भ्रामक वॉकी-टॉकी विज्ञापनों पर जुर्माना किस कानून के तहत लगाया गया?
- A.उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986
- B.उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
- C.विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009
- D.सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 है। मेसर्स होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशंस एलएलपी के खिलाफ एक लाख रुपये के जुर्माने वाला आदेश इसी अधिनियम के तहत पारित हुआ, और इसी मामले में ई-कॉमर्स मंचों तथा विक्रेताओं के खिलाफ पहले के आदेश भी इसी कानून के तहत थे। प्राधिकरण ने कहा कि डीलर पजेसिंग लाइसेंस या उपकरण प्रकार अनुमोदन प्रमाणन होने से विज्ञापनदाता का यह दायित्व नहीं हटता कि वह खरीद से पहले उपभोक्ता को सही और पूरी महत्वपूर्ण जानकारी दे। यह भी तय हुआ कि जो वेबसाइट केवल पूछताछ जुटाती है और जिसमें भुगतान गेटवे या शॉपिंग कार्ट नहीं है, वह भी भ्रामक विज्ञापन के प्रावधानों के दायरे में आती है। विकल्प A पुराना उपभोक्ता कानून है, जिसकी जगह वर्तमान अधिनियम आया और जिसके समय यह प्राधिकरण मौजूद नहीं था। विकल्प C बाट, माप और पैकेज पर घोषणाओं से जुड़ा है। विकल्प D इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों और साइबर अपराधों को देखता है।
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अभ्यास प्रश्न
भ्रामक वॉकी-टॉकी विज्ञापनों पर ई-कॉमर्स इकाइयों पर जुर्माना किस प्राधिकरण ने लगाया?
- A.भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण
- B.भारतीय मानक ब्यूरो
- C.केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण
- D.भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग
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यह निकाय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार व्यवहारों पर कार्रवाई के लिए बना है, और इसका नेतृत्व मुख्य आयुक्त करते हैं, जो इस समय निधि खरे हैं; उनके साथ आयुक्त अनुपम मिश्रा भी बैठते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में पर्सनल मोबाइल रेडियो के लिए कौन सी आवृत्ति पट्टी लाइसेंस से मुक्त है?
- A.433.0 से 434.8 मेगाहर्ट्ज
- B.446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज
- C.865.0 से 867.0 मेगाहर्ट्ज
- D.2400 से 2483.5 मेगाहर्ट्ज
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कम शक्ति और अति कम शक्ति वाले लघु दूरी रेडियो आवृत्ति उपकरणों पर 2018 के नियमों के अनुसार, इस सीमित पट्टी में काम करने वाले पर्सनल मोबाइल रेडियो को निर्धारित शर्तों के अधीन लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होती।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ऑपरेशन ट्राइडेंट के जरिए दोहराए गए लक्ष्य के अनुसार भारत किस तारीख तक हर नशा नेटवर्क खत्म करना चाहता है?
- A.2 अक्टूबर 2029
- B.31 दिसंबर 2029
- C.31 मार्च 2030
- D.31 दिसंबर 2027
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इस कार्रवाई को उसी संकल्प का प्रमाण बताया गया कि भारत इस तारीख तक नशीले पदार्थों का हर नेटवर्क जड़ से खत्म कर देगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत 38 ठिकानों पर छापे किन तीन राज्यों में पड़े?
- A.असम, मेघालय और मिजोरम
- B.नगालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा
- C.असम, मिजोरम और मणिपुर
- D.मिजोरम, त्रिपुरा और नगालैंड
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टीमों ने इन्हीं तीन राज्यों के शहरी केंद्रों और सीमावर्ती इलाकों में कार्रवाई की, जिनमें मिजोरम के आइजॉल और चम्फाई, भारत-म्यांमार सीमा का व्यापारिक कस्बा जोखॉथर, मणिपुर के चूड़ाचांदपुर के ठिकाने और असम का कछार ट्रांजिट कॉरिडोर शामिल थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्टूबर 2026 में पूर्वोत्तर में चलाए गए ऑपरेशन ट्राइडेंट की अगुवाई किस एजेंसी ने की?
- A.राष्ट्रीय जांच एजेंसी
- B.नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो
- C.केन्द्रीय जांच ब्यूरो
- D.राजस्व आसूचना निदेशालय
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इस ब्यूरो ने ही अभियान की योजना बनाई और 23 अक्टूबर 2026 की सुबह मिजोरम पुलिस तथा प्रवर्तन निदेशालय के साथ एक ही कमान के नीचे इसे अंजाम दिया।
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