यदि किसी व्यक्ति का वृक्क काम करना बंद कर दे, तो उसके रक्त को कृत्रिम वृक्क द्वारा फिल्टर किया जाता है, अन्यथा वह जीवित नहीं रह सकता। यह प्रक्रिया कहलाती है:
- A.उत्सर्जन
- B.डायलिसिस
- C.प्रस्वेदन
- D.निष्कासन
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, डायलिसिस। हीमोडायलिसिस में कृत्रिम वृक्क नाम की मशीन से उस मरीज़ का खून साफ़ किया जाता है, जिसके गुर्दे काम करना बंद कर चुके हों। मरीज़ के खून में हेपेरिन जैसा थक्का-रोधी मिलाकर उसे अर्धपारगम्य परत वाली पतली नलियों से गुज़ारा जाता है, जो डायलिसिस द्रव में डूबी रहती हैं। यूरिया जैसे अपशिष्ट पदार्थ इस परत से होकर द्रव में चले जाते हैं, और साफ़ खून शिरा के ज़रिए वापस शरीर में भेज दिया जाता है। गुर्दे पूरी तरह खराब होने पर मरीज़ को यह उपचार नियमित रूप से, अक्सर हफ़्ते में दो-तीन बार, लेना पड़ता है, जब तक गुर्दा प्रत्यारोपण न हो। डच डॉक्टर विलेम कोल्फ़ ने 1943 में पहला कारगर कृत्रिम वृक्क बनाया था। विकल्प A गलत है, क्योंकि उत्सर्जन शरीर द्वारा अपशिष्ट निकालने की प्राकृतिक क्रिया है, जिसे स्वस्थ गुर्दे करते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि प्रस्वेदन का अर्थ त्वचा से पसीना निकलना है। विकल्प D गलत है, क्योंकि निष्कासन का अर्थ केवल बाहर निकालना है; यह इस उपचार का नाम नहीं है। परीक्षा टिप: गुर्दे की कार्यात्मक इकाई नेफ़्रॉन है, और कृत्रिम वृक्क की प्रक्रिया हीमोडायलिसिस है, जिससे मुख्य रूप से यूरिया निकाला जाता है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंयह तथ्य कि ग्रह सूर्य के चारों ओर वृत्तों में नहीं, बल्कि दीर्घवृत्तों में घूमते हैं, सबसे पहले किसने प्रदर्शित किया?
- A.गैलीलियो
- B.मार्टिन लूथर
- C.योहानेस केप्लर
- D.कॉपरनिकस
उत्तर देखें
1609 में केप्लर ने दिखाया कि ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं और सूर्य उस दीर्घवृत्त की एक नाभि पर होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.यूरिया यकृत में बनता है।
- B.यूरिया रक्त में बनता है।
- C.यूरिया स्टार्च के पाचन से बनता है।
- D.यूरिया फेफड़े और वृक्क में बनता है।
उत्तर देखें
यकृत की कोशिकाएँ अमीनो अम्लों के टूटने से निकले विषैले अमोनिया को ऑर्निथीन चक्र, जिसे यूरिया चक्र भी कहते हैं, के द्वारा यूरिया में बदलती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में प्रकाश के गमन का सही क्रम निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- A.संघनित्र-अभिदृश्यक लेंस-नेत्रिका-देह नलिका
- B.अभिदृश्यक लेंस-संघनित्र-देह नलिका-नेत्रिका
- C.संघनित्र-अभिदृश्यक लेंस-देह नलिका-नेत्रिका
- D.नेत्रिका-अभिदृश्यक लेंस-देह नलिका-दर्पण
उत्तर देखें
प्रकाश संघनित्र से होकर नमूने तक जाता है, अभिदृश्यक लेंस उसे ग्रहण करता है, फिर वह देह नलिका से ऊपर जाकर नेत्रिका के रास्ते आँख तक पहुँचता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हीमोग्लोबिन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.आरबीसी में उपस्थित हीमोग्लोबिन केवल ऑक्सीजन ले जा सकता है, कार्बन डाइऑक्साइड नहीं।
- B.आरबीसी का हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड दोनों ले जा सकता है।
- C.आरबीसी का हीमोग्लोबिन केवल कार्बन डाइऑक्साइड ले जा सकता है।
- D.हीमोग्लोबिन का उपयोग केवल रक्त के थक्का बनने में होता है, गैसों को ले जाने में नहीं।
उत्तर देखें
यह अपने लौह-युक्त हीम समूहों पर ऑक्सीजन बाँधता है और अपनी प्रोटीन शृंखलाओं पर कुछ कार्बन डाइऑक्साइड ले जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हिस्टोन प्रोटीनों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.हिस्टोन ऐसे प्रोटीन हैं जो माइटोकॉन्ड्रिया की झिल्ली में पाए जाते हैं।
- B.हिस्टोन ऐसे प्रोटीन हैं जो केंद्रक में डीएनए के साथ जुड़े हुए पाए जाते हैं।
- C.हिस्टोन साइटोसोल में लिपिडों से जुड़े प्रोटीन हैं।
- D.हिस्टोन साइटोसोल में कार्बोहाइड्रेटों से जुड़े प्रोटीन हैं।
उत्तर देखें
यूकैरियोटिक कोशिकाओं के केंद्रक में डीएनए इन्हीं प्रोटीनों के चारों ओर लिपटकर क्रोमैटिन बनाता है। हिस्टोन छोटे क्षारीय प्रोटीन हैं जिनमें धनावेशित अमीनो अम्ल लाइसिन और आर्जिनिन अधिक होते हैं, जो डीएनए के ऋणावेशित फॉस्फेट समूहों को आकर्षित करते हैं।
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