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GK24
राष्ट्रीयकठिन

दिल्ली आईटीएमएस परियोजना में कितने एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम स्थल बनाए जाएंगे?

  1. A.1,029
  2. B.1,092
  3. C.2,092
  4. D.4,200

सही उत्तर

B. 1,092

व्याख्या

सही उत्तर 1,092 है। परियोजना में इतने एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम स्थल बनेंगे। विकल्प A यानी 1,029 इस प्रश्न का जाल है: वह प्रवर्तन स्थलों की संख्या है, उसी मंजूरी का बहुत मिलता-जुलता आंकड़ा, और दोनों आसानी से आपस में बदल जाते हैं। विकल्प C और D गलत हैं, क्योंकि इनमें से कोई संख्या परियोजना से नहीं जुड़ी। अनुकूल नियंत्रण इस योजना का केंद्र है: तय अवधि के बजाय सिग्नल उसी समय के ट्रैफिक के हिसाब से बदलेंगे और कॉरिडोर भर में तालमेल बैठेगा, जिससे बेवजह रुकना और देरी घटेगी। प्रवर्तन स्थल अलग काम करते हैं और रेड लाइट तथा स्टॉप लाइन उल्लंघन, तेज रफ्तार, गलत दिशा में गाड़ी चलाना, हेलमेट व सीट बेल्ट का पालन न करना, अवैध पार्किंग और गाड़ी चलाते वक्त फोन का इस्तेमाल पकड़ते हैं।

पूरा लेख पढ़ें: दिल्ली को 1,789.52 करोड़ रुपये का आईटीएमएस मंजूर

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Q1.राष्ट्रीयआसान

दिल्ली के लिए मंजूर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की अनुमानित लागत कितनी है?

  1. A.789.52 करोड़ रुपये
  2. B.1,289.52 करोड़ रुपये
  3. C.1,789.52 करोड़ रुपये
  4. D.2,789.52 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1,789.52 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 1,789.52 करोड़ रुपये है, जो करों सहित वह अनुमानित लागत है जिस पर आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने दिल्ली पुलिस के लिए यह परियोजना मंजूर की। विकल्प A, B और D गलत हैं, क्योंकि इनमें आंकड़े का ढांचा वही रखकर संख्या बदल दी गई है, जो परीक्षा में विकल्प गढ़ने का आम तरीका है। इस राशि से जो प्रणाली बनेगी वह 42 चिह्नित ट्रैफिक कॉरिडोर को कवर करेगी, जिसमें 1,092 एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम स्थल और 1,029 प्रवर्तन स्थल होंगे। काम 24 महीनों में तीन चरणों में चलेगा और उसके बाद पांच साल संचालन तथा रखरखाव होगा, और हर चरण तभी शुरू होगा जब पिछला चरण निर्धारित परीक्षण, कमीशनिंग, स्वीकृति और प्रदर्शन मानकों पर परखा जा चुका हो।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम दिल्ली के कितने ट्रैफिक कॉरिडोर को कवर करेगा?

  1. A.24
  2. B.42
  3. C.71
  4. D.108
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 42

व्याख्या

सही उत्तर 42 है। परियोजना राजधानी के इतने ही चिह्नित ट्रैफिक कॉरिडोर को अपने दायरे में लेती है। विकल्प A यानी 24 गलत है, क्योंकि वह उन महीनों की संख्या है जिनमें कार्यान्वयन के तीन चरण फैले हैं, कॉरिडोर की गिनती नहीं। विकल्प C यानी 71 गलत है, क्योंकि वह पूरी तरह दूसरे तथ्य से जुड़ा है: दिल्ली में लगभग 71 लाख सक्रिय पंजीकृत वाहन हैं, और वाहनों की यही बढ़त, जो सड़क क्षमता की बढ़त से कहीं आगे है, इस प्रणाली की वजह बनी। विकल्प D गलत है, क्योंकि ऐसा कोई आंकड़ा इस मंजूरी से नहीं जुड़ा। इन कॉरिडोर में 1,092 एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम स्थल और 1,029 प्रवर्तन स्थल बनेंगे, और नियमन, प्रवर्तन तथा सूचना ट्रैफिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिये एक मंच पर आएंगे।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

दिल्ली की इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम परियोजना का परियोजना प्रबंधन सलाहकार कौन होगा?

  1. A.सी-डैक
  2. B.एनआईसी
  3. C.बीईएल
  4. D.सीएसआईआर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सी-डैक

व्याख्या

सही उत्तर सी-डैक है। वह परियोजना प्रबंधन सलाहकार के रूप में तकनीकी सहयोग देगा, जिसमें तकनीकी जांच-पड़ताल, निगरानी, सत्यापन और स्वीकृति शामिल है, और यह भूमिका प्रणाली लगने के दौरान तथा बाद में संचालन व रखरखाव के समय भी बनी रहेगी। विकल्प B, C और D अन्य जाने-पहचाने सार्वजनिक तकनीकी संस्थानों के नाम हैं और गलत हैं, क्योंकि इस मंजूरी में इनमें से किसी को यह जिम्मेदारी नहीं दी गई। याद रखने लायक अंतर परियोजना की दो एजेंसियों के बीच है: दिल्ली पुलिस लागू करने वाली एजेंसी है और प्रतिस्पर्धी बोली से चुने मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर से काम कराएगी, जबकि सी-डैक सलाहकार के तौर पर तकनीक की जांच करेगा। प्रणाली खुले मानकों और एपीआई पर बनेगी ताकि आगे इसका विस्तार संभव रहे।

Q4.राष्ट्रीयआसान

विभाग के साथ इस अभियान में निम्न में से कौन सा संगठन शामिल है?

  1. A.भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण
  2. B.भारतीय खाद्य निगम
  3. C.भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण
  4. D.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भारतीय खाद्य निगम

व्याख्या

सही उत्तर भारतीय खाद्य निगम है। विभाग ने बताया कि उसके संबद्ध तथा अधीनस्थ कार्यालय और सार्वजनिक उपक्रम इसमें भाग ले रहे हैं और उनमें भारतीय खाद्य निगम, केंद्रीय भंडारण निगम तथा भंडारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण का नाम लिया। ये तीनों खाद्यान्न की खरीद, भंडारण और भंडारण नियमन के क्षेत्र में काम करते हैं, इसीलिए वे इसी विभाग के अधीन आते हैं। विकल्प A यानी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सड़क परिवहन मंत्रालय के अधीन है। विकल्प C यानी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण नागर विमानन के अधीन आता है। विकल्प D यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अंतरिक्ष विभाग के अधीन राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है। इनमें से कोई भी खाद्य और सार्वजनिक वितरण के दायरे में नहीं आता, इसलिए वे इस विभागीय अभियान का हिस्सा नहीं हैं। परीक्षा में संगठन और उसके मंत्रालय का मिलान अक्सर पूछा जाता है।

Q5.राष्ट्रीयआसान

खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के इस विशेष अभियान में इस बार किस पर विशेष जोर है?

  1. A.ई-कचरे का संग्रहण, पृथक्करण और निपटान
  2. B.नोडल अधिकारियों की भर्ती
  3. C.नए गोदामों का निर्माण
  4. D.न्यूनतम समर्थन मूल्य में संशोधन
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ई-कचरे का संग्रहण, पृथक्करण और निपटान

व्याख्या

सही उत्तर ई-कचरे का संग्रहण, पृथक्करण और निपटान है। विभाग ने कहा कि इस वर्ष इलेक्ट्रॉनिक कचरे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, साथ ही सफाई, लंबित मामलों के निपटारे और कार्यालय स्थान के बेहतर उपयोग के स्थायी उद्देश्य भी जारी हैं, और तैयारी चरण में निपटान के लिए ई-कचरे की एक निश्चित संख्या चिह्नित की गई। विकल्प B गलत है, क्योंकि अभियान के लिए नोडल अधिकारियों की भर्ती नहीं हुई, वे पहले से हैं और नियमित समीक्षा बैठकों में प्रगति देख रहे हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि गोदाम बनाना इस प्रशासनिक अभियान का हिस्सा नहीं है, भले ही भंडारण से जुड़े संगठन इसमें शामिल हों। विकल्प D कृषि मूल्य नीति से संबंधित है, जिसका लंबित मामलों और कचरा निपटान के अभियान से कोई संबंध नहीं है।