किसी अर्थव्यवस्था में जब मुद्रास्फीति और बेरोजगारी दोनों ऊँचे स्तर पर हों, तो उस स्थिति को __________ कहते हैं।
- A.स्टैगफ्लेशन (मुद्रास्फीतिजनित मंदी)
- B.मुद्रास्फीति प्रीमियम
- C.मुद्रास्फीतिक अंतराल
- D.रिफ्लेशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. स्टैगफ्लेशन (मुद्रास्फीतिजनित मंदी)
व्याख्या
सही उत्तर है A, स्टैगफ्लेशन (मुद्रास्फीतिजनित मंदी)। स्टैगफ्लेशन शब्द 'स्टैगनेशन' (ठहराव) और 'इन्फ्लेशन' (मुद्रास्फीति) से बना है: उत्पादन बढ़ना बंद हो जाता है, बेरोजगारी बढ़ती है, फिर भी कीमतें चढ़ती रहती हैं। सामान्यतः मुद्रास्फीति और बेरोजगारी उल्टी दिशा में चलती हैं, जैसा फिलिप्स वक्र दिखाता है, इसलिए स्टैगफ्लेशन नीति-निर्माताओं के लिए पहेली है: कीमतें ठंडी करने को ब्याज दर बढ़ाएँ तो बेरोजगारी बढ़ती है, और रोजगार के लिए खर्च बढ़ाएँ तो कीमतें और चढ़ती हैं। इसका क्लासिक उदाहरण 1970 का दशक है, जब 1973 और 1979 के तेल-मूल्य झटकों ने पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ धीमी वृद्धि और दो अंकों की मुद्रास्फीति दी। B गलत है क्योंकि मुद्रास्फीति प्रीमियम वह अतिरिक्त प्रतिफल है जो ऋणदाता अपेक्षित मुद्रास्फीति की भरपाई के लिए माँगते हैं। C गलत है क्योंकि मुद्रास्फीतिक अंतराल वह मात्रा है जिससे कुल माँग पूर्ण-रोजगार उत्पादन से अधिक हो जाती है, यह ज़्यादा माँग की स्थिति है, ऊँची बेरोजगारी की नहीं। D गलत है क्योंकि रिफ्लेशन मंदी से उबारने के लिए जानबूझकर माँग बढ़ाने की नीति है। परीक्षा टिप: स्टैगफ्लेशन = ऊँची मुद्रास्फीति + ऊँची बेरोजगारी + ठहरी हुई वृद्धि, 1970 के तेल संकट से याद रखें।