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मंत्रिमंडल ने 2,814 करोड़ की खनिज प्रसंस्करण योजना मंजूर की

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2,814 करोड़ रुपये की पूंजीगत सहायता योजना मंजूर की, जिससे लिथियम और निकेल के चार संयंत्र 30 प्रतिशत सब्सिडी पर लगेंगे।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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मंत्रिमंडल ने 2,814 करोड़ की खनिज प्रसंस्करण योजना मंजूर की — GK24 title card

चर्चा में क्यों

4 नवंबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की पूंजीगत व्यय सहायता योजना को मंजूरी दी, जो लिथियम और निकेल संयंत्रों के लिए है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर 2026 को महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय सहायता योजना को हरी झंडी दी। योजना का कुल परिव्यय 2,814 करोड़ रुपये है और यह पांच वर्ष तक, वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी। इसकी जिम्मेदारी खान मंत्रालय के पास रहेगी।

जरूरत क्यों पड़ी

महत्वपूर्ण खनिजों का परिष्करण दुनिया में गिने-चुने देशों तक सिमटा हुआ है। इस केंद्रीकरण से भारत जैसे खरीदार देशों पर भू-राजनीतिक झटकों, कीमतों के उतार-चढ़ाव और आपूर्ति रुकने का खतरा बना रहता है। इसका सीधा असर राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक संप्रभुता और कार्बन उत्सर्जन घटाने के लक्ष्यों पर पड़ता है। भारत आज भी परिष्कृत मध्यवर्ती उत्पाद और उच्च शुद्धता वाली सामग्री बड़े पैमाने पर आयात करता है, क्योंकि देश के भीतर प्रसंस्करण ढांचा शुरुआती अवस्था में है। भारी पूंजी की जरूरत, उपयुक्त प्रौद्योगिकी की कमी और कच्चे माल तक सीमित पहुंच के कारण व्यावसायिक स्तर के संयंत्र नहीं लग पाए।

योजना में क्या मिलेगा

पात्र निवेश की 30 प्रतिशत राशि पूंजीगत सब्सिडी के रूप में चार प्रसंस्करण संयंत्रों को दी जाएगी। इनमें दो संयंत्र लिथियम के होंगे, जिनकी न्यूनतम क्षमता 30 किलो टन प्रत्येक रहेगी, और दो संयंत्र निकेल के होंगे, जिनकी न्यूनतम क्षमता 50 किलो टन प्रत्येक होगी। एक लिथियम लाभार्थी को अधिकतम 500 करोड़ रुपये और एक निकेल लाभार्थी को अधिकतम 900 करोड़ रुपये की सहायता मिलेगी। निकेल उत्पादन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में कोबाल्ट भी मिलने की उम्मीद है।

लाभार्थी कैसे चुने जाएंगे

चयन दो चरणों में होगा। पहले चरण में आवेदनों की तकनीकी योग्यता जांची जाएगी और जो आवेदक इसमें खरे उतरेंगे, वही दूसरे चरण की वित्तीय बोली में शामिल हो सकेंगे। प्रत्येक खनिज के लिए दो लाभार्थी न्यूनतम लागत के आधार पर चुने जाएंगे, अर्थात जो बोलीदाता सबसे कम पूंजीगत सहायता मांगेगा। प्रोत्साहन राशि तीन किस्तों में दी जाएगी और हर किस्त किसी निर्धारित पड़ाव के पूरा होने से जुड़ी रहेगी।

किन क्षेत्रों को फायदा

उच्च शुद्धता वाले लिथियम और निकेल यौगिक इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और विशेष इस्पात जैसे क्षेत्रों के काम आते हैं। सरकार इस मंजूरी को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम मानती है, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और देश में पूरी मूल्य श्रृंखला खड़ी होगी।

महत्वपूर्ण तथ्य

योजनामहत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण के लिए पूंजीगत व्यय सहायता योजना
मंजूरीकेंद्रीय मंत्रिमंडल, अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
परिव्यय2,814 करोड़ रुपये
अवधिवित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 (पांच वर्ष)
पूंजीगत सब्सिडीपात्र निवेश की 30 प्रतिशत
संयंत्रदो लिथियम (30 किलो टन प्रत्येक) और दो निकेल (50 किलो टन प्रत्येक)
सहायता सीमालिथियम लाभार्थी 500 करोड़ रुपये, निकेल लाभार्थी 900 करोड़ रुपये
खनिजलिथियम और निकेल, कोबाल्ट निकेल का उप-उत्पाद
मंत्रालयखान मंत्रालय

परीक्षा की दृष्टि से

परिव्यय (2,814 करोड़ रुपये), अवधि (वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31), सब्सिडी दर (पात्र निवेश की 30 प्रतिशत), चार संयंत्र और उनकी न्यूनतम क्षमता (लिथियम 30 किलो टन, निकेल 50 किलो टन), सहायता सीमा (500 करोड़ और 900 करोड़ रुपये), संबंधित मंत्रालय (खान मंत्रालय) तथा कोबाल्ट के उप-उत्पाद होने की बात याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंआसान

महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर पूंजीगत व्यय सहायता योजना का कुल परिव्यय कितना है?

  1. A.1,814 करोड़ रुपये
  2. B.2,814 करोड़ रुपये
  3. C.3,814 करोड़ रुपये
  4. D.4,814 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2,814 करोड़ रुपये

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय सहायता योजना को इसी परिव्यय के साथ मंजूरी दी है, जो वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्ष में खर्च होगा।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

इस योजना के तहत प्रत्येक निकेल प्रसंस्करण संयंत्र की न्यूनतम क्षमता कितनी निर्धारित की गई है?

  1. A.30 किलो टन
  2. B.40 किलो टन
  3. C.50 किलो टन
  4. D.60 किलो टन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 50 किलो टन

योजना के अंतर्गत कुल चार प्रसंस्करण संयंत्र लगेंगे। इनमें दो निकेल के संयंत्र होंगे और प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 50 किलो टन रखनी होगी, जबकि दो लिथियम संयंत्रों में प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 30 किलो टन तय की गई है।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

पूंजीगत व्यय सहायता योजना में लाभार्थियों का चयन किस तरह किया जाएगा?

  1. A.सभी आवेदकों में लॉटरी के जरिये
  2. B.पहले तकनीकी योग्यता, फिर न्यूनतम लागत के आधार पर वित्तीय बोली
  3. C.पोर्टल पर पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर
  4. D.संबंधित राज्य सरकारों की सिफारिश पर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पहले तकनीकी योग्यता, फिर न्यूनतम लागत के आधार पर वित्तीय बोली

चयन प्रक्रिया दो चरणों की है। पहले चरण में आवेदनों की तकनीकी योग्यता का आकलन होगा और केवल तकनीकी रूप से योग्य आवेदक ही दूसरे चरण की वित्तीय बोली में भाग ले सकेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण की पूंजीगत व्यय सहायता योजना का परिव्यय कितना है?

2,814 करोड़ रुपये, जो वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्ष में खर्च होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर 2026 को इसे मंजूरी दी।

इस योजना के तहत कितने प्रसंस्करण संयंत्र लगाए जाएंगे?

चार संयंत्र। दो लिथियम संयंत्र, जिनकी न्यूनतम क्षमता 30 किलो टन प्रत्येक होगी, और दो निकेल संयंत्र, जिनकी न्यूनतम क्षमता 50 किलो टन प्रत्येक होगी। हर संयंत्र को पात्र निवेश की 30 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी।

एक लाभार्थी को अधिकतम कितनी पूंजीगत सहायता मिल सकती है?

लिथियम प्रसंस्करण संयंत्र के लिए 500 करोड़ रुपये और निकेल प्रसंस्करण संयंत्र के लिए 900 करोड़ रुपये। यह राशि तीन किस्तों में दी जाएगी, जो निर्धारित पड़ावों से जुड़ी होंगी।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS