गज से बजने वाला लोक वाद्य रावणहत्था मुख्यतः किस राज्य से सम्बंधित है?
- A.पंजाब
- B.राजस्थान
- C.पश्चिम बंगाल
- D.मणिपुर
सही उत्तर
B. राजस्थान
व्याख्या
सही उत्तर B, राजस्थान है। रावणहत्था नारियल की कटोरी को गूँजपात्र बनाकर बना प्राचीन वाद्य है, जिसे घोड़े के बालों वाले गज से बजाया जाता है और जिस पर प्रायः छोटी घंटियाँ बँधी रहती हैं; यह राजस्थान के लोक गायकों का वाद्य है और पाबूजी की कथा के साथ बजता है। मांगणियार समुदाय का कमायचा और सपेरों की पुंगी भी इसी मरुभूमि परम्परा से आते हैं।
विकल्प A, पंजाब, के वाद्य एक तार वाली तूंबी, साथ-साथ फूँकी जाने वाली अलगोजा जोड़ी, चिमटा और भंगड़ा का ढोल हैं। विकल्प C, पश्चिम बंगाल, में बाउल गायकों का दोतारा, एकतारा और दुर्गा पूजा का ढाक है। विकल्प D, मणिपुर, में पेना नामक छोटी गजयुक्त सारंगी और पुंग ढोल हैं। राज्यस्तरीय परीक्षाओं को यह जोड़ी विशेष प्रिय है, इसलिए वाद्य और उसका राज्य साथ-साथ याद करना चाहिए।
पूरा लेख पढ़ें: वाद्य यंत्र और कलाकार: तत, सुषिर, अवनद्ध और घन
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनाट्यशास्त्र के वर्गीकरण में फूँक से बजने वाले वाद्यों को किस नाम से पुकारा जाता है?
- A.तत वाद्य
- B.सुषिर वाद्य
- C.अवनद्ध वाद्य
- D.घन वाद्य
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सही उत्तर: B. सुषिर वाद्य
व्याख्या
सही उत्तर B, सुषिर वाद्य है। सुषिर का अर्थ है खोखला, और इस वर्ग में वे सभी वाद्य आते हैं जिनमें नली के भीतर की वायु कम्पित होकर ध्वनि उत्पन्न करती है। बाँसुरी, शहनाई, नादस्वरम, पुंगी, अलगोजा और शंख सभी इसी वर्ग के हैं, तथा हारमोनियम भी, जिसकी रीडें धौंकनी की हवा से बजती हैं।
विकल्प A, तत वाद्य, तार वाले वाद्यों का वर्ग है, जैसे सितार, सरोद, सारंगी, वीणा और संतूर। विकल्प C, अवनद्ध वाद्य, में चमड़ा मढ़े वाद्य आते हैं, अर्थात् तबला, पखावज, मृदंगम और चेंडा जैसे ढोल। विकल्प D, घन वाद्य, धातु, मिट्टी या लकड़ी के ठोस वाद्यों का वर्ग है, जो बिना किसी स्वर मिलान के आघात या हिलाने से बजते हैं, जैसे मंजीरा, घटम और जलतरंग। चारों नाम एक ही वर्गीकरण के हैं, इसलिए ये सदा साथ रखे जाते हैं।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ किस वाद्य यंत्र से सम्बंधित हैं?
- A.सरोद
- B.सारंगी
- C.शहनाई
- D.संतूर
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सही उत्तर: C. शहनाई
व्याख्या
सही उत्तर C, शहनाई है। बिस्मिल्लाह खाँ शहनाई बजाते थे, जो दोहरी रीड वाला सुषिर वाद्य है और उत्तर भारत में विवाह, मंदिर की शोभायात्राओं तथा शुभ आरम्भ से लंबे समय से जुड़ा है; उन्हें इसे मांगलिक प्रयोग से निकालकर शास्त्रीय मंच तक पहुँचाने का श्रेय दिया जाता है। उनका जीवन वाराणसी में बीता और उन्हें 2001 में भारत रत्न मिला।
विकल्प A, सरोद, बिना पर्दों वाला तंत्रीवाद्य है, जिसे अलाउद्दीन खाँ, अली अकबर खाँ और अमजद अली खाँ ने प्रसिद्ध किया। विकल्प B, सारंगी, गज से बजने वाला वाद्य है जिसे मानव कंठ के सबसे निकट कहा जाता है और जिसके सबसे प्रसिद्ध वादक राम नारायण हैं। विकल्प D, संतूर, कश्मीर का आघात से बजने वाला तंत्रीवाद्य है, जिसे शिवकुमार शर्मा ने शास्त्रीय मंच पर स्थापित किया। हर विकल्प वास्तविक वाद्य है और हर एक का अपना प्रसिद्ध वादक, इसलिए यह जोड़ियों की सीधी परीक्षा है।
पंडित शिवकुमार शर्मा किस वाद्य के वादन के लिए जाने जाते हैं?
- A.संतूर
- B.सितार
- C.बाँसुरी
- D.वीणा
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सही उत्तर: A. संतूर
व्याख्या
सही उत्तर A, संतूर है। संतूर समलम्ब आकार का काष्ठ पात्र है, जिस पर छोटी घोड़ियों के ऊपर अनेक तारें तनी रहती हैं और जिन पर हल्की मुड़ी हुई छड़ियों की जोड़ी से आघात किया जाता है। यह कश्मीर से आया है, जहाँ सूफियाना संगीत में इसका प्रयोग होता था, और शिवकुमार शर्मा को इसे हिंदुस्तानी शास्त्रीय प्रस्तुति के योग्य बनाने का श्रेय दिया जाता है। भजन सोपोरी इस वाद्य का दूसरा प्रसिद्ध नाम हैं।
विकल्प B, सितार, रविशंकर, विलायत खाँ और निखिल बनर्जी का वाद्य है। विकल्प C, बाँसुरी, पन्नालाल घोष का वाद्य है, जिन्होंने उसे शास्त्रीय मंच पर लाया, और बाद में हरिप्रसाद चौरसिया का, जो प्रायः शिवकुमार शर्मा के साथ प्रस्तुति देते रहे। विकल्प D, वीणा, की अपनी परम्परा है, सरस्वती वीणा पर एस. बालचंदर तथा चिट्टी बाबू से लेकर रुद्र वीणा पर असद अली खाँ तक। यह भी ध्यान रखें कि संतूर आघात से बजने पर भी तार होने के कारण तत वाद्य गिना जाता है।
उस्ताद अमजद अली खाँ किस वाद्य के प्रसिद्ध वादक हैं?
- A.सितार
- B.सरोद
- C.तबला
- D.शहनाई
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सही उत्तर: B. सरोद
व्याख्या
सही उत्तर B, सरोद है। सरोद ऐसा तंत्रीवाद्य है जिसकी पट्टी धातु की होती है और जिसमें पर्दे नहीं होते, इसीलिए वादक एक स्वर से दूसरे तक निरन्तर फिसल सकता है और उसका गहरा, गाता हुआ स्वर बनता है। अमजद अली खाँ सरोद वादकों की पारिवारिक परम्परा से आते हैं, और इस वाद्य के अन्य बड़े नाम मैहर के अलाउद्दीन खाँ तथा उनके पुत्र अली अकबर खाँ हैं।
विकल्प A, सितार, पर्देदार वाद्य है जिसमें तरब की तारें और तूँबा होता है और जिसे रविशंकर ने विश्व भर में प्रसिद्ध किया। विकल्प C, तबला, दो ढोलकों की जोड़ी है, काठ का दायाँ और धातु का बायाँ, जिसके प्रसिद्ध वादक अल्ला रक्खा, ज़ाकिर हुसैन और किशन महाराज हैं। विकल्प D, शहनाई, बिस्मिल्लाह खाँ का सुषिर वाद्य है। विद्यार्थी प्रायः सितार और सरोद में भ्रम करते हैं, इसलिए अंतर पक्का कर लें: सितार में पर्दे होते हैं, सरोद में नहीं।
कर्नाटक संगीत में प्रयुक्त घटम किस वर्ग का वाद्य है?
- A.अवनद्ध वाद्य
- B.सुषिर वाद्य
- C.घन वाद्य
- D.तत वाद्य
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सही उत्तर: C. घन वाद्य
व्याख्या
सही उत्तर C, घन वाद्य है। घटम मिट्टी का घड़ा है और उसके मुँह पर कुछ भी मढ़ा नहीं होता। वादक उँगलियों, हथेलियों और कलाइयों से घड़े के शरीर पर आघात करता है और घड़े के मुँह को पेट से लगाकर या हटाकर स्वर बदलता है। चूँकि ठोस शरीर स्वयं कम्पित होता है, यह मंजीरा, जलतरंग और मोरसिंग के साथ घन वर्ग में आता है। इसके सबसे प्रसिद्ध वादक टी. एच. विक्कू विनायकराम हैं।
विकल्प A, अवनद्ध वाद्य, के लिए मढ़े हुए चमड़े की आवश्यकता होती, जो घटम में नहीं है; उसी कर्नाटक वृंद के मृदंगम, कंजीरा और तवील अवश्य इस वर्ग में आते हैं। विकल्प B, सुषिर वाद्य, में नादस्वरम और बाँसुरी जैसे फूँक वाले वाद्य आते हैं। विकल्प D, तत वाद्य, में वीणा और वायलिन जैसे तार वाले वाद्य। घड़े का आकार देखकर विद्यार्थी उसे ढोल मान बैठते हैं, और यह प्रश्न ठीक उसी भूल को पकड़ने के लिए बनता है।