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GK24
अर्थव्यवस्थामध्यम

यहां बताए गए तिमाही जीडीपी अनुमान कौन जारी करता है?

  1. A.नीति आयोग
  2. B.सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
  3. C.भारतीय रिजर्व बैंक
  4. D.आर्थिक कार्य विभाग

सही उत्तर

B. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय है, जिसे संक्षेप में एमओएसपीआई कहा जाता है। विज्ञप्ति की हर तालिका, चाहे वह व्यय घटकों की हो, क्षेत्रवार सकल मूल्य वृद्धि की हो या वार्षिक संशोधित अनुमानों की, इसी मंत्रालय के स्रोत से दी गई है। पिछले तीन वर्षों की वास्तविक जीडीपी वृद्धि को ऊपर संशोधित करने और अनुमानों को आधार वर्ष 2022-23 वाले नए मूल्य तथा उत्पादन सूचकांकों पर ले जाने का काम भी इसी मंत्रालय ने किया, जिनमें आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स और बैंकिंग सर्विसेज प्राइस इंडेक्स शामिल हैं। विकल्प सी गलत है लेकिन तथ्य के करीब है: रिजर्व बैंक ने इस तिमाही के लिए 7.0 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था, जो पूर्वानुमान था, न कि अनुमान जारी करना, और वास्तविक आंकड़ा उससे ऊपर रहा। नीति आयोग और आर्थिक कार्य विभाग का नाम इन राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों के स्रोत के रूप में विज्ञप्ति में नहीं है।

पूरा लेख पढ़ें: पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत

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Q1.अर्थव्यवस्थाआसान

2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि कितनी रही?

  1. A.6.9 प्रतिशत
  2. B.7.0 प्रतिशत
  3. C.7.8 प्रतिशत
  4. D.8.2 प्रतिशत
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 7.8 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर 7.8 प्रतिशत है। वास्तविक जीडीपी, यानी स्थिर कीमतों पर जीडीपी, 2026-27 की पहली तिमाही में 81.36 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है और यही स्तर 7.8 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। यह आंकड़ा 2023-24 से आगे के चार वर्षों में किसी पहली तिमाही की सबसे ऊंची वृद्धि है और इसे विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र ने आगे बढ़ाया। हर गलत विकल्प भी इसी विज्ञप्ति का वास्तविक आंकड़ा है, इसलिए वे भ्रमित करते हैं। विकल्प ए पिछले वर्ष की पहली तिमाही की वृद्धि है, यानी वह आधार जिससे तुलना की गई। विकल्प बी भारतीय रिजर्व बैंक का इस तिमाही के लिए अनुमान है, जिसे वास्तविक आंकड़े ने पार कर लिया। विकल्प डी वास्तविक सकल मूल्य वृद्धि यानी जीवीए की वृद्धि है, जो 73.82 लाख करोड़ रुपये रही। तीनों को अलग-अलग याद रखें: 7.0 अनुमान, 7.8 जीडीपी और 8.2 जीवीए।

Q2.अर्थव्यवस्थामध्यम

तिमाही में वास्तविक जीडीपी के किस व्यय घटक में 11.9 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई?

  1. A.अंतिम निजी उपभोग व्यय
  2. B.सकल स्थिर पूंजी निर्माण
  3. C.सरकारी अंतिम उपभोग व्यय
  4. D.वस्तुओं और सेवाओं का आयात
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सकल स्थिर पूंजी निर्माण

व्याख्या

सही उत्तर सकल स्थिर पूंजी निर्माण है, जो अर्थव्यवस्था के भीतर से हुए निवेश का माप है। 2026-27 की पहली तिमाही में यह 11.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पिछले वर्ष की इसी तिमाही में वृद्धि 5.8 प्रतिशत थी, और दिए गए व्यय घटकों में यही सबसे तेज बदलाव है। विकल्प ए विचार के स्तर पर नहीं, संख्या के स्तर पर गलत है: अंतिम निजी उपभोग व्यय, यानी परिवारों का वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च, 6.8 प्रतिशत से बढ़कर 7.1 प्रतिशत हुआ। निर्यात 6.0 प्रतिशत से बढ़कर 12.0 प्रतिशत हुआ। सरकारी उपभोग और आयात के लिए इस विज्ञप्ति में वृद्धि के आंकड़े दिए ही नहीं गए, इसलिए विकल्प सी और डी को इससे सिद्ध नहीं किया जा सकता। दोहराने के लिए तीनों प्रेरक क्रम से याद रखें: निर्यात 12.0, निवेश 11.9 और परिवारों की खपत 7.1 प्रतिशत।

Q3.अर्थव्यवस्थाकठिन

संशोधित राष्ट्रीय लेखा अनुमानों के बारे में कौन-सा कथन सही है?

  1. A.मूल्य और उत्पादन सूचकांकों का नया आधार वर्ष 2022-23 है
  2. B.पिछले तीन वर्षों की वृद्धि घटाकर संशोधित की गई
  3. C.संशोधन में आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स हटा दिया गया
  4. D.2025-26 की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.1 प्रतिशत कर दी गई
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मूल्य और उत्पादन सूचकांकों का नया आधार वर्ष 2022-23 है

व्याख्या

सही उत्तर यह है कि नया आधार वर्ष 2022-23 है। वार्षिक संशोधित अनुमान इसी आधार वाले नए मूल्य और उत्पादन सूचकांकों का उपयोग करते हैं, जिनमें आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स और बैंकिंग सर्विसेज प्राइस इंडेक्स शामिल हैं, और इनके साथ कई स्रोतों से मिले अद्यतन प्रशासनिक आंकड़े भी जोड़े गए हैं। विकल्प बी बदलाव की दिशा उलट देता है, क्योंकि तीनों पुराने वर्षों की वास्तविक जीडीपी वृद्धि बढ़ाकर संशोधित की गई। विकल्प सी भी तथ्य के स्तर पर गलत है: आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स उन नए सूचकांकों में है जिन्हें जोड़ा गया, हटाया नहीं गया। विकल्प डी एक सही आंकड़े को गलत जगह रखता है; 7.1 प्रतिशत 2024-25 का पूर्ववर्ती अनुमान था, जिसे 7.2 प्रतिशत किया गया, जबकि 2025-26 का अनुमान 7.7 से 7.8 प्रतिशत हुआ। ये संशोधन बताते हैं कि मजबूत तिमाही पहले से मजबूत रास्ते पर खड़ी है।

Q4.अर्थव्यवस्थामध्यम

जेसीआर ने भारतीय बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता सुधरने का श्रेय किस सुधार को दिया?

  1. A.दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता
  2. B.कंपनी अधिनियम
  3. C.प्रतिस्पर्धा अधिनियम
  4. D.विदेश व्यापार नीति
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता

व्याख्या

सही उत्तर दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता है। जेसीआर ने भारतीय बैंकों की बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता के पीछे तीन बातें गिनाईं: इस संहिता की स्थापना, सरकार द्वारा बैंकों में डाली गई पूंजी और भारतीय रिजर्व बैंक की कड़ी निगरानी। उसने यह भी कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में पूंजी पर्याप्तता और लाभप्रदता ठीक बनी हुई है तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में भी परिसंपत्ति गुणवत्ता और पूंजी पर्याप्तता सुधरी है, जिससे पूरी वित्तीय प्रणाली मजबूत हुई है। विकल्प बी यानी कंपनी अधिनियम कंपनियों के गठन और संचालन से जुड़ा है, इसका यहां उल्लेख नहीं है। विकल्प सी यानी प्रतिस्पर्धा अधिनियम प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार से जुड़ा अलग विषय है। विकल्प डी यानी विदेश व्यापार नीति निर्यात और आयात से जुड़ी है। इनमें से किसी का भी नाम बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता के संदर्भ में विज्ञप्ति में नहीं आया है, इसलिए वे तीनों गलत हैं।

Q5.अर्थव्यवस्थामध्यम

जेसीआर के फैसले से पहले वाले वर्ष में इनमें से किसने भारत की सॉवरेन रेटिंग नहीं बढ़ाई थी?

  1. A.मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस
  2. B.एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स
  3. C.रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन, इंक.
  4. D.एशियाई विकास बैंक
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. एशियाई विकास बैंक

व्याख्या

सही उत्तर एशियाई विकास बैंक है। यह एक बहुपक्षीय विकास बैंक है जो अपने सदस्य देशों को ऋण देता है। यह क्रेडिट रेटिंग एजेंसी नहीं है और किसी देश को सॉवरेन रेटिंग नहीं देता, इसलिए इस सूची में उसका नाम आ ही नहीं सकता। विज्ञप्ति में तीन एजेंसियों का उल्लेख है जिन्होंने पिछले एक वर्ष में भारत की रेटिंग बढ़ाई। सबसे पहले मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस ने मई 2025 में ऐसा किया। इसके बाद अगस्त 2025 में एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने और सितंबर 2025 में जापान की ही रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन, इंक. ने रेटिंग बढ़ाई। जेसीआर का फैसला इस तरह लगभग एक वर्ष में चौथा है, इसीलिए इसे किसी एक राय के बजाय भारत की आर्थिक बुनियाद के लगातार मजबूत होने का प्रमाण बताया गया है।