अंतरीय मौर्य काल में लोगों द्वारा पहना जाने वाला एक वस्त्र था। यह क्या था?
- A.शरीर पर लपेटा जाने वाला बिना सिला कपड़े का एक लंबा टुकड़ा।
- B.बाजू वाले अंगरखे से बना एक सिला हुआ वस्त्र।
- C.केवल स्त्रियों द्वारा प्रयुक्त सिर ढकने का वस्त्र।
- D.एक साथ सिली पट्टियों से बना, जिसे कमर पर डोरी से बांधा जाता था
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, शरीर पर लपेटा जाने वाला बिना सिला कपड़े का एक लंबा टुकड़ा। अंतरीय प्राचीन भारत का अधोवस्त्र था, सूती या महीन कपड़े का लंबा टुकड़ा जिसे कूल्हों और पैरों पर लपेटकर खोंसा जाता था, लगभग बाद की धोती की तरह। मौर्य और शुंग काल की मूर्तियों, जैसे दीदारगंज यक्षी और भरहुत व सांची की आकृतियों, में पुरुष और स्त्रियां दोनों इसे पहने दिखते हैं। इसे कमर पर कायबंध नाम के पटके से बांधा जाता था, और ऊपरी शरीर को अलग से ओढ़े गए दुपट्टे, उत्तरीय, से ढका जाता था। ये तीनों मिलकर मूल पहनावा बनाते थे, और अंतरीय ही धोती, लुंगी और साड़ी का पूर्वज है। विकल्प B गलत है, क्योंकि बाजू वाला अंगरखा सिला हुआ वस्त्र था जो बाद में कुषाणों और मध्य एशियाई प्रभाव से आम हुआ। विकल्प C गलत है, क्योंकि अंतरीय स्त्री-पुरुष दोनों का अधोवस्त्र था, सिर ढकने का वस्त्र नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह एक ही बुना हुआ लंबा टुकड़ा था, सिली हुई पट्टियां नहीं। परीक्षा टिप: नीचे अंतरीय, ऊपर उत्तरीय और कमर पर कायबंध।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंजहांगीर को सफवी शासक शाह अब्बास को गले लगाते हुए दिखाने वाली प्रसिद्ध मुगल चित्रकृति निम्नलिखित में से किस मुगल चित्रकार ने बनाई थी?
- A.अब्दुस्समद
- B.अबुल हसन
- C.दसवंत
- D.बिशनदास
उत्तर देखें
जहांगीर को फारस के शाह अब्बास को गले लगाते दिखाने वाला प्रतीकात्मक चित्र, जो लगभग 1618 में बना और अब वॉशिंगटन की फ्रीयर गैलरी में है, अबुल हसन की कृति है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में प्राचीन हिंदू धातु प्रतिमाओं के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चोल काल अपनी धातु मूर्तिकला की सौंदर्यात्मक और तकनीकी उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध है। 2. चोल धातु प्रतिमाओं की प्रतिमा-विधान और शैली उनकी पाषाण प्रतिमाओं के समान थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
चोल कांस्य प्रतिमाएं अपनी सुंदरता और ढलाई के कौशल के लिए प्रसिद्ध हैं, और ये उसी काल की पाषाण मूर्तियों जैसे प्रतिमा-विधान और शैली का पालन करती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आरंभिक बौद्ध मूर्तिकारों ने बुद्ध को मानव रूप में नहीं दिखाया। आरंभिक मूर्तिकारों ने निम्नलिखित में से किन प्रतीकों के माध्यम से बुद्ध की उपस्थिति दर्शाई?
- A.केवल खाली आसन और स्तूप
- B.केवल चक्र और वृक्ष
- C.केवल चक्र, वृक्ष और स्तूप
- D.खाली आसन, चक्र, वृक्ष और स्तूप
उत्तर देखें
साँची, भरहुत और अमरावती जैसे स्थलों की आरंभिक मूर्तिकला में बुद्ध को मनुष्य के रूप में नहीं उकेरा गया; उनकी उपस्थिति प्रतीकों से दिखाई गई, और हर प्रतीक उनके जीवन की किसी घटना से जुड़ा था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रधानमंत्री ने हाल ही में वेरावल में सोमनाथ मंदिर के पास नए सर्किट हाउस का उद्घाटन किया। सोमनाथ मंदिर के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
1. सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग तीर्थों में से एक है।
2. सोमनाथ मंदिर का वर्णन अल-बिरूनी ने किया था।
3. सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा (वर्तमान मंदिर की स्थापना) राष्ट्रपति एस. राधाकृष्णन ने की थी।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग है और अल-बिरूनी ने इसका वर्णन किया, पर वर्तमान मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने की थी, एस. राधाकृष्णन ने नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हाल ही में प्रधानमंत्री ने हैदराबाद में बैठी हुई मुद्रा में रामानुज की विश्व की दूसरी सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन रामानुज की शिक्षाओं को सही रूप में प्रस्तुत करता है?
- A.मुक्ति का सर्वोत्तम साधन भक्ति था।
- B.वेद नित्य, स्वयंभू और पूर्णतः प्रामाणिक हैं।
- C.परम आनंद के लिए तार्किक युक्तियां आवश्यक साधन थीं।
- D.मुक्ति ध्यान के द्वारा प्राप्त की जानी थी।
उत्तर देखें
रामानुज ने सिखाया कि विष्णु के प्रति प्रेमपूर्ण भक्ति और पूर्ण शरणागति (प्रपत्ति) ही मोक्ष का सबसे निश्चित मार्ग है।
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