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GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

पीएलए पायलट सुविधा के लिए 75 करोड़ रुपये का अनुदान किस संस्था ने दिया है?

  1. A.नीति आयोग
  2. B.वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद
  3. C.जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद
  4. D.प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड

सही उत्तर

C. जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद

व्याख्या

सही उत्तर जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद यानी बिराक है, जो जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करती है। उसी के 75 करोड़ रुपये के अनुदान से पीएलए और उन्नत को-पोलिमर्स की 100 टीपीए पायलट स्तरीय सुविधा को सहयोग मिल रहा है, जिसे बलरामपुर चीनी मिल्स उत्तर प्रदेश के कुंभी में चलाएगी। विकल्प ए गलत है, क्योंकि नीति आयोग नीति सलाहकार संस्था है और इस तरह के शोध अनुदान नहीं देता। विकल्प बी गलत है, क्योंकि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद अपनी प्रयोगशालाओं का जाल चलाती है और इस शुभारंभ में उसका नाम नहीं है। विकल्प डी गलत है, क्योंकि प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड स्वदेशी तकनीक के व्यावसायीकरण के लिए अलग रास्ते से मदद देता है। डीबीटी सचिव डॉ. राजेश सुधीर गोखले ही बिराक के अध्यक्ष भी हैं।

पूरा लेख पढ़ें: बायो ई3 के तहत पीएलए बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का व्यावसायिक शुभारंभ

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Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

बायो ई3 ढांचे में ई3 का अर्थ क्या है, जिसके तहत पीएलए बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का शुभारंभ हुआ?

  1. A.ऊर्जा, पारिस्थितिकी और दक्षता
  2. B.अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार
  3. C.शिक्षा, उद्यम और निर्यात
  4. D.इथेनॉल, एंजाइम और इंजीनियरिंग
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार

व्याख्या

सही उत्तर अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार है। बायो ई3 सरकार का वह ढांचा है जिसका पूरा नाम अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी है, और इसी के अंतर्गत बलरामपुर चीनी मिल्स की पॉलीलैक्टिक एसिड आधारित बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक परियोजना आगे बढ़ रही है। मंत्री ने कहा कि यह ढांचा देश के आर्थिक विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और रोजगार के लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाने का अवसर देता है, इसलिए नाम में यही तीन शब्द हैं। विकल्प ए गलत है, क्योंकि ऊर्जा और पारिस्थितिकी संबंधित विषय जरूर हैं, पर ढांचे के नाम में नहीं आते। विकल्प सी गलत है, क्योंकि शिक्षा और निर्यात दूसरी नीतियों की शब्दावली हैं। विकल्प डी गलत है, क्योंकि इथेनॉल और एंजाइम जैव प्रौद्योगिकी के उत्पाद या साधन हैं, ढांचे के उद्देश्य नहीं।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

बायो ई3 समर्थित पीएलए और को-पोलिमर्स की पायलट सुविधा कुंभी में किस राज्य के भीतर स्थापित होगी?

  1. A.उत्तर प्रदेश
  2. B.महाराष्ट्र
  3. C.कर्नाटक
  4. D.बिहार
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. उत्तर प्रदेश

व्याख्या

सही उत्तर उत्तर प्रदेश है। पीएलए और को-पोलिमर्स के लिए 100 टीपीए की पायलट स्तरीय शोध सुविधा उत्तर प्रदेश के कुंभी में बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड के एकीकृत विनिर्माण परिसर में बनाई जाएगी, जबकि शुभारंभ कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित जैव प्रौद्योगिकी विभाग में हुआ। विकल्प बी गलत है, क्योंकि महाराष्ट्र बड़ा चीनी उत्पादक राज्य होने के बावजूद इस घोषणा में नामित स्थान नहीं है। विकल्प सी गलत है, क्योंकि कर्नाटक में जैव प्रौद्योगिकी कंपनियां तो बहुत हैं, पर इस सुविधा से उसका संबंध नहीं है। विकल्प डी गलत है, क्योंकि विज्ञप्ति में बिहार का कोई उल्लेख नहीं है। परीक्षा के लिए कुंभी को उत्तर प्रदेश, कंपनी को बलरामपुर चीनी मिल्स, अनुदान को बिराक और सामग्री को पॉलीलैक्टिक एसिड से जोड़कर याद रखें, क्योंकि प्रश्न इन्हीं कड़ियों पर बनते हैं।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

आरडीआई सहायता ऑप्टोएसएआर प्रौद्योगिकी को किन तैयारी स्तरों से गुजारने के लिए है?

  1. A.टीआरएल-1 से टीआरएल-4
  2. B.टीआरएल-3 से टीआरएल-6
  3. C.टीआरएल-6 से टीआरएल-9
  4. D.टीआरएल-4 से टीआरएल-7
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. टीआरएल-6 से टीआरएल-9

व्याख्या

सही उत्तर टीआरएल-6 से टीआरएल-9 है। प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर वह पैमाना है जो बताता है कि कोई प्रौद्योगिकी विचार से नियमित उपयोग तक कितनी दूर पहुंची है, और यहां बताया गया चरण आखिरी हिस्से का है, जहां वास्तविक परिस्थितियों के करीब दिखा दी गई प्रणाली को इंजीनियरिंग, परीक्षण और वैलिडेशन से गुजारकर सेवा में खरा उतारना होता है। बोर्ड अपनी भूमिका भी ठीक इसी रूप में बताता है, यानी उन्नत विकास और तैनाती के बीच के अहम चरणों में सहारा देना, जिसका अंतिम उद्देश्य व्यापारिक उपयोग है। विकल्प A और B शुरुआती चरण बताते हैं, जहां काम प्रयोगशाला की खोज के अधिक निकट होता है, और यह मान लेने वाला अभ्यर्थी उनकी ओर खिंचता है कि सार्वजनिक धन सदा शुरुआती शोध को ही मिलता है। विकल्प D पैमाने के शीर्ष तक नहीं जाता, इसलिए तैनाती के घोषित लक्ष्य से मेल नहीं खाता।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

गैलेक्सआई की ऑप्टोएसएआर प्रौद्योगिकी किन दो प्रकार की इमेजिंग को एक साथ लाती है?

  1. A.सिंथेटिक अपर्चर रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजिंग
  2. B.लिडार और थर्मल इन्फ्रारेड इमेजिंग
  3. C.हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग और रडार अल्टीमेट्री
  4. D.उपग्रह नेविगेशन संकेत और सोनार इमेजिंग
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सिंथेटिक अपर्चर रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजिंग

व्याख्या

सही उत्तर सिंथेटिक अपर्चर रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजिंग है, और संकेत प्रौद्योगिकी के नाम में ही छिपा है, क्योंकि ऑप्टो का अर्थ ऑप्टिकल सेंसर और एसएआर का अर्थ रडार है। दोनों को एक मंच पर इसलिए रखा जाता है कि उनकी कमजोरियां एक जैसी नहीं हैं, ऑप्टिकल इमेजिंग बारीक दृश्य विवरण देती है पर बादल और अंधेरा उसे रोक देते हैं, जबकि रडार उजाले की परवाह किए बिना काम करता है और बादलों के आर-पार देख लेता है। दोनों के आंकड़े मिलाने से जमीन की अधिक पूरी और कम टूटी तस्वीर मिलती है, जिससे बड़े भूभाग की निगरानी, लोगों और वाहनों की पहचान तथा लक्ष्य वर्गीकरण हर मौसम में संभव होता है। विकल्प B, C और D में सुदूर संवेदन की असली विधियां हैं, पर यहां बताई जोड़ी कोई नहीं, और विकल्प D में सोनार भी है जो पानी में काम करता है, कक्षा से नहीं।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

गैलेक्सआई की मल्टी-सेंसर उपग्रह परियोजना की कुल स्वीकृत लागत कितनी है?

  1. A.147.69 करोड़ रुपये
  2. B.247.69 करोड़ रुपये
  3. C.347.69 करोड़ रुपये
  4. D.447.69 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 247.69 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 247.69 करोड़ रुपये है। यह पूरी परियोजना की स्वीकृत लागत है, जिसका एक हिस्सा प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड से दे रहा है और शेष कंपनी उठाएगी। यह भेद मायने रखता है, क्योंकि ऐसा सार्वजनिक कोष महंगे प्रौद्योगिकी कार्यक्रम का जोखिम बांटने के लिए होता है, उसे पूरा चुकाने के लिए नहीं, और इसी कारण सहायता ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स के रूप में दी जा रही है। विकल्प A, C और D में दशमलव भाग वही रखकर केवल पहला अंक बदला गया है, इसलिए जिस अभ्यर्थी ने आंकड़ा ढीले ढंग से याद किया है, वह इनमें अंतर नहीं कर पाएगा। नोट्स में सहायता और कुल लागत, दोनों को जोड़ी बनाकर लिखें, तो अलग-अलग याद रखने से आसान रहेगा।