ब्रह्मपुत्र नदी का कितना हिस्सा राष्ट्रीय जलमार्ग-2 घोषित किया गया है?
- A.768 किलोमीटर
- B.891 किलोमीटर
- C.1,300 किलोमीटर
- D.218 किलोमीटर
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 891 किलोमीटर है। सदिया से धुबरी तक ब्रह्मपुत्र का हिस्सा 891 किलोमीटर लंबा है और इसे 1988 में राष्ट्रीय जलमार्ग-2 घोषित किया गया था, हालांकि इस पर नियमित माल ढुलाई दिसंबर 2017 में ही शुरू हो सकी। विकल्प A गलत है, क्योंकि 768 किलोमीटर वह दूरी है जो मेथनॉल लेकर चला बजरा भारत-बांग्लादेश सीमा तक पहुंचने से पहले भारत के भीतर जलमार्ग पर तय करता है, और उसके बाद वह भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग पर आगे बढ़ता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि लगभग 1,300 किलोमीटर पूरी यात्रा की लंबाई है, अर्थात डिब्रूगढ़ के बोगीबील से ढाका के पास नारायणगंज तक की दूरी, घोषित जलमार्ग की लंबाई नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि 218 कोई दूरी नहीं है: देश के राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई 2013-14 के 18 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 218 मिलियन टन हो गई है। परीक्षार्थियों को इन तीनों आंकड़ों को अलग-अलग याद रखना चाहिए, क्योंकि प्रश्न पत्र में इन्हें आपस में मिला दिया जाता है।
पूरा लेख पढ़ें: बोगीबील से बांग्लादेश भेजी गई 540 टन मेथनॉल की पहली खेप
अभ्यास प्रश्न
स्वतंत्रता के बाद ऊपरी असम से पहली अंतरराष्ट्रीय माल खेप किस टर्मिनल से रवाना हुई?
- A.पांडू टर्मिनल, गुवाहाटी
- B.बोगीबील टर्मिनल, डिब्रूगढ़
- C.धुबरी टर्मिनल
- D.जोगीघोपा टर्मिनल
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कुशल कोनवार टगबोट द्वारा धकेला जा रहा डीएलबी पटकाई बजरा 5 अक्टूबर 2026 को 540 मीट्रिक टन मेथनॉल लेकर बोगीबील से बांग्लादेश के लिए रवाना हुआ और वर्ष 1947 में देश के स्वतंत्र होने के बाद ऊपरी असम से किसी विदेशी बंदरगाह को भेजी गई यह पहली खेप है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बोगीबील से ढाका भेजा गया मेथनॉल किस कंपनी ने बनाया है?
- A.ब्रह्मपुत्र क्रैकर एंड पॉलिमर लिमिटेड
- B.असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड
- C.ऑयल इंडिया लिमिटेड
- D.नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड
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बोगीबील में लादा गया 540 मीट्रिक टन मेथनॉल इस सरकारी कंपनी ने अपने नामरूप संयंत्र में बनाया है और यह खेप ढाका के पांगाओन बंदरगाह के लिए रवाना हुई है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ई1 या टीडीएम लिंक पर चल रहे मौजूदा पीओआई को आईपी आधारित इंटरकनेक्शन पर कितने समय में बदलना होगा?
- A.एक वर्ष
- B.दो वर्ष
- C.तीन वर्ष
- D.पांच वर्ष
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संशोधन विनियमों में कहा गया है कि नियम लागू होने के बाद स्थापित हर इंटरकनेक्शन आईपी आधारित होगा, और जो पीओआई अब भी ई1 या टीडीएम तकनीक पर काम कर रहे हैं उन्हें चरणबद्ध तरीके से तीन वर्ष के भीतर आईपी आधारित इंटरकनेक्शन में बदलना होगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →इंटरकनेक्शन शुल्क के विलंबित भुगतान पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा क्या है?
- A.आरबीआई रेपो दर में एक प्रतिशत जोड़कर
- B.एसबीआई की एक वर्षीय एमसीएलआर में दो प्रतिशत जोड़कर
- C.सालाना 18 प्रतिशत की निश्चित दर
- D.बैंक दर में तीन प्रतिशत जोड़कर
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एक नया प्रावधान इंटरकनेक्शन शुल्क और इंटरकनेक्शन उपयोग शुल्क के देर से भुगतान से निपटता है, जिसमें दोनों सेवा प्रदाता ब्याज दर आपस में तय कर सकते हैं, मगर वह इस मानक से ऊपर नहीं जा सकती।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संशोधित नियमों के तहत इंटरकनेक्शन किस स्तर पर आ जाएगा?
- A.शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (एसडीसीए) स्तर
- B.लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (एलडीसीए) स्तर
- C.लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (एलएसए) स्तर
- D.जिला स्तर
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संशोधन ट्रैफिक सौंपने और लेने की व्यवस्था को पुराने चार्जिंग एरिया वाले भूगोल से हटाकर लाइसेंस्ड सर्विस एरिया पर ले आता है, और इंटरकनेक्शन देने वाले तथा लेने वाले को आपसी सहमति से स्थान तय करने की छूट देता है।
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