भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की कौन-सी धारा कहती है कि प्रतिभू की देयता मूल ऋणी की देयता के सह-विस्तृत होती है, जब तक संविदा में अन्यथा न लिखा हो?
- A.धारा 124
- B.धारा 126
- C.धारा 128
- D.धारा 130
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है ग, धारा 128। यह धारा निर्धारित करती है कि प्रतिभू की देयता मूल ऋणी की देयता के सह-विस्तृत होगी, जब तक संविदा में अन्यथा उपबंधित न हो। इसी कारण बिना शर्त गारंटी देने वाले बैंक से पूरी राशि मांगी जा सकती है और लेनदार को पहले अपने ग्राहक के विरुद्ध सभी उपाय आज़माने की आवश्यकता नहीं होती।
विकल्प क, धारा 124, क्षतिपूर्ति की संविदा को परिभाषित करती है, जिसमें एक पक्ष दूसरे को अपने या किसी अन्य व्यक्ति के आचरण से होने वाली हानि से बचाने का वचन देता है; क्षतिपूर्ति और प्रतिभूति संबंधित पर भिन्न हैं। विकल्प ख, धारा 126, प्रतिभूति की संविदा और उसके तीन पक्षकारों की परिभाषा है, इसलिए यही सबसे निकट का गलत उत्तर है। विकल्प घ, धारा 130, सतत गारंटी को भावी लेनदेनों के लिए सूचना देकर प्रतिसंहृत करने से संबंधित है। क्रम याद रखें: 124 क्षतिपूर्ति, 126 प्रतिभूति, 128 सह-विस्तृत देयता, 130 प्रतिसंहरण।