राजस्थान में गैर-परंपरागत स्रोतों से ऊर्जा उत्पादन के लिए भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की राज्य नोडल एजेंसी कौन है?
- A.राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड
- B.राजस्थान राज्य विद्युत मंडल
- C.राजस्थान अक्षय ऊर्जा फाउंडेशन
- D.जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड
सही उत्तर
A. राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड
व्याख्या
सही उत्तर है A, राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड। जयपुर में कार्यालय वाला यह निगम राजस्थान में गैर-परंपरागत स्रोतों से बिजली विकसित करने के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की राज्य नोडल एजेंसी है। यह सौर, पवन, बायोमास और लघु जल परियोजनाओं को बढ़ावा देता है तथा राज्य के सोलर पार्क विकसित करता है। थार क्षेत्र में मिलने वाली तेज और लगातार धूप तथा जैसलमेर के आसपास का पवन क्षेत्र राजस्थान को देश के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में रखते हैं। विकल्प B, राजस्थान राज्य विद्युत मंडल, पुराना एकीकृत निगम था, जिसे सन 2000 में उत्पादन, प्रसारण और वितरण की अलग कंपनियों में बांट दिया गया, इसलिए वह नोडल एजेंसी नहीं है। विकल्प C ऐसी कोई संस्था नहीं है। विकल्प D, जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, राज्य की तीन डिस्कॉम में से एक है और अपने क्षेत्र में केवल बिजली वितरित करता है। परीक्षा टिप: हर राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए मंत्रालय की एक नोडल एजेंसी होती है — राजस्थान में यही निगम।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंअष्टमुडी आर्द्रभूमि कहाँ स्थित है?
- A.केरल
- B.कर्नाटक
- C.तमिलनाडु
- D.असम
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केरल
व्याख्या
सही उत्तर है A, केरल। अष्टमुडी केरल के कोल्लम ज़िले में स्थित एक पश्चजल झील है और वेम्बनाड के बाद राज्य की दूसरी सबसे बड़ी ज्वारनदमुख प्रणाली है। इसके नाम का अर्थ है आठ शाखाएँ, क्योंकि यह झील कई भुजाओं में फैलकर नींदकरा के पास अरब सागर से मिलती है। अपने मैंग्रोव, प्रवासी पक्षियों और छोटी गर्दन वाली सीपी की मत्स्यिकी के कारण इसे 2002 में रामसर स्थल घोषित किया गया; यही मत्स्यिकी भारत की पहली ऐसी मत्स्यिकी बनी जिसे मरीन स्टीवर्डशिप काउंसिल प्रमाणन मिला। इसी झील से अलपुझा जाने वाला हाउसबोट मार्ग भी गुज़रता है। B गलत है क्योंकि कर्नाटक की प्रसिद्ध आर्द्रभूमियाँ रंगनतिट्टू और मागडी हैं। C गलत है क्योंकि तमिलनाडु में पॉइंट कैलिमेर और पल्लिकरनै हैं। D गलत है क्योंकि असम में गुवाहाटी के पास दीपोर बील है। परीक्षा टिप: केरल के रामसर स्थल अष्टमुडी, वेम्बनाड-कोल और शास्तमकोट्टा।
वायु में सल्फर डाइऑक्साइड प्रदूषण के जैव सूचक के रूप में निम्नलिखित में से किन जीवों का प्रयोग होता है?
- A.लाइकेन
- B.केंचुए
- C.मधुमक्खियाँ
- D.जलकुंभी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लाइकेन
व्याख्या
सही उत्तर A, लाइकेन है। लाइकेन शैवाल और कवक का सहजीवन है और वह अपना जल तथा पोषक तत्व सीधे वायु से लेता है, क्योंकि उसमें न रक्षक उपचर्म होती है और न जड़ें। इसलिए वह नमी के साथ घुली सल्फर डाइऑक्साइड भी सोख लेता है और ऐसी सांद्रता पर भी मर जाता है जो अधिकांश पौधों को हानि पहुँचाने के लिए बहुत कम हो, और इसी कारण किसी नगर में पेड़ों के तनों से लाइकेन का लुप्त होना सल्फर डाइऑक्साइड प्रदूषण का संकेत माना जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि केंचुए मिट्टी के स्वास्थ्य और नमी के सूचक हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि मधुमक्खियों को कीटनाशकों के प्रयोग तथा पुष्पी पौधों की स्थिति के सूचक के रूप में देखा जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि जलकुंभी, जिसे बंगाल का आतंक कहा जाता है, पोषक तत्वों से भरे प्रदूषित जल की सूचक है, प्रदूषित वायु की नहीं।
उत्प्रेरक परिवर्तक लगे वाहन में सीसारहित पेट्रोल का प्रयोग आवश्यक है, क्योंकि सीसा:
- A.निकास गैसों का तापमान बढ़ा देता है
- B.परिवर्तक में लगे उत्प्रेरक को निष्क्रिय कर देता है
- C.कार्बन मोनोऑक्साइड से क्रिया करके ठोस बनाता है
- D.ईंधन की ऑक्टेन संख्या घटा देता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. परिवर्तक में लगे उत्प्रेरक को निष्क्रिय कर देता है
व्याख्या
सही उत्तर B, परिवर्तक में लगे उत्प्रेरक को निष्क्रिय कर देता है है। उत्प्रेरक परिवर्तक में मधुकोश जैसे आधार पर प्लैटिनम, पैलेडियम और रोडियम लगे होते हैं, जो कार्बन मोनोऑक्साइड तथा बिना जले हाइड्रोकार्बन को कार्बन डाइऑक्साइड और जल में ऑक्सीकृत करते हैं और नाइट्रोजन के ऑक्साइड को नाइट्रोजन में अपचयित करते हैं। सीसायुक्त पेट्रोल से आने वाले सीसा यौगिक इन धातुओं की सतह पर परत बना देते हैं और उनकी उत्प्रेरक क्रिया नष्ट कर देते हैं, जिसे उत्प्रेरक विषन कहा जाता है, और उसके बाद परिवर्तक निकास गैस साफ नहीं करता। विकल्प A गलत है क्योंकि समस्या रासायनिक विषन की है, तापमान बढ़ने की नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि निकास में सीसा कार्बन मोनोऑक्साइड से कोई ठोस नहीं बनाता। विकल्प D गलत है क्योंकि टेट्राएथिल लेड पेट्रोल में उसकी ऑक्टेन संख्या बढ़ाने के लिए ही मिलाया जाता था, घटाने के लिए नहीं।
ताप विद्युत गृह में लगाया गया स्थिर वैद्युत अवक्षेपक निर्गम गैस से कौन सा प्रदूषक हटाता है?
- A.सल्फर डाइऑक्साइड
- B.नाइट्रोजन के ऑक्साइड
- C.कणिकीय पदार्थ
- D.कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कणिकीय पदार्थ
व्याख्या
सही उत्तर C, कणिकीय पदार्थ है। स्थिर वैद्युत अवक्षेपक निर्गम गैस में मौजूद धूल तथा राख के कणों को इलेक्ट्रोड के पास से निकलते समय विद्युत आवेश देता है और फिर उन्हें विपरीत आवेश वाली प्लेटों पर इकट्ठा कर लेता है; प्लेटों को हिलाया जाता है जिससे जमा राख नीचे कुंड में गिर जाए। कोयले से चलने वाले विद्युत गृह की चिमनी गैसों को साफ करने का यह मानक उपकरण है और यह कणों का बड़ा भाग हटा देता है। विकल्प A और B गलत हैं क्योंकि गैसों को इस प्रकार आवेशित करके एकत्र नहीं किया जाता; सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड स्क्रबर से हटाए जाते हैं, जिसमें गैस को जल या चूने के घोल से धोया जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि सामान्य व्यवहार में कार्बन डाइऑक्साइड इन दोनों उपकरणों से नहीं हटाई जाती।
भारत का कौन सा कानून विशेष रूप से वायु प्रदूषण के निवारण और नियंत्रण से संबंधित है?
- A.वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981
- B.पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- C.जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974
- D.वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981
व्याख्या
सही उत्तर A, वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 है। यह अधिनियम वायु प्रदूषण पर विशिष्ट कानून है। यह केंद्रीय तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को उद्योगों और वाहनों के लिए उत्सर्जन मानक तय करने, वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्र घोषित करने और किसी प्रदूषणकारी संयंत्र की स्थापना या संचालन से पहले सहमति लेने की अपेक्षा करने की शक्ति देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि भोपाल गैस त्रासदी के बाद पारित पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 छत्र कानून है, जो केवल वायु नहीं, पर्यावरण के सभी माध्यमों को समेटता है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1974 का जल अधिनियम जल प्रदूषण से संबंधित है, हालाँकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पहले उसी अधिनियम के अंतर्गत बना। विकल्प D गलत है क्योंकि 1972 का वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम प्रजातियों तथा आवासों की रक्षा करता है।