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GK24
भारतीय राजव्यवस्थाकठिनपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper I

भारतीय राजव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : I. अध्यादेश किसी भी केंद्रीय अधिनियम में संशोधन कर सकता है। II. अध्यादेश किसी मूल अधिकार को न्यून (कम) कर सकता है। III. अध्यादेश पिछली तिथि से लागू हो सकता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. A.केवल I और II
  2. B.केवल II और III
  3. C.केवल I और III
  4. D.I, II और III

सही उत्तर

C. केवल I और III

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल I और III। अध्यादेश का बल संसद के अधिनियम के समान होता है, इसलिए यह किसी केंद्रीय कानून में संशोधन कर सकता है और भूतलक्षी हो सकता है, पर किसी भी कानून की तरह यह मूल अधिकार नहीं छीन सकता।

अनुच्छेद 123 के अंतर्गत राष्ट्रपति तब अध्यादेश जारी कर सकते हैं जब संसद का कोई भी सदन सत्र में न हो और तुरंत कार्रवाई आवश्यक हो; संसद के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह बाद यह समाप्त हो जाता है। कानून माने जाने के कारण यह संसद के किसी अधिनियम में संशोधन कर सकता है या उसे निरस्त कर सकता है, और पिछली तिथि से भी लागू किया जा सकता है। पर अनुच्छेद 13 में 'विधि' के अर्थ में अध्यादेश शामिल है, इसलिए मूल अधिकार को न्यून करने वाला अध्यादेश उस सीमा तक शून्य होता है।

A और D गलत हैं: इनमें कथन II शामिल है, जो गलत है।

B गलत है: इसमें II शामिल है और सही कथन I छूट गया है।

Exam tip: अध्यादेश = अनुच्छेद 123 (राष्ट्रपति), अनुच्छेद 213 (राज्यपाल); अधिनियम के समान बल; भूतलक्षी हो सकता है; संविधान संशोधन या मूल अधिकार न्यून नहीं कर सकता।

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Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2021, GKमध्यम

निम्नलिखित में से किस देश के संघ को "अविनाशी राज्यों का अविनाशी संघ" कहा गया है?

  1. A.भारत
  2. B.U.S.A.
  3. C.कनाडा
  4. D.ऑस्ट्रेलिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. U.S.A.

। अमेरिकी संघ को "अविनाशी राज्यों का अविनाशी संघ" कहा जाता है; यह वाक्य अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के टेक्सास बनाम व्हाइट (1869) निर्णय से आया है।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-I 2019, GKआसान

मोबाइल ऐप 'cVIGIL' किसमें सहायक है?

  1. A.सरकारी कार्यालयों में स्वतंत्र और निष्पक्ष ई-निविदा प्रक्रिया चलाने में
  2. B.सार्वजनिक सेवाओं में भ्रष्टाचार से लड़ने में
  3. C.नगरपालिका क्षेत्रों से कचरा हटाने में
  4. D.चुनाव वाले राज्यों में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की सूचना देने में
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. चुनाव वाले राज्यों में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की सूचना देने में

cVIGIL भारत निर्वाचन आयोग का ऐप है, जिससे नागरिक आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत करते हैं। इसका नाम 'सतर्क नागरिक' (विजिलेंट सिटिजन) से बना है।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2019, GKमध्यम

भारत के संविधान में अधिकार-पृच्छा (क्वो वारंटो) रिट जारी करने के लिए निर्धारित निम्नलिखित में से कौन-सी शर्त सही नहीं है?

  1. A.पद सार्वजनिक होना चाहिए और किसी कानून द्वारा सृजित होना चाहिए
  2. B.पद मौलिक (सब्सटैंटिव) होना चाहिए
  3. C.उस व्यक्ति की उस पद पर नियुक्ति में संविधान या किसी कानून का उल्लंघन हुआ हो
  4. D.नियुक्ति किसी वैधानिक प्रावधान के अनुरूप है
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. नियुक्ति किसी वैधानिक प्रावधान के अनुरूप है

अधिकार-पृच्छा तभी जारी होती है जब नियुक्ति कानून के विरुद्ध हो; यदि नियुक्ति वैधानिक प्रावधान के अनुरूप है तो न्यायालय के सुधारने के लिए कुछ नहीं बचता।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2020, GKमध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सी अधिकार-पृच्छा (क्वो वारंटो) रिट जारी करने की आवश्यक शर्त नहीं है?

  1. A.पद सार्वजनिक पद होना चाहिए।
  2. B.पद किसी कानून या स्वयं संविधान द्वारा सृजित होना चाहिए।
  3. C.पद मौलिक (सब्सटैंटिव) नहीं होना चाहिए।
  4. D.उस व्यक्ति को उस पद पर बिठाने में संविधान या किसी कानून का उल्लंघन हुआ हो।
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पद मौलिक (सब्सटैंटिव) नहीं होना चाहिए।

अधिकार-पृच्छा के लिए पद का मौलिक (सब्सटैंटिव) होना आवश्यक है, इसलिए 'पद मौलिक नहीं होना चाहिए' कोई शर्त नहीं है।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2018, Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से किस संविधान संशोधन ने संसद/राज्य विधानमंडलों के सदनों के अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों को बहुत अधिक मज़बूत किया है?

  1. A.61वाँ संशोधन, जिसने मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की
  2. B.52वें संशोधन के दल-बदल विरोधी प्रावधान
  3. C.44वें संशोधन द्वारा 42वें संशोधन के कई प्रावधानों का निरसन
  4. D.73वाँ संशोधन, जिसने पंचायत निकायों को व्यापक शक्तियाँ दीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 52वें संशोधन के दल-बदल विरोधी प्रावधान

1985 के इस संशोधन ने हर सदन के पीठासीन अधिकारी को यह तय करने वाला प्राधिकारी बनाया कि कोई सदस्य दल-बदल के कारण अयोग्य है या नहीं।