मथुरा कला शैली में, निम्नलिखित में से भगवान बुद्ध की मूर्तियाँ (इमेज) मुख्यतः किस मुद्रा में बनायी गयी हैं?
- A.ध्यान मुद्रा
- B.अभय मुद्रा
- C.धर्मचक्र मुद्रा
- D.वरद मुद्रा
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, अभय मुद्रा। मथुरा की आरंभिक बुद्ध मूर्तियों में दायाँ हाथ ऊपर उठा और हथेली बाहर की ओर होती है, जिसका अर्थ है "डरो मत"। मथुरा शैली ईसा की आरंभिक सदियों में कुषाणों के समय फली-फूली, उसी दौर में उत्तर-पश्चिम में गांधार शैली भी थी। मथुरा के शिल्पियों ने स्थानीय चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग किया और बुद्ध को गोल मुस्कुराता चेहरा, सर्पिल जूड़े वाला मुंडित सिर और भरा-पूरा मज़बूत शरीर दिया, जो पूरी तरह भारतीय शैली थी। कटरा टीले से मिली बैठी बुद्ध मूर्ति, जो अब मथुरा संग्रहालय में है, अभय मुद्रा का प्रसिद्ध उदाहरण है। विकल्प A गलत है, क्योंकि गोद में हाथ रखे ध्यान मुद्रा गांधार की मूर्तियों की पहचान है। विकल्प C गलत है, क्योंकि उपदेश की धर्मचक्र मुद्रा बाद में प्रसिद्ध हुई, जैसे गुप्तकालीन सारनाथ बुद्ध में। विकल्प D गलत है, क्योंकि नीचे की ओर हथेली वाली दान की वरद मुद्रा बाद की मूर्तियों में अधिक दिखती है। परीक्षा टिप: मथुरा यानी लाल बलुआ पत्थर और अभय मुद्रा; गांधार यानी स्लेटी शिस्ट और ध्यान मुद्रा।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंएलिफेंटा द्वीप के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.इसका नाम अंग्रेज़ों ने वहाँ स्थित हाथी की एक विशाल आकृति के कारण रखा था।
- B.इसमें केवल एक बड़ी गुफा है।
- C.यह विष्णुधर्मोत्तर पुराण में वर्णित विष्णु की एक भव्य नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
- D.यह पाशुपत संप्रदाय से जुड़ा है।
उत्तर देखें
एलिफेंटा की गुफाएँ शैव शैलकृत मंदिर हैं और विद्वान इनकी मूर्तिकला को शिव के उपासक पाशुपत संप्रदाय से जोड़ते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →'इनवैल्यूएबल ट्रेज़र्स ऑफ इनक्रेडिबल इंडिया' टैगलाइन किसके लोगो से संबंधित है?
- A.भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
- B.भारत पर्यटन विकास निगम
- C.भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण
- D.भारत के भौगोलिक संकेतक (GI)
उत्तर देखें
नवंबर 2018 में वाणिज्य मंत्रालय के औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग ने GI टैग वाले उत्पादों के लिए एक साझा लोगो जारी किया, जिसकी टैगलाइन थी "इनवैल्यूएबल ट्रेज़र्स ऑफ इनक्रेडिबल इंडिया"।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में बौद्ध स्तूपों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.अशोक ने स्तूप पूजा को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- B.ये बुद्ध और अन्य भिक्षुओं के अवशेषों के भंडार थे।
- C.ये ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित थे।
- D.ये व्यापार मार्गों के निकट स्थित थे।
उत्तर देखें
स्तूप प्रायः नगरों के पास और व्यापार मार्गों पर बनाए गए, जहाँ व्यापारी और नगरवासी आकर उन्हें दान दे सकते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नालायिर दिव्य प्रबंधम के 10वीं शताब्दी के रचयिता कौन था/थे?
- A.आलवार
- B.नयनार
- C.अप्पार
- D.संबंदर
उत्तर देखें
तमिल वैष्णव परंपरा के 4,000 पवित्र पदों का संग्रह नालायिर दिव्य प्रबंधम बारह आलवारों की रचना है, जिसे 10वीं शताब्दी में एक संग्रह के रूप में संकलित किया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित पर विचार कीजिए : 1. तुगलकाबाद किला 2. लोधी गार्डन में बड़ा गुंबद 3. कुतुब मीनार 4. फतेहपुर सीकरी उपर्युक्त स्मारकों के निर्माण का सही कालानुक्रम निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- A.3, 1, 4, 2
- B.3, 1, 2, 4
- C.1, 3, 2, 4
- D.1, 3, 4, 2
उत्तर देखें
सबसे पहले कुतुब मीनार बनी, फिर तुगलकाबाद किला, फिर लोदी काल का बड़ा गुंबद और अंत में मुगल नगर फतेहपुर सीकरी।
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