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GK24
भारतीय राजव्यवस्थामध्यमपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2026, Paper I

भारत के संविधान के अनुच्छेद 20(1) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. इसमें कार्योत्तर (ex post facto) विधान के विरुद्ध प्रावधान है। 2. विधायिका किसी आपराधिक कानून को भूतलक्षी (पिछली तिथि से लागू) बनाने में सक्षम नहीं होगी। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए।

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 2 दोनों
  4. D.न तो 1 और न ही 2

सही उत्तर

C. 1 और 2 दोनों

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1 और 2 दोनों। अनुच्छेद 20(1) कार्योत्तर आपराधिक कानूनों पर रोक लगाता है, इसलिए विधायिका किसी आपराधिक कानून को पिछली तिथि से लागू नहीं कर सकती।

अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण देता है। खंड (1) कहता है कि किसी व्यक्ति को तभी दोषी ठहराया जा सकता है जब उसने कार्य के समय लागू किसी कानून का उल्लंघन किया हो, और उसे उस समय लागू दंड से अधिक दंड नहीं दिया जा सकता। यही कार्योत्तर कानूनों से संरक्षण है। यह रोक केवल आपराधिक कानूनों पर है: दीवानी दायित्व या कर पिछली तिथि से लगाया जा सकता है। यह केवल दोषसिद्धि और सजा पर लागू होता है, मुकदमे की प्रक्रिया पर नहीं। खंड (2) दोहरे दंड से और खंड (3) आत्म-अभिशंसन से बचाता है; अनुच्छेद 20 आपातकाल में भी निलंबित नहीं होता।

A गलत है: कथन 2 भी सही है, क्योंकि वह इसी खंड का प्रभाव बताता है।

B गलत है: कथन 1 तो अनुच्छेद 20(1) का मूल है।

D गलत है: दोनों कथन सही हैं।

Exam tip: अनुच्छेद 20 = (1) कार्योत्तर आपराधिक कानून नहीं, (2) दोहरा दंड नहीं, (3) आत्म-अभिशंसन नहीं।

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Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2021, GKमध्यम

निम्नलिखित में से किस देश के संघ को "अविनाशी राज्यों का अविनाशी संघ" कहा गया है?

  1. A.भारत
  2. B.U.S.A.
  3. C.कनाडा
  4. D.ऑस्ट्रेलिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. U.S.A.

। अमेरिकी संघ को "अविनाशी राज्यों का अविनाशी संघ" कहा जाता है; यह वाक्य अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के टेक्सास बनाम व्हाइट (1869) निर्णय से आया है।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-I 2019, GKआसान

मोबाइल ऐप 'cVIGIL' किसमें सहायक है?

  1. A.सरकारी कार्यालयों में स्वतंत्र और निष्पक्ष ई-निविदा प्रक्रिया चलाने में
  2. B.सार्वजनिक सेवाओं में भ्रष्टाचार से लड़ने में
  3. C.नगरपालिका क्षेत्रों से कचरा हटाने में
  4. D.चुनाव वाले राज्यों में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की सूचना देने में
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. चुनाव वाले राज्यों में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की सूचना देने में

cVIGIL भारत निर्वाचन आयोग का ऐप है, जिससे नागरिक आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत करते हैं। इसका नाम 'सतर्क नागरिक' (विजिलेंट सिटिजन) से बना है।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2019, GKमध्यम

भारत के संविधान में अधिकार-पृच्छा (क्वो वारंटो) रिट जारी करने के लिए निर्धारित निम्नलिखित में से कौन-सी शर्त सही नहीं है?

  1. A.पद सार्वजनिक होना चाहिए और किसी कानून द्वारा सृजित होना चाहिए
  2. B.पद मौलिक (सब्सटैंटिव) होना चाहिए
  3. C.उस व्यक्ति की उस पद पर नियुक्ति में संविधान या किसी कानून का उल्लंघन हुआ हो
  4. D.नियुक्ति किसी वैधानिक प्रावधान के अनुरूप है
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. नियुक्ति किसी वैधानिक प्रावधान के अनुरूप है

अधिकार-पृच्छा तभी जारी होती है जब नियुक्ति कानून के विरुद्ध हो; यदि नियुक्ति वैधानिक प्रावधान के अनुरूप है तो न्यायालय के सुधारने के लिए कुछ नहीं बचता।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2020, GKमध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सी अधिकार-पृच्छा (क्वो वारंटो) रिट जारी करने की आवश्यक शर्त नहीं है?

  1. A.पद सार्वजनिक पद होना चाहिए।
  2. B.पद किसी कानून या स्वयं संविधान द्वारा सृजित होना चाहिए।
  3. C.पद मौलिक (सब्सटैंटिव) नहीं होना चाहिए।
  4. D.उस व्यक्ति को उस पद पर बिठाने में संविधान या किसी कानून का उल्लंघन हुआ हो।
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पद मौलिक (सब्सटैंटिव) नहीं होना चाहिए।

अधिकार-पृच्छा के लिए पद का मौलिक (सब्सटैंटिव) होना आवश्यक है, इसलिए 'पद मौलिक नहीं होना चाहिए' कोई शर्त नहीं है।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2018, Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से किस संविधान संशोधन ने संसद/राज्य विधानमंडलों के सदनों के अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों को बहुत अधिक मज़बूत किया है?

  1. A.61वाँ संशोधन, जिसने मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की
  2. B.52वें संशोधन के दल-बदल विरोधी प्रावधान
  3. C.44वें संशोधन द्वारा 42वें संशोधन के कई प्रावधानों का निरसन
  4. D.73वाँ संशोधन, जिसने पंचायत निकायों को व्यापक शक्तियाँ दीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 52वें संशोधन के दल-बदल विरोधी प्रावधान

1985 के इस संशोधन ने हर सदन के पीठासीन अधिकारी को यह तय करने वाला प्राधिकारी बनाया कि कोई सदस्य दल-बदल के कारण अयोग्य है या नहीं।