2021 में आरंभ ई-रुपी का सबसे सही वर्णन क्या है?
- A.भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदित क्रिप्टोकरेंसी
- B.प्रीपेड, व्यक्ति-विशिष्ट और उद्देश्य-विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक वाउचर
- C.डिजिटल रुपये का एक नया मूल्यवर्ग
- D.भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम का क्रेडिट कार्ड उत्पाद
सही उत्तर
B. प्रीपेड, व्यक्ति-विशिष्ट और उद्देश्य-विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक वाउचर
व्याख्या
सही उत्तर B है। ई-रुपी एक प्रीपेड इलेक्ट्रॉनिक वाउचर है, जो लाभार्थी को एसएमएस स्ट्रिंग या क्यूआर कोड के रूप में मिलता है और जिसे केवल नामित व्यक्ति तथा केवल नामित उद्देश्य के लिए भुनाया जा सकता है, जैसे टीकाकरण या कोई जांच। यह नकदी-रहित और संपर्क-रहित है तथा लाभार्थी के सिरे पर बैंक खाते या इंटरनेट की आवश्यकता नहीं रखता। विकल्प A गलत है क्योंकि रिज़र्व बैंक ने किसी क्रिप्टोकरेंसी को अनुमोदित नहीं किया है; ई-रुपी वाउचर है और उसमें ब्लॉकचेन का उपयोग नहीं होता। विकल्प C गलत है क्योंकि ई-रुपी मुद्रा ही नहीं है और यह डिजिटल रुपये के पायलटों से पहले का है, जो 2022 के अंत में आरंभ हुए। विकल्प D गलत है क्योंकि ई-रुपी प्रीपेड वाउचर है, साख लिखत नहीं; एनपीसीआई का कार्ड उत्पाद रुपे है, जो अलग योजना है।
पूरा लेख पढ़ें: डिजिटल रुपया, फिनटेक और अकाउंट एग्रीगेटर: नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारतीय रिज़र्व बैंक डिजिटल रुपया जारी कर सके, इसके लिए "बैंक नोट" की परिभाषा चौड़ी करने हेतु किस अधिनियम में संशोधन किया गया?
- A.बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949
- B.भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934
- C.भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007
- D.सिक्का निर्माण अधिनियम, 2011
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 है। वित्त अधिनियम, 2022 ने भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धारा 2 में संशोधन किया जिससे बैंक नोट शब्द में डिजिटल रूप में जारी बैंक नोट भी आ गया, और इसी से डिजिटल रुपये को वैध मुद्रा का दर्जा मिला। विकल्प A गलत है क्योंकि बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 बैंकिंग कंपनियों के लाइसेंस, प्रबंधन और पर्यवेक्षण से संबंधित है, मुद्रा जारी करने से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 यूपीआई और आरटीजीएस जैसी भुगतान प्रणालियों को प्राधिकृत और विनियमित करता है, पर सीबीडीसी मुद्रा है, भुगतान प्रणाली नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि सिक्का निर्माण अधिनियम, 2011 सिक्कों, उनके मूल्यवर्गों और सरकार की ढलाई शक्ति से संबंधित है; सिक्के भारत सरकार जारी करती है, जबकि बैंक नोट, जिनमें अब डिजिटल रुपया भी है, रिज़र्व बैंक जारी करता है।
थोक डिजिटल रुपया, e₹-W, का पायलट 1 नवंबर 2022 को किस उद्देश्य से आरंभ किया गया?
- A.दुकानों पर खुदरा भुगतान
- B.सीमापार विप्रेषण
- C.सरकारी प्रतिभूतियों के द्वितीयक बाजार सौदों का निपटान
- D.प्रत्यक्ष लाभ अंतरण सब्सिडी का भुगतान
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, सरकारी प्रतिभूतियों के द्वितीयक बाजार सौदों का निपटान है। थोक पायलट 1 नवंबर 2022 को कुछ चुने हुए बैंकों के साथ आरंभ हुआ और इसका पहला उपयोग सरकारी प्रतिभूति सौदों के द्वितीयक बाजार चरण का निपटान था, क्योंकि इससे अलग निपटान गारंटी व्यवस्था की आवश्यकता मिट जाती है और संपार्श्विक मुक्त हो जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि व्यापारी भुगतान खुदरा पायलट e₹-R का विषय है, जो एक महीने बाद 1 दिसंबर 2022 को आरंभ हुआ। विकल्प B गलत है क्योंकि सीमापार उपयोग की चर्चा आगे की संभावना के रूप में हुई है, वह पहला थोक उपयोग नहीं था। विकल्प D गलत है क्योंकि सब्सिडी अंतरण साधारण बैंक खातों और आधार भुगतान ब्रिज के जरिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली से होता है; प्रोग्रामेबल सीबीडीसी ऐसे कामों के लिए केवल परखा गया है, पायलट के पहले उपयोग के रूप में लागू नहीं हुआ।
डिजिटल रुपये और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस में निम्नलिखित में से कौन सा अंतर सही है?
- A.दोनों एनपीसीआई द्वारा संचालित भुगतान प्रणालियां हैं
- B.डिजिटल रुपया स्वयं केंद्रीय बैंक की मुद्रा है, जबकि यूपीआई बैंक जमा के धन को हिलाने वाली प्रणाली है
- C.यूपीआई वैध मुद्रा है, जबकि डिजिटल रुपया नहीं
- D.डिजिटल रुपये पर ब्याज मिलता है, यूपीआई शेष पर नहीं
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। डिजिटल रुपया मुद्रा है, रिज़र्व बैंक की देयता, अतः एक वॉलेट से दूसरे में अंतरण उसी क्षण अंतिम हो जाता है और उसके बाद कोई अंतर-बैंक निपटान नहीं होता। इसके विपरीत यूपीआई भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा चलाई जाने वाली भुगतान निर्देश प्रणाली है, जो उस धन को हिलाती है जो पहले से बैंक खाते में जमा के रूप में है, और बैंक आपस में निपटान बाद में करते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि डिजिटल रुपया रिज़र्व बैंक जारी करता है और वह एनपीसीआई का उत्पाद नहीं है। विकल्प C गलत है और स्थिति उलट देता है: संशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के अंतर्गत डिजिटल रुपया वैध मुद्रा है, जबकि यूपीआई केवल भुगतान निर्देश देने का तरीका है और वैध मुद्रा कभी नहीं हो सकता। विकल्प D गलत है क्योंकि डिजिटल रुपये पर जानबूझकर ब्याज नहीं दिया जाता, जिससे बचतकर्ता बैंक जमा से न हटें।
भारतीय रिज़र्व बैंक के अकाउंट एग्रीगेटर ढांचे में वह संस्था, जो ग्राहक का वित्तीय डेटा रखती है और सहमति पर उसे साझा करती है, क्या कहलाती है?
- A.वित्तीय सूचना उपयोगकर्ता (एफआईयू)
- B.वित्तीय सूचना प्रदाता (एफआईपी)
- C.सहमति प्रबंधक
- D.ऋण सेवा प्रदाता (एलएसपी)
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, वित्तीय सूचना प्रदाता है। एफआईपी वह संस्था है जिसके पास ग्राहक का डेटा पहले से है — बैंक, गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी, बीमाकर्ता, म्यूचुअल फंड या पेंशन निधि — और जो वैध सहमति अभिलेख प्रस्तुत होने पर उसे जारी करती है। विकल्प A गलत है क्योंकि वित्तीय सूचना उपयोगकर्ता प्राप्त करने वाले सिरे की संस्था है, जिसे सेवा देने के लिए डेटा चाहिए, जैसे ऋण परखने वाला ऋणदाता। विकल्प C गलत है क्योंकि सहमति प्रबंधक स्वयं अकाउंट एग्रीगेटर है, वह डेटा-अंधा माध्यम जो अपने से गुजरने वाले डेटा को न रख सकता, न उपयोग कर सकता, न बेच सकता है। विकल्प D गलत है क्योंकि ऋण सेवा प्रदाता वह अभिकर्ता है जो 2022 के डिजिटल ऋण दिशानिर्देशों के अंतर्गत विनियमित ऋणदाता के लिए ऋण जुटाता या सेवित करता है; वह ऋण श्रृंखला का अंग है, अकाउंट एग्रीगेटर ढांचे का नहीं।
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की स्थापना किस वर्ष हुई?
- A.2005
- B.2008
- C.2010
- D.2016
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 2008 है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम 2008 में भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय बैंक संघ की पहल पर भारत में खुदरा भुगतानों की छत्र संस्था के रूप में निगमित हुआ, और यह कंपनी अधिनियम की वर्तमान धारा 8 के अंतर्गत लाभ-निरपेक्ष कंपनी है। विकल्प A गलत है क्योंकि 2005 तो भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम से भी पहले का वर्ष है, जो 2007 में पारित हुआ और जिसके अंतर्गत एनपीसीआई की प्रणालियां प्राधिकृत होती हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि 2010 वह वर्ष है जब एनपीसीआई ने तत्काल भुगतान सेवा यानी आईएमपीएस आरंभ की, स्थापना का वर्ष नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2016 में एनपीसीआई ने अपना सर्वाधिक प्रसिद्ध उत्पाद यूपीआई आरंभ किया; अभ्यर्थी प्रायः यूपीआई का वर्ष एनपीसीआई का वर्ष मान लेते हैं, और यही इस प्रश्न का जाल है।