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GK24
भारतीय राजव्यवस्थामध्यमपूछा गया: SSC CHSL · 13 मार्च 2023, शिफ्ट 4

निम्नलिखित में से किस संविधान संशोधन अधिनियम ने भारतीय संविधान में शिक्षा का अधिकार जोड़ा?

  1. A.85वां
  2. B.88वां
  3. C.87वां
  4. D.86वां

सही उत्तर

D. 86वां

व्याख्या

सही उत्तर 86वां है। 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 ने अनुच्छेद 21A जोड़कर शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया, जिसके तहत राज्य छह से चौदह वर्ष के सभी बच्चों को, कानून द्वारा तय तरीके से, निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देगा। वह कानून निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 है, जो 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ।

इसी संशोधन ने दो और बदलाव किए, और दोनों परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। इसने नीति निदेशक तत्व अनुच्छेद 45 को बदला, जो अब राज्य से छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों की प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा की व्यवस्था करने को कहता है। और इसने एक मौलिक कर्तव्य, अनुच्छेद 51A(ट), जोड़ा, जिसके तहत माता-पिता या संरक्षक छह से चौदह वर्ष के अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर देंगे। इस तरह एक संशोधन ने संविधान के तीन भागों को छुआ: मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व और मौलिक कर्तव्य। 85वां, 87वां और 88वां पास की संख्याएं हैं जो भ्रम के लिए रखी गई हैं; उदाहरण के लिए 85वां संशोधन अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए पदोन्नति में परिणामी वरिष्ठता से जुड़ा था।

पूरा लेख पढ़ें: मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12–35): नोट्स, रिट और PYQ

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अभ्यास प्रश्न

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Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CPO · 5 अक्टूबर 2023, शिफ्ट 2आसान

भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार निम्नलिखित में से किस देश के ‘अधिकार पत्र’ (बिल ऑफ राइट्स) से प्रेरित हैं?

  1. A.ऑस्ट्रेलिया
  2. B.जापान
  3. C.सोवियत संघ
  4. D.संयुक्त राज्य अमेरिका
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. संयुक्त राज्य अमेरिका

व्याख्या

सही उत्तर संयुक्त राज्य अमेरिका है। अमेरिका के संविधान में 1791 में जोड़े गए पहले दस संशोधनों को अधिकार पत्र (बिल ऑफ राइट्स) कहा जाता है, जो वाक् और धर्म जैसी स्वतंत्रताओं को सरकार से सुरक्षित रखते हैं। भारत के संविधान निर्माताओं ने इससे ऐसे अधिकारों की लिखित सूची का विचार लिया जिनका राज्य उल्लंघन न कर सके और जिन्हें न्यायालय लागू कराएं। हमारे संविधान का भाग III, अनुच्छेद 12 से 35, इसी का परिणाम है, और इसे अक्सर भारत का मैग्नाकार्टा कहा जाता है।

बाकी देशों से भारत ने दूसरे प्रावधान लिए। ऑस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची, व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता, और संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक ली गई। जापान से अनुच्छेद 21 में प्रयुक्त वाक्यांश "विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया" लिया गया। पूर्व सोवियत संघ से मौलिक कर्तव्य और प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय का आदर्श लिया गया। इसलिए भाग III में भी दो स्रोत याद रखें: पूरा अध्याय अमेरिका से प्रेरित, और अनुच्छेद 21 की शब्दावली जापान से।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 16 नवंबर 2021, शिफ्ट 2मध्यम

भारतीय संविधान के 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 के बाद निम्नलिखित में से कौन-सा मौलिक अधिकार नहीं है?

  1. A.संपत्ति का अधिकार
  2. B.समता का अधिकार
  3. C.शोषण के विरुद्ध अधिकार
  4. D.धर्म का अधिकार
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. संपत्ति का अधिकार

व्याख्या

सही उत्तर संपत्ति का अधिकार है। संविधान लागू होने के समय संपत्ति दो जगह मौलिक अधिकार के रूप में सुरक्षित थी: अनुच्छेद 19(1)(च), यानी संपत्ति अर्जित करने, रखने और बेचने की स्वतंत्रता, और अनुच्छेद 31, यानी संपत्ति से वंचित किए जाने के विरुद्ध संरक्षण। 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 ने दोनों को हटा दिया और भाग XII में अनुच्छेद 300A जोड़ा, जो कहता है कि किसी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। इसलिए संपत्ति अब भी सुरक्षित है, लेकिन मौलिक अधिकार के रूप में नहीं, केवल संवैधानिक या कानूनी अधिकार के रूप में।

व्यावहारिक अंतर यह है कि जिसकी संपत्ति ली जाए, वह अब अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सर्वोच्च न्यायालय नहीं जा सकता, क्योंकि वह केवल मौलिक अधिकारों के लिए है; वह अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय या सामान्य न्यायालय जा सकता है। बाकी तीन विकल्प, समता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18), शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 और 24) और धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 से 28), आज भी मौलिक अधिकार हैं। इसी 44वें संशोधन ने अनुच्छेद 20 और 21 को आपातकाल में भी निलंबित न किए जा सकने वाला बनाया।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 8 अगस्त 2023, शिफ्ट 4मध्यम

मौलिक अधिकार जनता को राज्य की दमनकारी कार्रवाइयों से बचाने के लिए दिए गए हैं; न्यायिक निर्णय भारतीय संविधान के ______ में परिभाषित ‘राज्य’ शब्द के दायरे को बढ़ाते रहे हैं।

  1. A.अनुच्छेद 12
  2. B.अनुच्छेद 14
  3. C.अनुच्छेद 15
  4. D.अनुच्छेद 13
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. अनुच्छेद 12

व्याख्या

सही उत्तर अनुच्छेद 12 है। अधिकांश मौलिक अधिकार राज्य के विरुद्ध दावे हैं, इसलिए जो भी "राज्य" माना जाता है, वह इनसे बंधा है। अनुच्छेद 12 भाग III के लिए राज्य की परिभाषा देता है, जिसमें भारत की सरकार और संसद, हर राज्य की सरकार और विधानमंडल, तथा भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर या भारत सरकार के नियंत्रण में सभी स्थानीय और अन्य प्राधिकारी शामिल हैं। स्थानीय प्राधिकारियों में नगरपालिकाएं और पंचायतें जैसे निकाय आते हैं।

प्रश्न में न्यायिक निर्णयों की बात "अन्य प्राधिकारी" शब्दों से जुड़ी है। न्यायालयों ने इनका अर्थ व्यापक रूप से लिया है और माना है कि जीवन बीमा निगम और तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग जैसे वैधानिक और सरकार-नियंत्रित निकाय भी इस प्रयोजन के लिए राज्य हैं। अनुच्छेद 13 सबसे आकर्षक गलत उत्तर है क्योंकि वह ठीक बगल में है: वह मौलिक अधिकारों से असंगत कानूनों को शून्य बनाता है और न्यायिक पुनरावलोकन का आधार है। अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समता देता है और अनुच्छेद 15 भेदभाव पर रोक लगाता है। इन्हें अलग रखने का आसान तरीका: अनुच्छेद 12 बताता है कि अधिकार किसके विरुद्ध लागू होते हैं, और अनुच्छेद 13 बताता है कि उनका उल्लंघन करने वाले कानून का क्या होता है।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 6 फरवरी 2023, शिफ्ट 1आसान

भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद ‘अस्पृश्यता’ की अवधारणा का अंत करता है और किसी भी रूप में इसके आचरण पर रोक लगाता है?

  1. A.16
  2. B.15
  3. C.17
  4. D.14
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 17

व्याख्या

सही उत्तर अनुच्छेद 17 है। अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है, किसी भी रूप में इसके आचरण पर रोक लगाता है, और अस्पृश्यता से उपजी किसी भी निर्योग्यता को लागू करना कानून के अनुसार दंडनीय अपराध बनाता है। इसे प्रभावी बनाने के लिए संसद ने अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955 पारित किया, जिसका नाम 1976 में बदलकर नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम किया गया, और बाद में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 बनाया। न संविधान में और न इन कानूनों में "अस्पृश्यता" शब्द की परिभाषा दी गई है; न्यायालयों ने इसे इसके ऐतिहासिक अर्थ में लिया है। इस अधिकार का कोई अपवाद नहीं है और यह राज्य के साथ-साथ निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी लागू होता है।

बाकी विकल्प समता के अधिकार वाले समूह में इसके पड़ोसी हैं, इसीलिए ये साथ आते हैं। अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समता और विधियों का समान संरक्षण देता है। अनुच्छेद 15 केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाता है। अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरी में अवसर की समता देता है। पूरा समूह क्रम से याद करें: 14 समता, 15 भेदभाव नहीं, 16 सरकारी नौकरी, 17 अस्पृश्यता, 18 उपाधियां।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 6 दिसंबर 2022, शिफ्ट 1आसान

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 कितने प्रकार की स्वतंत्रताओं का प्रावधान करता है?

  1. A.13
  2. B.44
  3. C.30
  4. D.6
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 6

व्याख्या

सही उत्तर 6 है। अनुच्छेद 19(1) हर नागरिक को छह स्वतंत्रताएं देता है: वाक् और अभिव्यक्ति; शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के सम्मेलन; संगम, संघ या सहकारी समितियां बनाना; भारत में सर्वत्र अबाध घूमना; भारत के किसी भी भाग में रहना और बस जाना; और कोई भी वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार करना। संविधान की शुरुआत में ये सात थीं। सातवीं, यानी खंड (च), संपत्ति अर्जित करने, रखने और बेचने की स्वतंत्रता, 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 से हटा दी गई।

97वें संशोधन अधिनियम, 2011 ने खंड (ग) में "सहकारी समितियां" शब्द जोड़े, लेकिन इससे एक मौजूदा स्वतंत्रता का दायरा बढ़ा, कोई नई स्वतंत्रता नहीं बनी, इसलिए संख्या अब भी छह है। ये स्वतंत्रताएं केवल नागरिकों के लिए हैं, और इनमें से कोई भी असीमित नहीं है: अनुच्छेद 19 के खंड (2) से (6) राज्य को युक्तियुक्त निर्बंधन लगाने देते हैं। गलत विकल्प इसी टॉपिक की आसपास की संख्याओं से लिए गए हैं, अनुच्छेद 13, अनुच्छेद 30 और 44वां संशोधन, इसीलिए वे जाने-पहचाने लगते हैं और भ्रम पैदा करते हैं।