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सिक्किम में माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला, चुरपी पहल शुरू

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने गंगटोक में सिक्किम मिल्क यूनियन की माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला का उद्घाटन कर चुरपी ट्रेसेबिलिटी पहल शुरू की।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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सिक्किम में माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला, चुरपी पहल शुरू

चर्चा में क्यों

3 नवंबर 2026 को गंगटोक में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने सिक्किम मिल्क यूनियन की माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया, चुरपी ट्रेसेबिलिटी पहल तथा फॉडर प्लस उत्पाद शुरू किए और सिरी नस्ल के लिए उत्कृष्टता केंद्र की घोषणा की।

केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, जिन्हें ललन सिंह भी कहा जाता है, ने 3 नवंबर 2026 को गंगटोक में सिक्किम मिल्क यूनियन के कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) के तहत स्थापित यूनियन की माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया, जो सूक्ष्मजीव परीक्षण तथा गुणवत्ता मूल्यांकन को मजबूत करेगी और डेयरी क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा बेहतर बनाएगी। इसी कार्यक्रम में करफेक्टर की दूसरी माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला का वर्चुअल उद्घाटन भी हुआ।

चुरपी ट्रेसेबिलिटी और फॉडर प्लस

मंत्री ने चुरपी ट्रेसेबिलिटी पहल शुरू की, जिसका उद्देश्य पहाड़ के पारंपरिक दुग्ध उत्पाद चुरपी की ट्रेसेबिलिटी मजबूत करना तथा उसकी पहचान और बाजार पहुंच बढ़ाना है। उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों द्वारा विकसित फॉडर प्लस उत्पादों का शुभारंभ भी किया, जिन्हें मंत्रालय चारे की उपलब्धता, किसान समूहों तथा पशुधन क्षेत्र में आय के अतिरिक्त अवसरों से जोड़ता है। पांच नवगठित डेयरी सहकारी समितियों को पंजीकरण प्रमाण-पत्र सौंपे गए।

सिक्किम का डेयरी क्षेत्र कैसे बढ़ा

संकेतकबदलाव
दूध उत्पादन प्रतिदिन79 प्रतिशत वृद्धि, 1.37 लाख लीटर से 2.45 लाख लीटर
डेयरी सहकारी समितियां88 प्रतिशत वृद्धि, 2014-15 में 389 से 2025-26 में 733
उपभोक्ताओं को दैनिक आपूर्तिदोगुनी, 28,000 लीटर से 56,000 लीटर

सभा को संबोधित करते हुए मंत्री ने इस प्रगति पर राज्य सरकार और सभी हितधारकों को बधाई दी। उन्होंने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से अधिक कर्मी और प्रयास लगाने को कहा, ताकि सिक्किम दूध उत्पादन एवं खरीद में आत्मनिर्भर बने। उन्होंने कहा कि डेयरी सहकारी समितियां ही गुणवत्ता सुनिश्चित करने, मिलावट रोकने और किसानों को उचित दाम दिलाने का माध्यम हैं। उन्होंने वाराणसी का उदाहरण दिया, जहां बोर्ड के हस्तक्षेप से दूध संग्रह 2022 में 14,000 लीटर प्रतिदिन से बढ़कर लगभग 2.5 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया और किसानों को मिलने वाला दाम 28 से 30 रुपये से बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर हो गया, साथ ही गोवर्धन पहल के तहत बायोगैस संयंत्रों में गोबर के उपयोग से अतिरिक्त आय भी हुई।

सिरी मवेशी और मंगन संयंत्र

मंगन की अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए, जहां स्थानीय मवेशी औसतन लगभग तीन लीटर दूध प्रतिदिन देते हैं, मंत्री ने घोषणा की कि केंद्र सरकार स्वदेशी सिरी नस्ल के संरक्षण एवं विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्र हेतु धनराशि मंजूर करेगी। यह केंद्र नस्ल की आनुवंशिक क्षमता और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए आईवीएफ सहित उन्नत प्रजनन तकनीकों को बढ़ावा देगा, और राज्य से औपचारिक प्रस्ताव भेजने को कहा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड मिजोरम में अपनाए गए मॉडल पर मंगन जिले के डेयरी संयंत्र का पूरा आधुनिकीकरण वित्तपोषित करेगा और स्वयं कराएगा। राज्य की आर्थिक प्रगति को उन्होंने आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर के विजन का हिस्सा बताया।

महत्वपूर्ण तथ्य

मंत्रीराजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री
स्थान एवं तिथिसिक्किम मिल्क यूनियन का कार्यक्रम, गंगटोक, 3 नवंबर 2026
उद्घाटनराष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम के तहत सिक्किम मिल्क यूनियन की माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला; करफेक्टर की प्रयोगशाला वर्चुअल रूप से
शुभारंभचुरपी ट्रेसेबिलिटी पहल तथा किसान उत्पादक संगठनों के फॉडर प्लस उत्पाद
नई समितियांपांच नई डेयरी सहकारी समितियों को पंजीकरण प्रमाण-पत्र
दूध उत्पादन79 प्रतिशत वृद्धि, 1.37 लाख से 2.45 लाख लीटर प्रतिदिन
सहकारी समितियां88 प्रतिशत वृद्धि, 2014-15 में 389 से 2025-26 में 733
उपभोक्ता आपूर्ति28,000 लीटर से बढ़कर 56,000 लीटर प्रतिदिन
घोषणाएंस्वदेशी सिरी नस्ल के लिए उत्कृष्टता केंद्र; एनडीडीबी द्वारा मंगन डेयरी संयंत्र का आधुनिकीकरण

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि सिक्किम मिल्क यूनियन की माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम के तहत है, चुरपी ट्रेसेबिलिटी पहल पारंपरिक दुग्ध उत्पाद से जुड़ी है, राज्य में दूध उत्पादन 79 प्रतिशत बढ़कर 2.45 लाख लीटर प्रतिदिन और सहकारी समितियां 733 हो गईं, उत्कृष्टता केंद्र स्वदेशी सिरी नस्ल के लिए है तथा मंगन संयंत्र का आधुनिकीकरण एनडीडीबी मिजोरम मॉडल पर करेगा।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राज्य समाचारआसान

नवंबर 2026 में शुरू की गई चुरपी ट्रेसेबिलिटी पहल किस राज्य के डेयरी क्षेत्र से जुड़ी है?

  1. A.अरुणाचल प्रदेश
  2. B.सिक्किम
  3. C.मिजोरम
  4. D.नागालैंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सिक्किम

यह पहल गंगटोक में सिक्किम मिल्क यूनियन के कार्यक्रम में शुरू की गई, जहां केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने यूनियन की माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला का उद्घाटन भी किया और किसान उत्पादक संगठनों के फॉडर प्लस उत्पादों का शुभारंभ देखा।

Q2.राज्य समाचारमध्यम

सिक्किम के लिए घोषित उत्कृष्टता केंद्र किस स्वदेशी मवेशी नस्ल के संरक्षण पर काम करेगा?

  1. A.गिर
  2. B.साहीवाल
  3. C.सिरी
  4. D.थारपारकर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सिरी

मंगन की यात्रा का उल्लेख करते हुए, जहां स्थानीय मवेशी औसतन लगभग तीन लीटर दूध प्रतिदिन देते हैं, मंत्री ने घोषणा की कि स्वदेशी सिरी नस्ल के संरक्षण एवं विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्र हेतु केंद्रीय धनराशि मंजूर की जाएगी, जिसमें नस्ल की आनुवंशिक क्षमता और दूध उत्पादन बढ़ाने के…

Q3.राज्य समाचारकठिन

गंगटोक के कार्यक्रम में बताया गया कि सिक्किम में दूध उत्पादन पिछले दशक में कितना बढ़ा?

  1. A.59 प्रतिशत
  2. B.69 प्रतिशत
  3. C.79 प्रतिशत
  4. D.89 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 79 प्रतिशत

मंत्री ने बताया कि राज्य में दूध उत्पादन दशक भर में इतनी वृद्धि के साथ 1.37 लाख लीटर प्रतिदिन से 2.45 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया, जबकि डेयरी सहकारी समितियों की संख्या 88 प्रतिशत बढ़कर 2014-15 के 389 से 2025-26 में 733 हो गई और उपभोक्ताओं को दैनिक दूध आपूर्ति…

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुरपी ट्रेसेबिलिटी पहल क्या है?

यह गंगटोक में शुरू की गई पहल है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक दुग्ध उत्पाद चुरपी की ट्रेसेबिलिटी मजबूत करना तथा उसकी पहचान और बाजार पहुंच बढ़ाना है। इसे केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने शुरू किया।

सिक्किम में दूध उत्पादन कितना बढ़ा है?

पिछले एक दशक में 79 प्रतिशत, अर्थात 1.37 लाख लीटर प्रतिदिन से 2.45 लाख लीटर प्रतिदिन। डेयरी सहकारी समितियां 88 प्रतिशत बढ़कर 2014-15 के 389 से 2025-26 में 733 हो गईं।

उत्कृष्टता केंद्र किस मवेशी नस्ल के लिए घोषित हुआ?

स्वदेशी सिरी नस्ल के लिए, जिसके संरक्षण एवं विकास हेतु केंद्र सरकार धनराशि मंजूर करेगी और आईवीएफ सहित उन्नत प्रजनन तकनीकों का उपयोग होगा। राज्य से औपचारिक प्रस्ताव मांगा गया है।

स्रोत

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