बायो ई3 के तहत पीएलए बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का व्यावसायिक शुभारंभ
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बायो ई3 के तहत पीएलए आधारित बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का व्यावसायिक शुभारंभ किया; बिराक अनुदान से कुंभी में पायलट संयंत्र बनेगा।

चर्चा में क्यों
24 सितंबर 2026 को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बायो ई3 ढांचे के तहत पीएलए आधारित जैव आधारित बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक के व्यावसायिक उपयोग का औपचारिक शुभारंभ किया, जिसे बिराक के 75 करोड़ रुपये के अनुदान वाली 100 टीपीए पायलट सुविधा का सहयोग मिला है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) से बने जैव आधारित बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक के व्यावसायिक उपयोग का औपचारिक शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) में हुआ और इसे टिकाऊ विनिर्माण की ओर भारत का अहम कदम बताया गया।
परियोजना और उसका सहयोग
यह पहल बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (बीसीएमएल) सरकार के बायो ई3 ढांचे के तहत आगे बढ़ा रही है। बायो ई3 का अर्थ है अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी। डीबीटी के अधीन काम करने वाली जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बिराक) से मिला 75 करोड़ रुपये का अनुदान पीएलए तथा को-पोलिमर्स के लिए 100 टीपीए की पायलट स्तरीय शोध सुविधा को सहारा दे रहा है। यह सुविधा उत्तर प्रदेश के कुंभी में बीसीएमएल के एकीकृत विनिर्माण परिसर में लगेगी।
पायलट सुविधा का काम
यह सुविधा उच्च मूल्य वाले उपयोगों के लिए विशेष पीएलए ग्रेड और उन्नत को-पोलिमर विकसित करेगी, तकनीकी आर्थिक आंकड़े तथा प्रक्रिया की जानकारी तैयार करेगी, उत्पाद विकास और ग्राहक सत्यापन में मदद करेगी, तकनीक के स्वदेशीकरण को आसान बनाएगी और व्यावसायिक उत्पादन तक विस्तार का रास्ता खोलेगी। इससे उद्योग, शिक्षा जगत और शोध संस्थानों के बीच तालमेल भी बढ़ेगा।
जैव अर्थव्यवस्था के आंकड़े
मंत्री ने बताया कि भारत की जैव अर्थव्यवस्था 2014 में करीब 10 अरब अमेरिकी डॉलर की थी, जो अब लगभग 195 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि अगला चरण वैज्ञानिक क्षमता को बिकने लायक उत्पादों में बदलने का है। कचरे से संपदा के विचार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में अलग तरह का बायोमास निकलता है, इसलिए उसे उपयोगी बनाने की तकनीक भी अलग चाहिए, और कचरा जैसी कोई चीज होती ही नहीं।
व्यापक संदेश
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरल भाषा में जन संवाद की जरूरत बताई और सुझाया कि लोगों को दिखाया जाए कि गन्ने जैसी रोजमर्रा की फसल भोजन से आगे बढ़कर टिकाऊ सामग्री कैसे बन सकती है। वोकल फॉर लोकल एंड ग्लोबल से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादन क्षमता पहले देश में खड़ी हो और फिर वैश्विक बाजार तक जाए। डीबीटी सचिव एवं बिराक अध्यक्ष डॉ. राजेश सुधीर गोखले ने कहा कि यह परियोजना चीनी तथा अन्य बायोमास को लैक्टिक एसिड और उच्च मूल्य वाले बायोपोलिमर में बदलकर इथेनॉल से आगे की मूल्य श्रृंखला बना सकती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| शुभारंभ | डॉ. जितेंद्र सिंह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी |
|---|---|
| ढांचा | बायो ई3 - अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी |
| सामग्री | पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) से बना बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक |
| कंपनी | बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (बीसीएमएल) |
| अनुदान | बिराक से 75 करोड़ रुपये, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन |
| सुविधा | पीएलए और को-पोलिमर्स के लिए 100 टीपीए पायलट स्तरीय सुविधा |
| स्थान | कुंभी, उत्तर प्रदेश |
| जैव अर्थव्यवस्था | 2014 में लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर करीब 195 अरब अमेरिकी डॉलर |
| डीबीटी सचिव एवं बिराक अध्यक्ष | डॉ. राजेश सुधीर गोखले |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: ढांचा और उसका पूरा नाम (बायो ई3, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी), सामग्री (पीएलए), कंपनी (बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड), अनुदान देने वाली संस्था (बिराक, डीबीटी के अधीन), राशि (75 करोड़ रुपये), सुविधा और स्थान (100 टीपीए पायलट सुविधा, कुंभी, उत्तर प्रदेश), मंत्री (डॉ. जितेंद्र सिंह) तथा जैव अर्थव्यवस्था के आंकड़े।
अभ्यास प्रश्न
बायो ई3 ढांचे में ई3 का अर्थ क्या है, जिसके तहत पीएलए बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का शुभारंभ हुआ?
- A.ऊर्जा, पारिस्थितिकी और दक्षता
- B.अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार
- C.शिक्षा, उद्यम और निर्यात
- D.इथेनॉल, एंजाइम और इंजीनियरिंग
उत्तर देखें
बायो ई3 सरकार का वह ढांचा है जिसका पूरा नाम अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी है, और इसी के अंतर्गत बलरामपुर चीनी मिल्स की पॉलीलैक्टिक एसिड आधारित बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक परियोजना आगे बढ़ रही है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बायो ई3 समर्थित पीएलए और को-पोलिमर्स की पायलट सुविधा कुंभी में किस राज्य के भीतर स्थापित होगी?
- A.उत्तर प्रदेश
- B.महाराष्ट्र
- C.कर्नाटक
- D.बिहार
उत्तर देखें
पीएलए और को-पोलिमर्स के लिए 100 टीपीए की पायलट स्तरीय शोध सुविधा उत्तर प्रदेश के कुंभी में बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड के एकीकृत विनिर्माण परिसर में बनाई जाएगी, जबकि शुभारंभ कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित जैव प्रौद्योगिकी विभाग में हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पीएलए पायलट सुविधा के लिए 75 करोड़ रुपये का अनुदान किस संस्था ने दिया है?
- A.नीति आयोग
- B.वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद
- C.जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद
- D.प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड
उत्तर देखें
उसी के 75 करोड़ रुपये के अनुदान से पीएलए और उन्नत को-पोलिमर्स की 100 टीपीए पायलट स्तरीय सुविधा को सहयोग मिल रहा है, जिसे बलरामपुर चीनी मिल्स उत्तर प्रदेश के कुंभी में चलाएगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बायो ई3 का पूरा अर्थ क्या है?
बायो ई3 सरकार का वह ढांचा है जिसका अर्थ है अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी। बलरामपुर चीनी मिल्स की पीएलए आधारित बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक परियोजना इसी के तहत आगे बढ़ रही है और उसे बिराक से 75 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है।
पीएलए की पायलट सुविधा कहां लगेगी?
उत्तर प्रदेश के कुंभी में बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड के एकीकृत विनिर्माण परिसर में। इस पायलट स्तरीय शोध सुविधा की क्षमता 100 टीपीए होगी और यह विशेष पीएलए ग्रेड तथा उन्नत को-पोलिमर पर काम करेगी।
शुभारंभ में जैव अर्थव्यवस्था का कौन सा आंकड़ा बताया गया?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह 2014 में करीब 10 अरब अमेरिकी डॉलर की थी और अब लगभग 195 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है, जो जैव प्रौद्योगिकी आधारित गतिविधियों के तेज विस्तार को दर्शाता है।
स्रोत
करेंट अफेयर्स 24 सितंबर 2026
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