'क्योटो प्रोटोकॉल' एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जो सदस्य राष्ट्रों को किसमें कमी के लिए प्रतिबद्ध करती है?
- A.गरीबी
- B.ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन
- C.नाभिकीय आयुध
- D.कृषि सहायिकी
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के तहत 11 दिसंबर 1997 को जापान के क्योटो में अपनाया गया क्योटो प्रोटोकॉल उत्सर्जन घटाने के बाध्यकारी लक्ष्य तय करने वाली पहली संधि थी। यह 16 फरवरी 2005 को लागू हुआ और इसने औद्योगिक देशों से 2008 से 2012 के बीच अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 1990 के स्तर से औसतन लगभग 5 प्रतिशत कम करने को कहा। इसमें कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड समेत छह गैसें शामिल थीं, और स्वच्छ विकास तंत्र (CDM) जैसे बाजार उपाय बने, जिनसे भारत जैसे देशों की परियोजनाएं कार्बन क्रेडिट कमा सकीं। भारत ने 2002 में इसका अनुसमर्थन किया, पर विकासशील देश होने के कारण उस पर कोई बाध्यकारी लक्ष्य नहीं था। A गलत है, गरीबी घटाना संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों का उद्देश्य है, क्योटो का नहीं। C गलत है, नाभिकीय हथियारों से 1968 की परमाणु अप्रसार संधि जैसी संधियां जुड़ी हैं। D गलत है, कृषि सब्सिडी विश्व व्यापार संगठन के कृषि समझौते के अंतर्गत आती है। परीक्षा टिप: क्योटो 1997, लागू 2005, अमीर देशों पर बाध्यकारी कटौती; पेरिस 2015, सभी देशों के संकल्प।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक में शामिल नहीं है?
- A.सल्फर
- B.नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
- C.सीसा (लेड)
- D.मीथेन
उत्तर देखें
भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक की गणना में मीथेन शामिल नहीं है। राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 2014 में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शुरू किया गया था और इसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चलाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रीय हरित अधिकरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.इसकी स्थापना वर्ष 2010 में हुई थी।
- B.यह पर्यावरण संरक्षण और वनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटारे में लगा है।
- C.यह व्यक्तियों और संपत्ति को हुई क्षति के लिए राहत और मुआवजा देने पर विचार कर सकता है।
- D.यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में निर्धारित प्रक्रियाओं से बँधा है।
उत्तर देखें
राष्ट्रीय हरित अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता से बँधा नहीं है; यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होता है। NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत हुई, जो अनुच्छेद 21 के स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार से जुड़ा है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत की 2017-2031 की राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना (NWAP) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह तीसरी राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना है।
2. यह NWAP अनूठी है क्योंकि पहली बार भारत ने वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से जुड़ी चिंताओं को मान्यता दी है।
3. इस NWAP के दस घटक हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 1 और 2
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
2017-2031 की योजना भारत की तीसरी राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना है और वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को संबोधित करने वाली पहली योजना है, पर इसके दस नहीं, पाँच घटक हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सी विधि शहरी वर्षा जल संचयन के लिए उपयुक्त नहीं है?
- A.छत पुनर्भरण गड्ढा (रूफटॉप रिचार्ज पिट)
- B.पुनर्भरण कुएँ
- C.गली प्लग
- D.पुनर्भरण खाई (रिचार्ज ट्रेंच)
उत्तर देखें
गली प्लग पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में किसी प्राकृतिक नाले या धारा के आर-पार बनाया जाने वाला छोटा अवरोध है, इसलिए शहर में इसका उपयोग नहीं होता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिए प्रसिद्ध कार्टाजेना शहर कहाँ स्थित है?
- A.कोलंबिया
- B.वेनेज़ुएला
- C.ब्राज़ील
- D.गुयाना
उत्तर देखें
कार्टाजेना कोलंबिया के कैरिबियाई तट पर स्थित बंदरगाह शहर है, जहाँ 1999 में जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल पर वार्ता हुई थी। कार्टाजेना जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल 1992 के जैव विविधता अभिसमय का एक पूरक समझौता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →