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GK24
भारतीय राजव्यवस्थाआसानपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2017, GS Paper I

भारत में, न्यायिक पुनर्विलोकन का अर्थ है

  1. A.विधियों और कार्यपालिका आदेशों की सांविधानिकता के विषय में न्यायपालिका द्वारा विचार करने की शक्ति।
  2. B.विधायिकाओं द्वारा बनाई गई विधियों के विवेक पर प्रश्न करने की न्यायपालिका की शक्ति।
  3. C.सभी विधायी अधिनियमों के राष्ट्रपति द्वारा अनुमति दिए जाने से पहले उनका पुनर्विलोकन करने की न्यायपालिका की शक्ति।
  4. D.समान या भिन्न मामलों में पहले दिए गए अपने निर्णयों का पुनर्विलोकन करने की न्यायपालिका की शक्ति।

सही उत्तर

A. विधियों और कार्यपालिका आदेशों की सांविधानिकता के विषय में न्यायपालिका द्वारा विचार करने की शक्ति।

व्याख्या

सही उत्तर है A, विधियों और कार्यपालिका आदेशों की सांविधानिकता के विषय में न्यायपालिका द्वारा विचार करने की शक्ति। न्यायिक पुनर्विलोकन से सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय संविधान का उल्लंघन करने वाले किसी भी कानून या कार्यपालिका के कदम को रद्द कर सकते हैं। इसका आधार अनुच्छेद 13 है, जो मौलिक अधिकारों से असंगत कानूनों को शून्य करता है, और अनुच्छेद 32 तथा 226, जिनसे नागरिक न्यायालय जा सकते हैं। केशवानंद भारती (1973) और बाद में एल. चंद्र कुमार (1997) में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे मूल ढांचे का हिस्सा माना, इसलिए संविधान संशोधन से भी इसे हटाया नहीं जा सकता। विकल्प B गलत है, क्योंकि न्यायालय केवल यह देखते हैं कि कानून संवैधानिक है या नहीं, यह नहीं कि वह समझदारी भरा है; यह विधायिका का विषय है। विकल्प C गलत है, क्योंकि भारत में न्यायालय विधेयकों की जांच राष्ट्रपति की अनुमति से पहले नहीं करते; अनुच्छेद 143 की सलाहकारी व्यवस्था को छोड़कर वे कानून बनने के बाद ही समीक्षा करते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि अपने ही निर्णय पर दोबारा विचार अनुच्छेद 137 की पुनर्विलोकन शक्ति है, जो अलग बात है। परीक्षा टिप: न्यायिक पुनर्विलोकन — अनुच्छेद 13, 32, 226; मूल ढांचे का हिस्सा; विचार अमेरिका से लिया गया।

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Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-I 2021, GKमध्यम

निम्नलिखित में से कौन संविधान के कार्यकरण की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग (2000) के अध्यक्ष थे?

  1. A.न्यायमूर्ति एम.एन. वेंकटचलैया
  2. B.न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा
  3. C.न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र
  4. D.न्यायमूर्ति वाई.के. सभरवाल
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. न्यायमूर्ति एम.एन. वेंकटचलैया

संविधान के कार्यकरण की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग फरवरी 2000 में केंद्र सरकार ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एन. वेंकटचलैया की अध्यक्षता में बनाया था।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-I 2022, GKआसान

भारत के संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद भारत के प्रधानमंत्री से अपेक्षा करता है कि वह मंत्रिपरिषद के निर्णयों से जुड़ी जानकारी भारत के राष्ट्रपति को दे?

  1. A.अनुच्छेद 78
  2. B.अनुच्छेद 74
  3. C.अनुच्छेद 75
  4. D.अनुच्छेद 81
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अनुच्छेद 78

अनुच्छेद 78 राष्ट्रपति के प्रति प्रधानमंत्री के कर्तव्य बताता है, जिनमें सबसे प्रमुख है राष्ट्रपति को सूचित रखना।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-I 2024, GKमध्यम

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. भारत में, विशेष विवाह अधिनियम अंतर-धार्मिक विवाह करने वाले व्यक्ति को संरक्षण देता है।

2. अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकारों का अभिन्न अंग है।

3. मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा भी प्रत्येक वयस्क, सहमति देने वाले व्यक्ति के वैवाहिक अधिकारों को मान्यता देती है।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 2 और 3
  2. B.केवल 1 और 3
  3. C.1, 2 और 3
  4. D.केवल 1
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1, 2 और 3

तीनों कथन सही हैं। विशेष विवाह अधिनियम, 1954 किन्हीं भी दो भारतीयों को, धर्म चाहे जो हो, धर्म परिवर्तन के बिना पंजीकरण द्वारा विवाह की सुविधा देता है, इसलिए अंतर-धार्मिक विवाह इसी कानून के तहत संरक्षित हैं।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2024, GKमध्यम

4 नवंबर, 1948 को डॉ. बी.आर. आंबेडकर द्वारा प्रस्तुत संविधान के प्रारूप में राज्यों के लिए निम्नलिखित में से किस पद का प्रयोग किया गया था?

  1. A.राज्यों का संघ (Union of States)
  2. B.राज्यों का परिसंघ (Federation of States)
  3. C.स्वायत्त राज्य
  4. D.सहायक राज्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. राज्यों का संघ (Union of States)

संविधान के प्रारूप के अनुच्छेद 1 में भारत को 'राज्यों का संघ' कहा गया था, और यही शब्द आज भी संविधान के अनुच्छेद 1 में हैं।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

उच्चतम न्यायालय ने गरिमा के साथ मृत्यु के अधिकार के भाग रूप में जीवित वसीयत या अग्रिम चिकित्सा निर्देश को किस वाद में मान्यता दी?

  1. A.अरुणा शानबाग बनाम भारत संघ, 2011
  2. B.कॉमन कॉज बनाम भारत संघ, 2018
  3. C.ज्ञान कौर बनाम पंजाब राज्य, 1996
  4. D.पी. रतिनम बनाम भारत संघ, 1994
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कॉमन कॉज बनाम भारत संघ, 2018

संविधान पीठ ने कहा कि गरिमा के साथ मृत्यु का अधिकार अनुच्छेद 21 के प्राण के अधिकार का भाग है, और स्वस्थ चित्त वाला वयस्क अग्रिम निर्देश, जिसे लोकप्रिय भाषा में जीवित वसीयत कहते हैं, बना सकता है, जिसमें वह असाध्य रोग या स्थायी निर्जीव अवस्था में जीवन रक्षक उपचार…