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दिल्ली को 1,789.52 करोड़ रुपये का आईटीएमएस मंजूर

सीसीईए ने दिल्ली के लिए 1,789.52 करोड़ रुपये की इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम परियोजना मंजूर की, जो 42 ट्रैफिक कॉरिडोर को तीन चरणों में कवर करेगी।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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दिल्ली को 1,789.52 करोड़ रुपये का आईटीएमएस मंजूर — GK24 title card

चर्चा में क्यों

30 सितंबर 2026 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने दिल्ली के लिए 1,789.52 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम परियोजना मंजूर की, जो 42 ट्रैफिक कॉरिडोर पर लागू होगी।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने दिल्ली पुलिस द्वारा लागू की जाने वाली इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) परियोजना को मंजूरी दे दी है। करों सहित अनुमानित लागत 1,789.52 करोड़ रुपये है। इस मंजूरी को एक नेटवर्क, स्मार्टर ट्रैफिक शीर्षक से घोषित किया गया, और यह राजधानी को उस ट्रैफिक प्रबंधन की ओर ले जाती है जो तय समय-चक्र पर चलने के बजाय सड़क को उसी क्षण पढ़ता है।

आकार और समय-सीमा

परियोजना दिल्ली के 42 चिह्नित ट्रैफिक कॉरिडोर को अपने दायरे में लेती है। काम 24 महीनों में तीन चरणों में बंटा है, और उसके बाद पांच साल का संचालन तथा रखरखाव चलेगा। हर चरण तभी शुरू होगा जब उससे पहले वाले को निर्धारित परीक्षण, कमीशनिंग, स्वीकृति और प्रदर्शन मानकों पर नापा जा चुका हो। जमीन पर यह प्रणाली 1,092 एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम स्थल और 1,029 प्रवर्तन स्थल खड़े करेगी।

दिल्ली को इसकी जरूरत क्यों

राजधानी में लगभग 71 लाख सक्रिय पंजीकृत वाहन हैं। वाहनों की संख्या सड़कों के विस्तार से कहीं तेज बढ़ी है, जबकि नियमन आज भी बड़े पैमाने पर तय सिग्नल अवधि और ट्रैफिक कर्मियों के हाथ से दखल पर टिका है। आईटीएमएस का मकसद मौजूदा सड़क क्षमता से ज्यादा काम निकालना है, यानी ट्रैफिक नियंत्रण को सड़क की असल स्थिति के हिसाब से प्रतिक्रिया देने लायक बनाना।

प्रणाली क्या करेगी

  • अनुकूल सिग्नल: सिग्नल की अवधि उसी समय के ट्रैफिक के साथ बदलेगी और पूरे कॉरिडोर में तालमेल बैठेगा, जिससे बेवजह रुकना घटेगा।
  • ग्रीन कॉरिडोर: एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को भीड़ भरे रास्तों से प्राथमिकता के साथ निकाला जाएगा।
  • तेज प्रतिक्रिया: जाम, धीमी रफ्तार और सड़क पर हुई घटनाएं उसी समय पकड़ में आएंगी, इसलिए मार्ग बदलने का फैसला जल्दी होगा।
  • यात्रियों को सूचना: वैरिएबल मैसेज साइन बोर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म जाम, डायवर्जन तथा पार्किंग की जानकारी देंगे, जो नेविगेशन सेवाओं से भी साझा हो सकती है।
  • स्वचालित प्रवर्तन: रेड लाइट और स्टॉप लाइन का उल्लंघन, तेज रफ्तार, गलत दिशा में गाड़ी चलाना, हेलमेट या सीट बेल्ट न लगाना, अवैध पार्किंग और गाड़ी चलाते हुए फोन का इस्तेमाल मशीन से पकड़ा जाएगा। विश्लेषण चोरी की, हॉट-लिस्टेड और ब्लैकलिस्टेड गाड़ियों, बार-बार उल्लंघन करने वालों तथा हिट-एंड-रन से जुड़े वाहनों की भी शिनाख्त करेगा।

कौन बनाएगा

नियमन, प्रवर्तन और सूचना एक ही मंच पर ट्रैफिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिये आएंगे, जिन्हें सुरक्षित डेटा सेंटर तथा आपदा पुनर्प्राप्ति ढांचे का सहारा रहेगा; प्रणाली खुले मानकों और एपीआई पर बनेगी ताकि आगे इसका विस्तार हो सके। दिल्ली पुलिस प्रतिस्पर्धी बोली से चुने गए मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर के माध्यम से काम कराएगी, और सी-डैक परियोजना प्रबंधन सलाहकार के रूप में तकनीकी जांच, निगरानी, सत्यापन तथा स्वीकृति देखेगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

परियोजनादिल्ली के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस), घोषणा शीर्षक एक नेटवर्क, स्मार्टर ट्रैफिक
मंजूरीआर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए), अध्यक्ष प्रधानमंत्री
लागतकरों सहित 1,789.52 करोड़ रुपये
कार्यान्वयन एजेंसीदिल्ली पुलिस, मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर के माध्यम से
कॉरिडोर42 चिह्नित ट्रैफिक कॉरिडोर
समय-सीमा24 महीनों में तीन चरण, फिर पांच साल संचालन और रखरखाव
अनुकूल सिग्नल स्थल1,092 एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम स्थल
प्रवर्तन स्थल1,029
दिल्ली में पंजीकृत वाहनलगभग 71 लाख सक्रिय पंजीकृत वाहन
परियोजना प्रबंधन सलाहकारसी-डैक

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें: मंजूरी देने वाली समिति (सीसीईए), परियोजना का नाम (इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, घोषणा शीर्षक एक नेटवर्क स्मार्टर ट्रैफिक), लागत (करों सहित 1,789.52 करोड़ रुपये), लागू करने वाली एजेंसी (दिल्ली पुलिस), 42 कॉरिडोर, 24 महीनों में तीन चरण और पांच साल संचालन-रखरखाव, 1,092 अनुकूल सिग्नल स्थल, 1,029 प्रवर्तन स्थल, लगभग 71 लाख पंजीकृत वाहन, तथा सलाहकार सी-डैक।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

दिल्ली के लिए मंजूर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की अनुमानित लागत कितनी है?

  1. A.789.52 करोड़ रुपये
  2. B.1,289.52 करोड़ रुपये
  3. C.1,789.52 करोड़ रुपये
  4. D.2,789.52 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1,789.52 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 1,789.52 करोड़ रुपये है, जो करों सहित वह अनुमानित लागत है जिस पर आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने दिल्ली पुलिस के लिए यह परियोजना मंजूर की। विकल्प A, B और D गलत हैं, क्योंकि इनमें आंकड़े का ढांचा वही रखकर संख्या बदल दी गई है, जो परीक्षा में विकल्प गढ़ने का आम तरीका है। इस राशि से जो प्रणाली बनेगी वह 42 चिह्नित ट्रैफिक कॉरिडोर को कवर करेगी, जिसमें 1,092 एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम स्थल और 1,029 प्रवर्तन स्थल होंगे। काम 24 महीनों में तीन चरणों में चलेगा और उसके बाद पांच साल संचालन तथा रखरखाव होगा, और हर चरण तभी शुरू होगा जब पिछला चरण निर्धारित परीक्षण, कमीशनिंग, स्वीकृति और प्रदर्शन मानकों पर परखा जा चुका हो।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम दिल्ली के कितने ट्रैफिक कॉरिडोर को कवर करेगा?

  1. A.24
  2. B.42
  3. C.71
  4. D.108
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 42

व्याख्या

सही उत्तर 42 है। परियोजना राजधानी के इतने ही चिह्नित ट्रैफिक कॉरिडोर को अपने दायरे में लेती है। विकल्प A यानी 24 गलत है, क्योंकि वह उन महीनों की संख्या है जिनमें कार्यान्वयन के तीन चरण फैले हैं, कॉरिडोर की गिनती नहीं। विकल्प C यानी 71 गलत है, क्योंकि वह पूरी तरह दूसरे तथ्य से जुड़ा है: दिल्ली में लगभग 71 लाख सक्रिय पंजीकृत वाहन हैं, और वाहनों की यही बढ़त, जो सड़क क्षमता की बढ़त से कहीं आगे है, इस प्रणाली की वजह बनी। विकल्प D गलत है, क्योंकि ऐसा कोई आंकड़ा इस मंजूरी से नहीं जुड़ा। इन कॉरिडोर में 1,092 एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम स्थल और 1,029 प्रवर्तन स्थल बनेंगे, और नियमन, प्रवर्तन तथा सूचना ट्रैफिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिये एक मंच पर आएंगे।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

दिल्ली की इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम परियोजना का परियोजना प्रबंधन सलाहकार कौन होगा?

  1. A.सी-डैक
  2. B.एनआईसी
  3. C.बीईएल
  4. D.सीएसआईआर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सी-डैक

व्याख्या

सही उत्तर सी-डैक है। वह परियोजना प्रबंधन सलाहकार के रूप में तकनीकी सहयोग देगा, जिसमें तकनीकी जांच-पड़ताल, निगरानी, सत्यापन और स्वीकृति शामिल है, और यह भूमिका प्रणाली लगने के दौरान तथा बाद में संचालन व रखरखाव के समय भी बनी रहेगी। विकल्प B, C और D अन्य जाने-पहचाने सार्वजनिक तकनीकी संस्थानों के नाम हैं और गलत हैं, क्योंकि इस मंजूरी में इनमें से किसी को यह जिम्मेदारी नहीं दी गई। याद रखने लायक अंतर परियोजना की दो एजेंसियों के बीच है: दिल्ली पुलिस लागू करने वाली एजेंसी है और प्रतिस्पर्धी बोली से चुने मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर से काम कराएगी, जबकि सी-डैक सलाहकार के तौर पर तकनीक की जांच करेगा। प्रणाली खुले मानकों और एपीआई पर बनेगी ताकि आगे इसका विस्तार संभव रहे।

Q4.राष्ट्रीयकठिन

दिल्ली आईटीएमएस परियोजना में कितने एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम स्थल बनाए जाएंगे?

  1. A.1,029
  2. B.1,092
  3. C.2,092
  4. D.4,200
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1,092

व्याख्या

सही उत्तर 1,092 है। परियोजना में इतने एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम स्थल बनेंगे। विकल्प A यानी 1,029 इस प्रश्न का जाल है: वह प्रवर्तन स्थलों की संख्या है, उसी मंजूरी का बहुत मिलता-जुलता आंकड़ा, और दोनों आसानी से आपस में बदल जाते हैं। विकल्प C और D गलत हैं, क्योंकि इनमें से कोई संख्या परियोजना से नहीं जुड़ी। अनुकूल नियंत्रण इस योजना का केंद्र है: तय अवधि के बजाय सिग्नल उसी समय के ट्रैफिक के हिसाब से बदलेंगे और कॉरिडोर भर में तालमेल बैठेगा, जिससे बेवजह रुकना और देरी घटेगी। प्रवर्तन स्थल अलग काम करते हैं और रेड लाइट तथा स्टॉप लाइन उल्लंघन, तेज रफ्तार, गलत दिशा में गाड़ी चलाना, हेलमेट व सीट बेल्ट का पालन न करना, अवैध पार्किंग और गाड़ी चलाते वक्त फोन का इस्तेमाल पकड़ते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली की इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम परियोजना की स्वीकृत लागत कितनी है?

करों सहित 1,789.52 करोड़ रुपये, जिसे आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने दिल्ली पुलिस के लिए 42 चिह्नित ट्रैफिक कॉरिडोर पर लागू करने के लिए मंजूर किया।

आईटीएमएस परियोजना को लागू होने में कितना समय लगेगा?

24 महीनों में तीन चरण, और उसके बाद पांच साल का संचालन तथा रखरखाव। हर चरण तभी शुरू होगा जब पिछला चरण परीक्षण, कमीशनिंग, स्वीकृति और प्रदर्शन जांच पास कर ले।

दिल्ली आईटीएमएस को तकनीकी सहयोग कौन देगा?

सी-डैक, परियोजना प्रबंधन सलाहकार के रूप में, जिसमें तकनीकी जांच, निगरानी, सत्यापन और स्वीकृति शामिल है। दिल्ली पुलिस प्रतिस्पर्धी बोली से चुने मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर से काम कराएगी।

स्रोत

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