भारत के संविधान में संशोधन संबंधी विधेयक के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही नहीं है?
- A.यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 368(2) द्वारा शासित होता है।
- B.भारत के संविधान में संशोधन करने वाले विधेयक को पारित करने के लिए संयुक्त बैठक का सहारा लिया जा सकता है।
- C.राज्य विधानमंडल भारत के संविधान में संशोधन के लिए कोई विधेयक या प्रस्ताव आरंभ नहीं कर सकते।
- D.भारत के संविधान में संशोधन के लिए संसद में कोई विधेयक प्रस्तुत करने हेतु भारत के राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक नहीं है।
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, भारत के संविधान में संशोधन करने वाले विधेयक को पारित करने के लिए संयुक्त बैठक का सहारा लिया जा सकता है। यह कथन गलत है, क्योंकि संविधान संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों को अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित करना होता है, और अनुच्छेद 108 की संयुक्त बैठक इस पर लागू नहीं होती। यदि दोनों सदन असहमत हों, तो विधेयक गिर जाता है। अनुच्छेद 368(2) प्रक्रिया बताता है: विधेयक केवल संसद के किसी भी सदन में, मंत्री या निजी सदस्य द्वारा, प्रस्तुत हो सकता है; हर सदन को इसे कुल सदस्यता के बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित करना होता है; कुछ संशोधनों के लिए आधे राज्यों के विधानमंडलों का अनुसमर्थन भी चाहिए; फिर राष्ट्रपति को स्वीकृति देनी ही होती है, जिसे 1971 के 24वें संशोधन ने अनिवार्य किया। विकल्प A चुनना गलत है, क्योंकि प्रक्रिया सचमुच अनुच्छेद 368(2) में है। विकल्प C चुनना गलत है, क्योंकि राज्य विधानमंडल संशोधन आरंभ नहीं कर सकते। विकल्प D चुनना गलत है, क्योंकि ऐसा विधेयक लाने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति नहीं चाहिए। परीक्षा टिप: संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक नहीं होती; यह केवल साधारण विधेयकों के लिए है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से किस समिति में संसद के उच्च सदन के सदस्य नहीं होते? 1. लोक लेखा समिति 2. प्राक्कलन समिति 3. सार्वजनिक उपक्रम समिति नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
- A.1 और 2
- B.1 और 3
- C.केवल 2
- D.केवल 3
उत्तर देखें
प्राक्कलन समिति के सभी सदस्य लोकसभा से होते हैं, जबकि बाकी दो वित्तीय समितियों में राज्यसभा के सदस्य भी होते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. भारत के महान्यायवादी का कर्तव्य भारत सरकार को ऐसे विधिक विषयों पर सलाह देना और विधिक प्रकृति के ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करना है, जो भारत के राष्ट्रपति समय-समय पर उसे सौंपें या निर्दिष्ट करें 2. भारत का सॉलिसिटर जनरल देश का द्वितीय विधि अधिकारी है, जो महान्यायवादी की सहायता करता है और स्वयं कई अपर सॉलिसिटर जनरलों द्वारा सहायता प्राप्त करता है उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
कथन 1 अनुच्छेद 76 का ही सार है और कथन 2 सॉलिसिटर जनरल की महान्यायवादी के नीचे की स्थिति को सही बताता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा भारत के संविधान के अंतर्गत मौलिक अधिकार नहीं है?
- A.समता का अधिकार
- B.स्वतंत्रता का अधिकार
- C.नागरिकता का अधिकार
- D.शोषण के विरुद्ध अधिकार
उत्तर देखें
नागरिकता का विषय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5 से 11) में है, भाग III के मौलिक अधिकारों में नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के संविधान की किस अनुसूची में दल-बदल के आधार पर निरर्हता के उपबंध दिए गए हैं?
- A.नौवीं अनुसूची
- B.दसवीं अनुसूची
- C.ग्यारहवीं अनुसूची
- D.छठी अनुसूची
उत्तर देखें
दल-बदल विरोधी कानून कही जाने वाली दसवीं अनुसूची बताती है कि संसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य दल-बदल के कारण कब अपनी सदस्यता खोता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रशासनिक अधिकरणों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा सही नहीं है?
- A.संसद विधि द्वारा संघ और राज्य, दोनों स्तरों पर प्रशासनिक अधिकरण गठित कर सकती है।
- B.अधिकरण लोक सेवाओं में नियुक्त व्यक्तियों की भर्ती और सेवा शर्तों से संबंधित विवादों और शिकायतों पर विचार कर सकते हैं।
- C.संसद की विधि द्वारा स्थापित अधिकरण विशेष अनुमति से अपील के लिए सभी न्यायालयों के क्षेत्राधिकार को अपवर्जित कर सकते हैं।
- D.अधिकरणों की स्थापना करने वाली विधि साक्ष्य के नियमों सहित अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं का उपबंध कर सकती है।
उत्तर देखें
1976 के 42वें संशोधन से जोड़ा गया अनुच्छेद 323A संसद को यह शक्ति देता है कि वह विधि बनाकर संघ और हर राज्य या राज्यों के समूह के लिए प्रशासनिक अधिकरण बनाए, जो लोक सेवकों की भर्ती और सेवा शर्तों के विवाद सुनें।
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