निम्नलिखित में से कौन-सा वायु प्रदूषण के जैविक सूचक का प्रसिद्ध उदाहरण है?
- A.लाइकेन
- B.मेथिल मरकरी
- C.गुलाब का पौधा
- D.सूरजमुखी का पुष्प
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, लाइकेन। जैव सूचक (बायोइंडिकेटर) वह जीव है जिसकी उपस्थिति, अनुपस्थिति या सेहत से पर्यावरण की गुणवत्ता का पता चलता है। लाइकेन कवक और शैवाल (या सायनोबैक्टीरिया) की साझेदारी से बनते हैं; इनकी जड़ें नहीं होतीं और ये पानी व पोषक तत्व सीधे हवा और बारिश से लेते हैं। इसीलिए ये वायु प्रदूषण, ख़ासकर सल्फर डाइऑक्साइड, के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। प्रदूषित शहरों में पेड़ों की छाल से ये ग़ायब हो जाते हैं और साफ़ हवा वाली जगहों पर ख़ूब उगते हैं, इसलिए वैज्ञानिक लाइकेन देखकर हवा की गुणवत्ता आँकते हैं। मॉस का भी इसी तरह उपयोग होता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि मेथिल मरकरी एक ज़हरीला प्रदूषक है, जीवित सूचक नहीं; 1950 के दशक में जापान में मिनामाता रोग इसी से फैला था। विकल्प C गलत है, क्योंकि गुलाब का पौधा वायु गुणवत्ता का मानक सूचक नहीं माना जाता। विकल्प D गलत है, क्योंकि सूरजमुखी भी वायु प्रदूषण का मान्य सूचक नहीं है। परीक्षा टिप: हवा में सल्फर डाइऑक्साइड का सूचक लाइकेन; पानी में मल प्रदूषण का सूचक ई. कोलाई।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक में शामिल नहीं है?
- A.सल्फर
- B.नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
- C.सीसा (लेड)
- D.मीथेन
उत्तर देखें
भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक की गणना में मीथेन शामिल नहीं है। राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 2014 में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शुरू किया गया था और इसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चलाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रीय हरित अधिकरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.इसकी स्थापना वर्ष 2010 में हुई थी।
- B.यह पर्यावरण संरक्षण और वनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटारे में लगा है।
- C.यह व्यक्तियों और संपत्ति को हुई क्षति के लिए राहत और मुआवजा देने पर विचार कर सकता है।
- D.यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में निर्धारित प्रक्रियाओं से बँधा है।
उत्तर देखें
राष्ट्रीय हरित अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता से बँधा नहीं है; यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होता है। NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत हुई, जो अनुच्छेद 21 के स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार से जुड़ा है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत की 2017-2031 की राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना (NWAP) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह तीसरी राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना है।
2. यह NWAP अनूठी है क्योंकि पहली बार भारत ने वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से जुड़ी चिंताओं को मान्यता दी है।
3. इस NWAP के दस घटक हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 1 और 2
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
2017-2031 की योजना भारत की तीसरी राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना है और वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को संबोधित करने वाली पहली योजना है, पर इसके दस नहीं, पाँच घटक हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सी विधि शहरी वर्षा जल संचयन के लिए उपयुक्त नहीं है?
- A.छत पुनर्भरण गड्ढा (रूफटॉप रिचार्ज पिट)
- B.पुनर्भरण कुएँ
- C.गली प्लग
- D.पुनर्भरण खाई (रिचार्ज ट्रेंच)
उत्तर देखें
गली प्लग पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में किसी प्राकृतिक नाले या धारा के आर-पार बनाया जाने वाला छोटा अवरोध है, इसलिए शहर में इसका उपयोग नहीं होता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिए प्रसिद्ध कार्टाजेना शहर कहाँ स्थित है?
- A.कोलंबिया
- B.वेनेज़ुएला
- C.ब्राज़ील
- D.गुयाना
उत्तर देखें
कार्टाजेना कोलंबिया के कैरिबियाई तट पर स्थित बंदरगाह शहर है, जहाँ 1999 में जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल पर वार्ता हुई थी। कार्टाजेना जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल 1992 के जैव विविधता अभिसमय का एक पूरक समझौता है।
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