सोल्डर (टांका) किसकी मिश्रधातु है?
- A.Cu और Sn
- B.Fe और Zn
- C.Pb और Sn
- D.Ag और Zn
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, Pb और Sn। पारंपरिक सोल्डर सीसे और टिन की मिश्रधातु है, जिसमें प्रायः लगभग 60 भाग टिन और 40 भाग सीसा होता है।
सोल्डर का उपयोग धातु के हिस्सों, खासकर विद्युत परिपथों के तारों और पुर्जों, को जोड़ने में होता है। इसका मुख्य गुण कम गलनांक है, जो शुद्ध सीसे (327 °C) और शुद्ध टिन (232 °C) दोनों से कम होता है; लगभग 63 प्रतिशत टिन और 37 प्रतिशत सीसे वाला मिश्रण केवल लगभग 183 °C पर पिघलता है। इससे यह सोल्डरिंग आयरन से आसानी से पिघल जाता है, जुड़ने वाले हिस्सों को नुकसान नहीं होता, और ठंडा होकर मजबूत, चालक जोड़ बनाता है। सीसा विषैला होने के कारण अब कई देश मुख्यतः टिन, थोड़ी चांदी और तांबे वाले सीसा-मुक्त सोल्डर इस्तेमाल करते हैं।
A गलत है: तांबा और टिन मिलकर कांसा बनाते हैं।
B गलत है: जस्ते की परत चढ़ा लोहा जस्तीकृत लोहा है; यह परत है, सोल्डर नहीं।
D गलत है: चांदी और जस्ता सोल्डर नहीं बनाते; पीतल तांबे और जस्ते से बनता है।
परीक्षा टिप: सोल्डर, सीसा और टिन; कांसा, तांबा और टिन; पीतल, तांबा और जस्ता।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा कोशिकीय प्रक्रियाओं के लिए 'ऊर्जा मुद्रा' है?
- A.ग्लूकोज़
- B.ATP
- C.ADP
- D.पाइरुविक अम्ल
उत्तर देखें
एडिनोसिन ट्राइफ़ॉस्फ़ेट अपने फ़ॉस्फ़ेट आबंधों में ऊर्जा संचित रखता है और कोशिका को जहाँ ज़रूरत हो वहाँ उसे मुक्त करता है, इसलिए इसे कोशिका की ऊर्जा मुद्रा कहते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तनु HCl के साथ अभिक्रिया करने वाली धातुओं का सही अभिक्रियाशीलता क्रम निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- A.Mg > Al > Zn > Fe
- B.Mg < Al < Zn < Fe
- C.Mg > Zn > Fe > Al
- D.Fe > Mg > Al > Zn
उत्तर देखें
सक्रियता श्रेणी में ये धातुएँ इसी क्रम में हैं, और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से हाइड्रोजन निकालने की इनकी तीव्रता भी इसी क्रम में है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लौह (आयरन) की कमी से क्या होता है?
- A.एनीमिया (रक्ताल्पता)
- B.स्कर्वी
- C.रिकेट्स
- D.हैज़ा
उत्तर देखें
हीमोग्लोबिन बनाने के लिए लौह ज़रूरी है, इसलिए लौह की कमी से हीमोग्लोबिन कम बनता है और रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता घट जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तरंगों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. यदि माध्यम के कण तरंग की गति की दिशा में गति करते हैं, तो तरंग अनुदैर्ध्य तरंग कहलाती है। 2. यदि माध्यम के कण तरंग की गति की दिशा के लंबवत गति करते हैं, तो तरंग अनुप्रस्थ तरंग कहलाती है। 3. अनुप्रस्थ तरंगों में माध्यम के आकार में परिवर्तन हो सकता है, जबकि अनुदैर्ध्य तरंगों में माध्यम के घनत्व में परिवर्तन होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 1
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
तीनों कथन दोनों प्रकार की यांत्रिक तरंगों में कणों की गति का सही वर्णन करते हैं। अनुदैर्ध्य तरंग में, जैसे हवा में ध्वनि, कण उसी दिशा में आगे-पीछे कंपन करते हैं जिसमें तरंग चलती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कागज़ निर्माण में कच्चे माल का गोंद-निष्कासन (डीगमिंग) किसके द्वारा किया जाता है?
- A.सल्फ़्यूरिक अम्ल
- B.विरंजक चूर्ण
- C.कास्टिक सोडा
- D.नाइट्रिक अम्ल
उत्तर देखें
कागज़ बनाने में कच्चे वनस्पति पदार्थ को कास्टिक सोडा के साथ पकाया जाता है, जो सेल्यूलोज़ रेशों को आपस में बाँधने वाले गोंद, रेज़िन और लिग्निन को घोल देता है।
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