रेड डाटा बुक में किसका रिकॉर्ड होता है?
- A.विलुप्त प्रजातियाँ
- B.लुप्तप्राय प्रजातियाँ
- C.सामान्य प्रजातियाँ
- D.आक्रामक प्रजातियाँ
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, लुप्तप्राय प्रजातियाँ। रेड डाटा बुक वह स्रोत पुस्तक है, जिसमें लुप्तप्राय जीव-जंतुओं, पौधों और कवकों का रिकॉर्ड रखा जाता है, ताकि सरकारें और संरक्षणकर्ता जान सकें कि किन जीवित प्रजातियों पर खत्म होने का सबसे अधिक खतरा है। यह अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट से जुड़ी है; IUCN की स्थापना 1948 में हुई थी और इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के ग्लैंड में है। खतरे वाली प्रजातियों को गंभीर रूप से संकटग्रस्त, संकटग्रस्त और सुभेद्य जैसी श्रेणियों में रखा जाता है, जिन्हें मिलाकर संकटापन्न प्रजातियाँ कहते हैं। भारत समेत कई देश अपनी स्थानीय प्रजातियों के लिए अपनी रेड डाटा बुक भी बनाते हैं, और भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण भारतीय पौधों के लिए इसे तैयार करता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि यह पुस्तक जीवित प्रजातियों को बचाने के लिए है; विलुप्त प्रजातियाँ बचाई नहीं जा सकतीं और वे इसका मुख्य रिकॉर्ड नहीं हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि सामान्य प्रजातियों पर कोई खतरा नहीं होता। विकल्प D गलत है, क्योंकि जलकुंभी जैसी आक्रामक प्रजातियाँ बाहर से आकर नुकसान करती हैं और उनकी अलग सूचियाँ बनती हैं। परीक्षा टिप: रेड डाटा बुक यानी लुप्तप्राय प्रजातियाँ; IUCN का मुख्यालय ग्लैंड, स्विट्ज़रलैंड, स्थापना 1948।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक में शामिल नहीं है?
- A.सल्फर
- B.नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
- C.सीसा (लेड)
- D.मीथेन
उत्तर देखें
भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक की गणना में मीथेन शामिल नहीं है। राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 2014 में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शुरू किया गया था और इसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चलाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रीय हरित अधिकरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.इसकी स्थापना वर्ष 2010 में हुई थी।
- B.यह पर्यावरण संरक्षण और वनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटारे में लगा है।
- C.यह व्यक्तियों और संपत्ति को हुई क्षति के लिए राहत और मुआवजा देने पर विचार कर सकता है।
- D.यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में निर्धारित प्रक्रियाओं से बँधा है।
उत्तर देखें
राष्ट्रीय हरित अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता से बँधा नहीं है; यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होता है। NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत हुई, जो अनुच्छेद 21 के स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार से जुड़ा है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत की 2017-2031 की राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना (NWAP) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह तीसरी राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना है।
2. यह NWAP अनूठी है क्योंकि पहली बार भारत ने वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से जुड़ी चिंताओं को मान्यता दी है।
3. इस NWAP के दस घटक हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 1 और 2
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
2017-2031 की योजना भारत की तीसरी राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना है और वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को संबोधित करने वाली पहली योजना है, पर इसके दस नहीं, पाँच घटक हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सी विधि शहरी वर्षा जल संचयन के लिए उपयुक्त नहीं है?
- A.छत पुनर्भरण गड्ढा (रूफटॉप रिचार्ज पिट)
- B.पुनर्भरण कुएँ
- C.गली प्लग
- D.पुनर्भरण खाई (रिचार्ज ट्रेंच)
उत्तर देखें
गली प्लग पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में किसी प्राकृतिक नाले या धारा के आर-पार बनाया जाने वाला छोटा अवरोध है, इसलिए शहर में इसका उपयोग नहीं होता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिए प्रसिद्ध कार्टाजेना शहर कहाँ स्थित है?
- A.कोलंबिया
- B.वेनेज़ुएला
- C.ब्राज़ील
- D.गुयाना
उत्तर देखें
कार्टाजेना कोलंबिया के कैरिबियाई तट पर स्थित बंदरगाह शहर है, जहाँ 1999 में जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल पर वार्ता हुई थी। कार्टाजेना जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल 1992 के जैव विविधता अभिसमय का एक पूरक समझौता है।
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