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GK24

कला और संस्कृति पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) उत्तर सहित – पेज 2

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SSC, बैंकिंग, रेलवे और अन्य परीक्षाओं के पिछले वर्षों के पेपरों में पूछे गए कला और संस्कृति के प्रश्न, परीक्षा और वर्ष, उत्तर और व्याख्या सहित।

52 पिछले वर्षों के प्रश्न

Q21.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC MTS · 19 Jun 2023, Shift 2आसान

कौन-सा भारतीय शास्त्रीय नृत्य अपने विस्तृत रंगीन मेकअप और अनोखे मुखौटों के लिए जाना जाता है, जो केरल की पुरानी युद्ध कलाओं को दर्शाते हैं?

  1. A.मोहिनीअट्टम
  2. B.कुचिपुड़ी
  3. C.कथकली
  4. D.ओडिसी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. कथकली

व्याख्या

सही उत्तर है C, कथकली। कथकली, जिसका अर्थ है 'कथा का खेल', केरल का शास्त्रीय नृत्य-नाटक है, जिसे पारंपरिक रूप से पुरुष करते हैं और जिसमें रामायण-महाभारत की कथाएं हाथों की मुद्राओं, आंखों की गति और चेहरे के भावों से कही जाती हैं। इसकी सबसे खास पहचान है भारी, रंगीन मेकअप और ऊंचा मुकुट: महान नायकों के लिए हरा (पच्चा), खलनायकों के लिए लाल धारियों वाला चेहरा (कत्ति) और राक्षसों-वानरों के लिए दाढ़ी वाले (तादी) रूप। शरीर का जोरदार प्रशिक्षण केरल की प्राचीन युद्ध कला कलरीपयट्टु से आता है। प्रस्तुति चेंडा और मद्दलम ढोलों के साथ होती है और रात भर चलती है। A गलत है क्योंकि मोहिनीअट्टम भी केरल का है, पर वह महिलाओं का कोमल एकल नृत्य है, 'मोहिनी का नृत्य', जिसमें सादा मेकअप होता है और मुखौटे नहीं होते। B गलत है क्योंकि कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश का शास्त्रीय नृत्य है। D गलत है क्योंकि ओडिसी ओडिशा का नृत्य है, जो त्रिभंगी मुद्रा के लिए जाना जाता है। परीक्षा टिप: केरल के दो शास्त्रीय नृत्य, कथकली (मुखौटे, मेकअप, युद्ध कला का जोश) और मोहिनीअट्टम (कोमल, स्त्रैण)।

Q22.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CHSL · 17 Mar 2023, Shift 3मध्यम

रज पर्व (राजा परबा), जिसे मिथुन संक्रांति भी कहते हैं, ओडिशा में मनाया जाने वाला _______ दिन का नारीत्व उत्सव है।

  1. A.पाँच
  2. B.छह
  3. C.चार
  4. D.तीन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. तीन

व्याख्या

सही उत्तर है D, तीन। रज पर्व (राजा परबा) ओडिशा का तीन दिन का नारीत्व उत्सव है जो मध्य जून में मनाया जाता है, जब सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करता है। तीन दिन हैं पहिली रज, रज संक्रांति या मिथुन संक्रांति, और बासी रज; चौथी सुबह धरती माता के स्नान, वसुमती स्नान, से इसका समापन होता है। 'रज' शब्द 'रजस्वला' से बना है: माना जाता है कि इन दिनों भूदेवी, धरती माता, रजस्वला होती हैं, इसलिए न हल चलता है न खुदाई, और अविवाहित लड़कियाँ आराम करती हैं, नए कपड़े पहनती हैं, रस्सी के झूलों पर झूलती हैं और पोड़ा पीठा खाती हैं। यह मानसून की शुरुआत और आने वाले खेती के मौसम का प्रतीक है। विकल्प A गलत है क्योंकि रज के दिन पाँच नहीं होते; यह पाँच दिन का उत्सव नहीं है। विकल्प B गलत है क्योंकि छह दिन किसी रज परंपरा में नहीं हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि चौथा दिन, वसुमती स्नान, सिर्फ समापन स्नान है और उत्सव तीन दिन का ही गिना जाता है। परीक्षा टिप: रज पर्व = ओडिशा, तीन दिन, जून में मिथुन संक्रांति, झूले और पोड़ा पीठा।

Q23.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CGL · 27 Jul 2023, Shift 2मध्यम

कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद निम्नलिखित में से किस शहर में स्थित है?

  1. A.पानीपत
  2. B.लाहौर
  3. C.अजमेर
  4. D.दिल्ली
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. दिल्ली

व्याख्या

सही उत्तर है D, दिल्ली। कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, जिसका अर्थ है "इस्लाम की शक्ति", दिल्ली के महरौली में कुतुब परिसर में कुतुब मीनार और लौह स्तंभ के पास खड़ी है। कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे 1192-93 में, तुर्क विजय के तुरंत बाद, बनवाना शुरू किया, इसलिए यह दिल्ली में बनी पहली मस्जिद और भारत में इंडो-इस्लामी स्थापत्य का सबसे पुराना बचा हुआ उदाहरण है। इसके खंभे सत्ताईस तोड़े गए हिंदू और जैन मंदिरों से लाए गए थे, इसीलिए उन पर आज भी घंटियाँ, जंजीरें और फूलों की नक्काशी दिखती है, और बाद में इल्तुतमिश तथा अलाउद्दीन खिलजी ने इसका विस्तार किया। यह परिसर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। A, पानीपत, में काबुली बाग मस्जिद है, जो बाबर ने 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई के बाद बनवाई। B, लाहौर, में औरंगज़ेब की बादशाही मस्जिद है। C, अजमेर, में ऐबक की दूसरी मस्जिद अढ़ाई दिन का झोंपड़ा है, जो इस प्रश्न का आम जाल है। परीक्षा टिप: ऐबक ने दिल्ली में कुव्वत-उल-इस्लाम और अजमेर में अढ़ाई दिन का झोंपड़ा बनवाया।

Q24.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CGL · 08 Dec 2022, Shift 4मध्यम

कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और मीनार ______ शताब्दी के अंतिम दशक में बनाई गई थी।

  1. A.ग्यारहवीं
  2. B.तेरहवीं
  3. C.चौदहवीं
  4. D.बारहवीं
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. बारहवीं

व्याख्या

सही उत्तर है D, बारहवीं। तराइन के दूसरे युद्ध के तुरंत बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1192 में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण शुरू किया और इसका पहला चरण लगभग 1198 तक पूरा हुआ, जो बारहवीं शताब्दी का अंतिम दशक है। उन्होंने 1199 में इसके पास कुतुब मीनार की नींव रखी, जिसे इल्तुतमिश ने पूरा किया। इसे दिल्ली में नए सल्तनत काल की पहली मस्जिद माना जाता है, जो उसी स्थान के पुराने मंदिरों के पत्थरों से बनी थी, इसीलिए इसके स्तंभों पर प्राचीन भारतीय अलंकरण दिखाई देते हैं। इल्तुतमिश और बाद में अलाउद्दीन खिलजी ने इसके प्रांगण का विस्तार किया, और इसी परिसर में चौथी शताब्दी का चंद्र का लौह स्तंभ खड़ा है। विकल्प A, B और C गलत हैं क्योंकि ग्यारहवीं शताब्दी में सल्तनत दिल्ली तक पहुँची ही नहीं थी, जबकि तेरहवीं और चौदहवीं शताब्दी में मूल मस्जिद नहीं, बल्कि बाद के विस्तार हुए। परीक्षा टिप: तराइन 1192, कुव्वत-उल-इस्लाम 1192-98 और कुतुब मीनार का आरंभ 1199।

Q25.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CGL · 13 April 2022, Shift 1मध्यम

गुरु हेमकुंड साहिब की छत उलटे हुए ______ के आकार की है।

  1. A.गुलाब
  2. B.गेंदा
  3. C.सूरजमुखी
  4. D.कमल
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. कमल

व्याख्या

सही उत्तर है D, कमल। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब का तारे जैसा भवन ऐसी छत के साथ बना है, जो उलटे हुए कमल के आकार की दिखती है, और कमल इस स्थान की कथा से भी जुड़ा है। यह गुरुद्वारा उत्तराखंड के चमोली जिले में 4,600 मीटर से अधिक ऊँचाई पर, सप्त शृंग कहलाने वाली सात चोटियों से घिरी हिमनद झील के किनारे स्थित है। यह सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह को समर्पित है, जिन्होंने अपनी रचना 'बचित्तर नाटक' में इस स्थान का उल्लेख किया है, और बर्फ के कारण यह लगभग मई से अक्तूबर तक ही खुला रहता है। विकल्प A, B और C गलत हैं क्योंकि गुलाब, गेंदा और सूरजमुखी का इस गुरुद्वारे की बनावट से कोई संबंध नहीं है; गेंदा मालाओं में काम आता है और शेष दोनों बगीचे के फूल हैं। दूसरी ओर, कमल भारतीय धार्मिक स्थापत्य में पवित्रता का स्थायी प्रतीक है। परीक्षा टिप: हेमकुंड साहिब उत्तराखंड में, फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित है।

Q26.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CGL · 19 April 2022, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से कौन सा वाद्ययंत्र 'मंगल वाद्य' के नाम से भी जाना जाता है?

  1. A.शहनाई
  2. B.संतूर
  3. C.तबला
  4. D.डमरू
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. शहनाई

व्याख्या

सही उत्तर है A, शहनाई। शहनाई को मंगल वाद्य कहा जाता है क्योंकि इसे विवाह, मंदिर के अनुष्ठानों और शोभायात्राओं जैसे शुभ अवसरों पर बजाया जाता है। यह दोहरी रीड वाला सुषिर यानी फूँक से बजने वाला वाद्य है, जिसका ढाँचा लकड़ी का और सिरे पर धातु का प्याला लगा होता है। उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ ने, जिन्होंने 15 अगस्त 1947 को लाल किले की प्राचीर से शहनाई बजाई थी और जिन्हें 2001 में भारत रत्न मिला, इसे मंच का शास्त्रीय वाद्य बना दिया। विकल्प B गलत है क्योंकि संतूर कश्मीर का समलंब आकार का तंतु वाद्य है, जिसे हल्की छड़ियों से बजाया जाता है और पंडित शिवकुमार शर्मा ने इसे प्रसिद्धि दिलाई। विकल्प C गलत है क्योंकि तबला हिंदुस्तानी संगीत में ताल देने वाला अवनद्ध वाद्य है। विकल्प D गलत है क्योंकि डमरू भगवान शिव से जुड़ा छोटा दो मुँह वाला ढोलक है। परीक्षा टिप: शहनाई-बिस्मिल्ला खाँ, संतूर-शिवकुमार शर्मा, सरोद-अमजद अली खाँ।

Q27.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CGL · 20 April 2022, Shift 2आसान

केलुचरण महापात्र निम्नलिखित में से किस नृत्य शैली के प्रतिपादक थे?

  1. A.कुचिपुड़ी
  2. B.मणिपुरी
  3. C.भरतनाट्यम
  4. D.ओडिसी
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. ओडिसी

व्याख्या

सही उत्तर है D, ओडिसी। केलुचरण महापात्र वे गुरु थे जिन्होंने बीसवीं सदी में ओडिशा के शास्त्रीय नृत्य ओडिसी को फिर मंच पर स्थापित किया। उन्होंने गोटीपुआ बालक नर्तक और पखावज वादक के रूप में शुरुआत की और आगे संजुक्ता पाणिग्रही, सोनल मानसिंह, माधवी मुद्गल तथा प्रोतिमा बेदी को प्रशिक्षित किया। उन्हें 2000 में पद्म विभूषण और संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप मिली। ओडिसी की पहचान त्रिभंग यानी तीन मोड़ वाली मुद्रा और चौकोर चौक मुद्रा है, जो कोणार्क तथा पुरी की मंदिर मूर्तिकला से लिए गए हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश का नृत्य है और वेम्पति चिन्ना सत्यम इसके बड़े गुरु थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि मणिपुरी मणिपुर से आता है और झावेरी बहनें इसकी प्रतिपादक रही हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि भरतनाट्यम तमिलनाडु का है, जो रुक्मिणी देवी अरुंडेल और बालसरस्वती से जुड़ा है। परीक्षा टिप: गुरु और शैली की जोड़ी याद रखें — केलुचरण महापात्र और ओडिसी, बिरजू महाराज और कथक।

Q28.कला और संस्कृतिपूछा गया: RRB NTPC · 13 June 2022, Shift 2आसान

कोणार्क का सूर्य मंदिर लोकप्रिय रूप से __________ के नाम से जाना जाता है।

  1. A.श्वेत पैगोडा
  2. B.ब्लैक पैगोडा
  3. C.स्वर्ण पैगोडा
  4. D.कांस्य पैगोडा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ब्लैक पैगोडा

व्याख्या

सही उत्तर है B, ब्लैक पैगोडा। यूरोपीय नाविक कोणार्क के सूर्य मंदिर को ब्लैक पैगोडा अर्थात काला पैगोडा कहते थे, क्योंकि इसका गहरे रंग के पत्थर से बना शिखर ओडिशा के समुद्र तट पर दूर से दिखाई देता था और उनके लिए दिशासूचक चिह्न का काम करता था; इसके विपरीत पुरी के सफेद पुते जगन्नाथ मंदिर को वे श्वेत पैगोडा कहते थे। इस मंदिर का निर्माण तेरहवीं शताब्दी में पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने कलिंग शैली में कराया था। पूरा मंदिर सूर्य देव के रथ के आकार में बना है, जिसमें पहियों के बारह जोड़े उकेरे गए हैं और सात घोड़े उसे खींचते दिखाए गए हैं; ये पहिए धूपघड़ी का काम भी करते हैं। यूनेस्को ने 1984 में इसे विश्व धरोहर सूची में रखा। A गलत है क्योंकि श्वेत पैगोडा नाविकों द्वारा पुरी के मंदिर को दिया गया नाम था। C और D गलत हैं क्योंकि कोणार्क के लिए ऐसे कोई नाम प्रचलित नहीं रहे। परीक्षा टिप: कोणार्क = ब्लैक पैगोडा, नरसिंहदेव प्रथम, कलिंग शैली, 1984 से यूनेस्को धरोहर।

Q29.कला और संस्कृतिपूछा गया: दिल्ली · DSSSB Patwari, 17 Sep 2022, Shift 1आसान

इंडिया गेट को मूल रूप से निम्नलिखित में से किस नाम से जाना जाता था?

  1. A.एंग्लो-अफ़गान युद्ध स्मारक
  2. B.अखिल भारतीय युद्ध स्मारक
  3. C.दिल्ली का मेहराब
  4. D.सभी ब्रिटिश सैनिकों का युद्ध स्मारक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अखिल भारतीय युद्ध स्मारक

व्याख्या

सही उत्तर है B, अखिल भारतीय युद्ध स्मारक। इंडिया गेट को 'ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल' के रूप में बनाया गया था, ताकि प्रथम विश्व युद्ध और 1919 के तीसरे आंग्ल-अफ़गान युद्ध में जान गँवाने वाले ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिकों को सम्मान दिया जा सके। इसका डिज़ाइन नई दिल्ली के मुख्य वास्तुकार सर एडविन लुटियंस ने तैयार किया था। ड्यूक ऑफ़ कनॉट ने 1921 में इसकी नींव रखी और यह 1931 में बनकर तैयार हुआ। इसकी दीवारों पर हज़ारों सैनिकों के नाम खुदे हैं। 1971 के युद्ध के बाद 1972 में इसके मेहराब के नीचे अमर जवान ज्योति जोड़ी गई। विकल्प A गलत है, क्योंकि अफ़गान युद्ध उन युद्धों में से सिर्फ़ एक है जिनकी याद इसमें है, और यह इसका नाम कभी नहीं था। विकल्प C गलत है, क्योंकि 'दिल्ली का मेहराब' केवल एक वर्णन है, कोई आधिकारिक नाम नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह स्मारक ब्रिटिश भारतीय सेना के भारतीय सैनिकों को सम्मान देता है, केवल ब्रिटिश सैनिकों को नहीं। परीक्षा टिप: इंडिया गेट = अखिल भारतीय युद्ध स्मारक, डिज़ाइन लुटियंस का, निर्माण 1921–1931।

Q30.कला और संस्कृतिपूछा गया: CTET · 22nd Dec 2021मध्यम

स्तंभों का मिलान करें: i. ईदगाह — a. बंद सिरे वाली गली। ii. दरगाह — b. सूफी खानकाह। iii. कुल-दे-सैक — c. खुला नमाज़ स्थल। iv. खानकाह — d. संत का मकबरा। सही विकल्प चुनें।

  1. A.i - b, ii - d, iii - a, iv - c
  2. B.i - d, ii - c, iii - a, iv - b
  3. C.i - b, ii - c, iii - a, iv - d
  4. D.i - c, ii - d, iii - a, iv - b
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. i - c, ii - d, iii - a, iv - b

व्याख्या

सही उत्तर है D, i - c, ii - d, iii - a, iv - b। ईदगाह शहर के किनारे बनी खुली चारदीवारी वाली जगह होती है, जहाँ पूरा समुदाय ईद की नमाज़ के लिए इकट्ठा होता है, इसलिए इसका मिलान खुले नमाज़ स्थल से है। दरगाह किसी सूफी संत का मकबरा है, जहाँ हर धर्म के लोग फूल और दुआएँ चढ़ाने आते हैं। कुल-दे-सैक वह सँकरी गली है जो एक सिरे पर बंद होती है, ऐसी गलियाँ शाहजहाँनाबाद के भरे-पूरे मोहल्लों में बहुत थीं। खानकाह वह स्थान है जहाँ सूफी संत अपने शिष्यों के साथ रहते, शिक्षा देते और आने वालों को भोजन कराते थे। A गलत है क्योंकि यह ईदगाह को सूफी निवास और खानकाह को नमाज़ स्थल बता देता है। B गलत है क्योंकि यह ईदगाह को मकबरा और दरगाह को खुला नमाज़ स्थल कहता है। C गलत है क्योंकि यह ईदगाह को निवास और खानकाह को मकबरा बताता है। परीक्षा टिप: ईदगाह – खुला ईद नमाज़ स्थल; खानकाह – सूफी निवास; दरगाह – संत का मकबरा।

Q31.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC MTS · 6 Oct 2021, Shift 3मध्यम

कोणार्क का सूर्य मंदिर किस राजा के शासनकाल में बनवाया गया था?

  1. A.अनंत पद्मनाभन
  2. B.समुद्रगुप्त
  3. C.अनंतवर्मन चोडगंग
  4. D.नरसिंहदेव प्रथम
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. नरसिंहदेव प्रथम

व्याख्या

सही उत्तर है D, नरसिंहदेव प्रथम। ओडिशा के कोणार्क का सूर्य मंदिर तेरहवीं शताब्दी में पूर्वी गंग वंश के नरसिंहदेव प्रथम ने बनवाया था। यह सूर्य देव के विशाल रथ के रूप में गढ़ा गया है, जिसमें पत्थर के बारह जोड़े पहिये और उसे खींचते सात घोड़े हैं; ये पहिये धूपघड़ी की तरह भी काम करते हैं। नागर शैली की कलिंग शाखा में बना यह मंदिर समुद्र के किनारे खड़ा था और यूरोपीय नाविक इसे ब्लैक पगोडा कहते थे। इसका मुख्य शिखर गिर चुका है, पर जगमोहन और मूर्तिशिल्प बचे हैं, और यूनेस्को ने 1984 में इसे विश्व विरासत सूची में रखा। विकल्प A गलत है, क्योंकि अनंत पद्मनाभन इस मंदिर से जुड़ा कोई शासक नहीं है। विकल्प B गलत है, क्योंकि गुप्त वंश के समुद्रगुप्त इससे लगभग एक हज़ार वर्ष पहले थे और उन्होंने यहाँ कोई मंदिर नहीं बनवाया। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसी वंश के अनंतवर्मन चोडगंग ने पुरी का जगन्नाथ मंदिर आरंभ कराया था। परीक्षा टिप: कोणार्क यानी नरसिंहदेव प्रथम, पुरी यानी अनंतवर्मन चोडगंग, और दोनों पूर्वी गंग वंश के।

Q32.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC MTS · 27 Oct 2021, Shift 2आसान

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान किस वाद्य यंत्र को बजाने के लिए प्रसिद्ध थे?

  1. A.संतूर
  2. B.सितार
  3. C.शहनाई
  4. D.तबला
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. शहनाई

व्याख्या

सही उत्तर है C, शहनाई। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान वही शहनाई वादक थे जिन्होंने इस वाद्य को बारात और मंगल अवसरों से उठाकर संगीत सभा के मंच तक पहुँचाया। उनका जन्म 1916 में बिहार के डुमराँव में हुआ, वे वाराणसी में बसे और विश्वनाथ मंदिर में वादन करते रहे। उन्होंने 1947 में स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर लाल किले से और पहले गणतंत्र दिवस पर भी शहनाई बजाई। उन्हें 2001 में भारत रत्न मिला और वे एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी तथा रवि शंकर के बाद यह सम्मान पाने वाले तीसरे संगीतकार बने; इससे पहले उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण मिल चुके थे। विकल्प A गलत है, क्योंकि कश्मीर का तार वाद्य संतूर शिवकुमार शर्मा से जुड़ा है। विकल्प B गलत है, क्योंकि सितार रवि शंकर और विलायत खान के नाम से जाना जाता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि तबला सुनते ही अल्ला रक्खा और ज़ाकिर हुसैन याद आते हैं। परीक्षा टिप: वाद्य और कलाकार जोड़कर याद रखें, शहनाई बिस्मिल्लाह खान, सरोद अमजद अली खान, बाँसुरी हरिप्रसाद चौरसिया और संतूर शिवकुमार शर्मा।

Q33.कला और संस्कृतिपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 8 Aug 2021मध्यम

मथुरा कला शैली में, निम्नलिखित में से भगवान बुद्ध की मूर्तियाँ (इमेज) मुख्यतः किस मुद्रा में बनायी गयी हैं?

  1. A.ध्यान मुद्रा
  2. B.अभय मुद्रा
  3. C.धर्मचक्र मुद्रा
  4. D.वरद मुद्रा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अभय मुद्रा

व्याख्या

सही उत्तर है B, अभय मुद्रा। मथुरा की आरंभिक बुद्ध मूर्तियों में दायाँ हाथ ऊपर उठा और हथेली बाहर की ओर होती है, जिसका अर्थ है "डरो मत"। मथुरा शैली ईसा की आरंभिक सदियों में कुषाणों के समय फली-फूली, उसी दौर में उत्तर-पश्चिम में गांधार शैली भी थी। मथुरा के शिल्पियों ने स्थानीय चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग किया और बुद्ध को गोल मुस्कुराता चेहरा, सर्पिल जूड़े वाला मुंडित सिर और भरा-पूरा मज़बूत शरीर दिया, जो पूरी तरह भारतीय शैली थी। कटरा टीले से मिली बैठी बुद्ध मूर्ति, जो अब मथुरा संग्रहालय में है, अभय मुद्रा का प्रसिद्ध उदाहरण है। विकल्प A गलत है, क्योंकि गोद में हाथ रखे ध्यान मुद्रा गांधार की मूर्तियों की पहचान है। विकल्प C गलत है, क्योंकि उपदेश की धर्मचक्र मुद्रा बाद में प्रसिद्ध हुई, जैसे गुप्तकालीन सारनाथ बुद्ध में। विकल्प D गलत है, क्योंकि नीचे की ओर हथेली वाली दान की वरद मुद्रा बाद की मूर्तियों में अधिक दिखती है। परीक्षा टिप: मथुरा यानी लाल बलुआ पत्थर और अभय मुद्रा; गांधार यानी स्लेटी शिस्ट और ध्यान मुद्रा।

Q34.कला और संस्कृतिपूछा गया: RRB NTPC · 5 Jan 2021, Shift 1 (CBT 1)आसान

तंजावुर का कौन-सा मंदिर चोल स्थापत्य का है और सम्राट राजराज ने बनवाया था?

  1. A.बृहदीश्वर मंदिर
  2. B.नागनाथस्वामी मंदिर
  3. C.तिरुमनंजेरी मंदिर
  4. D.भगवान मुरुगन मंदिर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बृहदीश्वर मंदिर

व्याख्या

सही उत्तर है A, बृहदीश्वर मंदिर। तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर राजराज चोल प्रथम ने बनवाया और यह लगभग 1010 ईस्वी में पूरा हुआ, इसीलिए इसे राजराजेश्वरम या बड़ा मंदिर भी कहते हैं। यह द्रविड़ मंदिर स्थापत्य का सबसे सुंदर उदाहरण है: लगभग 66 मीटर ऊँचा ग्रेनाइट का विमान, शिखर पर एक ही पत्थर का लगभग 80 टन का कलश, और शिव के गर्भगृह के सामने विशाल एकाश्म नंदी। गंगईकोंड चोलपुरम और दारासुरम के ऐरावतेश्वर मंदिर के साथ यह UNESCO विश्व धरोहर सूची में 'महान जीवित चोल मंदिर' के नाम से शामिल है। B गलत है क्योंकि नागनाथस्वामी मंदिर कुंभकोणम के पास तिरुनागेश्वरम में है और नवग्रह मंदिरों में केतु स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। C गलत है क्योंकि तिरुमनंजेरी मंदिर कुंभकोणम के पास विवाह-आशीर्वाद का मंदिर है, राजराज का मंदिर नहीं। D गलत है क्योंकि पलनी और स्वामीमलाई जैसे मुरुगन मंदिर तंजावुर के चोल राजकीय मंदिर नहीं हैं। परीक्षा टिप: राजराज प्रथम ने तंजावुर का बृहदीश्वर बनवाया; उनके पुत्र राजेंद्र प्रथम ने गंगईकोंड चोलपुरम।

Q35.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CHSL · 13 Oct 2020, Shift 3मध्यम

कौन सा त्योहार तिब्बती नववर्ष के आरंभ का प्रतीक है?

  1. A.सागा दावा उत्सव
  2. B.ओंगकोर उत्सव
  3. C.लोसर उत्सव
  4. D.शोटोन उत्सव
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. लोसर उत्सव

व्याख्या

सही उत्तर है C, लोसर उत्सव। लोसर तिब्बती नववर्ष का प्रतीक है और लगभग पंद्रह दिनों तक मनाया जाता है, प्रायः फरवरी या मार्च में। यह लद्दाख, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश तथा देश भर के तिब्बती समुदायों में मनाया जाता है। तिब्बती भाषा में 'लो' का अर्थ वर्ष और 'सर' का अर्थ नया है। घरों की सफाई और सजावट होती है, मक्खन के दीप जलाए जाते हैं, मठों में मुखौटा पहनकर छम नृत्य होता है और परिवार गुथुक नामक नूडल सूप खाते हैं, ताकि बीते वर्ष का अशुभ दूर हो जाए। विकल्प A गलत है, क्योंकि सागा दावा बुद्ध के जन्म, ज्ञानप्राप्ति और महापरिनिर्वाण का पर्व है और तिब्बती पंचांग के चौथे महीने में आता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि ओंगकोर फसल कटाई से पहले मनाया जाने वाला त्योहार है। विकल्प D गलत है, क्योंकि ल्हासा का शोटोन दही उत्सव है, जो तिब्बती ओपेरा और विशाल थंका के प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध है। परीक्षा टिप: लोसर - तिब्बती नववर्ष; सागा दावा - बुद्ध का जन्म और ज्ञानप्राप्ति।

Q36.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CHSL · 14 Oct 2020, Shift 1आसान

'मोहिनीअट्टम' एक पारंपरिक नृत्य है, जिसका उद्गम भारत के ______ राज्य में हुआ।

  1. A.असम
  2. B.पश्चिम बंगाल
  3. C.केरल
  4. D.आंध्र प्रदेश
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. केरल

व्याख्या

सही उत्तर है C, केरल। मोहिनीअट्टम केरल का शास्त्रीय नृत्य है और इसका नाम भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से आया है। इसे महिलाएं अकेले प्रस्तुत करती हैं, जिसमें सादी सफेद-सुनहरी कसावु साड़ी, लहरदार कोमल गति, मृदु पदचाप और सूक्ष्म भाव-भंगिमा होती है। गीत मणिप्रवालम में होते हैं, जो संस्कृत और मलयालम का मिश्रण है, तथा संगीत कर्नाटक शैली का होता है। कवि वल्लत्तोल नारायण मेनन ने बीसवीं शताब्दी में केरल कलामंडलम में इस नृत्य को पुनर्जीवित किया। विकल्प A गलत है, क्योंकि असम का शास्त्रीय नृत्य सत्रिया है, जिसे संत श्रीमंत शंकरदेव ने आरंभ किया। विकल्प B गलत है, क्योंकि पश्चिम बंगाल का अपना कोई शास्त्रीय नृत्य नहीं है; छऊ और गंभीरा वहां के प्रसिद्ध लोक नृत्य हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि आंध्र प्रदेश का शास्त्रीय नृत्य कुचिपुड़ी है। परीक्षा टिप: केरल के दो शास्त्रीय नृत्य - कथकली और मोहिनीअट्टम; सत्रिया असम का और ओडिसी ओडिशा का है।

Q37.कला और संस्कृतिपूछा गया: राजस्थान · 29 Nov 2020मध्यम

किस चित्रशैली में पशु-पक्षियों को महत्वपूर्ण स्थान मिला है?

  1. A.बूंदी शैली
  2. B.नाथद्वारा शैली
  3. C.किशनगढ़ शैली
  4. D.बीकानेर शैली
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बूंदी शैली

व्याख्या

सही उत्तर है A, बूंदी शैली। हाड़ौती क्षेत्र की बूंदी शैली ही अपने चित्रों को पशु-पक्षियों और घने हरे जंगल से भर देती है। इसके चित्रकारों को प्रकृति प्रिय थी: आम और केले के कुंज, कमल से भरे तालाब, बिजली सहित वर्षा के बादल, हाथी, बाघ, गिलहरी, तोते और मोर पृष्ठभूमि में भरे रहते हैं, और उनके सामने गोल चेहरे तथा छोटी नाक वाली मानव आकृतियाँ दिखाई जाती हैं। बूंदी चित्रकला राव सुर्जन सिंह के समय चुनार के कलाकारों की सहायता से आगे बढ़ी, और इसकी शाखा कोटा शैली ने घने जंगल के शिकार दृश्यों को अपनी विशेषता बना लिया। विकल्प B गलत है, क्योंकि नाथद्वारा शैली में श्रीनाथजी के चित्र बनते हैं, अधिकतर कपड़े पर पिछवाई के रूप में। विकल्प C गलत है, क्योंकि किशनगढ़ शैली निहालचंद के बणी-ठणी मुखड़े और राधा-कृष्ण विषयों के लिए जानी जाती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि बीकानेर शैली पर मुगल तथा दक्कनी प्रभाव है और उसके चित्रकार अपने नाम लिखते थे। परीक्षा टिप: बूंदी-कोटा का अर्थ प्रकृति और शिकार; किशनगढ़ का अर्थ बणी-ठणी।

Q38.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CHSL · 20 Oct 2020, Shift 1मध्यम

'खुआंग' किस राज्य का पारंपरिक वाद्य यंत्र है?

  1. A.असम
  2. B.मिज़ोरम
  3. C.झारखंड
  4. D.पश्चिम बंगाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मिज़ोरम

व्याख्या

सही उत्तर है B, मिज़ोरम। खुआंग मिज़ो लोगों का खोखला काठ का ढोल है, जो एक ही लकड़ी के तने से बनता है और जिसके दोनों सिरों पर चमड़ा मढ़ा जाता है। इसे कंधे से लटकाकर हाथों से बजाया जाता है। मिज़ोरम का कोई उत्सव इसके बिना पूरा नहीं होता - बाँस नृत्य चेरॉ की ताल यही देता है, और चपचार कुट, मिम कुट तथा पॉल कुट त्योहारों में यह प्रमुख वाद्य है। मिज़ो इसे अपने संगीत की आत्मा कहते हैं। मिज़ोरम के अन्य वाद्यों में दरबू और दरमंग घड़ियाल, तुइउम बाँसुरी तथा तार वाला टिंगटांग शामिल हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि असम के प्रसिद्ध वाद्य ढोल, पेपा, गगना और ताल हैं, जो बिहू के साथ बजते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि झारखंड के जनजातीय संगीत में मांदर, नगाड़ा और ढाक बजते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि पश्चिम बंगाल से एकतारा, दोतारा और कीर्तन का खोल जुड़े हैं। परीक्षा टिप: खुआंग और चेरॉ - मिज़ोरम; पेपा और बिहू - असम; एकतारा और बाउल - पश्चिम बंगाल।

Q39.कला और संस्कृतिपूछा गया: SSC CHSL · 16 Oct 2020, Shift 2मध्यम

'मटकी' निम्नलिखित में से किस राज्य का लोकप्रिय लोक नृत्य है?

  1. A.असम
  2. B.मध्य प्रदेश
  3. C.बिहार
  4. D.राजस्थान
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मध्य प्रदेश

व्याख्या

सही उत्तर है B, मध्य प्रदेश। मटकी मध्य प्रदेश के मालवा अंचल का महिलाओं का लोक नृत्य है, जो विवाह और दूसरे मंगल अवसरों पर किया जाता है। एक नर्तकी सिर पर मिट्टी की मटकी सँभालकर, घूँघट डाले, ढोल की थाप पर नाचती है और ताल तेज़ होते ही दूसरी महिलाएँ एक-एक कर उसके साथ जुड़ती जाती हैं। अकेले किए जाने वाले इसी रूप को आड़ा और खड़ा नाच भी कहते हैं। मध्य प्रदेश से गौर, करमा, सैला, गृदा और जवारा नृत्य भी आते हैं, इसलिए इस राज्य के लोक नृत्य प्रश्नपत्रों में बार-बार पूछे जाते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि असम बिहू, बगरुंबा और झुमुर के लिए जाना जाता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि बिहार के नृत्य जट-जटिन, झिझिया, बिदेसिया और पाइका हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि राजस्थान घूमर, कालबेलिया, भवाई, चरी और तेरह ताली के लिए प्रसिद्ध है; चरी नृत्य में भी बर्तन होता है, पर उसमें जलता दीपक रखा जाता है। परीक्षा टिप: मटकी और जवारा - मध्य प्रदेश; चरी और घूमर - राजस्थान।

Q40.कला और संस्कृतिपूछा गया: RRB NTPC · 28 Dec 2020, Shift 1आसान

पट्टचित्र शैली की चित्रकला निम्नलिखित में से किस राज्य की सबसे प्राचीन और लोकप्रिय कला शैलियों में से एक है?

  1. A.आंध्र प्रदेश
  2. B.राजस्थान
  3. C.ओडिशा
  4. D.बिहार
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. ओडिशा

व्याख्या

सही उत्तर है C, ओडिशा। पट्टचित्र ओडिशा की प्राचीन कपड़े पर बनने वाली चित्रकला है और इसका नाम ही इसका अर्थ बता देता है — पट्ट यानी कपड़ा और चित्र यानी तस्वीर। चित्रकार कहे जाने वाले कलाकार कपड़े पर खड़िया और इमली की लेई चढ़ाते हैं, फिर प्राकृतिक रंगों और बारीक कूँची से देवी-देवताओं तथा कथाओं के दृश्य उकेरते हैं और चारों ओर सजी हुई किनारी बनाते हैं। अधिकांश चित्रों में पुरी के जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा, कृष्ण लीला या महाकाव्यों के प्रसंग दिखाए जाते हैं। पुरी के पास बसा रघुराजपुर गाँव इस कला के लिए प्रसिद्ध है और ओडिशा पट्टचित्र को जीआई टैग भी मिला है। A गलत है क्योंकि आंध्र प्रदेश कलमकारी के लिए जाना जाता है। B गलत है क्योंकि राजस्थान फड़ चित्रकला तथा किशनगढ़, मेवाड़ और बूँदी की लघु चित्र शैलियों के लिए प्रसिद्ध है। D गलत है क्योंकि बिहार की पहचान मधुबनी या मिथिला चित्रकला है। परीक्षा टिप: पट्टचित्र ओडिशा, मधुबनी बिहार, कलमकारी आंध्र प्रदेश और वारली महाराष्ट्र की शैली है।