सत्त्रिया नृत्य शैली किस राज्य के मठों में विकसित हुई थी?
- A.पश्चिम बंगाल
- B.अरुणाचल प्रदेश
- C.असम
- D.सिक्किम
सही उत्तर
C. असम
व्याख्या
सही उत्तर है C, असम। सत्त्रिया नृत्य 15वीं सदी में संत-सुधारक श्रीमंत शंकरदेव ने असम के वैष्णव मठों, यानी सत्रों, में विकसित किया। उन्होंने इसे भगवान कृष्ण की भक्ति फैलाने के लिए अपनी एकांकी नाटिकाओं 'अंकिया नाट' के हिस्से के रूप में रचा, और सदियों तक इसे सत्रों के भीतर केवल पुरुष भिक्षु, यानी भकत, करते रहे। संगीत नाटक अकादमी ने वर्ष 2000 में सत्त्रिया को भारत के शास्त्रीय नृत्य के रूप में मान्यता दी। यह आज भी ब्रह्मपुत्र के नदी द्वीप माजुली के सत्रों से गहराई से जुड़ा है। A गलत है क्योंकि पश्चिम बंगाल पुरुलिया छऊ जैसे लोक नृत्यों के लिए जाना जाता है, सत्त्रिया के लिए नहीं। B गलत है क्योंकि अरुणाचल प्रदेश के तवांग जैसे मठ बौद्ध हैं और वहां मुखौटा नृत्य होते हैं, सत्त्रिया नहीं। D गलत है क्योंकि सिक्किम के मठ भी बौद्ध हैं और छाम मुखौटा नृत्य के लिए प्रसिद्ध हैं। परीक्षा टिप: सत्त्रिया, असम, श्रीमंत शंकरदेव, सत्र, और वर्ष 2000 में शास्त्रीय दर्जा।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और मीनार ______ शताब्दी के अंतिम दशक में बनाई गई थी।
- A.ग्यारहवीं
- B.तेरहवीं
- C.चौदहवीं
- D.बारहवीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. बारहवीं
व्याख्या
सही उत्तर है D, बारहवीं। तराइन के दूसरे युद्ध के तुरंत बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1192 में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण शुरू किया और इसका पहला चरण लगभग 1198 तक पूरा हुआ, जो बारहवीं शताब्दी का अंतिम दशक है। उन्होंने 1199 में इसके पास कुतुब मीनार की नींव रखी, जिसे इल्तुतमिश ने पूरा किया। इसे दिल्ली में नए सल्तनत काल की पहली मस्जिद माना जाता है, जो उसी स्थान के पुराने मंदिरों के पत्थरों से बनी थी, इसीलिए इसके स्तंभों पर प्राचीन भारतीय अलंकरण दिखाई देते हैं। इल्तुतमिश और बाद में अलाउद्दीन खिलजी ने इसके प्रांगण का विस्तार किया, और इसी परिसर में चौथी शताब्दी का चंद्र का लौह स्तंभ खड़ा है। विकल्प A, B और C गलत हैं क्योंकि ग्यारहवीं शताब्दी में सल्तनत दिल्ली तक पहुँची ही नहीं थी, जबकि तेरहवीं और चौदहवीं शताब्दी में मूल मस्जिद नहीं, बल्कि बाद के विस्तार हुए। परीक्षा टिप: तराइन 1192, कुव्वत-उल-इस्लाम 1192-98 और कुतुब मीनार का आरंभ 1199।
गुरु हेमकुंड साहिब की छत उलटे हुए ______ के आकार की है।
- A.गुलाब
- B.गेंदा
- C.सूरजमुखी
- D.कमल
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. कमल
व्याख्या
सही उत्तर है D, कमल। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब का तारे जैसा भवन ऐसी छत के साथ बना है, जो उलटे हुए कमल के आकार की दिखती है, और कमल इस स्थान की कथा से भी जुड़ा है। यह गुरुद्वारा उत्तराखंड के चमोली जिले में 4,600 मीटर से अधिक ऊँचाई पर, सप्त शृंग कहलाने वाली सात चोटियों से घिरी हिमनद झील के किनारे स्थित है। यह सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह को समर्पित है, जिन्होंने अपनी रचना 'बचित्तर नाटक' में इस स्थान का उल्लेख किया है, और बर्फ के कारण यह लगभग मई से अक्तूबर तक ही खुला रहता है। विकल्प A, B और C गलत हैं क्योंकि गुलाब, गेंदा और सूरजमुखी का इस गुरुद्वारे की बनावट से कोई संबंध नहीं है; गेंदा मालाओं में काम आता है और शेष दोनों बगीचे के फूल हैं। दूसरी ओर, कमल भारतीय धार्मिक स्थापत्य में पवित्रता का स्थायी प्रतीक है। परीक्षा टिप: हेमकुंड साहिब उत्तराखंड में, फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित है।
निम्नलिखित में से किस कलाकार ने 1975 में 'मीना गुर्जरी' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता था?
- A.सोनल मानसिंह
- B.सितारा देवी
- C.शोवना नारायण
- D.मल्लिका साराभाई
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. मल्लिका साराभाई
व्याख्या
सही उत्तर है D, मल्लिका साराभाई। उन्हें 1975 में गुजराती फिल्म 'मीना गुर्जरी' में अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला था, जो सिनेमा, रंगमंच और नृत्य तीनों में फैले उनके करियर की शुरुआत थी। अपनी माँ मृणालिनी साराभाई से भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी सीखने वाली मल्लिका को पीटर ब्रुक के 'द महाभारत' में द्रौपदी की भूमिका के लिए भी जाना जाता है, और वे अहमदाबाद की दर्पण अकादमी चलाती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि सोनल मानसिंह ओडिसी और भरतनाट्यम की प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं, जिन्हें पद्म विभूषण मिला है, वे फिल्म अभिनेत्री नहीं हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि सितारा देवी कथक नृत्यांगना थीं, जिन्हें रवींद्रनाथ टैगोर ने नृत्य सम्राज्ञी कहा था और उनका फिल्मी काम 1940 के दशक का है। विकल्प C गलत है क्योंकि शोवना नारायण कथक नृत्यांगना हैं और भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा सेवा की अधिकारी भी रही हैं। परीक्षा टिप: मल्लिका साराभाई को दर्पण अकादमी और माँ मृणालिनी साराभाई से जोड़कर याद रखें।
निम्नलिखित में से कौन सा वाद्ययंत्र 'मंगल वाद्य' के नाम से भी जाना जाता है?
- A.शहनाई
- B.संतूर
- C.तबला
- D.डमरू
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. शहनाई
व्याख्या
सही उत्तर है A, शहनाई। शहनाई को मंगल वाद्य कहा जाता है क्योंकि इसे विवाह, मंदिर के अनुष्ठानों और शोभायात्राओं जैसे शुभ अवसरों पर बजाया जाता है। यह दोहरी रीड वाला सुषिर यानी फूँक से बजने वाला वाद्य है, जिसका ढाँचा लकड़ी का और सिरे पर धातु का प्याला लगा होता है। उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ ने, जिन्होंने 15 अगस्त 1947 को लाल किले की प्राचीर से शहनाई बजाई थी और जिन्हें 2001 में भारत रत्न मिला, इसे मंच का शास्त्रीय वाद्य बना दिया। विकल्प B गलत है क्योंकि संतूर कश्मीर का समलंब आकार का तंतु वाद्य है, जिसे हल्की छड़ियों से बजाया जाता है और पंडित शिवकुमार शर्मा ने इसे प्रसिद्धि दिलाई। विकल्प C गलत है क्योंकि तबला हिंदुस्तानी संगीत में ताल देने वाला अवनद्ध वाद्य है। विकल्प D गलत है क्योंकि डमरू भगवान शिव से जुड़ा छोटा दो मुँह वाला ढोलक है। परीक्षा टिप: शहनाई-बिस्मिल्ला खाँ, संतूर-शिवकुमार शर्मा, सरोद-अमजद अली खाँ।
स्तंभों का मिलान करें: i. ईदगाह — a. बंद सिरे वाली गली। ii. दरगाह — b. सूफी खानकाह। iii. कुल-दे-सैक — c. खुला नमाज़ स्थल। iv. खानकाह — d. संत का मकबरा। सही विकल्प चुनें।
- A.i - b, ii - d, iii - a, iv - c
- B.i - d, ii - c, iii - a, iv - b
- C.i - b, ii - c, iii - a, iv - d
- D.i - c, ii - d, iii - a, iv - b
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. i - c, ii - d, iii - a, iv - b
व्याख्या
सही उत्तर है D, i - c, ii - d, iii - a, iv - b। ईदगाह शहर के किनारे बनी खुली चारदीवारी वाली जगह होती है, जहाँ पूरा समुदाय ईद की नमाज़ के लिए इकट्ठा होता है, इसलिए इसका मिलान खुले नमाज़ स्थल से है। दरगाह किसी सूफी संत का मकबरा है, जहाँ हर धर्म के लोग फूल और दुआएँ चढ़ाने आते हैं। कुल-दे-सैक वह सँकरी गली है जो एक सिरे पर बंद होती है, ऐसी गलियाँ शाहजहाँनाबाद के भरे-पूरे मोहल्लों में बहुत थीं। खानकाह वह स्थान है जहाँ सूफी संत अपने शिष्यों के साथ रहते, शिक्षा देते और आने वालों को भोजन कराते थे। A गलत है क्योंकि यह ईदगाह को सूफी निवास और खानकाह को नमाज़ स्थल बता देता है। B गलत है क्योंकि यह ईदगाह को मकबरा और दरगाह को खुला नमाज़ स्थल कहता है। C गलत है क्योंकि यह ईदगाह को निवास और खानकाह को मकबरा बताता है। परीक्षा टिप: ईदगाह – खुला ईद नमाज़ स्थल; खानकाह – सूफी निवास; दरगाह – संत का मकबरा।