भारत में संपत्ति के अधिकार की क्या स्थिति है?
- A.केवल नागरिकों को उपलब्ध विधिक अधिकार
- B.किसी भी व्यक्ति को उपलब्ध विधिक अधिकार
- C.केवल नागरिकों को उपलब्ध मौलिक अधिकार
- D.न मौलिक अधिकार, न विधिक अधिकार
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. किसी भी व्यक्ति को उपलब्ध विधिक अधिकार
व्याख्या
सही उत्तर है B, किसी भी व्यक्ति को उपलब्ध विधिक अधिकार। 1978 से संपत्ति अनुच्छेद 300A के तहत संवैधानिक अधिकार है, और यह हर व्यक्ति को सुरक्षा देता है, केवल नागरिकों को नहीं। 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 ने भाग III से अनुच्छेद 19(1)(f) और अनुच्छेद 31 हटाए और अनुच्छेद 300A जोड़ा, जिसके अनुसार किसी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। यानी राज्य केवल वैध कानून से ही संपत्ति ले सकता है, और कोई कंपनी या विदेशी भी यह सुरक्षा माँग सकता है। भाग III से बाहर होने के कारण इसके लिए अनुच्छेद 32 में सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकते; उपाय अनुच्छेद 226 में हाई कोर्ट या साधारण मुकदमा है। विकल्प A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 300A का 'व्यक्ति' शब्द गैर-नागरिकों को भी शामिल करता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1978 में संपत्ति मौलिक अधिकार नहीं रही। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह अब भी संवैधानिक और विधिक अधिकार है। परीक्षा टिप: 44वाँ संशोधन, संपत्ति भाग III से निकलकर भाग XII के अनुच्छेद 300A में।