'एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (UPI)' को लागू करने का सबसे संभावित परिणाम निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- A.ऑनलाइन भुगतान के लिए मोबाइल वॉलेट आवश्यक नहीं रहेंगे।
- B.लगभग दो दशकों में डिजिटल मुद्रा भौतिक मुद्रा का पूरी तरह स्थान ले लेगी।
- C.FDI अंतर्वाह में भारी वृद्धि होगी।
- D.गरीबों को सब्सिडी का प्रत्यक्ष हस्तांतरण बहुत प्रभावी हो जाएगा।
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, ऑनलाइन भुगतान के लिए मोबाइल वॉलेट आवश्यक नहीं रहेंगे। UPI फ़ोन के ज़रिए पैसा सीधे एक बैंक खाते से दूसरे में भेजता है, इसलिए पहले किसी अलग वॉलेट में पैसा डालने की ज़रूरत नहीं रहती।
UPI को 2016 में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने शुरू किया, जो RBI और भारतीय बैंक संघ के मार्गदर्शन में बनी खुदरा भुगतान की शीर्ष संस्था है। उपयोगकर्ता अपना बैंक खाता किसी UPI ऐप से जोड़ता है, उसे name@bank जैसा वर्चुअल भुगतान पता मिलता है, और वह PIN डालकर किसी भी समय तुरंत पैसा भेज या मँगा सकता है। भुगतान सीधे बैंक खाते से होने के कारण प्रीपेड मोबाइल वॉलेट में पैसा भरने वाला पुराना तरीका अनावश्यक हो गया।
B गलत है क्योंकि UPI डिजिटल भुगतान आसान बनाता है, पर इसका अर्थ नकदी का खत्म होना नहीं; चलन में मुद्रा बढ़ती ही रही है। C गलत है क्योंकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश व्यापक आर्थिक कारणों पर निर्भर है, किसी भुगतान इंटरफ़ेस पर नहीं। D गलत है क्योंकि सब्सिडी का हस्तांतरण प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, आधार और जन धन खातों से होता है।
Exam tip: UPI = NPCI, 2016, खाते से खाते में तुरंत भुगतान; DBT JAM त्रिमूर्ति पर चलता है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. कृषि क्षेत्र को अल्पकालिक ऋण देने के मामले में ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCB) अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की तुलना में अधिक ऋण देते हैं।
2. DCCB के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को धन उपलब्ध कराना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
DCCB बीच की कड़ी हैं जो प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को धन देते हैं, लेकिन अल्पकालिक कृषि ऋण का सबसे बड़ा हिस्सा DCCB नहीं, वाणिज्यिक बैंक देते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →RBI द्वारा घोषित 'मार्जिनल कॉस्ट ऑफ़ फ़ंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR)' का/के उद्देश्य क्या है/हैं?
1. ये दिशानिर्देश अग्रिमों पर ब्याज दरें तय करने के लिए बैंकों द्वारा अपनाई जाने वाली पद्धति में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद करते हैं।
2. ये दिशानिर्देश ऐसी ब्याज दरों पर बैंक ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद करते हैं जो उधारकर्ताओं और बैंकों दोनों के लिए उचित हों।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
RBI ने MCLR इसलिए लागू किया ताकि बैंकों का ऋण-मूल्य निर्धारण अधिक पारदर्शी हो और उधारकर्ताओं को दोनों पक्षों के लिए उचित दरें मिलें।
पूरी व्याख्या पढ़ें →डिजिटल रुपये के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा अपनी मौद्रिक नीति के अनुरूप जारी की गई संप्रभु मुद्रा है।
2. यह RBI के तुलन-पत्र में देयता के रूप में दिखता है।
3. अपनी बनावट के कारण ही यह मुद्रास्फीति के विरुद्ध बीमित है।
4. यह वाणिज्यिक बैंक मुद्रा और नकदी के बदले स्वतंत्र रूप से परिवर्तनीय है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 1 और 3
- C.केवल 2 और 4
- D.1, 2 और 4
उत्तर देखें
डिजिटल रुपया RBI द्वारा जारी संप्रभु मुद्रा है, नोटों की तरह RBI की देयता है, और नकदी व बैंक जमा से एक के बदले एक बदला जा सकता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: सिंडिकेटेड ऋण देने से उधारकर्ता के चूक का जोखिम कई ऋणदाताओं में बँट जाता है।
कथन-II: सिंडिकेटेड ऋण एक निश्चित राशि/एकमुश्त धनराशि हो सकता है, परंतु क्रेडिट लाइन नहीं हो सकता।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?
- A.कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है
- B.कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, परंतु कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता
- C.कथन-I सही है, परंतु कथन-II गलत है
- D.कथन-I गलत है, परंतु कथन-II सही है
उत्तर देखें
सिंडिकेट चूक का जोखिम बाँट लेता है, और सिंडिकेटेड सुविधा सावधि ऋण भी हो सकती है और क्रेडिट लाइन भी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विदेशी बैंकों के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा लागू नियम/नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. भारत में पूर्ण स्वामित्व वाली बैंकिंग सहायक कंपनियों के लिए कोई न्यूनतम पूँजी आवश्यकता नहीं है। 2. भारत में पूर्ण स्वामित्व वाली बैंकिंग सहायक कंपनियों के लिए बोर्ड के कम से कम 50% सदस्य भारतीय नागरिक होने चाहिए। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें
RBI विदेशी बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के लिए न्यूनतम पूँजी तय करता है, और बोर्ड के कम से कम आधे सदस्यों का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →