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GK क्विजसामान्य विज्ञान

सामान्य विज्ञान मिश्रित क्विज: सेट 6

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

सामान्य विज्ञान मिश्रित क्विज़ (सेट 6) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 18 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: मात्रक और मापन, कार्बन और उसके यौगिक, प्रकाश: परावर्तन और अपवर्तन और अन्य। इनमें से 19 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.सामान्य विज्ञानआसान

दाब का एसआई मात्रक क्या है?

  1. A.न्यूटन
  2. B.पास्कल
  3. C.हर्ट्ज
  4. D.टेस्ला
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पास्कल

व्याख्या

सही उत्तर B, पास्कल है। दाब बल में क्षेत्रफल का भाग देकर निकाला जाता है, इसलिए इसका मात्रक एक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर है, जिसे ब्लेज पास्कल के नाम पर पास्कल कहा जाता है। इसका विमीय सूत्र M L⁻¹ T⁻² है, और समुद्र तल पर वायुमंडलीय दाब लगभग 1.013 लाख पास्कल होता है, जिसे एक वायुमंडल अथवा लगभग 1,013 मिलीबार भी कहते हैं।

विकल्प A, न्यूटन स्वयं बल मापता है, प्रति इकाई क्षेत्रफल बल नहीं; इसी बिंदु पर सबसे अधिक भ्रम होता है। विकल्प C, हर्ट्ज आवृत्ति मापता है, अर्थात प्रति सेकंड चक्रों की संख्या। विकल्प D, टेस्ला चुंबकीय फ्लक्स घनत्व मापता है। यह भी याद रखें कि वायुमंडलीय दाब मापने वाला यंत्र बैरोमीटर है और उसके पाठ्यांक का अचानक गिरना तूफान की चेतावनी देता है।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB JE · CBT-1, 28 June 2019, Shift 3आसान

हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु कितने कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है?

  1. A.दो
  2. B.पाँच
  3. C.तीन
  4. D.चार
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. चार

व्याख्या

सही उत्तर है D, चार। हीरे में हर कार्बन परमाणु चार दूसरे कार्बन परमाणुओं से मज़बूत सहसंयोजक (covalent) बंधों द्वारा जुड़ा होता है। ये बंध चतुष्फलक (tetrahedron) के कोनों की ओर होते हैं और पूरे क्रिस्टल में एक कठोर त्रिविमीय जाल बना देते हैं। इसी जाल के कारण हीरा सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है और काटने व ड्रिलिंग के औज़ारों में इस्तेमाल होता है। चारों संयोजी इलेक्ट्रॉन बंध बनाने में लग जाते हैं और कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं बचता, इसलिए हीरा बिजली का चालन नहीं करता। कार्बन के दूसरे रूप ग्रेफाइट में हर परमाणु केवल तीन कार्बन से जुड़कर षट्कोणीय परतें बनाता है; बचा हुआ इलेक्ट्रॉन उसे विद्युत चालक बनाता है। A गलत है क्योंकि दो बंधों से ठोस त्रिविमीय जाल नहीं बनता। B गलत है क्योंकि कार्बन की संयोजकता चार है, वह पाँच बंध नहीं बनाता। C गलत है क्योंकि तीन बंध ग्रेफाइट की पहचान है, हीरे की नहीं। परीक्षा टिप: हीरा = 4 बंध, कठोर, कुचालक; ग्रेफाइट = 3 बंध, नरम, सुचालक।

Q3.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019आसान

जब किसी प्रिज्म पर श्वेत प्रकाश के एक किरण पुंज को आपतित होने दिया जाता है, तब निर्गत होने वाले किस प्रकाश के लिए अधिकतम विचलन होता है?

  1. A.लाल प्रकाश
  2. B.बैंगनी प्रकाश
  3. C.पीला प्रकाश
  4. D.नीला प्रकाश
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. बैंगनी प्रकाश

व्याख्या

सही उत्तर है B, बैंगनी प्रकाश। दृश्य प्रकाश में बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे छोटी होती है, इसलिए काँच उसे सबसे ज़्यादा धीमा करता है और सबसे ज़्यादा मोड़ता है। श्वेत प्रकाश सात रंगों का मिश्रण है, जिन्हें VIBGYOR (बैनीआहपीनाला) से याद रखते हैं। काँच का अपवर्तनांक हर रंग के लिए थोड़ा अलग होता है, बैंगनी के लिए सबसे अधिक और लाल के लिए सबसे कम। इसलिए प्रिज्म से गुज़रते समय हर रंग अलग कोण पर मुड़ता है और प्रकाश एक रंगीन पट्टी में फैल जाता है, जिसे स्पेक्ट्रम कहते हैं। इस बिखराव को विक्षेपण कहते हैं, जिसे आइज़क न्यूटन ने 1666 के अपने प्रयोगों में काँच के प्रिज्म से दिखाया था। विकल्प A गलत है, क्योंकि लाल की तरंगदैर्ध्य सबसे लंबी है और वह सबसे कम मुड़ता है, इसलिए वह स्पेक्ट्रम में बैंगनी के दूसरे छोर पर होता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि पीला स्पेक्ट्रम के बीच में है और बैंगनी से कम मुड़ता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि नीला पीले से अधिक पर बैंगनी से थोड़ा कम मुड़ता है। परीक्षा टिप: लाल का विचलन सबसे कम, बैंगनी का सबसे अधिक; तरंगदैर्ध्य जितनी छोटी, मोड़ उतना बड़ा।

Q4.सामान्य विज्ञानपूछा गया: CDS · CDS (I) 2024, 21 Apr 2024आसान

मानव शरीर की किन कोशिकाओं में केंद्रक नहीं होता?

  1. A.पेशी कोशिकाएं
  2. B.भक्षक (फैगोसाइटिक) कोशिकाएं
  3. C.लाल रक्त कोशिकाएं
  4. D.पक्ष्माभी (सिलियेटेड) कोशिकाएं
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. लाल रक्त कोशिकाएं

व्याख्या

सही उत्तर है C, लाल रक्त कोशिकाएं। परिपक्व लाल रक्त कोशिकाएं यानी एरिथ्रोसाइट रक्त में आने से पहले अपना केंद्रक खो देती हैं। केंद्रक और माइटोकॉन्ड्रिया न होने से हीमोग्लोबिन के लिए ज्यादा जगह बचती है, जो ऑक्सीजन ढोने वाला लौह युक्त प्रोटीन है, और कोशिका को लचीला उभयावतल आकार मिलता है, जिससे वह पतली केशिकाओं से निकल पाती है। केंद्रक न होने से ये कोशिकाएं विभाजन या अपनी मरम्मत नहीं कर पातीं; ये लगभग 120 दिन जीवित रहती हैं, लाल अस्थि मज्जा में बनती हैं और मुख्यतः प्लीहा में नष्ट होती हैं, जिसे लाल रक्त कोशिकाओं का कब्रिस्तान कहते हैं। प्लेटलेट्स में भी केंद्रक नहीं होता, पर वे पूरी कोशिका नहीं, कोशिका के टुकड़े हैं। A गलत है, पेशी कोशिकाओं में केंद्रक होता है; कंकाल पेशी तंतुओं में तो कई केंद्रक होते हैं। B गलत है, न्यूट्रोफिल और मैक्रोफेज जैसी भक्षक कोशिकाओं में केंद्रक होता है। D गलत है, श्वासनली और अंडवाहिनी की पक्ष्माभी कोशिकाओं में सामान्य केंद्रक होता है। परीक्षा टिप: मानव लाल रक्त कोशिका, केंद्रक नहीं, 120 दिन जीवन, अस्थि मज्जा में जन्म, प्लीहा में अंत।

Q5.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ग्रुप D · 29 Oct 2018, Shift 2मध्यम

समूह _______ के तत्वों को 'd' ब्लॉक तत्व कहा जाता है।

  1. A.3 से 12
  2. B.1 और 2
  3. C.13 से 18
  4. D.3 से 10
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 3 से 12

व्याख्या

सही उत्तर है A, 3 से 12। d-ब्लॉक आधुनिक आवर्त सारणी के बीच में समूह 3 से 12 तक फैला है और इसके तत्वों को संक्रमण तत्व भी कहते हैं। इनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन दूसरे-अंतिम कोश के d कक्षक में जाता है, इसीलिए ये परिवर्ती संयोजकता दिखाते हैं, रंगीन यौगिक बनाते हैं और अच्छे उत्प्रेरक होते हैं। लोहा, ताँबा, जिंक, चाँदी, सोना और पारा सब इसी ब्लॉक में हैं। इसमें चार श्रेणियाँ हैं जो 3d, 4d, 5d और 6d कक्षकों को भरती हैं, आवर्त 4 से 7 में एक-एक। B गलत है क्योंकि समूह 1 और 2 s-ब्लॉक हैं, यानी क्षार और क्षारीय मृदा धातुएँ। C गलत है क्योंकि समूह 13 से 18 p-ब्लॉक बनाते हैं, जिसमें अधिकांश अधातुएँ और उत्कृष्ट गैसें हैं। D गलत है क्योंकि d-ब्लॉक समूह 10 पर नहीं रुकता; समूह 12 के जिंक, कैडमियम और पारा भी इसी में हैं। परीक्षा टिप: s-ब्लॉक = समूह 1 और 2, d-ब्लॉक = समूह 3 से 12, p-ब्लॉक = समूह 13 से 18, f-ब्लॉक = सारणी के नीचे रखे लैंथेनाइड और ऐक्टिनाइड।

Q6.सामान्य विज्ञानपूछा गया: हरियाणा · HPSC HCS Prelims GS, 24 Jul 2022मध्यम

निःश्वसन के दौरान फेफड़ों से वायु तब निकलेगी, जब फेफड़ों के भीतर का दबाव

  1. A.वायुमंडलीय दबाव के बराबर हो
  2. B.वायुमंडलीय दबाव से कम हो
  3. C.वायुमंडलीय दबाव से अधिक हो
  4. D.डायाफ्राम का संकुचन हो
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. वायुमंडलीय दबाव से अधिक हो

व्याख्या

सही उत्तर है C, वायुमंडलीय दबाव से अधिक हो। हवा हमेशा अधिक दबाव वाली जगह से कम दबाव वाली जगह की ओर बहती है, इसलिए वह फेफड़ों से तभी बाहर निकलती है, जब भीतर का दबाव बाहर की हवा के दबाव से अधिक हो जाए। निःश्वसन के समय डायाफ्राम शिथिल होकर ऊपर की ओर गुंबद जैसा हो जाता है, और पसलियों की पेशियाँ ढीली पड़ने से पसलियाँ नीचे व अंदर आती हैं। इससे वक्ष गुहा का आयतन घटता है, फेफड़ों में दबाव बढ़ता है और हवा बाहर धकेल दी जाती है। अंतःश्वसन में इसका उल्टा होता है: डायाफ्राम सिकुड़कर चपटा होता है, वक्ष गुहा बड़ी होती है, फेफड़ों का दबाव वायुमंडलीय दबाव से कम हो जाता है और हवा अंदर आती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि दबाव बराबर होने पर हवा नहीं चलती; ऐसा दो साँसों के बीच पल भर के लिए होता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि फेफड़ों में कम दबाव होने पर हवा अंदर आती है, जो अंतःश्वसन है। विकल्प D गलत है, क्योंकि डायाफ्राम के संकुचन से अंतःश्वसन होता है, निःश्वसन नहीं। परीक्षा टिप: अंतःश्वसन में डायाफ्राम सिकुड़ता है और दबाव घटता है; निःश्वसन में डायाफ्राम शिथिल होता है और दबाव बढ़ता है।

Q7.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · CBT-1, 17 Aug 2018, Shift 2आसान

चूने के पानी में कार्बन डाइऑक्साइड प्रवाहित करने पर वह दूधिया हो जाता है। ऐसा किसके बनने के कारण होता है?

  1. A.बेरियम कार्बोनेट
  2. B.कैल्शियम ऑक्साइड
  3. C.कैल्शियम कार्बोनेट
  4. D.कैल्शियम हाइड्रोजन कार्बोनेट
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. कैल्शियम कार्बोनेट

व्याख्या

सही उत्तर है C, कैल्शियम कार्बोनेट। कार्बन डाइऑक्साइड चूने के पानी से क्रिया करके अघुलनशील कैल्शियम कार्बोनेट बनाती है, जिसके बारीक सफेद कण पानी को दूधिया बना देते हैं। चूने का पानी कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, Ca(OH)2, का साफ घोल होता है और अभिक्रिया है: Ca(OH)2 + CO2 → CaCO3 + H2O। यही कार्बन डाइऑक्साइड की पहचान का मानक परीक्षण है, जैसे यह दिखाना कि हमारी छोड़ी हुई साँस में CO2 होती है। यदि बहुत देर तक CO2 प्रवाहित करते रहें तो घुलनशील कैल्शियम हाइड्रोजन कार्बोनेट बनने से दूधियापन गायब हो जाता है। A गलत है क्योंकि चूने के पानी में बेरियम होता ही नहीं, इसलिए बेरियम कार्बोनेट नहीं बन सकता। B गलत है क्योंकि कैल्शियम ऑक्साइड (बिना बुझा चूना) चूना पत्थर को गर्म करने से बनता है, CO2 प्रवाहित करने से नहीं। D गलत है क्योंकि कैल्शियम हाइड्रोजन कार्बोनेट केवल अधिक CO2 से बनता है और घुलनशील होने के कारण दूधियापन को मिटाता है, पैदा नहीं करता। परीक्षा टिप: चूने के पानी में CO2 = दूधिया (CaCO3); अधिक CO2 = फिर साफ (Ca(HCO3)2); चूना पत्थर, चॉक और संगमरमर तीनों CaCO3 हैं।

Q8.सामान्य विज्ञानपूछा गया: CDS · CDS (II) 2024, 1 Sep 2024आसान

निम्नलिखित में से कौन-सा हॉर्मोन पौधों में वृद्धि क्रिया को रोकता है?

  1. A.ऑक्सिन
  2. B.साइटोकाइनिन
  3. C.एब्सिसिक अम्ल
  4. D.जिबरेलिन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. एब्सिसिक अम्ल

व्याख्या

सही उत्तर है C, एब्सिसिक अम्ल। यह पादप हॉर्मोनों में मुख्य वृद्धि रोधक है और वृद्धि बढ़ाने वाले हॉर्मोनों के उलट काम करता है। एब्सिसिक अम्ल (ABA) को तनाव हॉर्मोन कहते हैं, क्योंकि यह सूखे, ठंड और लवणता में पौधे को बचाता है: पानी बचाने के लिए रंध्र बंद कराता है, बीजों और कलियों को सुप्त रखता है ताकि वे खराब मौसम में न फूटें, और पत्तियों व फलों को पुराना होकर गिरने में मदद करता है। इसलिए जब पूछा जाए कि कौन-सा हॉर्मोन वृद्धि धीमी या बंद करता है, तो उत्तर ABA है; बुढ़ापे और फल पकने से जुड़ा दूसरा हॉर्मोन एथिलीन है। A गलत है, ऑक्सिन कोशिकाओं को लंबा करके वृद्धि बढ़ाते हैं और तने को प्रकाश की ओर मोड़ते हैं। B गलत है, साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन बढ़ाते हैं और पत्तियों के बुढ़ापे को टालते हैं। D गलत है, जिबरेलिन तने की लंबाई बढ़ाते हैं, बीज की सुप्तावस्था तोड़ते हैं और अंगूर का आकार बढ़ाने के लिए छिड़के जाते हैं। परीक्षा टिप: वृद्धि बढ़ाने वाले ऑक्सिन, जिबरेलिन और साइटोकाइनिन; रोकने वाला एब्सिसिक अम्ल, यानी तनाव हॉर्मोन।

Q9.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB JE · CBT-1, 16 Dec 2024, Shift 2आसान

सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर कौन-सी धातु रखी गई है?

  1. A.ताँबा
  2. B.लोहा
  3. C.चाँदी
  4. D.पोटैशियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. पोटैशियम

व्याख्या

सही उत्तर है D, पोटैशियम। सक्रियता श्रेणी में धातुओं को सबसे अधिक क्रियाशील से सबसे कम क्रियाशील के क्रम में रखा जाता है, और पोटैशियम सबसे ऊपर है क्योंकि वह अपना एकमात्र बाहरी इलेक्ट्रॉन सबसे आसानी से खो देता है। यह ठंडे पानी से इतनी तेज़ी से अभिक्रिया करता है कि निकलने वाली हाइड्रोजन आग पकड़ लेती है, इसलिए पोटैशियम को मिट्टी के तेल (केरोसिन) में रखा जाता है। सामान्य क्रम है: K, Na, Ca, Mg, Al, Zn, Fe, Pb, (H), Cu, Hg, Ag, Au। ऊपर वाली धातु नीचे वाली धातु को उसके लवण के घोल से हटा देती है; इसीलिए नीले कॉपर सल्फेट के घोल में रखी लोहे की कील पर ताँबे की भूरी परत चढ़ जाती है। हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएँ तनु अम्ल से हाइड्रोजन गैस देती हैं, नीचे वाली नहीं। A गलत है क्योंकि ताँबा हाइड्रोजन से नीचे है और तनु अम्ल से अभिक्रिया नहीं करता। B गलत है क्योंकि लोहा श्रेणी के बीच में है। C गलत है क्योंकि चाँदी लगभग सबसे नीचे, सोने से ठीक ऊपर है। परीक्षा टिप: सबसे ऊपर पोटैशियम, सबसे नीचे सोना; K और Na केरोसिन में रखे जाते हैं।

Q10.सामान्य विज्ञानपूछा गया: हरियाणा · HPSC HCS Prelims GS, 24 Jul 2022मध्यम

निम्नलिखित रोगों के समूह में से किसमें जिनेटिक रोग समाविष्ट हैं?

  1. A.सिकल सेल अनीमिया, AIDS, डाउन सिन्ड्रोम
  2. B.AIDS, हेपैटाइटिस B, कैन्सर
  3. C.हीमोफिलिया, हेपैटाइटिस B, कलर ब्लाइंडनेस
  4. D.सिकल सेल अनीमिया, हीमोफिलिया, डाउन सिन्ड्रोम
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सिकल सेल अनीमिया, हीमोफिलिया, डाउन सिन्ड्रोम

व्याख्या

सही उत्तर है D, सिकल सेल अनीमिया, हीमोफिलिया, डाउन सिन्ड्रोम। ये तीनों आनुवंशिक रोग हैं, जो जीन या गुणसूत्रों में बदलाव से होते हैं और जन्म से मिलते हैं, किसी रोगाणु से नहीं। सिकल सेल अनीमिया एक अलिंगसूत्री अप्रभावी रोग है, जिसमें हीमोग्लोबिन के जीन में एक छोटे से बदलाव से लाल रक्त कोशिकाएँ हँसिए जैसी हो जाती हैं। हीमोफिलिया X गुणसूत्र से जुड़ा लिंग-सहलग्न अप्रभावी रोग है, जिसमें खून ठीक से नहीं जमता; यह ज़्यादातर पुरुषों को होता है, और महारानी विक्टोरिया के वंशजों में फैलने के कारण इसे शाही रोग कहा जाता है। डाउन सिन्ड्रोम गुणसूत्र 21 की एक अतिरिक्त प्रति से होने वाला गुणसूत्रीय विकार है, जिसे ट्राइसोमी 21 भी कहते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि AIDS एचआईवी विषाणु से होता है और जीन से विरासत में नहीं मिलता। विकल्प B गलत है, क्योंकि AIDS और हेपैटाइटिस B विषाणु संक्रमण हैं, और अधिकतर कैंसर जीवन के दौरान हुए उत्परिवर्तन से होते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि हेपैटाइटिस B विषाणु संक्रमण है, भले ही हीमोफिलिया और वर्णांधता आनुवंशिक हैं। परीक्षा टिप: आनुवंशिक रोगों में सिकल सेल अनीमिया, हीमोफिलिया, वर्णांधता, थैलेसीमिया और डाउन सिन्ड्रोम आते हैं।

Q11.सामान्य विज्ञानपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Pre GS, 25 Jul 2021आसान

भोजन में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) का उपयोग किया जाता है

  1. A.रंग बढ़ाने में
  2. B.स्वाद बढ़ाने में
  3. C.सुरक्षित रखने में
  4. D.पायसीकरण में
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. स्वाद बढ़ाने में

व्याख्या

सही उत्तर है B, स्वाद बढ़ाने में। मोनोसोडियम ग्लूटामेट एक अमीनो अम्ल, ग्लूटामिक अम्ल, का सोडियम लवण है, जिसे सूप, सॉस, नूडल्स और नमकीन में उनका चटपटा स्वाद बढ़ाने के लिए डाला जाता है। इस स्वाद को उमामी कहते हैं, जो मीठा, खट्टा, नमकीन और कड़वा के बाद पाँचवाँ मूल स्वाद है; इसे 1908 में जापानी रसायनज्ञ किकुने इकेदा ने पहचाना, जिन्होंने समुद्री शैवाल के शोरबे से पहली बार MSG बनाया। भारत में MSG ज़्यादातर ‘अजीनोमोटो’ नाम से बिकता है, जो इसे बनाने वाली जापानी कंपनी का नाम है। विकल्प A गलत है, क्योंकि कैरामेल या अनुमत डाई जैसे खाद्य रंग भोजन का रूप बदलते हैं, स्वाद नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि सोडियम बेंज़ोएट, या नमक और सिरका जैसे परिरक्षक भोजन को ख़राब होने से बचाते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि लेसिथिन जैसे पायसीकारक मेयोनीज़ और आइसक्रीम जैसी चीज़ों में तेल और पानी को मिलाए रखने में मदद करते हैं। परीक्षा टिप: MSG से उमामी स्वाद, सोडियम बेंज़ोएट से परिरक्षण, लेसिथिन से पायसीकरण।

Q12.सामान्य विज्ञानपूछा गया: CTET · Paper I, 7 Jul 2024मध्यम

पर्वतारोहियों की नाक से ऊँचाई पर खून बहने लगता है, क्योंकि:

  1. A.रक्त वाहिकाओं में दाब बाहरी दाब से अधिक हो जाता है।
  2. B.रक्त वाहिकाओं में दाब बाहरी दाब से कम हो जाता है।
  3. C.रक्त वाहिकाओं में दाब बाहरी दाब के बराबर हो जाता है।
  4. D.अधिक ऊँचाई पर रक्त गाढ़ा हो जाता है।
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. रक्त वाहिकाओं में दाब बाहरी दाब से अधिक हो जाता है।

व्याख्या

सही उत्तर है A, रक्त वाहिकाओं में दाब बाहरी दाब से अधिक हो जाता है। बहुत ऊँचाई पर हवा विरल होती है, इसलिए शरीर पर पड़ने वाला वायुमंडलीय दाब समुद्र तल की तुलना में काफी कम हो जाता है। पर रक्त वाहिकाओं के अंदर खून का दाब लगभग पहले जितना ही रहता है। नाक की रक्त वाहिकाएँ बहुत महीन होती हैं और सतह के पास रहती हैं, इसलिए जब उनके अंदर का दाब बाहर के दाब से अधिक हो जाता है, तो उनमें से कुछ फट जाती हैं और नाक से खून आने लगता है। पहाड़ों की ठंडी और सूखी हवा से नाक की भीतरी परत भी आसानी से फटती है। वायु दाब कम होने से ही पहाड़ों पर पानी 100 °C से कम पर उबलता है और खाना देर से पकता है। B गलत है क्योंकि वाहिकाओं के अंदर का दाब बाहर से कम नहीं, अधिक हो जाता है। C गलत है क्योंकि दाब बराबर होने पर वाहिकाओं को फाड़ने वाला कोई धक्का नहीं बनता। D गलत है क्योंकि ऊँचाई पर खून इतना गाढ़ा नहीं होता कि नाक से खून बहे। परीक्षा टिप: अधिक ऊँचाई – कम वायु दाब – रक्त वाहिकाओं का दाब अपेक्षाकृत अधिक – नाक से खून।

Q13.सामान्य विज्ञानपूछा गया: हरियाणा · HSSC CET Group D, 21 Oct 2023, Shift 1आसान

यदि किसी व्यक्ति का वृक्क काम करना बंद कर दे, तो उसके रक्त को कृत्रिम वृक्क द्वारा फिल्टर किया जाता है, अन्यथा वह जीवित नहीं रह सकता। यह प्रक्रिया कहलाती है:

  1. A.उत्सर्जन
  2. B.डायलिसिस
  3. C.प्रस्वेदन
  4. D.निष्कासन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. डायलिसिस

व्याख्या

सही उत्तर है B, डायलिसिस। हीमोडायलिसिस में कृत्रिम वृक्क नाम की मशीन से उस मरीज़ का खून साफ़ किया जाता है, जिसके गुर्दे काम करना बंद कर चुके हों। मरीज़ के खून में हेपेरिन जैसा थक्का-रोधी मिलाकर उसे अर्धपारगम्य परत वाली पतली नलियों से गुज़ारा जाता है, जो डायलिसिस द्रव में डूबी रहती हैं। यूरिया जैसे अपशिष्ट पदार्थ इस परत से होकर द्रव में चले जाते हैं, और साफ़ खून शिरा के ज़रिए वापस शरीर में भेज दिया जाता है। गुर्दे पूरी तरह खराब होने पर मरीज़ को यह उपचार नियमित रूप से, अक्सर हफ़्ते में दो-तीन बार, लेना पड़ता है, जब तक गुर्दा प्रत्यारोपण न हो। डच डॉक्टर विलेम कोल्फ़ ने 1943 में पहला कारगर कृत्रिम वृक्क बनाया था। विकल्प A गलत है, क्योंकि उत्सर्जन शरीर द्वारा अपशिष्ट निकालने की प्राकृतिक क्रिया है, जिसे स्वस्थ गुर्दे करते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि प्रस्वेदन का अर्थ त्वचा से पसीना निकलना है। विकल्प D गलत है, क्योंकि निष्कासन का अर्थ केवल बाहर निकालना है; यह इस उपचार का नाम नहीं है। परीक्षा टिप: गुर्दे की कार्यात्मक इकाई नेफ़्रॉन है, और कृत्रिम वृक्क की प्रक्रिया हीमोडायलिसिस है, जिससे मुख्य रूप से यूरिया निकाला जाता है।

Q14.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · Prelims GS Paper I, 10 Oct 2021कठिन

प्रेशर कुकर में जिस तापमान पर भोजन पकता है, वह मुख्य रूप से निम्नलिखित में से किस पर निर्भर करता है?

1. ढक्कन के छेद का क्षेत्रफल

2. लौ का तापमान

3. ढक्कन का भार

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल 1 और 3। पकाने का तापमान कुकर के अंदर के दाब से तय होता है, और यह दाब वेंट पर रखे भार और उसके नीचे के छेद के क्षेत्रफल से तय होता है। दाब बढ़ने पर पानी का क्वथनांक बढ़ता है। खुले बर्तन में पानी 100°C पर उबलता है, लेकिन जब भाप बंद रहती है, तो दाब तब तक बढ़ता है जब तक वह भार, यानी सीटी, को वेंट से उठा न दे। दाब बल को क्षेत्रफल से भाग देने पर मिलता है, इसलिए भारी वजन या छोटा छेद हो तो भाप निकलने से पहले दाब अधिक होता है, और पानी लगभग 120°C पर उबलता है, इसी से खाना जल्दी पकता है। कथन 2 गलत है, क्योंकि तेज लौ केवल पानी को जल्दी उबालती और सीटी जल्दी बजाती है; भाप निकलने के बाद तापमान उस दाब के क्वथनांक पर ही रहता है, और अतिरिक्त ऊष्मा बस अधिक भाप बनाती है। कथन 1 और 3 ऊपर बताए कारण से सही हैं। इसलिए कथन 2 वाले विकल्प A, B और D गलत हैं। परीक्षा टिप: अधिक दाब तो अधिक क्वथनांक; लौ गति बदलती है, तापमान नहीं।

Q15.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC MTS · 21 Jul 2022, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से कौन-सा रोग विटामिन A की कमी से होता है?

  1. A.रतौंधी
  2. B.स्कर्वी
  3. C.मरास्मस
  4. D.क्वाशियोरकर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. रतौंधी

व्याख्या

सही उत्तर है A, रतौंधी। विटामिन A, जिसे रासायनिक रूप से रेटिनॉल कहते हैं, रेटिना की शलाका कोशिकाओं में रोडोप्सिन नामक प्रकाश-संवेदी वर्णक बनाने के लिए जरूरी है, जिससे हम कम रोशनी में देख पाते हैं। इसकी कमी में आंख अंधेरे के अनुसार ढल नहीं पाती और व्यक्ति रात में या कम रोशनी में ठीक से नहीं देख पाता; इसी को रतौंधी (नाइट ब्लाइंडनेस) कहते हैं। कमी बनी रहे तो आंख सूखने लगती है और कॉर्निया को नुकसान होता है, इसे जीरोफ्थैल्मिया कहते हैं, जिससे पूरा अंधापन हो सकता है। विटामिन A वसा में घुलनशील है और गाजर, पपीता, आम, हरी पत्तेदार सब्जियों, दूध, अंडे और मछली के तेल से मिलता है। B गलत है क्योंकि स्कर्वी, जिसमें मसूड़ों से खून आता है, विटामिन C की कमी से होती है। C गलत है क्योंकि मरास्मस छोटे बच्चों में कैलोरी और प्रोटीन दोनों की भारी कमी से होता है। D गलत है क्योंकि क्वाशियोरकर प्रोटीन की कमी का रोग है जिसमें पेट फूल जाता है। परीक्षा टिप: विटामिन A रतौंधी, C स्कर्वी, D रिकेट्स, K रक्तस्राव; मरास्मस और क्वाशियोरकर प्रोटीन-ऊर्जा की समस्याएं हैं, विटामिन रोग नहीं।

Q16.सामान्य विज्ञानपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Pre GS, 18 Feb 2018आसान

मनुष्य की श्रव्यता की सीमा क्या है?

  1. A.20 हर्ट्ज – 20000 हर्ट्ज
  2. B.80 हर्ट्ज – 100 हर्ट्ज
  3. C.2 लाख हर्ट्ज – 4 लाख हर्ट्ज
  4. D.0 हर्ट्ज – 20 हर्ट्ज
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 20 हर्ट्ज – 20000 हर्ट्ज

व्याख्या

सही उत्तर है A, 20 हर्ट्ज – 20000 हर्ट्ज। स्वस्थ मानव कान लगभग 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज (20 किलोहर्ट्ज) आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगें सुन सकता है; इसे श्रव्य परास कहते हैं। 20 हर्ट्ज से कम आवृत्ति की ध्वनि अवश्रव्य (इन्फ्रासोनिक) कहलाती है, जिसका उपयोग हाथी और व्हेल दूर तक संदेश भेजने में करते हैं। 20 किलोहर्ट्ज से अधिक की ध्वनि पराश्रव्य (अल्ट्रासोनिक) कहलाती है; चमगादड़, कुत्ते और डॉल्फ़िन इसे सुन सकते हैं, और अल्ट्रासाउंड का उपयोग मेडिकल जाँच, नाज़ुक पुर्ज़ों की सफ़ाई और सोनार में होता है। पाँच साल से छोटे बच्चे और कुछ जानवर लगभग 25 किलोहर्ट्ज तक सुन लेते हैं, और उम्र बढ़ने के साथ ऊपरी सीमा घटती जाती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि 80 से 100 हर्ट्ज श्रव्य परास का बहुत छोटा हिस्सा भर है। विकल्प C गलत है, क्योंकि 2 लाख से 4 लाख हर्ट्ज, यानी 200 से 400 किलोहर्ट्ज, पूरी तरह पराश्रव्य क्षेत्र में है। विकल्प D गलत है, क्योंकि 0 से 20 हर्ट्ज अवश्रव्य क्षेत्र है, जिसे मनुष्य नहीं सुन सकता। परीक्षा टिप: 20 हर्ट्ज से नीचे अवश्रव्य, 20 हर्ट्ज से 20 किलोहर्ट्ज तक श्रव्य, 20 किलोहर्ट्ज से ऊपर पराश्रव्य।

Q17.सामान्य विज्ञानपूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025आसान

निम्नलिखित में से किसमें परिवर्तन के कारण मोतियाबिन्द में आँखों का प्राकृतिक लेंस धुँधला हो जाता है?

  1. A.प्रोटीन
  2. B.कार्बोहाइड्रेट
  3. C.वसा
  4. D.अश्रु ग्रन्थि
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. प्रोटीन

व्याख्या

सही उत्तर है A, प्रोटीन। आँख का लेंस मुख्य रूप से पानी और क्रिस्टलिन नाम के विशेष प्रोटीनों से बना होता है, जो इतने व्यवस्थित क्रम में जमे रहते हैं कि लेंस पारदर्शी रहता है और प्रकाश सीधे रेटिना तक पहुँचता है। उम्र बढ़ने के साथ, और मधुमेह, पराबैंगनी प्रकाश, धूम्रपान या चोट से और जल्दी, ये प्रोटीन टूटकर आपस में गुच्छे बना लेते हैं। ये गुच्छे प्रकाश को बिखेर देते हैं, जिससे लेंस धुँधला हो जाता है और दिखना धुँधला, मंद और चौंधयुक्त हो जाता है। लेंस का यही धुँधलापन मोतियाबिन्द है, और यह भारत में अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक है। इसका इलाज एक छोटे ऑपरेशन से होता है, जिसमें धुँधला लेंस हटाकर कृत्रिम इंट्राऑक्युलर लेंस लगाया जाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि लेंस कार्बोहाइड्रेट में बदलाव से धुँधला नहीं होता, हालाँकि मधुमेह में रक्त शर्करा अधिक होने से प्रोटीन की क्षति तेज़ होती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि वसा लेंस की पारदर्शी संरचना नहीं बनाती। विकल्प D गलत है, क्योंकि अश्रु ग्रन्थि आँख को नम रखती है और उसका लेंस से कोई संबंध नहीं है। परीक्षा टिप: मोतियाबिन्द = प्रोटीन के गुच्छों से धुँधला लेंस; ग्लूकोमा = आँख के भीतर बढ़ा दबाव।

Q18.सामान्य विज्ञानपूछा गया: बिहार · BPSC 68th CCE Pre, 12 Feb 2023आसान

रंध्र (स्टोमेटा) किसमें परिवर्तन के कारण खुलते या बंद होते हैं?

  1. A.कोशिकाओं में केंद्रक की स्थिति
  2. B.कोशिकाओं की प्रोटीन संरचना
  3. C.कोशिकाओं में जल की मात्रा
  4. D.उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. कोशिकाओं में जल की मात्रा

व्याख्या

सही उत्तर है C, कोशिकाओं में जल की मात्रा। हर रंध्र के चारों ओर दो द्वार कोशिकाएँ होती हैं, और इन कोशिकाओं में पानी आने-जाने से ही छिद्र खुलता या बंद होता है। जब द्वार कोशिकाओं में पानी भरता है, तो वे फूलकर स्फीत हो जाती हैं; उनकी भीतरी दीवार बाहरी दीवार से मोटी होती है, इसलिए वे बाहर की ओर मुड़ती हैं और बीच का छिद्र खुल जाता है। पानी निकलने पर वे ढीली (श्लथ) होकर सीधी हो जाती हैं और छिद्र बंद हो जाता है। द्वार कोशिकाओं में पोटैशियम आयनों का आना-जाना इस पानी के बहाव को चलाता है। रंध्र पत्तियों पर, ज़्यादातर निचली सतह पर, बने छोटे छिद्र हैं, जिनसे पौधे कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं, ऑक्सीजन छोड़ते हैं और वाष्पोत्सर्जन में जलवाष्प खोते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि केंद्रक की स्थिति छिद्र को नियंत्रित नहीं करती। विकल्प B गलत है, क्योंकि रंध्र खोलने या बंद करने के लिए कोशिकाओं की प्रोटीन संरचना नहीं बदलती। विकल्प D गलत है, क्योंकि यहाँ कारण केवल एक है, पानी की मात्रा। परीक्षा टिप: स्फीत द्वार कोशिका रंध्र खोलती है, श्लथ द्वार कोशिका उसे बंद करती है।

Q19.सामान्य विज्ञानपूछा गया: दिल्ली · DSSSB Asst. Supdt., 20 Jul 2024, S1आसान

मानव DNA की द्विकुंडलित संरचना में क्षार एडेनिन निम्नलिखित में से किस क्षार के साथ दो हाइड्रोजन बंध बनाकर क्षार-युग्म बनाता है?

  1. A.ग्वानिन
  2. B.साइटोसिन
  3. C.थाइमिन
  4. D.हिस्टोन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. थाइमिन

व्याख्या

सही उत्तर है C, थाइमिन। DNA में एडेनिन हमेशा थाइमिन के साथ दो हाइड्रोजन बंधों से जुड़ता है, और ग्वानिन साइटोसिन के साथ तीन बंधों से। इसे पूरक क्षार-युग्मन कहते हैं, और इसी कारण DNA का एक सूत्र दूसरे की नकल बनाने में काम आता है। द्विकुंडली मॉडल 1953 में जेम्स वॉटसन और फ्रांसिस क्रिक ने रोज़ालिंड फ्रैंकलिन की एक्स-रे तस्वीरों की मदद से दिया था। एडेनिन और ग्वानिन दो वलय वाले प्यूरीन हैं, जबकि थाइमिन और साइटोसिन एक वलय वाले पिरिमिडीन हैं, इसलिए हर जोड़े की चौड़ाई बराबर रहती है और कुंडली एक-सी बनी रहती है। RNA में थाइमिन की जगह यूरेसिल होता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि ग्वानिन भी एडेनिन की तरह प्यूरीन है और साइटोसिन से जोड़ा बनाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि साइटोसिन तीन हाइड्रोजन बंधों से ग्वानिन के साथ जुड़ता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि हिस्टोन एक प्रोटीन है, जिसके चारों ओर गुणसूत्रों में DNA लिपटा रहता है; यह क्षार है ही नहीं। परीक्षा टिप: A की जोड़ी T से दो बंधों से, G की C से तीन बंधों से; RNA में T की जगह U होता है।

Q20.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB NTPC · 7 Jan 2021, Shift 2 (CBT 1)मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा उपकरण भट्टियों जैसे अपेक्षाकृत उच्च तापमान को मापने के लिए प्रयोग होता है?

  1. A.बोलोमीटर
  2. B.पायरोमीटर
  3. C.अमीटर
  4. D.फ्लक्समीटर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पायरोमीटर

व्याख्या

सही उत्तर है B, पायरोमीटर। पायरोमीटर बहुत ऊँचे तापमान, जैसे भट्टियों, भट्ठों और पिघली धातु का तापमान, गर्म वस्तु को छुए बिना मापता है। इसका सिद्धांत यह है कि हर गर्म वस्तु ऊष्मीय विकिरण छोड़ती है जिसकी तीव्रता और रंग उसके तापमान पर निर्भर करते हैं; उपकरण इसी विकिरण को पढ़कर तापमान बताता है। साधारण पारे वाले थर्मामीटर लगभग 350 डिग्री सेल्सियस तक ही काम करते हैं, इसलिए इस्पात संयंत्र, काँच कारखाने और सीमेंट भट्ठे पायरोमीटर पर निर्भर रहते हैं, जो 1,000 डिग्री सेल्सियस से बहुत ऊपर तक पढ़ सकता है। यह शब्द ग्रीक 'पायरो' यानी आग से बना है। A गलत है क्योंकि बोलोमीटर आने वाले विद्युत-चुंबकीय विकिरण, जैसे अवरक्त या माइक्रोवेव, की शक्ति मापता है, भट्टी का तापमान नहीं। C गलत है क्योंकि अमीटर विद्युत धारा को एम्पियर में मापता है। D गलत है क्योंकि फ्लक्समीटर चुंबकीय फ्लक्स मापता है। परीक्षा टिप: भट्टी की गर्मी के लिए पायरोमीटर, शरीर की गर्मी के लिए थर्मामीटर, धारा के लिए अमीटर, चुंबकत्व के लिए फ्लक्समीटर।

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