संप्रभु गारंटी का उपयोग करने से पहले भारत समुद्री बीमा पूल अपनी आरक्षित निधियों से कितनी राशि तक के दावे चुकाता है?
- A.50 मिलियन अमेरिकी डॉलर
- B.100 मिलियन अमेरिकी डॉलर
- C.500 मिलियन अमेरिकी डॉलर
- D.1.5 अरब अमेरिकी डॉलर
सही उत्तर
B. 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर
व्याख्या
सही उत्तर 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। इस सीमा तक के दावे पूल की संचित आरक्षित निधियों और पुनर्बीमा वसूली से पूरे किए जाते हैं, और सरकार की गारंटी तभी सक्रिय होती है जब ये निधियां पूरी तरह समाप्त हो जाएं। यह परतदार बनावट ही इस ढांचे का मूल विचार है, जिसमें सामान्य नुकसान व्यावसायिक स्तर पर सहे जाते हैं और संप्रभु सहारा अंतिम उपाय के रूप में बचाकर रखा जाता है, ताकि उस पर निर्भरता कम से कम रहे। विकल्प D यानी 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर पूल की कुल हामीदारी क्षमता है, दावे की सीमा नहीं, इसलिए वह आकर्षक जाल बनता है। विकल्प A और विकल्प C गढ़े हुए आंकड़े हैं। परीक्षार्थी दावा सीमा, संप्रभु गारंटी और कुल क्षमता, तीनों अंक साथ जोड़कर याद रखें।
पूरा लेख पढ़ें: भारत समुद्री बीमा पूल: 13,906.50 करोड़ रुपये की क्षमता
अभ्यास प्रश्न
भारत समुद्री बीमा पूल की हामीदारी क्षमता कितनी है?
- A.9,500 करोड़ रुपये
- B.12,980 करोड़ रुपये
- C.13,906.50 करोड़ रुपये
- D.20,000 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 13,906.50 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 13,906.50 करोड़ रुपये है, जो करीब 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर है। यही वह कुल जोखिम मूल्य है जिसका बीमा यह पूल कर सकता है, और इसी वजह से यह भारत का पहला इतने बड़े आकार का घरेलू समुद्री बीमा प्रबंध बनता है। विकल्प B यानी 12,980 करोड़ रुपये सबसे भ्रमित करने वाला है, क्योंकि यह आंकड़ा इसी योजना से जुड़ा है, पर वह सरकार की दी गई संप्रभु गारंटी है, हामीदारी क्षमता नहीं। दोनों अंक जानबूझकर अलग रखे गए हैं और गारंटी क्षमता से कुछ कम है। विकल्प A यानी 9,500 करोड़ रुपये और विकल्प D यानी 20,000 करोड़ रुपये गढ़े हुए आंकड़े हैं और पूल के विवरण में कहीं नहीं आते। परीक्षार्थियों को दोनों अंक जोड़े में याद रखने चाहिए, क्षमता और गारंटी।
भारत समुद्री बीमा पूल का पूल प्रशासक किसे बनाया गया है?
- A.भारतीय साधारण बीमा निगम
- B.भारतीय जीवन बीमा निगम
- C.भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण
- D.न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
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सही उत्तर: A. भारतीय साधारण बीमा निगम
व्याख्या
सही उत्तर भारतीय साधारण बीमा निगम यानी जीआईसी री है, जिसने पूल प्रबंधक और प्रशासक का दायित्व संभाला है। वह पूल का रोजमर्रा का संचालन, प्रदर्शन रिपोर्ट देना और हामीदारी, दावों तथा नियामक अनुपालन की व्यवस्थाएं देखता है। विकल्प D यानी न्यू इंडिया एश्योरेंस सबसे मजबूत भ्रम है, क्योंकि यह सदस्य बीमा कंपनी है और इसने शुरुआती कई पॉलिसियां जारी भी कीं, जिनमें पहली हल एवं मशीनरी युद्ध पॉलिसी तथा पहली संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति पॉलिसी शामिल हैं, पर पॉलिसी जारी करना प्रशासक होना नहीं है। विकल्प B यानी जीवन बीमा निगम जीवन बीमा का काम करता है और समुद्री जोखिम में उसकी कोई भूमिका नहीं है। विकल्प C क्षेत्र का नियामक है और किसी पूल का संचालन नहीं करता। यहां दो और ढांचे महत्वपूर्ण हैं, शासी निकाय और हामीदारी समिति।
वर्ष 2025-26 में भारत के प्रमुख और गैर-प्रमुख बंदरगाहों ने कितना माल संभाला?
- A.950 मिलियन मीट्रिक टन
- B.1,200 मिलियन मीट्रिक टन
- C.1,668 मिलियन मीट्रिक टन
- D.2,400 मिलियन मीट्रिक टन
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सही उत्तर: C. 1,668 मिलियन मीट्रिक टन
व्याख्या
सही उत्तर 1,668 मिलियन मीट्रिक टन है, जो 2025-26 में भारत के बंदरगाहों से गुजरा माल है, और व्यापार बढ़ने के साथ यह आंकड़ा और ऊपर जाने की उम्मीद है। भारत में 12 प्रमुख और 217 गैर-प्रमुख बंदरगाह हैं, इसलिए यह कुल दोनों श्रेणियों को मिलाकर बनता है। विकल्प A, विकल्प B और विकल्प D में दिए 950, 1,200 और 2,400 मिलियन मीट्रिक टन गढ़े हुए आंकड़े हैं और उस वर्ष के रिकॉर्ड से इनका कोई संबंध नहीं है। इस आंकड़े के आसपास कुछ और अंक याद रखने लायक हैं, जैसे 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 2.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र, 14,500 किलोमीटर से अधिक अंतर्देशीय जलमार्ग, 30 मिलियन से ज्यादा लोगों की रोजी और 2026 के मध्य में 1,609 जहाजों तथा 14.33 मिलियन सकल टनभार का भारतीय बेड़ा।
रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के लिए वेज एंड मीन्स एडवांस की सीमा कितनी तय की है?
- A.₹30,000 करोड़
- B.₹40,000 करोड़
- C.₹60,000 करोड़
- D.₹50,000 करोड़
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सही उत्तर: D. ₹50,000 करोड़
व्याख्या
सही उत्तर ₹50,000 करोड़ है। वेज एंड मीन्स एडवांस वह सुविधा है जिसके जरिये भारतीय रिजर्व बैंक सरकार को उसकी आमदनी और भुगतान के बीच थोड़े समय के अंतर को पाटने में मदद करता है, और वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के लिए इस सुविधा की सीमा ₹50,000 करोड़ रखी गई है। विकल्प A, B और C तीनों गलत हैं क्योंकि इनमें से कोई भी आंकड़ा घोषणा में तय की गई सीमा नहीं है; ये केवल असली आंकड़े के आस-पास रखे गए गोल-मटोल विकल्प हैं। अभ्यर्थियों को इस योजना के बाकी आंकड़े भी अलग-अलग याद रखने चाहिए: छमाही की कुल उधारी ₹7,86,000 करोड़ है, तीसरी तिमाही में ट्रेजरी बिलों से साप्ताहिक रकम ₹23,000 करोड़ है, और ग्रीनशू विकल्प के तहत हर प्रतिभूति पर ₹2,000 करोड़ तक अतिरिक्त राशि रखी जा सकती है।
दूसरी छमाही की बाजार उधारी कितनी साप्ताहिक नीलामियों के जरिये पूरी की जाएगी?
- A.13
- B.19
- C.23
- D.26
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सही उत्तर: C. 23
व्याख्या
सही उत्तर 23 है। दूसरी छमाही के लिए तय ₹7,86,000 करोड़ की उधारी दिनांकित प्रतिभूतियों की 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिये पूरी की जाएगी, और ये प्रतिभूतियां तीन साल से लेकर पचास साल तक की आठ अलग-अलग अवधियों में बेची जाएंगी। विकल्प A यहां गलत है, हालांकि यह संख्या इसी घोषणा में कहीं और आती है: 13 उन नीलामी सप्ताहों की गिनती है जो तीसरी तिमाही में ट्रेजरी बिलों के लिए तय किए गए हैं। ट्रेजरी बिल अलग साधन हैं और उनका कैलेंडर भी अलग है, इसलिए दोनों संख्याओं को आपस में नहीं मिलाना चाहिए। विकल्प B गलत है क्योंकि उधारी योजना के किसी भी चरण में नीलामियों की यह गिनती नहीं आती। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि छमाही में दिनांकित प्रतिभूतियों की इतनी नीलामियां नहीं होंगी। परीक्षा में यही अंतर अक्सर पूछा जाता है।