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कोयला मंत्रालय ने सुविकल्प खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण बनाया

कोयला नियंत्रक संगठन ने सुविकल्प तैयार किया है, जो बंद और परित्यक्त कोयला तथा लिग्नाइट खदानों के लिए खनन के बाद भूमि उपयोग के विकल्प रैंक करता है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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कोयला मंत्रालय ने सुविकल्प खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण बनाया

चर्चा में क्यों

कोयला मंत्रालय ने सुविकल्प की जानकारी दी है, जो कोयला नियंत्रक संगठन द्वारा विकसित खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण है और बंद तथा परित्यक्त कोयला और लिग्नाइट खदानों को उत्पादक संपत्ति में बदलने में मदद करेगा।

कोयला मंत्रालय के अधीन काम करने वाले कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) ने सुविकल्प नाम से खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण विकसित किया है, जिसका उद्देश्य बंद और परित्यक्त खदानों को उत्पादक संपत्ति में बदलना है। यह एक डिजिटल निर्णय-समर्थन मंच है और इसे कोयला और लिग्नाइट खदान के लिए खनन योजना दिशानिर्देश, 2025 के अनुरूप बनाया गया है। इसके पीछे सोच यह है कि खनन क्षेत्र के प्रति जिम्मेदारी खुदाई बंद होने के दिन समाप्त नहीं होती: पीछे छूटी भूमि का उपयोग होना चाहिए, पर्यावरण सुधरना चाहिए और स्थानीय आजीविका सुरक्षित रहनी चाहिए।

उपकरण कैसे निर्णय करता है

सुविकल्प भू-खनन विशेषताओं, पर्यावरणीय स्थितियों, ढांचागत उपलब्धता, संसाधनों की सीमा, वित्तीय पक्ष तथा सामाजिक-आर्थिक कारकों को एक ही मंच पर लाता है। उपयोगकर्ता किसी खदान का विवरण भरकर उसका साइट प्रोफाइल बनाता है और उपकरण परखता है कि वह स्थल किन नए उपयोगों के लिए ठीक रहेगा। रैंकिंग बहु-मानदंड निर्णय पद्धति से होती है, जो टॉप्सिस यानी आदर्श समाधान की समानता द्वारा अनुक्रम प्राथमिकता तकनीक पर आधारित है, जिससे अनेक मापदंडों पर विकल्पों की तुलना एक साथ हो जाती है और सलाह पारदर्शी तथा साक्ष्य आधारित रहती है। प्रक्रिया कारकों के चयन से शुरू होकर संभावित विकल्प बनाने, सामुदायिक प्राथमिकताएं जोड़ने, उपयुक्तता आंकने और अंत में रैंकिंग तक चलती है।

इसमें शामिल दो ढांचे

  • रिक्लेम, यानी सामुदायिक जुड़ाव और विकास ढांचा, स्थानीय पसंद को मूल्यांकन में शामिल करता है, जिससे पुनर्विकास रोजगार, आजीविका, ढांचे और दीर्घकालिक लाभ की स्थानीय जरूरतों से मेल खाए।
  • प्रिज्म, यानी पोस्ट-माइनिंग रीपर्पोजिंग इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रैटेजिक मॉडल, मंच को रैंकिंग से आगे कार्यान्वयन तक ले जाता है: परियोजना दृष्टि, पुनर्प्रयोजन रणनीति, निवेश की गतिशीलता, रणनीतिक संरचना और निगरानी। इसके साथ अवधारणा नोट, देशी-विदेशी केस स्टडी, नमूना निविदा दस्तावेज, कार्यान्वयन एजेंसियों का विवरण तथा सर्वोत्तम प्रणालियों का ज्ञान भंडार जुड़ा है।

आगे क्या

अगला चरण अपनाने और कार्यान्वयन पर केंद्रित है। बताई गई प्राथमिकताएं हैं: बंद और परित्यक्त कोयला तथा लिग्नाइट खदानों में मंच का व्यापक उपयोग; सिफारिशों को स्थल विशेष व्यवहार्यता अध्ययन, अवधारणा नोट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में बदलना; सरकार, उद्योग, विशेषज्ञों तथा कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय; व्यवहार्य परियोजनाओं के लिए निवेश जुटाना; सर्वोत्तम प्रणालियां साझा करना और हितधारकों की क्षमता बढ़ाना; तथा कार्यान्वयन की निगरानी के साथ पर्यावरणीय, आर्थिक और सामुदायिक लाभ का आकलन। दीर्घकालिक लक्ष्य सुविकल्प को ऐसा मापनीय राष्ट्रीय ज्ञान और निर्णय-समर्थन तंत्र बनाना है, जो विभिन्न खनन स्थितियों तथा क्षेत्रीय जरूरतों के अनुकूल ढल सके, जिससे खनन की विरासत परित्यक्त गड्ढों के बजाय पर्यावरण सुधार, आर्थिक विविधीकरण और क्षेत्रीय विकास का अवसर बने।

महत्वपूर्ण तथ्य

उपकरणसुविकल्प, खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण
विकसित कियाकोयला नियंत्रक संगठन, कोयला मंत्रालय के अधीन
स्वरूपडिजिटल निर्णय-समर्थन मंच
अनुरूपताकोयला और लिग्नाइट खदान के लिए खनन योजना दिशानिर्देश, 2025
रैंकिंग पद्धतिटॉप्सिस पर आधारित बहु-मानदंड निर्णय पद्धति
टॉप्सिसआदर्श समाधान की समानता द्वारा अनुक्रम प्राथमिकता तकनीक
रिक्लेमसामुदायिक जुड़ाव और विकास ढांचा
प्रिज्मपोस्ट-माइनिंग रीपर्पोजिंग इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रैटेजिक मॉडल
उद्देश्यबंद और परित्यक्त कोयला तथा लिग्नाइट खदानों को उत्पादक संपत्ति बनाना

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें सुविकल्प का उद्देश्य (खदान पुनर्प्रयोजन), विकसित करने वाला संगठन (कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक संगठन), संबंधित दिशानिर्देश (कोयला और लिग्नाइट खदान के लिए खनन योजना दिशानिर्देश, 2025), रैंकिंग पद्धति (टॉप्सिस पर आधारित बहु-मानदंड निर्णय पद्धति) तथा दोनों ढांचे रिक्लेम और प्रिज्म।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंमध्यम

खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण सुविकल्प किस संगठन ने विकसित किया है?

  1. A.कोल इंडिया लिमिटेड
  2. B.कोयला नियंत्रक संगठन
  3. C.भारतीय खान ब्यूरो
  4. D.नीति आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कोयला नियंत्रक संगठन

इसी संगठन ने सुविकल्प को डिजिटल निर्णय-समर्थन मंच के रूप में तैयार किया है, जो तय करने में मदद करता है कि बंद और परित्यक्त खदानों का उपयोग किस काम में हो, और इसे कोयला तथा लिग्नाइट खदान के लिए खनन योजना दिशानिर्देश के अनुरूप बनाया गया है।

Q2.सरकारी योजनाएंकठिन

सुविकल्प विकल्पों की रैंकिंग के लिए किस तकनीक पर आधारित बहु-मानदंड निर्णय पद्धति का उपयोग करता है?

  1. A.टॉप्सिस
  2. B.स्वोट विश्लेषण
  3. C.मोंटे कार्लो सिमुलेशन
  4. D.रैखिक समाश्रयण
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. टॉप्सिस

मंच इसी के सहारे खनन हो चुके स्थल के संभावित नए उपयोगों का मूल्यांकन और रैंकिंग करता है, क्योंकि इससे कई मापदंडों को एक साथ तौला जा सकता है और सिफारिशें राय के बजाय साक्ष्य पर टिकी तथा सुसंगत रहती हैं।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

सुविकल्प में कौन सा ढांचा परियोजनाओं के मूल्यांकन में सामुदायिक प्राथमिकताओं को शामिल करता है?

  1. A.प्रिज्म
  2. B.रिक्लेम
  3. C.टॉप्सिस
  4. D.शाइन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रिक्लेम

यह खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की पसंद को तकनीकी व्यवहार्यता, पर्यावरणीय उपयुक्तता तथा आर्थिक पक्षों के साथ रखता है, जिससे पुनर्विकास की योजनाएं रोजगार, आजीविका, ढांचे और टिकाऊ लाभ की स्थानीय जरूरतों का उत्तर दें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुविकल्प क्या है?

यह कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक संगठन द्वारा विकसित खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण है। यह डिजिटल निर्णय-समर्थन मंच बंद और परित्यक्त कोयला तथा लिग्नाइट खदानों के लिए खनन के बाद उपयुक्त भूमि उपयोग पहचानता और रैंक करता है।

सुविकल्प विकल्पों की रैंकिंग किस पद्धति से करता है?

टॉप्सिस यानी आदर्श समाधान की समानता द्वारा अनुक्रम प्राथमिकता तकनीक पर आधारित बहु-मानदंड निर्णय पद्धति से, जिससे अनेक मापदंडों पर विकल्पों की तुलना एक साथ संभव होती है।

सुविकल्प में रिक्लेम और प्रिज्म क्या हैं?

रिक्लेम सामुदायिक जुड़ाव और विकास ढांचा है, जो स्थानीय प्राथमिकताओं को मूल्यांकन में शामिल करता है। प्रिज्म पोस्ट-माइनिंग रीपर्पोजिंग इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रैटेजिक मॉडल है, जो कार्यान्वयन की राह दिखाता है।

स्रोत

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