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GK क्विजभारतीय राजव्यवस्था

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज: सेट 2

  • 20 प्रश्न
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इस क्विज के बारे में

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज़ (सेट 2) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 12 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: संविधान का निर्माण, प्रस्तावना, मौलिक अधिकार और अन्य। ये सभी प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 18 अक्टूबर 2021, शिफ्ट 1आसान

संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?

  1. A.जनवरी 1950
  2. B.अगस्त 1945
  3. C.दिसंबर 1946
  4. D.जुलाई 1948
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. दिसंबर 1946

व्याख्या

सही उत्तर दिसंबर 1946 है। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी। मुस्लिम लीग ने इस बैठक का बहिष्कार किया और अलग पाकिस्तान की मांग पर अड़ी रही, जबकि सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने अस्थायी अध्यक्ष के रूप में बैठक की अध्यक्षता की। दो दिन बाद, 11 दिसंबर 1946 को, डॉ. राजेंद्र प्रसाद सभा के स्थायी अध्यक्ष चुने गए।

बाकी विकल्प सभा के काम से पहले या बाद की तिथियां हैं। अगस्त 1945, 1946 की कैबिनेट मिशन योजना से एक साल से भी अधिक पहले का है, जिसके तहत सभा बनी। जुलाई 1948 सभा के काम के बीच का समय है, जब फरवरी 1948 में प्रारूप प्रकाशित हो चुका था। जनवरी 1950 बिल्कुल अंत है: अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को हुई और संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। सबसे अधिक पूछी जाने वाली जोड़ी याद रखें: पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 और राजेंद्र प्रसाद का चुनाव 11 दिसंबर 1946।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 4 मई 2023, शिफ्ट 1आसान

संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन की सिफारिश पर हुआ था, जो ______ में भारत आया था।

  1. A.1962
  2. B.1959
  3. C.1952
  4. D.1946
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 1946

व्याख्या

सही उत्तर 1946 है। कैबिनेट मिशन 1946 में सत्ता हस्तांतरण का रास्ता तय करने के लिए भारत आया था, और उसकी योजना में संविधान सभा के गठन का तरीका बताया गया: कुल 389 सीटें, जिनमें 296 ब्रिटिश भारत के लिए और 93 देसी रियासतों के लिए थीं, और प्रांतों के सदस्यों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होना था। ब्रिटिश भारत की सीटों के चुनाव जुलाई-अगस्त 1946 में हुए और सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई।

बाकी वर्ष सही नहीं हो सकते। संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हो गया था, इसलिए 1952, 1959 या 1962 में बनी सभा के पास लिखने को कुछ बचा ही नहीं होता। इस तिथि को याद रखने का आसान तरीका है इसे उसी वर्ष की दो और घटनाओं से जोड़ना: जुलाई-अगस्त 1946 के चुनाव और दिसंबर 1946 की पहली बैठक।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 10 जुलाई 2024, शिफ्ट 3मध्यम

प्रस्तावना के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द-क्रम सही है?

  1. A.संप्रभु, पंथनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक, गणराज्य
  2. B.संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य
  3. C.पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, पंथनिरपेक्ष, समाजवादी, संप्रभु
  4. D.समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य, संप्रभु
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य

व्याख्या

सही उत्तर संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य है। प्रस्तावना भारत का वर्णन इसी क्रम में करती है: "संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य"। समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्द 1976 में 42वें संशोधन से संप्रभु और लोकतांत्रिक के बीच जोड़े गए; उससे पहले यह वाक्यांश "संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य" था।

पहला विकल्प समाजवादी और पंथनिरपेक्ष की जगह आपस में बदल देता है, जो सबसे आम गलती है, क्योंकि दोनों शब्द एक साथ जोड़े गए थे। तीसरा विकल्प "पंथनिरपेक्ष" को दोहराता है और गलत शब्द से शुरू होता है, और चौथा "संप्रभु" को आगे से हटाकर अंत में रख देता है। क्रम याद रखने का आसान तरीका: 1976 में जोड़े गए दोनों शब्द बीच में साथ-साथ हैं, पहले समाजवादी फिर पंथनिरपेक्ष, मूल पहले शब्द (संप्रभु) और मूल अंतिम दो शब्दों (लोकतांत्रिक गणराज्य) के बीच।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 14 जून 2022, शिफ्ट 2आसान

भारत के संविधान की प्रस्तावना के शब्दों से रिक्त स्थान भरें: हम, ______, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को....

  1. A.सर्वोच्च न्यायालय
  2. B.भारतीय संसद
  3. C.केंद्र सरकार
  4. D.भारत के लोग
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. भारत के लोग

व्याख्या

सही उत्तर भारत के लोग है। प्रस्तावना "हम, भारत के लोग" शब्दों से शुरू होती है, जो बताते हैं कि संविधान अपना अधिकार जनता से प्राप्त करता है। संविधान किसी सरकार, न्यायालय या विधायिका ने नहीं दिया; जनता ने अपनी संविधान सभा के माध्यम से 26 नवंबर 1949 को इसे अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया।

सर्वोच्च न्यायालय, भारतीय संसद और केंद्र सरकार, तीनों संविधान द्वारा बनाए गए हैं, इसलिए इनमें से कोई भी उसके अधिकार का स्रोत नहीं हो सकता। ये केवल वही शक्तियां इस्तेमाल करते हैं जो संविधान इन्हें देता है। प्रस्तावना हमें जो चार बातें बताती है, उनमें यह पहली है; बाकी तीन हैं भारतीय राज्य की प्रकृति (संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य), उसके उद्देश्य (न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता) और अपनाने की तिथि। ऐसा रिक्त स्थान वाला प्रश्न सटीक आरंभिक शब्दों को परखता है, इसलिए पाठ को जैसा लिखा है वैसा याद करें।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 16 नवंबर 2021, शिफ्ट 2मध्यम

भारतीय संविधान के 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 के बाद निम्नलिखित में से कौन-सा मौलिक अधिकार नहीं है?

  1. A.संपत्ति का अधिकार
  2. B.समता का अधिकार
  3. C.शोषण के विरुद्ध अधिकार
  4. D.धर्म का अधिकार
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. संपत्ति का अधिकार

व्याख्या

सही उत्तर संपत्ति का अधिकार है। संविधान लागू होने के समय संपत्ति दो जगह मौलिक अधिकार के रूप में सुरक्षित थी: अनुच्छेद 19(1)(च), यानी संपत्ति अर्जित करने, रखने और बेचने की स्वतंत्रता, और अनुच्छेद 31, यानी संपत्ति से वंचित किए जाने के विरुद्ध संरक्षण। 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 ने दोनों को हटा दिया और भाग XII में अनुच्छेद 300A जोड़ा, जो कहता है कि किसी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। इसलिए संपत्ति अब भी सुरक्षित है, लेकिन मौलिक अधिकार के रूप में नहीं, केवल संवैधानिक या कानूनी अधिकार के रूप में।

व्यावहारिक अंतर यह है कि जिसकी संपत्ति ली जाए, वह अब अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सर्वोच्च न्यायालय नहीं जा सकता, क्योंकि वह केवल मौलिक अधिकारों के लिए है; वह अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय या सामान्य न्यायालय जा सकता है। बाकी तीन विकल्प, समता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18), शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 और 24) और धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 से 28), आज भी मौलिक अधिकार हैं। इसी 44वें संशोधन ने अनुच्छेद 20 और 21 को आपातकाल में भी निलंबित न किए जा सकने वाला बनाया।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CPO · 5 अक्टूबर 2023, शिफ्ट 2आसान

भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार निम्नलिखित में से किस देश के ‘अधिकार पत्र’ (बिल ऑफ राइट्स) से प्रेरित हैं?

  1. A.ऑस्ट्रेलिया
  2. B.जापान
  3. C.सोवियत संघ
  4. D.संयुक्त राज्य अमेरिका
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. संयुक्त राज्य अमेरिका

व्याख्या

सही उत्तर संयुक्त राज्य अमेरिका है। अमेरिका के संविधान में 1791 में जोड़े गए पहले दस संशोधनों को अधिकार पत्र (बिल ऑफ राइट्स) कहा जाता है, जो वाक् और धर्म जैसी स्वतंत्रताओं को सरकार से सुरक्षित रखते हैं। भारत के संविधान निर्माताओं ने इससे ऐसे अधिकारों की लिखित सूची का विचार लिया जिनका राज्य उल्लंघन न कर सके और जिन्हें न्यायालय लागू कराएं। हमारे संविधान का भाग III, अनुच्छेद 12 से 35, इसी का परिणाम है, और इसे अक्सर भारत का मैग्नाकार्टा कहा जाता है।

बाकी देशों से भारत ने दूसरे प्रावधान लिए। ऑस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची, व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता, और संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक ली गई। जापान से अनुच्छेद 21 में प्रयुक्त वाक्यांश "विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया" लिया गया। पूर्व सोवियत संघ से मौलिक कर्तव्य और प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय का आदर्श लिया गया। इसलिए भाग III में भी दो स्रोत याद रखें: पूरा अध्याय अमेरिका से प्रेरित, और अनुच्छेद 21 की शब्दावली जापान से।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 28 अक्टूबर 2024, शिफ्ट 1मध्यम

भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद यह कहता है? ‘राज्य के नीति निदेशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और कानून बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।’

  1. A.अनुच्छेद 40
  2. B.अनुच्छेद 30
  3. C.अनुच्छेद 35
  4. D.अनुच्छेद 37
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. अनुच्छेद 37

व्याख्या

सही उत्तर अनुच्छेद 37 है। यह एक साथ दो बातें कहता है: भाग IV के प्रावधान "किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे", लेकिन उसमें दिए गए तत्व "फिर भी देश के शासन में मूलभूत हैं और कानून बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा"। इसीलिए कोई नागरिक, मान लीजिए, समान नागरिक संहिता न लाने के लिए सरकार पर मुकदमा नहीं कर सकता, फिर भी न्यायालय किसी कानून की युक्तियुक्तता परखते समय अक्सर नीति निदेशक तत्वों का सहारा लेते हैं।

बाकी विकल्प पास की संख्याओं से बने जाल हैं। अनुच्छेद 40 खुद एक नीति निदेशक तत्व है, ग्राम पंचायतों के गठन पर, लेकिन वह पूरे अध्याय की प्रकृति नहीं बताता। अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को शिक्षा संस्थाएं चलाने का अधिकार देता है, और अनुच्छेद 35 कुछ मौलिक अधिकारों को प्रभावी बनाने वाले कानून बनाने की संसद की शक्ति से जुड़ा है; दोनों भाग III में हैं। जब भी प्रश्न "देश के शासन में मूलभूत" शब्द उद्धृत करे, उत्तर हमेशा अनुच्छेद 37 होगा।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 26 सितंबर 2024, शिफ्ट 1आसान

भारतीय संविधान के भाग IV में, अनुच्छेद 36 से 51 तक, निम्नलिखित में से किनका उल्लेख है?

  1. A.मौलिक अधिकार
  2. B.मौलिक कर्तव्य
  3. C.राज्य के नीति निदेशक तत्व
  4. D.संघ
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. राज्य के नीति निदेशक तत्व

व्याख्या

सही उत्तर राज्य के नीति निदेशक तत्व है। संविधान के भाग IV, अनुच्छेद 36 से 51, में नीति निदेशक तत्व हैं: वे लक्ष्य जिनकी ओर राज्य को कानून और नीतियां बनाते समय बढ़ना चाहिए, जैसे निर्वाह मजदूरी, निःशुल्क विधिक सहायता, ग्राम पंचायतें और समान नागरिक संहिता। अनुच्छेद 37 इन्हें न्यायालय में अप्रवर्तनीय, लेकिन "देश के शासन में मूलभूत" बनाता है।

हर गलत विकल्प किसी दूसरे भाग का है। मौलिक अधिकार भाग III, अनुच्छेद 12 से 35 में हैं। मौलिक कर्तव्य भाग IVA में, 1976 में जोड़े गए एक ही अनुच्छेद 51A में हैं। "संघ" भाग V है, जो अनुच्छेद 52 में राष्ट्रपति से शुरू होता है और संघ की कार्यपालिका, संसद और सर्वोच्च न्यायालय को कवर करता है। चारों भागों को क्रम से याद करने पर ऐसे प्रश्न आसान हो जाते हैं: भाग III अधिकार (12–35), भाग IV निदेशक तत्व (36–51), भाग IVA कर्तव्य (51A), और भाग V संघ (52 से)।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019आसान

"ऐसे उदात्त विचारों की कदर करना और अनुसरण करना जिन से स्वतंत्रता का हमारा राष्ट्रीय संघर्ष प्रेरित हुआ", भारत के संविधान के निम्नलिखित में से किस अंश का उपबंध है?

  1. A.राज्य की नीति के निदेशक तत्व
  2. B.मूल कर्तव्य
  3. C.मूल अधिकार
  4. D.उद्देशिका
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मूल कर्तव्य

व्याख्या

सही उत्तर है B, मूल कर्तव्य। ये शब्द अनुच्छेद 51क के खंड (ख) के हैं, जिसमें हर नागरिक के कर्तव्य गिनाए गए हैं। मूल कर्तव्य 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर भाग 4क के रूप में जोड़े गए और यह विचार पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया। शुरू में दस कर्तव्य थे; 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 ने ग्यारहवाँ कर्तव्य जोड़ा, जिसमें माता-पिता को 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर देना है। खंड (क) संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के आदर की बात करता है और खंड (ख) इस प्रश्न वाली पंक्ति है। विकल्प A गलत है, क्योंकि भाग 4 के निदेशक तत्व राज्य के लिए निर्देश हैं, नागरिकों के कर्तव्य नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि भाग 3 के मूल अधिकार नागरिक अदालत में लागू करा सकता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि उद्देशिका न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श बताती है, कर्तव्य नहीं गिनाती। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 51क, भाग 4क, 42वाँ संशोधन 1976, आज कुल ग्यारह कर्तव्य।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: NDA · NDA (I) 2023, 16 Apr 2023आसान

मूल कर्तव्यों से संबंधित अनुच्छेद 51A को भारत के संविधान में निम्नलिखित में से किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?

  1. A.संविधान (42वाँ संशोधन) अधिनियम
  2. B.संविधान (44वाँ संशोधन) अधिनियम
  3. C.संविधान (85वाँ संशोधन) अधिनियम
  4. D.संविधान (92वाँ संशोधन) अधिनियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. संविधान (42वाँ संशोधन) अधिनियम

व्याख्या

सही उत्तर है A, संविधान (42वाँ संशोधन) अधिनियम। 1976 के 42वें संशोधन ने, जो आपातकाल के दौरान स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर पारित हुआ, एक नया भाग IV-A जोड़ा जिसमें एकमात्र अनुच्छेद 51A नागरिकों के दस मूल कर्तव्य गिनाता है, जैसे संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान, पर्यावरण की रक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास। यह विचार पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया था। ग्यारहवाँ कर्तव्य, कि माता-पिता या अभिभावक छह से चौदह वर्ष के बच्चे को शिक्षा दिलाएँ, 2002 के 86वें संशोधन से जोड़ा गया। ये कर्तव्य न्यायालय से लागू नहीं कराए जा सकते, पर संसद इन्हें लागू करने के लिए कानून बना सकती है। B, 1978 के 44वें संशोधन ने आपातकाल के कई बदलाव पलटे और संपत्ति के अधिकार को कानूनी अधिकार बनाया। C, 2001 के 85वें संशोधन ने अनुसूचित जाति और जनजाति कर्मचारियों की पदोन्नति में परिणामी वरिष्ठता का प्रावधान किया। D, 2003 के 92वें संशोधन ने बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को आठवीं अनुसूची में जोड़ा। परीक्षा टिप: 42वाँ संशोधन 1976 ने भाग IV-A, अनुच्छेद 51A, दस कर्तव्य जोड़े; 86वाँ संशोधन 2002 ने इन्हें ग्यारह किया।

Q11.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 11 Jun 2019, Shift 1मध्यम

भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग के प्रावधानों की बात करता है?

  1. A.अनुच्छेद 51
  2. B.अनुच्छेद 61
  3. C.अनुच्छेद 63
  4. D.अनुच्छेद 54
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अनुच्छेद 61

व्याख्या

सही उत्तर है B, अनुच्छेद 61। इसमें राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया दी गई है और इसका एकमात्र आधार है "संविधान का उल्लंघन"। आरोप किसी भी सदन में शुरू हो सकता है, जिसके लिए कम से कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव और चौदह दिन का नोटिस चाहिए, और उस सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पास होना चाहिए। फिर दूसरा सदन आरोप की जाँच करता है, राष्ट्रपति उपस्थित हो सकते हैं या अपना प्रतिनिधि भेज सकते हैं, और अगर वह सदन भी दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास कर दे तो राष्ट्रपति पद से हट जाते हैं। अब तक किसी भारतीय राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं चला। A, अनुच्छेद 51, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बढ़ाने का नीति निदेशक तत्व है। C, अनुच्छेद 63, केवल यह कहता है कि भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। D, अनुच्छेद 54, निर्वाचक मंडल द्वारा राष्ट्रपति के चुनाव के बारे में है। परीक्षा टिप: 54 चुनाव, 56 कार्यकाल, 61 महाभियोग, 63 उपराष्ट्रपति।

Q12.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 17 Jul 2023, Shift 2मध्यम

भारत के संविधान के किस भाग में संघ की कार्यपालिका के प्रावधान हैं?

  1. A.भाग V
  2. B.भाग III
  3. C.भाग IV
  4. D.भाग VI
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. भाग V

व्याख्या

सही उत्तर है A, भाग V। भाग V का शीर्षक "संघ" है और इसका पहला अध्याय "कार्यपालिका" राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मंत्रिपरिषद और महान्यायवादी को कवर करता है। भाग V अनुच्छेद 52 से अनुच्छेद 151 तक चलता है और इसी में संसद, राष्ट्रपति की विधायी शक्तियाँ, संघ की न्यायपालिका यानी सर्वोच्च न्यायालय और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक भी हैं। अनुच्छेद 52 इसकी पहली पंक्ति है: "भारत का एक राष्ट्रपति होगा।" केंद्र से जुड़ी हर संस्था भाग V में मिलती है। B, भाग III, मूल अधिकार है, अनुच्छेद 12 से 35 तक। C, भाग IV, राज्य के नीति निदेशक तत्व है, अनुच्छेद 36 से 51 तक। D, भाग VI, "राज्य" है, अनुच्छेद 152 से 237 तक, जिसमें राज्यपाल, राज्य विधानमंडल और उच्च न्यायालय आते हैं, यानी भाग V का राज्य-स्तरीय रूप। परीक्षा टिप: भाग V संघ, भाग VI राज्य; भाग III अधिकार, भाग IV निदेशक तत्व।

Q13.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 3 Aug 2025मध्यम

निम्नलिखित में से उस सही विकल्प को पहचानिए जो 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 74(1) में किए गए परिवर्तन को दर्शाता है।

  1. A.संघ की कार्यपालिका शक्ति भारत के राष्ट्रपति में निहित होगी।
  2. B.मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को देना प्रधानमंत्री का कर्तव्य है।
  3. C.राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर करेगा।
  4. D.राष्ट्रपति को संसद के सदनों को आहूत करने या उनका सत्रावसान करने का अधिकार होगा।
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर करेगा।

व्याख्या

सही उत्तर है C, राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर करेगा। 42वें संशोधन ने यह सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी बना दी। 1976 से पहले अनुच्छेद 74(1) केवल इतना कहता था कि राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिपरिषद होगी। 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 ने जोड़ा कि राष्ट्रपति "ऐसी सलाह के अनुसार कार्य करेगा"। बाद में 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 ने राष्ट्रपति को सलाह एक बार पुनर्विचार के लिए लौटाने का अधिकार दिया, पर पुनर्विचार के बाद मिली सलाह माननी ही होती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होने की बात अनुच्छेद 53 में है, जिसे 42वें संशोधन ने नहीं छुआ। विकल्प B गलत है, क्योंकि राष्ट्रपति को जानकारी देते रहने का प्रधानमंत्री का कर्तव्य अनुच्छेद 78 में है। विकल्प D गलत है, क्योंकि सदनों को आहूत करना और सत्रावसान अनुच्छेद 85 का विषय है। परीक्षा टिप: 42वें संशोधन से सलाह बाध्यकारी हुई और 44वें संशोधन से एक बार पुनर्विचार का अवसर मिला।

Q14.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 07 Oct 2024, Shift 3मध्यम

भारतीय संविधान के कौन-से अनुच्छेद केंद्र में संसदीय शासन प्रणाली की व्यवस्था करते हैं?

  1. A.अनुच्छेद 74 और 75
  2. B.अनुच्छेद 71 और 72
  3. C.अनुच्छेद 79 और 80
  4. D.अनुच्छेद 76 और 77
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. अनुच्छेद 74 और 75

व्याख्या

सही उत्तर है A, अनुच्छेद 74 और 75। ये दोनों अनुच्छेद उस मंत्रिपरिषद को बनाते हैं जो असल में केंद्र सरकार चलाती है, और यही संसदीय व्यवस्था का आधार है। अनुच्छेद 74 कहता है कि राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिपरिषद होगी और राष्ट्रपति उसी सलाह के अनुसार काम करेगा। अनुच्छेद 75 कहता है कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है, अन्य मंत्री प्रधानमंत्री की सलाह पर नियुक्त होते हैं, मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है और उसका आकार लोकसभा की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता, यह सीमा 2003 के 91वें संशोधन से जोड़ी गई। राज्यों के लिए यही काम अनुच्छेद 163 और 164 करते हैं। B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 71 राष्ट्रपति चुनाव के विवादों और अनुच्छेद 72 क्षमादान की शक्ति से जुड़ा है। C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 79 और 80 संसद के गठन और राज्यसभा की संरचना के बारे में हैं। D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 76 महान्यायवादी और अनुच्छेद 77 सरकारी कामकाज के संचालन से जुड़ा है। परीक्षा टिप: केंद्र 74-75, राज्य 163-164; सामूहिक उत्तरदायित्व लोकसभा के प्रति।

Q15.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 14 Mar 2023, Shift 2मध्यम

भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राज्य सभा (Council of States) की संरचना निर्धारित करता है?

  1. A.अनुच्छेद 80
  2. B.अनुच्छेद 395
  3. C.अनुच्छेद 51 A
  4. D.अनुच्छेद 12
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. अनुच्छेद 80

व्याख्या

सही उत्तर है A, अनुच्छेद 80। अनुच्छेद 80 बताता है कि राज्य सभा यानी Council of States किन सदस्यों से बनेगी। इसमें अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं: 12 सदस्य राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र से मनोनीत करते हैं, और अधिकतम 238 सदस्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्हें राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य एकल संक्रमणीय मत से आनुपातिक प्रतिनिधित्व द्वारा चुनते हैं। अगला अनुच्छेद 81 यही काम लोक सभा के लिए करता है, और अनुच्छेद 79 से 122 तक पूरा संसद वाला हिस्सा है। विकल्प B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 395 केवल भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और भारत शासन अधिनियम 1935 को निरस्त करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 51A में नागरिकों के मौलिक कर्तव्य दिए गए हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 12 भाग III के लिए 'राज्य' की परिभाषा देता है। परीक्षा टिप: जोड़ी याद रखें, 80 = राज्य सभा की संरचना, 81 = लोक सभा की संरचना, और 250 = 238 + 12।

Q16.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 26 Jul 2023, Shift 3कठिन

भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद संसद को उसके द्वारा बनाए गए कानूनों के बेहतर प्रशासन के लिए अतिरिक्त न्यायालय स्थापित करने की शक्ति देता है?

  1. A.अनुच्छेद 246
  2. B.अनुच्छेद 248
  3. C.अनुच्छेद 253
  4. D.अनुच्छेद 247
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. अनुच्छेद 247

व्याख्या

सही उत्तर है D, अनुच्छेद 247। यह संसद को शक्ति देता है कि वह कानून बनाकर अतिरिक्त न्यायालय स्थापित करे, ताकि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों या संघ सूची के विषयों पर पुराने कानूनों का प्रशासन बेहतर हो सके। यह अनुच्छेद भाग XI के अध्याय I में है, जहाँ संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का बँटवारा दिया गया है, यानी अनुच्छेद 245 से 255 तक। प्रश्न में पकड़ने वाला शब्द है "अतिरिक्त न्यायालय": इस अध्याय में केवल अनुच्छेद 247 न्यायालयों की बात करता है, बाकी पड़ोसी अनुच्छेद विषयों और सूचियों की बात करते हैं। A, अनुच्छेद 246, सातवीं अनुसूची की संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों का बँटवारा करता है। B, अनुच्छेद 248, अवशिष्ट शक्ति यानी किसी भी सूची में न आने वाले विषय पर कानून बनाने की शक्ति संसद को देता है। C, अनुच्छेद 253, संधियों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए पूरे देश के लिए कानून बनाने की शक्ति संसद को देता है। परीक्षा टिप: 246 तीन सूचियाँ, 247 अतिरिक्त न्यायालय, 248 अवशिष्ट शक्ति, 253 अंतरराष्ट्रीय समझौते।

Q17.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CTET · Paper II SST, 20 Aug 2023कठिन

निम्नलिखित में से कौन-से प्रावधान भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करते हैं? A. न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में विधायिका शामिल नहीं होती B. न्यायाधीशों का निश्चित कार्यकाल C. संसद न्यायाधीशों के आचरण पर चर्चा नहीं कर सकती D. राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को शपथ दिलाते हैं। सही विकल्प चुनिए:

  1. A.A, B और D
  2. B.A, C और D
  3. C.A, B, C और D
  4. D.A, B और C
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. A, B और C

व्याख्या

सही उत्तर है D, A, B और C। ये तीनों प्रावधान न्यायाधीशों को सरकार के बाकी अंगों के दबाव से मुक्त रखते हैं, जबकि राष्ट्रपति द्वारा शपथ दिलाना केवल औपचारिकता है। NCERT की कक्षा 8 की किताब के अनुसार विधायिका और कार्यपालिका न्यायपालिका के काम में दखल नहीं दे सकतीं और न्यायाधीश उनके प्रति जवाबदेह नहीं हैं। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष तक और उच्च न्यायालयों के 62 वर्ष तक पद पर रहते हैं, और उन्हें केवल महाभियोग से ही हटाया जा सकता है, इसलिए उनका कार्यकाल सुरक्षित है। अनुच्छेद 121 संसद को किसी न्यायाधीश के आचरण पर चर्चा करने से रोकता है, सिवाय तब जब उसे हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो। कथन D एक तथ्य है, पर शपथ की रस्म से न्यायाधीश स्वतंत्र नहीं बनते। विकल्प A गलत है क्योंकि इसमें कथन D जुड़ा है और C छूट गया है। विकल्प B गलत है क्योंकि इसमें कथन B, यानी निश्चित कार्यकाल, छूट गया है। विकल्प C गलत है क्योंकि इसमें कथन D भी जोड़ा गया है, जो कोई सुरक्षा उपाय नहीं है। परीक्षा टिप: स्वतंत्रता = विधायिका के बिना नियुक्ति, सुरक्षित कार्यकाल, संचित निधि से वेतन और न्यायाधीश के आचरण पर संसद में बहस नहीं।

Q18.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: हरियाणा · HSSC CET Group C, 6 Nov 2022, Shift 2मध्यम

आपातकाल की उद्घोषणा (अनुच्छेद 352) के प्रवर्तन में होने पर निम्नलिखित में से किस मूल अधिकार को निलंबित नहीं किया जा सकता है?

  1. A.दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार
  2. B.वाक्-स्वातंत्र्य का अधिकार
  3. C.समता का अधिकार
  4. D.धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार

व्याख्या

सही उत्तर है A, दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार। राष्ट्रीय आपातकाल में भी अनुच्छेद 20 और 21 के प्रवर्तन को निलंबित नहीं किया जा सकता। अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है, जबकि अनुच्छेद 20 व्यक्ति को पिछली तारीख से लागू आपराधिक कानून, एक ही अपराध के लिए दो बार सज़ा और खुद के विरुद्ध गवाही देने की मजबूरी से बचाता है। यह सुरक्षा 44वें संशोधन, 1978 द्वारा जोड़ी गई, क्योंकि 1975-77 के आपातकाल में बंदी अपनी हिरासत को अदालत में चुनौती नहीं दे पाए थे। अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति आपातकाल के दौरान अन्य मूल अधिकारों का प्रवर्तन निलंबित कर सकते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि युद्ध या बाहरी आक्रमण के आधार पर आपातकाल घोषित होते ही अनुच्छेद 358 के तहत अनुच्छेद 19 की वाक्-स्वतंत्रता अपने आप निलंबित हो जाती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 14 से 18 का समता का अधिकार अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति के आदेश से निलंबित हो सकता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 25 से 28 की धार्मिक स्वतंत्रता भी अनुच्छेद 359 के तहत निलंबित हो सकती है। परीक्षा टिप: आपातकाल में भी अनुच्छेद 20 और 21 हमेशा लागू रहते हैं।

Q19.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB ग्रुप D · 16 Sep 2022, Shift 3मध्यम

राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी और वह उसका प्रयोग स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करेगा, यह भारत के संविधान के किस अनुच्छेद में कहा गया है?

  1. A.अनुच्छेद 124
  2. B.अनुच्छेद 134
  3. C.अनुच्छेद 144
  4. D.अनुच्छेद 154
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. अनुच्छेद 154

व्याख्या

सही उत्तर है D, अनुच्छेद 154। अनुच्छेद 154 कहता है कि राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित है, जिसका प्रयोग वह सीधे या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के जरिए करता है, ठीक वैसे ही जैसे अनुच्छेद 53 केंद्र में राष्ट्रपति के लिए कहता है। संविधान का भाग VI राज्यों से संबंधित है: अनुच्छेद 153 हर राज्य के लिए एक राज्यपाल का प्रावधान करता है, अनुच्छेद 155 के अनुसार राष्ट्रपति राज्यपाल की नियुक्ति करता है, अनुच्छेद 156 कार्यकाल पाँच वर्ष तय करता है, और अनुच्छेद 163 राज्यपाल की सहायता और सलाह के लिए मंत्रिपरिषद देता है। व्यवहार में सरकार मुख्यमंत्री और मंत्री चलाते हैं और राज्यपाल उनकी सलाह पर काम करता है। A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 124 सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना करता है। B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 134 सर्वोच्च न्यायालय में आपराधिक अपीलों से जुड़ा है। C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 144 सभी प्राधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय की सहायता में कार्य करने को कहता है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 53 = राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्ति, अनुच्छेद 154 = राज्यपाल की कार्यपालिका शक्ति; दोनों अनुच्छेद एक-दूसरे की प्रतिछाया हैं।

Q20.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Pre GS, 17 Dec 2023मध्यम

कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका निर्णय राज्य में कौन करता है?

  1. A.मुख्य मंत्री
  2. B.राज्यपाल
  3. C.विधान सभा का अध्यक्ष
  4. D.विधि मंत्री
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. विधान सभा का अध्यक्ष

व्याख्या

सही उत्तर है C, विधान सभा का अध्यक्ष। अनुच्छेद 199(3) के अनुसार, अगर यह सवाल उठे कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, तो विधान सभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है। अध्यक्ष विधेयक पर इसका प्रमाणपत्र लगाते हैं, जिसके बाद वह विधान परिषद (जहाँ हो) और फिर राज्यपाल के पास जाता है। धन विधेयक केवल विधान सभा में और राज्यपाल की सिफ़ारिश से ही पेश हो सकता है, और विधान परिषद इसे अधिकतम 14 दिन तक ही रोक सकती है। केंद्र में भी यही नियम है, जहाँ अनुच्छेद 110(3) के तहत लोक सभा अध्यक्ष निर्णय करते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि मुख्यमंत्री सरकार के प्रमुख हैं, पर विधेयक को प्रमाणित करने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। विकल्प B गलत है, क्योंकि राज्यपाल धन विधेयक पेश करने की सिफ़ारिश करते हैं और उस पर अनुमति देते हैं, पर उसकी प्रकृति तय नहीं करते। विकल्प D गलत है, क्योंकि विधि मंत्री सरकार को सलाह दे सकते हैं, पर उनके पास यह अधिकार नहीं है। परीक्षा टिप: धन विधेयक राज्य में अनुच्छेद 199 और केंद्र में अनुच्छेद 110 में है; दोनों जगह अध्यक्ष का फ़ैसला अंतिम होता है।

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