नाट्यशास्त्र के वर्गीकरण में फूँक से बजने वाले वाद्यों को किस नाम से पुकारा जाता है?
- A.तत वाद्य
- B.सुषिर वाद्य
- C.अवनद्ध वाद्य
- D.घन वाद्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सुषिर वाद्य
व्याख्या
सही उत्तर B, सुषिर वाद्य है। सुषिर का अर्थ है खोखला, और इस वर्ग में वे सभी वाद्य आते हैं जिनमें नली के भीतर की वायु कम्पित होकर ध्वनि उत्पन्न करती है। बाँसुरी, शहनाई, नादस्वरम, पुंगी, अलगोजा और शंख सभी इसी वर्ग के हैं, तथा हारमोनियम भी, जिसकी रीडें धौंकनी की हवा से बजती हैं।
विकल्प A, तत वाद्य, तार वाले वाद्यों का वर्ग है, जैसे सितार, सरोद, सारंगी, वीणा और संतूर। विकल्प C, अवनद्ध वाद्य, में चमड़ा मढ़े वाद्य आते हैं, अर्थात् तबला, पखावज, मृदंगम और चेंडा जैसे ढोल। विकल्प D, घन वाद्य, धातु, मिट्टी या लकड़ी के ठोस वाद्यों का वर्ग है, जो बिना किसी स्वर मिलान के आघात या हिलाने से बजते हैं, जैसे मंजीरा, घटम और जलतरंग। चारों नाम एक ही वर्गीकरण के हैं, इसलिए ये सदा साथ रखे जाते हैं।