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भारत समुद्री बीमा पूल: 13,906.50 करोड़ रुपये की क्षमता

भारत समुद्री बीमा पूल देश का पहला घरेलू समुद्री बीमा पूल है, जिसकी हामीदारी क्षमता 13,906.50 करोड़ रुपये है और यह अब पूरी व्यावसायिक गति से चल रहा है।

लेखक प्रकाशित · 3 मिनट
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भारत समुद्री बीमा पूल: 13,906.50 करोड़ रुपये की क्षमता

चर्चा में क्यों

पत्र सूचना कार्यालय ने 27 सितंबर 2026 को जारी बैकग्राउंडर में भारत समुद्री बीमा पूल का ब्यौरा दिया, जो देश का पहला घरेलू समुद्री बीमा पूल है। यह 12 मई 2026 को 13,906.50 करोड़ रुपये की क्षमता के साथ शुरू हुआ और अब पूरी व्यावसायिक गति से चल रहा है।

देश के पहले घरेलू समुद्री बीमा प्रबंध भारत समुद्री बीमा पूल (बीएमआईपी) ने अब पूरे व्यावसायिक पैमाने पर काम शुरू कर दिया है। पत्र सूचना कार्यालय ने 27 सितंबर 2026 को जारी अपने बैकग्राउंडर में इसका ब्यौरा दिया। इस पूल को 18 अप्रैल 2026 को मंजूरी मिली और 12 मई 2026 से इसने कारोबार शुरू किया। इसकी हामीदारी क्षमता 13,906.50 करोड़ रुपये यानी लगभग 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर है।

पूल की जरूरत क्यों पड़ी

भारत के व्यापार के मूल्य का करीब 95 प्रतिशत और मात्रा का 70 प्रतिशत हिस्सा समुद्री रास्तों से आता-जाता है, लेकिन भारतीय जहाज मालिक अपनी देनदारी का बीमा लगभग पूरा विदेश से खरीदते थे। वे 13 अंतरराष्ट्रीय संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति क्लबों पर निर्भर थे, जो मिलकर दुनिया के बड़े जहाजों का लगभग 90 प्रतिशत बीमा करते हैं। इतने भर के प्रीमियम पर हर साल 45 से 60 मिलियन अमेरिकी डॉलर देश से बाहर जाता रहा। लाल सागर के संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तनाव ने यात्राओं को जोखिम भरा बनाया, तो विदेशी बीमा कंपनियों ने दरें बढ़ा दीं या कवर देना बंद कर दिया और भारतीय मालिकों के पास कोई घरेलू सहारा नहीं था।

ढांचा कैसा है

पॉलिसी भारत की सदस्य बीमा कंपनियां जारी करती हैं और फिर अपनी-अपनी प्रतिबद्ध क्षमता के अनुपात में जोखिम आपस में बांट लेती हैं। पूरे ढांचे के पीछे 12,980 करोड़ रुपये की सरकारी गारंटी खड़ी है। 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक के दावे पूल की अपनी आरक्षित निधियों और पुनर्बीमा वसूली से चुकाए जाते हैं, और गारंटी का उपयोग तभी होता है जब ये निधियां पूरी तरह खर्च हो जाएं। भारतीय साधारण बीमा निगम (जीआईसी री) पूल प्रशासक के रूप में इसका रोजमर्रा का संचालन देखता है, एक शासी निकाय निगरानी रखता है और एक हामीदारी समिति स्वीकार किए जाने वाले जोखिमों की जांच करती है। पूल की अवधि 10 साल है, जिसे 15 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें चार तरह के जोखिम आते हैं: जहाज का ढांचा और मशीनरी, माल, संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति तथा युद्ध जोखिम।

अब तक क्या हुआ

7 सितंबर 2026 तक पूल ने 3,000 कार्गो वॉर, 92 हल वॉर-जोखिम और 3 संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति पॉलिसियां जारी कर दी थीं। पश्चिम एशिया संघर्ष के चरम की तुलना में युद्ध-जोखिम प्रीमियम करीब 35 से 40 प्रतिशत घट गया है। पहली हल एवं मशीनरी युद्ध पॉलिसी 12 मई 2026 को होगर ऑफशोर एंड मरीन को मिली, और पूल के तहत देश की पहली संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति पॉलिसी 30 जुलाई 2026 को भारतीय नौवहन निगम को न्यू इंडिया एश्योरेंस ने जारी की। माल का कवर वेदांता स्टरलाइट कॉपर और चीनी बनाने वाली बलरामपुर चीनी मिल्स को भी मिला है, जिससे पता चलता है कि इसका लाभ केवल जहाजी कंपनियां नहीं, कारखाने और जिंस कारोबारी भी उठा सकते हैं।

जिस क्षेत्र के लिए यह बना

भारत में 12 प्रमुख और 217 गैर-प्रमुख बंदरगाह हैं, जिन्होंने 2025-26 में मिलकर 1,668 मिलियन मीट्रिक टन माल संभाला। तटरेखा 11,098 किलोमीटर लंबी है, विशेष आर्थिक क्षेत्र 2.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैला है, अंतर्देशीय जलमार्ग 14,500 किलोमीटर से ऊपर हैं और 30 मिलियन से अधिक लोग समुद्र से रोजी कमाते हैं। वर्ष 2026 के मध्य में भारतीय ध्वज वाला बेड़ा 1,609 जहाजों और 14.33 मिलियन सकल टनभार का था, जो 2015 के बाद टनभार में करीब 36 प्रतिशत की बढ़त है।

महत्वपूर्ण तथ्य

योजनाभारत समुद्री बीमा पूल (बीएमआईपी)
हामीदारी क्षमता13,906.50 करोड़ रुपये (1.5 अरब अमेरिकी डॉलर)
संप्रभु गारंटी12,980 करोड़ रुपये (1.4 अरब अमेरिकी डॉलर)
मंजूरी18 अप्रैल 2026
शुरुआत12 मई 2026
पूल प्रशासकभारतीय साधारण बीमा निगम (जीआईसी री)
कवर किए गए जोखिमढांचा एवं मशीनरी, माल, संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति, युद्ध जोखिम
अवधि10 वर्ष, 15 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है
आरक्षित निधि से दावे100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक; इसके बाद संप्रभु गारंटी
7 सितंबर 2026 तक पॉलिसियां3,000 कार्गो वॉर, 92 हल वॉर-जोखिम, 3 संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति

परीक्षा की दृष्टि से

क्षमता (13,906.50 करोड़ रुपये या 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर), संप्रभु गारंटी (12,980 करोड़ रुपये), मंजूरी की तारीख (18 अप्रैल 2026), शुरुआत की तारीख (12 मई 2026), प्रशासक (जीआईसी री), चार तरह के कवर, 10 साल की अवधि जो 15 साल तक बढ़ सकती है और 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की दावा सीमा याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.अर्थव्यवस्थाआसान

भारत समुद्री बीमा पूल की हामीदारी क्षमता कितनी है?

  1. A.9,500 करोड़ रुपये
  2. B.12,980 करोड़ रुपये
  3. C.13,906.50 करोड़ रुपये
  4. D.20,000 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 13,906.50 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 13,906.50 करोड़ रुपये है, जो करीब 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर है। यही वह कुल जोखिम मूल्य है जिसका बीमा यह पूल कर सकता है, और इसी वजह से यह भारत का पहला इतने बड़े आकार का घरेलू समुद्री बीमा प्रबंध बनता है। विकल्प B यानी 12,980 करोड़ रुपये सबसे भ्रमित करने वाला है, क्योंकि यह आंकड़ा इसी योजना से जुड़ा है, पर वह सरकार की दी गई संप्रभु गारंटी है, हामीदारी क्षमता नहीं। दोनों अंक जानबूझकर अलग रखे गए हैं और गारंटी क्षमता से कुछ कम है। विकल्प A यानी 9,500 करोड़ रुपये और विकल्प D यानी 20,000 करोड़ रुपये गढ़े हुए आंकड़े हैं और पूल के विवरण में कहीं नहीं आते। परीक्षार्थियों को दोनों अंक जोड़े में याद रखने चाहिए, क्षमता और गारंटी।

Q2.अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत समुद्री बीमा पूल का पूल प्रशासक किसे बनाया गया है?

  1. A.भारतीय साधारण बीमा निगम
  2. B.भारतीय जीवन बीमा निगम
  3. C.भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण
  4. D.न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. भारतीय साधारण बीमा निगम

व्याख्या

सही उत्तर भारतीय साधारण बीमा निगम यानी जीआईसी री है, जिसने पूल प्रबंधक और प्रशासक का दायित्व संभाला है। वह पूल का रोजमर्रा का संचालन, प्रदर्शन रिपोर्ट देना और हामीदारी, दावों तथा नियामक अनुपालन की व्यवस्थाएं देखता है। विकल्प D यानी न्यू इंडिया एश्योरेंस सबसे मजबूत भ्रम है, क्योंकि यह सदस्य बीमा कंपनी है और इसने शुरुआती कई पॉलिसियां जारी भी कीं, जिनमें पहली हल एवं मशीनरी युद्ध पॉलिसी तथा पहली संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति पॉलिसी शामिल हैं, पर पॉलिसी जारी करना प्रशासक होना नहीं है। विकल्प B यानी जीवन बीमा निगम जीवन बीमा का काम करता है और समुद्री जोखिम में उसकी कोई भूमिका नहीं है। विकल्प C क्षेत्र का नियामक है और किसी पूल का संचालन नहीं करता। यहां दो और ढांचे महत्वपूर्ण हैं, शासी निकाय और हामीदारी समिति।

Q3.अर्थव्यवस्थामध्यम

संप्रभु गारंटी का उपयोग करने से पहले भारत समुद्री बीमा पूल अपनी आरक्षित निधियों से कितनी राशि तक के दावे चुकाता है?

  1. A.50 मिलियन अमेरिकी डॉलर
  2. B.100 मिलियन अमेरिकी डॉलर
  3. C.500 मिलियन अमेरिकी डॉलर
  4. D.1.5 अरब अमेरिकी डॉलर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर

व्याख्या

सही उत्तर 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। इस सीमा तक के दावे पूल की संचित आरक्षित निधियों और पुनर्बीमा वसूली से पूरे किए जाते हैं, और सरकार की गारंटी तभी सक्रिय होती है जब ये निधियां पूरी तरह समाप्त हो जाएं। यह परतदार बनावट ही इस ढांचे का मूल विचार है, जिसमें सामान्य नुकसान व्यावसायिक स्तर पर सहे जाते हैं और संप्रभु सहारा अंतिम उपाय के रूप में बचाकर रखा जाता है, ताकि उस पर निर्भरता कम से कम रहे। विकल्प D यानी 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर पूल की कुल हामीदारी क्षमता है, दावे की सीमा नहीं, इसलिए वह आकर्षक जाल बनता है। विकल्प A और विकल्प C गढ़े हुए आंकड़े हैं। परीक्षार्थी दावा सीमा, संप्रभु गारंटी और कुल क्षमता, तीनों अंक साथ जोड़कर याद रखें।

Q4.अर्थव्यवस्थाकठिन

वर्ष 2025-26 में भारत के प्रमुख और गैर-प्रमुख बंदरगाहों ने कितना माल संभाला?

  1. A.950 मिलियन मीट्रिक टन
  2. B.1,200 मिलियन मीट्रिक टन
  3. C.1,668 मिलियन मीट्रिक टन
  4. D.2,400 मिलियन मीट्रिक टन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1,668 मिलियन मीट्रिक टन

व्याख्या

सही उत्तर 1,668 मिलियन मीट्रिक टन है, जो 2025-26 में भारत के बंदरगाहों से गुजरा माल है, और व्यापार बढ़ने के साथ यह आंकड़ा और ऊपर जाने की उम्मीद है। भारत में 12 प्रमुख और 217 गैर-प्रमुख बंदरगाह हैं, इसलिए यह कुल दोनों श्रेणियों को मिलाकर बनता है। विकल्प A, विकल्प B और विकल्प D में दिए 950, 1,200 और 2,400 मिलियन मीट्रिक टन गढ़े हुए आंकड़े हैं और उस वर्ष के रिकॉर्ड से इनका कोई संबंध नहीं है। इस आंकड़े के आसपास कुछ और अंक याद रखने लायक हैं, जैसे 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 2.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र, 14,500 किलोमीटर से अधिक अंतर्देशीय जलमार्ग, 30 मिलियन से ज्यादा लोगों की रोजी और 2026 के मध्य में 1,609 जहाजों तथा 14.33 मिलियन सकल टनभार का भारतीय बेड़ा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत समुद्री बीमा पूल क्या है?

यह देश का पहला घरेलू समुद्री बीमा पूल है, जो 12 मई 2026 को 13,906.50 करोड़ रुपये यानी लगभग 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर की हामीदारी क्षमता के साथ शुरू हुआ। यह भारतीय जहाजों के लिए ढांचा एवं मशीनरी, माल, संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति तथा युद्ध जोखिम का कवर देता है।

भारत समुद्री बीमा पूल का प्रशासक कौन है?

भारतीय साधारण बीमा निगम (जीआईसी री) इसका पूल प्रशासक है। एक शासी निकाय संचालन की निगरानी करता है और एक हामीदारी समिति जोखिमों का आकलन करती है। पूल की अवधि 10 साल है, जिसे 15 साल तक बढ़ाया जा सकता है।

पूल के तहत देश की पहली संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति पॉलिसी किसे मिली?

भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड को, 30 जुलाई 2026 को। यह पॉलिसी न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने जारी की और यह प्रदूषण, मलबा हटाने तथा चालक दल की चोट जैसी तीसरे पक्ष की देनदारियों से सुरक्षा देती है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLबैंकिंग