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GK24

बोगीबील से बांग्लादेश भेजी गई 540 टन मेथनॉल की पहली खेप

केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने डिब्रूगढ़ के बोगीबील टर्मिनल से 540 मीट्रिक टन मेथनॉल की पहली खेप ढाका स्थित पांगाओन बंदरगाह के लिए रवाना की।

लेखक प्रकाशित · अपडेट · 2 मिनट
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बोगीबील से बांग्लादेश भेजी गई 540 टन मेथनॉल की पहली खेप

चर्चा में क्यों

5 अक्टूबर 2026 को वर्ष 1947 के बाद ऊपरी असम से पहली अंतरराष्ट्रीय खेप, असम पेट्रो-केमिकल्स का 540 मीट्रिक टन मेथनॉल, डिब्रूगढ़ के बोगीबील टर्मिनल से ढाका के पांगाओन बंदरगाह के लिए रवाना हुई, जिसे केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने हरी झंडी दिखाई।

असम के डिब्रूगढ़ स्थित बोगीबील टर्मिनल से 5 अक्टूबर 2026 को 540 मीट्रिक टन मेथनॉल लेकर एक बजरा बांग्लादेश के लिए रवाना हुआ। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने डीएलबी पटकाई नामक इस पोत को हरी झंडी दिखाई, जिसे कुशल कोनवार टगबोट धकेल रही है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा इस कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल हुए।

यह खेप पहली क्यों है

वर्ष 1947 में देश के स्वतंत्र होने के बाद ऊपरी असम से किसी विदेशी बंदरगाह के लिए भेजी गई यह पहली खेप है। डिब्रूगढ़ का नदी घाट 1956 से बंद पड़ा था और करीब सात दशकों तक वहां से जल मार्ग से कोई माल विदेश नहीं गया। बोगीबील और धुबरी में सीमा शुल्क तथा आव्रजन परिसर तैयार हो जाने के बाद ही यह खेप भेजी जा सकी।

मार्ग

यह मेथनॉल नामरूप स्थित सरकारी कंपनी असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड ने बनाया है और इसे ढाका के पांगाओन बंदरगाह भेजा जा रहा है। बजरा भारत के भीतर ब्रह्मपुत्र पर बने राष्ट्रीय जलमार्ग-2 से लगभग 768 किलोमीटर चलकर सीमा तक पहुंचेगा और उसके बाद भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग से आगे बढ़ेगा। बोगीबील से ढाका के पास नारायणगंज तक पूरी यात्रा लगभग 1,300 किलोमीटर की है। इस यात्रा को इस परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है कि ब्रह्मपुत्र पूर्वोत्तर को विदेशी बाजारों से जोड़ने वाले व्यावसायिक माल गलियारे के रूप में काम कर सकती है या नहीं। बांग्लादेश को मेथनॉल की नियमित खेप भेजने की योजना है।

नदी बंदरगाह के रूप में डिब्रूगढ़

वर्ष 1856 तक कलकत्ता से सरकारी स्टीमर इस शहर तक आते थे और 1882 में डिब्रू-सादिया रेलवे ने इसी स्टीमर घाट से परिचालन शुरू किया। वर्ष 1913 तक ब्रह्मपुत्र के रास्ते प्रतिदिन स्टीमर चाय, लकड़ी और यात्रियों को ले जाते थे। वर्ष 1947 के विभाजन ने यह मार्ग काट दिया, 1950 के भूकंप ने नदी के तल को प्रभावित किया, 1954 में नियमित बुकिंग बंद हुई और चाय की ढुलाई रेल पर चले जाने के कारण 15 अक्टूबर 1956 को घाट बंद कर दिया गया। वर्ष 1965 के युद्ध के दौरान सीमा पार नदी व्यापार रुक गया और 1972 में बांग्लादेश के साथ नदी व्यापार प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर हुए।

जलमार्ग के आंकड़े

राष्ट्रीय जलमार्ग-2 घोषित हिस्सा (1988)सदिया से धुबरी, 891 किलोमीटर
भारत में जलमार्ग पर दूरीलगभग 768 किलोमीटर
कुल यात्रानारायणगंज तक लगभग 1,300 किलोमीटर
राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई2013-14 में 18 मिलियन टन से 2025-26 में 218 मिलियन टन

इस जलमार्ग पर नियमित माल ढुलाई दिसंबर 2017 में तब शुरू हुई, जब पांडू से धुबरी तक सीमेंट भेजा गया। बोगीबील यात्री एवं मालवाहक टर्मिनल की आधारशिला जुलाई 2023 में रखी गई थी और इसे फरवरी 2024 में खोला गया, जबकि जलवाहक माल प्रोत्साहन कार्यक्रम दिसंबर 2024 में शुरू हुआ। पूर्वोत्तर के जलमार्गों में 68 बिलियन रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है, जिसमें पांडू में जहाज मरम्मत सुविधा भी शामिल है। श्री सोनोवाल ने कहा कि भारत क्षेत्रीय जलमार्ग संपर्क के लिए बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और म्यांमार के साथ काम कर रहा है।

महत्वपूर्ण तथ्य

घटनावर्ष 1947 के बाद ऊपरी असम से पहली अंतरराष्ट्रीय माल खेप
हरी झंडीसरबानंद सोनोवाल, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री
खेपनामरूप की असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड का 540 मीट्रिक टन मेथनॉल
पोतडीएलबी पटकाई, कुशल कोनवार टगबोट द्वारा संचालित
कहां से कहांबोगीबील टर्मिनल, डिब्रूगढ़ से ढाका का पांगाओन बंदरगाह और नारायणगंज
जलमार्गब्रह्मपुत्र पर राष्ट्रीय जलमार्ग-2, सदिया से धुबरी, 891 किलोमीटर
दूरीभारत में लगभग 768 किलोमीटर, कुल लगभग 1,300 किलोमीटर
टर्मिनल का उद्घाटनफरवरी 2024, आधारशिला जुलाई 2023 में
जलमार्ग माल ढुलाई2013-14 में 18 मिलियन टन से 2025-26 में 218 मिलियन टन
कार्यक्रम की तिथि5 अक्टूबर 2026

परीक्षा की दृष्टि से

टर्मिनल (बोगीबील, डिब्रूगढ़), खेप (नामरूप की असम पेट्रो-केमिकल्स का 540 मीट्रिक टन मेथनॉल), गंतव्य (ढाका का पांगाओन बंदरगाह और नारायणगंज), जलमार्ग (ब्रह्मपुत्र पर राष्ट्रीय जलमार्ग-2, सदिया से धुबरी 891 किलोमीटर, 1988 में घोषित), दूरी (भारत में लगभग 768 किलोमीटर, कुल 1,300 किलोमीटर), पोत (डीएलबी पटकाई और कुशल कोनवार टगबोट) तथा हरी झंडी दिखाने वाले मंत्री का नाम याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

स्वतंत्रता के बाद ऊपरी असम से पहली अंतरराष्ट्रीय माल खेप किस टर्मिनल से रवाना हुई?

  1. A.पांडू टर्मिनल, गुवाहाटी
  2. B.बोगीबील टर्मिनल, डिब्रूगढ़
  3. C.धुबरी टर्मिनल
  4. D.जोगीघोपा टर्मिनल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बोगीबील टर्मिनल, डिब्रूगढ़

कुशल कोनवार टगबोट द्वारा धकेला जा रहा डीएलबी पटकाई बजरा 5 अक्टूबर 2026 को 540 मीट्रिक टन मेथनॉल लेकर बोगीबील से बांग्लादेश के लिए रवाना हुआ और वर्ष 1947 में देश के स्वतंत्र होने के बाद ऊपरी असम से किसी विदेशी बंदरगाह को भेजी गई यह पहली खेप है।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

ब्रह्मपुत्र नदी का कितना हिस्सा राष्ट्रीय जलमार्ग-2 घोषित किया गया है?

  1. A.768 किलोमीटर
  2. B.891 किलोमीटर
  3. C.1,300 किलोमीटर
  4. D.218 किलोमीटर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 891 किलोमीटर

सदिया से धुबरी तक ब्रह्मपुत्र का हिस्सा 891 किलोमीटर लंबा है और इसे 1988 में राष्ट्रीय जलमार्ग-2 घोषित किया गया था, हालांकि इस पर नियमित माल ढुलाई दिसंबर 2017 में ही शुरू हो सकी।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

बोगीबील से ढाका भेजा गया मेथनॉल किस कंपनी ने बनाया है?

  1. A.ब्रह्मपुत्र क्रैकर एंड पॉलिमर लिमिटेड
  2. B.असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड
  3. C.ऑयल इंडिया लिमिटेड
  4. D.नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड

बोगीबील में लादा गया 540 मीट्रिक टन मेथनॉल इस सरकारी कंपनी ने अपने नामरूप संयंत्र में बनाया है और यह खेप ढाका के पांगाओन बंदरगाह के लिए रवाना हुई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय जलमार्ग-2 किस नदी पर है?

ब्रह्मपुत्र नदी पर। सदिया से धुबरी तक इसके 891 किलोमीटर लंबे हिस्से को 1988 में राष्ट्रीय जलमार्ग-2 घोषित किया गया था और बोगीबील से चला बजरा भारत-बांग्लादेश सीमा तक इस पर लगभग 768 किलोमीटर चलता है।

बोगीबील से बांग्लादेश क्या भेजा गया?

नामरूप स्थित सरकारी असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड का बनाया 540 मीट्रिक टन मेथनॉल, जिसे डीएलबी पटकाई पोत ढाका के पांगाओन बंदरगाह ले जा रहा है। वर्ष 1947 के बाद ऊपरी असम से विदेशी बंदरगाह भेजी गई यह पहली खेप है।

डिब्रूगढ़ का नदी घाट कब बंद हुआ था?

15 अक्टूबर 1956 को, जब 1954 में नियमित बुकिंग बंद होने के बाद चाय की ढुलाई रेल पर चली गई। फरवरी 2024 में खुले बोगीबील यात्री एवं मालवाहक टर्मिनल ने इस शहर की नदी बंदरगाह वाली भूमिका फिर जीवित की है।

स्रोत

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