CCPA: वॉकी-टॉकी विज्ञापनों पर 12 कंपनियों पर 58 लाख जुर्माना
केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने भ्रामक वॉकी-टॉकी विज्ञापनों पर 12 इकाइयों पर कुल 58 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, नया आदेश होगर टेक्नोलॉजीज पर है।

चर्चा में क्यों
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने 25 अक्टूबर 2026 को बताया कि CCPA ने भ्रामक वॉकी-टॉकी सूचियों पर होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशंस एलएलपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिससे इस मामले में 12 इकाइयों पर कुल जुर्माना 58 लाख रुपये हो गया।
केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ऑनलाइन बिकने वाले वॉकी-टॉकी के विज्ञापनों पर अपनी कार्रवाई और आगे बढ़ाई है। प्राधिकरण ने मेसर्स होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशंस एलएलपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया, क्योंकि उसकी उत्पाद सूचियों में वह नियामकीय जानकारी छिपी रह गई जो खरीदार के लिए जरूरी है। यह आदेश उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा वाले प्राधिकरण ने पारित किया।
सूचियों में क्या छूटा
प्राधिकरण ने कंपनी की वेबसाइट पर दिखाए गए वॉकी-टॉकी के कई मॉडल देखे और पाया कि उपकरणों की संचालन आवृत्तियां, उन पर लागू लाइसेंस की शर्तें और जरूरी नियामकीय मंजूरियां साफ तौर पर नहीं बताई गई थीं। इससे खरीदार यह मान सकता था कि इन सेटों का उपयोग बिना किसी अनुमति के वैध है। कंपनी ने कहा कि उसके पास डीलर पजेसिंग लाइसेंस है, उपकरणों के पास उपकरण प्रकार अनुमोदन प्रमाणन है और उसकी वेबसाइट सीधी बिक्री नहीं करती, केवल पूछताछ जुटाती है। प्राधिकरण ने माना कि मंजूरियां होने से विज्ञापनदाता का यह दायित्व खत्म नहीं होता कि वह खरीद से पहले उपभोक्ता को सही और पूरी जानकारी दे, और यह भी कि भुगतान गेटवे या शॉपिंग कार्ट के बिना चलने वाली वेबसाइट भी भ्रामक विज्ञापन के कानून के दायरे में आती है।
लाइसेंस का नियम
कम शक्ति और अति कम शक्ति वाले लघु दूरी रेडियो आवृत्ति उपकरणों पर 2018 के नियमों के अनुसार, 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज की पट्टी में काम करने वाले पर्सनल मोबाइल रेडियो को शर्तों के अधीन लाइसेंस से छूट है। इस पट्टी से बाहर काम करने वाले उपकरणों पर संबंधित नियामकीय शर्तें लागू होती हैं। इसी कारण विज्ञापन में आवृत्ति का ब्योरा छोड़ देना खरीदार को कानूनी और आर्थिक परेशानी में डाल सकता है।
कार्रवाई का दायरा
प्राधिकरण ने स्वत: संज्ञान लिया था कि ई-कॉमर्स मंचों पर वॉकी-टॉकी अनिवार्य जानकारी के बिना बेचे जा रहे हैं। जांच में 16,970 से अधिक नियम-विरुद्ध सूचियां मिलीं और 13 ई-कॉमर्स इकाइयों को नोटिस भेजे गए, जिनमें अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो, फेसबुक मार्केटप्लेस के लिए मेटा, जियोमार्ट, इंडियामार्ट और ट्रेडइंडिया शामिल हैं।
| जुर्माना | इकाइयां |
| दस लाख रुपये प्रत्येक | अमेजन सेलर सर्विसेज, फ्लिपकार्ट इंटरनेट, मीशो, मेटा प्लेटफॉर्म्स, ट्रेडइंडिया |
| एक लाख रुपये प्रत्येक | जियोमार्ट, चिमिया, मास्कमैन टॉयज, टॉक प्रो, संचार वायरलेस कम्युनिकेशंस, अंतरिक्ष टेक्नोसिस, होगर टेक्नोलॉजीज |
| अब तक कुल | 12 इकाइयां, 58 लाख रुपये |
अदालतों में चुनौती
कई कंपनियां अदालत गई हैं। अमेजन सेलर सर्विसेज और फ्लिपकार्ट इंटरनेट ने इन आदेशों के खिलाफ कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया है। मेटा प्लेटफॉर्म्स और ट्रेडइंडिया राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) पहुंचे, जिसने ट्रेडइंडिया को जुर्माना राशि जमा करने का निर्देश दिया। इंडियामार्ट इंटरमेश ने दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जबकि मामला प्राधिकरण के सामने भी विचाराधीन है। प्राधिकरण ने दोहराया कि ऐसे सेटों के विज्ञापनों में संचालन आवृत्तियां, लाइसेंस की शर्तें और अन्य महत्वपूर्ण नियामकीय जानकारी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए, क्योंकि जिन उत्पादों का वैध उपयोग शर्तों पर टिका है, उनमें यह जानकारी सबसे ज्यादा मायने रखती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| प्राधिकरण | केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) |
|---|---|
| लागू कानून | उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 |
| नेतृत्व | मुख्य आयुक्त निधि खरे, आयुक्त अनुपम मिश्रा के साथ |
| नया जुर्माना | मेसर्स होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशंस एलएलपी पर एक लाख रुपये |
| उत्पाद | वॉकी-टॉकी, जिन्हें पर्सनल मोबाइल रेडियो भी कहते हैं |
| लाइसेंस मुक्त पट्टी | 2018 के नियमों में 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज |
| नियम-विरुद्ध सूचियां | 16,970 से अधिक |
| नोटिस | 13 ई-कॉमर्स इकाइयों को |
| अब तक अंतिम आदेश | 12 इकाइयां, कुल 58 लाख रुपये जुर्माना |
| अपील कहां | कर्नाटक उच्च न्यायालय, दिल्ली उच्च न्यायालय और NCDRC |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें कि CCPA उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत काम करता है और इसका प्रमुख मुख्य आयुक्त होता है; 2018 के नियमों में पर्सनल मोबाइल रेडियो के लिए 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज की छूट; 16,970 से अधिक नियम-विरुद्ध सूचियां; 13 ई-कॉमर्स इकाइयों को नोटिस; 12 इकाइयों पर कुल 58 लाख रुपये का जुर्माना; और अपील NCDRC तथा उच्च न्यायालयों में।
अभ्यास प्रश्न
भ्रामक वॉकी-टॉकी विज्ञापनों पर ई-कॉमर्स इकाइयों पर जुर्माना किस प्राधिकरण ने लगाया?
- A.भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण
- B.भारतीय मानक ब्यूरो
- C.केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण
- D.भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग
उत्तर देखें
यह निकाय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार व्यवहारों पर कार्रवाई के लिए बना है, और इसका नेतृत्व मुख्य आयुक्त करते हैं, जो इस समय निधि खरे हैं; उनके साथ आयुक्त अनुपम मिश्रा भी बैठते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भ्रामक वॉकी-टॉकी विज्ञापनों पर जुर्माना किस कानून के तहत लगाया गया?
- A.उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986
- B.उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
- C.विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009
- D.सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
उत्तर देखें
मेसर्स होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशंस एलएलपी के खिलाफ एक लाख रुपये के जुर्माने वाला आदेश इसी अधिनियम के तहत पारित हुआ, और इसी मामले में ई-कॉमर्स मंचों तथा विक्रेताओं के खिलाफ पहले के आदेश भी इसी कानून के तहत थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में पर्सनल मोबाइल रेडियो के लिए कौन सी आवृत्ति पट्टी लाइसेंस से मुक्त है?
- A.433.0 से 434.8 मेगाहर्ट्ज
- B.446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज
- C.865.0 से 867.0 मेगाहर्ट्ज
- D.2400 से 2483.5 मेगाहर्ट्ज
उत्तर देखें
कम शक्ति और अति कम शक्ति वाले लघु दूरी रेडियो आवृत्ति उपकरणों पर 2018 के नियमों के अनुसार, इस सीमित पट्टी में काम करने वाले पर्सनल मोबाइल रेडियो को निर्धारित शर्तों के अधीन लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होती।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
CCPA भ्रामक विज्ञापनों पर किस कानून के तहत कार्रवाई करता है?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत। इसी के तहत प्राधिकरण ने होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशंस एलएलपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया, क्योंकि उसकी सूचियों में संचालन आवृत्ति और लाइसेंस की शर्तें नहीं बताई गई थीं।
वॉकी-टॉकी के लिए कौन सी आवृत्ति पट्टी लाइसेंस से मुक्त है?
2018 के नियमों के तहत 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज में काम करने वाले पर्सनल मोबाइल रेडियो को शर्तों के अधीन लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होती।
इस मामले में अब तक कितनी इकाइयों पर जुर्माना लगा है?
12 इकाइयों के खिलाफ अंतिम आदेश पारित हुए हैं और कुल जुर्माना 58 लाख रुपये है। इससे पहले 16,970 से अधिक नियम-विरुद्ध सूचियां मिलीं और 13 ई-कॉमर्स इकाइयों को नोटिस भेजे गए थे।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2328200 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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