निम्नलिखित में से कौन जल प्रदूषक नहीं है?
- A.क्रोमियम
- B.गाद
- C.हिमनद
- D.आर्सेनिक
सही उत्तर
C. हिमनद
व्याख्या
सही उत्तर है C, हिमनद। हिमनद चलती बर्फ का प्राकृतिक पिंड और मीठे जल का स्रोत है, प्रदूषक नहीं।
जल प्रदूषक वह पदार्थ है जो जल में मिलकर उसे उपयोग के अयोग्य बना देता है। प्रदूषकों को तीन वर्गों में रखा जाता है: भौतिक, जैसे गाद, ताप और रंग; रासायनिक, जैसे भारी धातुएं, उर्वरक, कीटनाशक और अपमार्जक; और जैविक, जैसे मलजल से आने वाले जीवाणु और विषाणु। हिमालय के हिमनद गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र को जल देते हैं, इसलिए वे जल बिगाड़ते नहीं, बल्कि जल की आपूर्ति करते हैं।
A विकल्प गलत है, क्योंकि क्रोमियम चमड़ा शोधन तथा विद्युत लेपन इकाइयों से निकलने वाली भारी धातु है और गंभीर हानि करती है। B गलत है, क्योंकि अपरदन से आने वाली गाद जल की गंदलाहट बढ़ाकर जलीय पौधों तक प्रकाश रोकती है और भौतिक प्रदूषक मानी जाती है। D गलत है, क्योंकि भूजल में आर्सेनिक, जो पश्चिम बंगाल और बिहार की जानी हुई समस्या है, आर्सेनिकोसिस और त्वचा कैंसर करता है।
परीक्षा टिप: भौतिक प्रदूषक - गाद और ताप; रासायनिक - क्रोमियम, आर्सेनिक, फ्लोराइड; जैविक - मलजल के रोगाणु।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनर्मदा बचाओ आंदोलन निम्नलिखित में से किस परियोजना से संबंधित है?
- A.सरदार सरोवर
- B.भाखड़ा नांगल
- C.रिहंद
- D.टिहरी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सरदार सरोवर
व्याख्या
सही उत्तर है A, सरदार सरोवर। नर्मदा बचाओ आंदोलन नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बाँध के विरोध में खड़ा हुआ था।
यह आंदोलन 1985 में मेधा पाटकर के नेतृत्व में शुरू हुआ और बाद में बाबा आम्टे जैसे लोग भी जुड़े। आंदोलन का कहना था कि बाँध की ऊँचाई बढ़ाने से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के गाँव और जंगल डूब जाएँगे और विस्थापित लोगों का ठीक से पुनर्वास नहीं हो रहा। इसमें अनशन, रैलियाँ और अदालती लड़ाई शामिल रही और 1993 में विश्व बैंक ने इस परियोजना से हाथ खींच लिया। सर्वोच्च न्यायालय ने 2000 में पुनर्वास की शर्तों के साथ निर्माण जारी रखने की अनुमति दी।
विकल्प B भाखड़ा नांगल सतलुज नदी पर हिमाचल प्रदेश और पंजाब में है। विकल्प C रिहंद उत्तर प्रदेश में सोन की सहायक नदी पर है। विकल्प D टिहरी उत्तराखंड में भागीरथी पर है, जिसका विरोध सुंदरलाल बहुगुणा ने किया था।
परीक्षा टिप: नर्मदा बचाओ - मेधा पाटकर, सरदार सरोवर; चिपको और टिहरी - सुंदरलाल बहुगुणा।
निम्नलिखित में से कौन सा संश्लेषित रसायन ओजोन परत के क्षरण के लिए उत्तरदायी है?
- A.पॉलीविनाइलक्लोराइड
- B.क्लोरोफ्लोरोकार्बन
- C.बायोपॉलीमर
- D.मेथेनॉल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. क्लोरोफ्लोरोकार्बन
व्याख्या
सही उत्तर है B, क्लोरोफ्लोरोकार्बन। सीएफसी समतापमंडल में क्लोरीन छोड़ते हैं और यही क्लोरीन ओजोन को नष्ट करती है।
सीएफसी का उपयोग रेफ्रिजरेंट, एरोसोल स्प्रे और फोम में होता था। ये धरातल के पास स्थिर रहते हैं, इसलिए ऊपर समतापमंडल तक पहुँच जाते हैं, जहाँ पराबैंगनी किरणें इन्हें तोड़कर क्लोरीन परमाणु मुक्त कर देती हैं। एक क्लोरीन परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया में हजारों ओजोन अणु नष्ट कर सकता है, इसी से अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र बना। 1987 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने सीएफसी को चरणबद्ध रूप से समाप्त किया और 16 सितंबर विश्व ओजोन दिवस के रूप में मनाया जाता है।
विकल्प A पॉलीविनाइलक्लोराइड एक प्लास्टिक है, जो कचरे की समस्या है पर समतापमंडल तक नहीं पहुँचता। विकल्प C बायोपॉलीमर सेल्यूलोज या स्टार्च जैसे प्राकृतिक बहुलक हैं, जो ओजोन के लिए हानिरहित हैं। विकल्प D मेथेनॉल एक अल्कोहल है, जिसका ओजोन क्षरण में कोई योगदान नहीं।
परीक्षा टिप: ओजोन नाशक - सीएफसी, हैलोन और कार्बन टेट्राक्लोराइड; नियंत्रण - मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, 1987।
कबरताल आर्द्रभूमि को 2020 में रामसर स्थल घोषित किया गया था। यह निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित है?
- A.बिहार
- B.हिमाचल प्रदेश
- C.पंजाब
- D.हरियाणा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बिहार
व्याख्या
सही उत्तर है A, बिहार। कबरताल आर्द्रभूमि, जिसे स्थानीय रूप से कँवर झील कहा जाता है, बिहार के बेगूसराय जिले में है और इसे 2020 में रामसर स्थल घोषित किया गया, जिससे यह राज्य का पहला रामसर स्थल बना। यह सिंधु-गंगा के मैदान में बूढ़ी गंडक की बदलती धारा से छूटी गोखुर झील है, लगभग 2,600 हेक्टेयर में फैली है और क्षेत्र के लिए प्राकृतिक बाढ़ अवरोधक की तरह काम करती है। यह मध्य एशियाई उड़ान मार्ग का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ ग्रेलैग हंस और संकटग्रस्त सोशिएबल लैपविंग जैसे प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश के रामसर स्थल रेणुका, पोंग बाँध झील और चंद्रताल हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि पंजाब में हरिके, कांजली, रोपड़, नंगल, ब्यास संरक्षण क्षेत्र और केशोपुर-मियानी आते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि हरियाणा के सुल्तानपुर और भिंडावास दोनों 2021 में नामित हुए। परीक्षा टिप: बेगूसराय की कँवर झील यानी कबरताल बिहार का पहला रामसर स्थल है, जो बूढ़ी गंडक की गोखुर झील है।
महाराष्ट्र की निम्नलिखित में से कौन-सी झील नवंबर 2020 में रामसर स्थलों की सूची में शामिल की गई?
- A.विहार
- B.वेण्णा
- C.रंकाला
- D.लोनार
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. लोनार
व्याख्या
सही उत्तर है D, लोनार। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले की लोनार झील नवंबर 2020 में उत्तर प्रदेश के सूर सरोवर के साथ रामसर स्थलों की सूची में जोड़ी गई। यह झील उस गड्ढे में भरी है जो लगभग पचास हजार वर्ष पहले उल्कापिंड के दक्कन की बेसाल्ट चट्टान से टकराने पर बना था, इसलिए यह भारत में बेसाल्ट में बना एकमात्र ऐसा क्रेटर है; इसका पानी एक साथ खारा और क्षारीय होने के कारण असामान्य है और इसमें दुर्लभ सूक्ष्मजीव पलते हैं। आर्द्रभूमि पर रामसर अभिसमय 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुआ था और भारत 1982 में इसका पक्षकार बना। विकल्प A गलत है, क्योंकि विहार मुंबई को पानी देने वाला जलाशय है। विकल्प B गलत है, क्योंकि वेण्णा महाबलेश्वर की मानव-निर्मित झील है। विकल्प C गलत है, क्योंकि रंकाला कोल्हापुर शहर के भीतर की झील है, और इनमें से किसी को रामसर दर्जा नहीं मिला है। परीक्षा टिप: नांदुर मध्मेश्वर महाराष्ट्र का पहला रामसर स्थल था, उसके बाद लोनार और ठाणे क्रीक आए।
2013 में अपनाया गया मिनामाता अभिसमय किस पदार्थ से संबंधित है?
- A.सीसा
- B.एस्बेस्टस
- C.पारा
- D.आर्सेनिक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पारा
व्याख्या
सही उत्तर C, पारा है। पारे पर मिनामाता अभिसमय 2013 में अपनाया गया और 2017 में लागू हुआ। यह पारे की आपूर्ति और व्यापार को नियंत्रित करता है, बैटरी, स्विच तथा कुछ मापक उपकरणों जैसे उत्पादों में उसके उपयोग को सीमित करता है, और कोयला जलाने तथा छोटे पैमाने के स्वर्ण खनन से होने वाले उत्सर्जन को नियमित करता है। इसका नाम जापान के मिनामाता नगर पर है, जहाँ खाड़ी में औद्योगिक पारा यौगिकों के निस्सरण से 1950 के दशक से गंभीर तंत्रिका रोग फैला।
विकल्प A, सीसा, पेट्रोल, रंग और पाइप संबंधी राष्ट्रीय कानूनों से नियंत्रित होता है, किसी समर्पित वैश्विक अभिसमय से नहीं। विकल्प B, एस्बेस्टस, पूर्व सूचित सहमति पर रॉटरडैम अभिसमय के अनुलग्नकों में आता है। विकल्प D, आर्सेनिक, दक्षिण एशिया के कई भागों में भूजल का गंभीर प्रदूषक है पर उससे पेयजल मानकों और राष्ट्रीय कार्यक्रमों के माध्यम से निपटा जाता है, किसी अलग संधि से नहीं।