आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना 5.0 का क्रियान्वयन कौन करता है?
- A.भारतीय रिजर्व बैंक
- B.भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक
- C.नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी
- D.राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
सही उत्तर
C. नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी
व्याख्या
सही उत्तर नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी है, जिसे एनसीजीटीसी लिखा जाता है। बैकग्राउंडर इसी को क्रियान्वयन एजेंसी बताता है और जोड़ता है कि उधारकर्ताओं को एनसीजीटीसी की तय पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी, जिनमें खाते की स्थिति और अन्य ऋण मानदंड शामिल हैं। विकल्प A सबसे आकर्षक भ्रम है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक का नाम विज्ञप्ति में आता है, पर वह केवल बेंचमार्क की व्याख्या में है। ईबीएलआर और एमसीएलआर केंद्रीय बैंक से जुड़ी दरें हैं, और योजना में एमएसएमई ऋण ईबीएलआर से तथा गैर-एमएसएमई ऋण एमसीएलआर से जुड़े हैं। विकल्प B और विकल्प D उन विकास वित्त संस्थानों के नाम हैं जो लघु उद्योग और कृषि के लिए अपनी पुनर्वित्त तथा गारंटी योजनाएं चलाते हैं, इसलिए ये विकल्प संभव लगते हैं, पर इनमें से कोई इस योजना का क्रियान्वयन नहीं करता। वितरण की कड़ी याद रखें, यानी गारंटी एनसीजीटीसी देती है, ऋण सदस्य ऋणदाता संस्थान देते हैं और आवेदन जन समर्थ पोर्टल से होता है।
पूरा लेख पढ़ें: ईसीएलजीएस 5.0: ₹2.55 लाख करोड़ की क्रेडिट गारंटी योजना
अभ्यास प्रश्न
ईसीएलजीएस 5.0 का लक्ष्य कितने अतिरिक्त ऋण प्रवाह को सुगम बनाना है?
- A.₹1.50 लाख करोड़
- B.₹2.55 लाख करोड़
- C.₹3.68 लाख करोड़
- D.₹5 लाख करोड़
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ₹2.55 लाख करोड़
व्याख्या
सही उत्तर ₹2.55 लाख करोड़ है। बैकग्राउंडर के अनुसार 5 मई 2026 को मंजूर और नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा चलाई जा रही यह योजना इतने अतिरिक्त ऋण प्रवाह को सुगम बनाना चाहती है, और यह 31 मार्च 2027 तक या इसी मूल्य की गारंटी जारी होने तक, जो भी पहले हो, चालू रहेगी। विकल्प C यहां जाल है, क्योंकि ₹3.68 लाख करोड़ इसी विज्ञप्ति का सही आंकड़ा है, पर वह पिछले चरणों का है। ईसीएलजीएस 1.0 से 4.0 तक 1.19 करोड़ गारंटियां जारी हुईं, जिनका मूल्य ₹3.68 लाख करोड़ था, और वे चरण 31 मार्च 2023 को समाप्त हो गए। विकल्प A और विकल्प D गोल संख्याएं हैं, जिनका समर्थन विज्ञप्ति में नहीं है। दोहराते समय दोनों आंकड़े अलग पंक्तियों में रखें, यानी ₹2.55 लाख करोड़ मौजूदा चरण का लक्ष्य है और ₹3.68 लाख करोड़ पहले चार चरणों की उपलब्धि है। मौजूदा चरण में 20 अगस्त 2026 तक ₹2,50,024 करोड़ की गारंटी दी जा चुकी थी।
ईसीएलजीएस 5.0 के तहत पात्र एमएसएमई को दिए जाने वाले ऋण पर क्रेडिट गारंटी कवरेज कितना है?
- A.75 प्रतिशत
- B.80 प्रतिशत
- C.90 प्रतिशत
- D.100 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 100 प्रतिशत
व्याख्या
सही उत्तर 100 प्रतिशत है। विज्ञप्ति दोनों स्तर साफ अलग करती है, यानी पात्र एमएसएमई को पूरी गारंटी मिलती है, जबकि पात्र गैर-एमएसएमई उधारकर्ताओं को 90 प्रतिशत कवरेज मिलता है। यही 90 प्रतिशत पात्र अनुसूचित यात्री एयरलाइनों को दिए ऋण पर भी लागू होता है। इसलिए विकल्प C सबसे आकर्षक गलत उत्तर है, क्योंकि 90 प्रतिशत योजना का सही आंकड़ा है, पर वह दूसरी श्रेणियों का है। विकल्प A और विकल्प B का उल्लेख विज्ञप्ति में कहीं नहीं है। इस तथ्य के साथ दो बातें और याद रखें। पहली, इस योजना के तहत सदस्य ऋणदाता संस्थानों से कोई गारंटी शुल्क नहीं लिया जाता। दूसरी, 2020 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत शुरू हुई मूल ईसीएलजीएस में भी कवरेज 100 प्रतिशत था, इसलिए छोटे उधारकर्ताओं के लिए पूरी गारंटी योजना की पुरानी विशेषता है। एमएसएमई के लिए अतिरिक्त ऋण उच्चतम कार्यशील पूंजी बकाया के 20 प्रतिशत तक और अधिकतम ₹100 करोड़ तक सीमित है।
रेलवे, दूरसंचार और बीमा जैसे मूलभूत क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर कितना एमडीआर लगेगा?
- A.प्रति लेन-देन एकसमान 5 रुपये
- B.लेन-देन मूल्य का 0.4 प्रतिशत
- C.लेन-देन मूल्य का 0.02 प्रतिशत
- D.कोई शुल्क नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. प्रति लेन-देन एकसमान 5 रुपये
व्याख्या
सही उत्तर प्रति लेन-देन एकसमान पांच रुपये है। विज्ञप्ति इसका कारण भी बताती है। एक निश्चित राशि महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं और कम लाभ पर चलने वाले कारोबारों को लागत की निश्चितता देती है, जो प्रतिशत आधारित शुल्क से नहीं मिलती। विकल्प बी सीमा से ऊपर के सामान्य व्यापारी भुगतान की दर है और इन नामित क्षेत्रों के बाहर लागू होती है, इसलिए यही सबसे आकर्षक गलत उत्तर है। विकल्प सी म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉकब्रोकरों और डीलरों से जुड़े भुगतानों की बहुत कम दर है, जो खुदरा निवेशकों को औपचारिक बाजार में बनाए रखने के लिए तय की गई है। विकल्प डी गलत है, क्योंकि ये क्षेत्र छूट में नहीं हैं, बस उन पर प्रतिशत के बदले एकसमान राशि लगती है। नामित क्षेत्रों की सूची भी याद रखें।
नए ढांचे में यूपीआई से किए गए व्यापारी भुगतान कितनी राशि तक एमडीआर से मुक्त रहेंगे?
- A.1,000 रुपये
- B.2,000 रुपये
- C.5,000 रुपये
- D.10,000 रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2,000 रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 2,000 रुपये है। इस राशि तक का प्रत्येक पर्सन-टू-मर्चेंट भुगतान मर्चेंट डिस्काउंट रेट से मुक्त रहेगा और ग्राहकों को ऐसे भुगतान पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। यह सीमा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विज्ञप्ति इसी के आधार पर बताती है कि लगभग छियानबे प्रतिशत व्यापारी लेन-देन अप्रभावित क्यों रहेंगे। ये लेन-देन या तो इस सीमा से कम हैं या छोटे व्यापारियों के लिए शून्य शुल्क वाली व्यवस्था में आते हैं। विकल्प ए गलत है, क्योंकि ऐसी कोई सीमा ढांचे में तय नहीं की गई है। विकल्प सी और विकल्प डी भी इसी कारण गलत हैं और ये वही गोल आंकड़े हैं जिनका अनुमान अभ्यर्थी तब लगाते हैं जब सही सीमा याद न हो। सीमा को उसके ऊपर लगने वाली दर के साथ जोड़कर याद रखें।
नया यूपीआई ढांचा किस अधिनियम के अंतर्गत लाया गया है?
- A.बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949
- B.भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007
- C.उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
- D.सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007
व्याख्या
सही उत्तर भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 है, जिसे विज्ञप्ति में ढांचे का आधार बताया गया है। यह ढांचा लागू दरों, परिचालन व्यवस्थाओं और उपभोक्ता सुरक्षा उपायों पर यूपीआई संचालन समिति के विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लाया गया। विकल्प ए गलत है, क्योंकि वह अधिनियम बैंकों के विनियमन से जुड़ा है, भुगतान प्रणालियों से नहीं। विकल्प सी गलत है, क्योंकि उपभोक्ता संरक्षण कानून अनुचित व्यापार व्यवहार और भ्रामक विज्ञापनों से जुड़ा है, किसी भुगतान शुल्क की संरचना से नहीं। विकल्प डी गलत है, क्योंकि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों और साइबर अपराधों को देखता है। यह भी याद रखें कि यह ढांचा वित्त संबंधी स्थायी समिति की सिफारिश के अनुरूप बताया गया है, जिसमें व्यवहार्य राजस्व के महत्व पर बल दिया गया था। ढांचे का उद्देश्य यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना और साथ ही आम लोगों तथा छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क से बचाना है।