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GK24
भारतीय राजव्यवस्थाकठिनपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2019, Paper I

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा वोटर वेरिफ़ायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) प्रणाली का पहली बार प्रयोग किस में किया गया था?

  1. A.उत्तर परवूर विधानसभा क्षेत्र, केरल
  2. B.नोकसेन विधानसभा क्षेत्र, नागालैंड
  3. C.मापुसा विधानसभा क्षेत्र, गोवा
  4. D.नंबोल विधानसभा क्षेत्र, मणिपुर

सही उत्तर

B. नोकसेन विधानसभा क्षेत्र, नागालैंड

व्याख्या

सही उत्तर है B, नोकसेन विधानसभा क्षेत्र, नागालैंड। निर्वाचन आयोग ने सितंबर 2013 में नागालैंड के त्वेनसांग ज़िले के नोकसेन उपचुनाव में पहली बार EVM के साथ VVPAT मशीनों का प्रयोग किया।

VVPAT, EVM से जुड़ा एक प्रिंटर है। मतदाता के बटन दबाते ही यह उम्मीदवार की क्रम संख्या, नाम और चुनाव चिह्न वाली एक पर्ची छापता है, जो सात सेकंड तक एक काँच की खिड़की के पीछे दिखती है और फिर एक सीलबंद डिब्बे में गिर जाती है। सर्वोच्च न्यायालय ने सुब्रमण्यम स्वामी बनाम निर्वाचन आयोग (2013) में कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए पेपर ट्रेल ज़रूरी है, और उसी वर्ष चुनाव संचालन नियमों में संशोधन किया गया। 2019 के लोकसभा चुनाव से हर मतदान केंद्र पर VVPAT का प्रयोग हो रहा है।

A गलत है: केरल का उत्तर परवूर 1982 में EVM के पहले प्रयोग के लिए प्रसिद्ध है।

C गलत है: गोवा पूरे राज्य के चुनाव (2017) में VVPAT अपनाने वाला पहला राज्य था, पहला निर्वाचन क्षेत्र नहीं।

D गलत है: मणिपुर का नंबोल VVPAT का पहला निर्वाचन क्षेत्र नहीं था।

परीक्षा टिप: पहली EVM — उत्तर परवूर, केरल (1982); पहला VVPAT — नोकसेन, नागालैंड (2013)।

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Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2025, Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. A.भारत का सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है।
  2. B.भारत में उच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय हैं।
  3. C.भारत में अधीनस्थ न्यायालय अभिलेख न्यायालय हैं।
  4. D.भारत में सभी न्यायालय अभिलेख न्यायालय नहीं हैं।
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भारत में अधीनस्थ न्यायालय अभिलेख न्यायालय हैं।

संविधान के अनुसार केवल सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय हैं; अधीनस्थ न्यायालय नहीं। अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय घोषित करता है और अनुच्छेद 215 हर उच्च न्यायालय को।

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Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2017, Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से किस विद्वान ने भारत के संविधान को एक 'निर्बाध जाल' (सीमलेस वेब) के रूप में परिकल्पित किया है?

  1. A.एम. वी. पायली
  2. B.डी. डी. बसु
  3. C.ग्रैनविल ऑस्टिन
  4. D.सुभाष कश्यप
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. ग्रैनविल ऑस्टिन

इस अमेरिकी इतिहासकार ने भारतीय संविधान को तीन घनिष्ठ रूप से जुड़े सूत्रों का "सीमलेस वेब" (निर्बाध जाल) कहा था।

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Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2018, GS Paper Iमध्यम

भारत की संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सी संसदीय समिति इस बात की जाँच कर सदन को प्रतिवेदन देती है कि संविधान द्वारा प्रदत्त या संसद द्वारा प्रत्यायोजित विनियम, नियम, उपनियम, उपविधियाँ आदि बनाने की शक्तियों का कार्यपालिका द्वारा ऐसे प्रत्यायोजन की सीमा के भीतर उचित रूप से प्रयोग किया जा रहा है या नहीं?

  1. A.सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति
  2. B.अधीनस्थ विधान संबंधी समिति
  3. C.नियम समिति
  4. D.कार्य मंत्रणा समिति
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अधीनस्थ विधान संबंधी समिति

यह समिति जाँचती है कि प्रत्यायोजित शक्तियों के अंतर्गत कार्यपालिका द्वारा बनाए गए नियम, विनियम और उपविधियाँ संसद द्वारा तय सीमाओं के भीतर हैं या नहीं।

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Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2022, GS Paper Iकठिन

लोकसभा के उपाध्यक्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमों के अनुसार उपाध्यक्ष का निर्वाचन उस तिथि को होगा, जो अध्यक्ष नियत करे।

2. यह अनिवार्य प्रावधान है कि लोकसभा उपाध्यक्ष के रूप में निर्वाचित उम्मीदवार या तो प्रमुख विपक्षी दल से हो या सत्तारूढ़ दल से।

3. सदन की बैठक की अध्यक्षता करते समय उपाध्यक्ष को अध्यक्ष के समान शक्ति होती है और उसके निर्णयों के विरुद्ध कोई अपील नहीं होती।

4. उपाध्यक्ष की नियुक्ति के संबंध में सुस्थापित संसदीय प्रथा यह है कि प्रस्ताव अध्यक्ष द्वारा रखा जाता है और प्रधानमंत्री द्वारा उसका विधिवत समर्थन किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 3
  2. B.1, 2 और 3
  3. C.केवल 3 और 4
  4. D.केवल 2 और 4
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केवल 1 और 3

उपाध्यक्ष के निर्वाचन की तिथि अध्यक्ष तय करता है, और पीठासीन उपाध्यक्ष को अध्यक्ष की पूरी शक्तियाँ होती हैं; कथन 2 और 4 ऐसे नियम बताते हैं जो हैं ही नहीं।

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Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2022, GS Paper Iमध्यम

भारत में न्यायालयों द्वारा जारी की जाने वाली रिटों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. परमादेश (मैंडमस) किसी निजी संगठन के विरुद्ध तब तक जारी नहीं होगा, जब तक उसे कोई लोक कर्तव्य न सौंपा गया हो।

2. परमादेश किसी कंपनी के विरुद्ध जारी नहीं होगा, भले ही वह सरकारी कंपनी हो।

3. कोई भी लोकहित-चिंतक व्यक्ति अधिकार-पृच्छा (क्वो वारंटो) रिट पाने के लिए न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

परमादेश हर उस संस्था पर लागू होता है जिस पर कोई लोक कर्तव्य है, सरकारी कंपनियों पर भी, और अधिकार-पृच्छा की माँग कोई भी इच्छुक व्यक्ति कर सकता है, केवल पीड़ित नहीं।

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