महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की कैपेक्स सहायता योजना का कुल परिव्यय कितना है?
- A.1,500 करोड़ रुपये
- B.2,800 करोड़ रुपये
- C.2,814 करोड़ रुपये
- D.10,000 करोड़ रुपये
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 2,814 करोड़ रुपये है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर 2026 को इसी परिव्यय के साथ महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण की कैपेक्स सहायता योजना मंजूर की थी। यह रकम पांच वित्त वर्ष में, वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक खर्च होगी और पूरी तरह बजटीय सहायता से आएगी। विकल्प बी में दिया 2,800 करोड़ रुपये केवल सब्सिडी का हिस्सा है, जिसमें दो लिथियम संयंत्रों के 1,000 करोड़ और दो निकल संयंत्रों के 1,800 करोड़ रुपये शामिल हैं; इसमें प्रशासनिक खर्च के लिए रखे 14 करोड़ रुपये नहीं जुड़े, और दोनों मिलाकर ही पूरा परिव्यय बनता है। विकल्प ए में दिया 1,500 करोड़ रुपये राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत पहले मंजूर हुई पुनर्चक्रण योजना का आकार है, जो अलग व्यवस्था है। विकल्प डी में दिया 10,000 करोड़ रुपये वह निवेश है जो इस योजना से शोधन क्षेत्र में आने की आशा है, सरकार का योगदान नहीं।
पूरा लेख पढ़ें: कैपेक्स योजना: लिथियम-निकल शोधन को 2,814 करोड़ रुपये
अभ्यास प्रश्न
कैपेक्स सहायता योजना किन दो खनिजों के प्रसंस्करण संयंत्रों के लिए धन देती है?
- A.लिथियम और कोबाल्ट
- B.लिथियम और निकल
- C.निकल और ग्रेफाइट
- D.कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्व
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योजना से कुल चार संयंत्र लगेंगे, दो लिथियम के जिनकी क्षमता कम से कम 30 किलो टन होगी और दो निकल के जिनकी क्षमता कम से कम 50 किलो टन होगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कैपेक्स सहायता योजना के शीर्ष निकाय संचालन परिषद की अध्यक्षता कौन करता है?
- A.कैबिनेट सचिव
- B.खान मंत्रालय के सचिव
- C.नीति आयोग के उपाध्यक्ष
- D.सार्वजनिक उद्यम विभाग के सचिव
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योजना का ढांचा तीन स्तरों वाला है। सबसे ऊपर संचालन परिषद है, जिसकी अध्यक्षता खान मंत्रालय के सचिव करते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने जिस समन्वित राष्ट्रीय निर्णय समर्थन प्रणाली का सुझाव दिया, वह किन दो राज्यों की प्रणालियों पर आधारित होगी?
- A.ओडिशा और कर्नाटक
- B.गुजरात और महाराष्ट्र
- C.राजस्थान और मध्य प्रदेश
- D.तेलंगाना और आंध्र प्रदेश
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राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर एक समन्वित निर्णय समर्थन प्रणाली बनाई जाए, जिसमें इन दोनों राज्यों की बनी प्रणालियों की सर्वोत्तम विशेषताएं शामिल हों, जिससे राज्यों में वाटरशेड नियोजन समेकित हो सके।
पूरी व्याख्या पढ़ें →डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 के अंतर्गत एक वाटरशेड परियोजना की अवधि कितनी है?
- A.तीन वर्ष
- B.पांच वर्ष
- C.सात वर्ष
- D.दस वर्ष
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भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव श्री नितिन खड़े ने बैठक में बताया कि वाटरशेड विकास घटक की परियोजना अवधि क्रमशः घटाई गई है, पहले चरण के सात वर्ष से दूसरे चरण में पांच वर्ष, और उन्होंने इस छोटी अवधि में अमल की गति बढ़ाने की जरूरत बताई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →4 और 5 नवंबर 2026 को वाटरशेड दिशानिर्देशों पर तीसरी राष्ट्रीय परामर्श बैठक किस संस्थान में हुई?
- A.आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली
- B.आईसीएआर-राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो, नागपुर
- C.आईसीएआर-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून
- D.राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, हैदराबाद
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दो दिवसीय परामर्श बैठक इसी ब्यूरो के सहयोग से और उसके परिसर में आयोजित हुई, तथा इसके निदेशक डॉ. एन.जी. पाटिल ने उद्घाटन सत्र में भूमि संसाधन सूची को समेकित वाटरशेड नियोजन का वैज्ञानिक और समग्र आधार बताया।
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