उत्तराखंड में ओपीयू-आईवीएफ से पहली बद्री बछिया का जन्म
बद्री भ्रूण को साहीवाल गाय में प्रत्यारोपित कर ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से एक स्वस्थ बद्री बछिया का जन्म हुआ; बद्री मवेशी उत्तराखंड के राज्य पशु हैं।

चर्चा में क्यों
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 12 सितंबर 2026 को ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से बद्री बछिया के जन्म की जानकारी दी, जो उत्तराखंड की देसी बद्री नस्ल के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
ओवम पिक-अप और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से एक स्वस्थ बद्री बछिया का जन्म हुआ है। बछिया का जन्म 11 सितंबर 2026 को एकेडमिक डेयरी फार्म में हुआ। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इसकी जानकारी 12 सितंबर 2026 को दी। बद्री नस्ल के भ्रूण को साहीवाल नस्ल की गाय में प्रत्यारोपित किया गया था और उसी गाय ने इस बछिया को जन्म दिया। बद्री मवेशी उत्तराखंड का महत्वपूर्ण देशी आनुवंशिक संसाधन हैं और इन्हें राज्य का राज्य पशु माना जाता है।
किसने यह काम किया
इस काम में दो संस्थाएं साथ रहीं। पहली है करनाल का आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान। दूसरी है उत्तराखंड के पंतनगर स्थित जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय। आर्थिक मदद हल्दी स्थित उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद से मिली। यह अनुसंधान कार्यक्रम 2023 में शुरू हुआ था, जब डॉ. एम. एस. चौहान विश्वविद्यालय के कुलपति थे। दोनों ओर की टीमों ने तीन वर्ष में इस नस्ल के लिए भ्रूण उत्पादन और भ्रूण प्रत्यारोपण की प्रक्रियाएं स्थापित कीं।
तकनीक कैसे काम करती है
| पहला चरण | चुनी हुई बद्री दाता गायों से अल्ट्रासाउंड-निर्देशित ओवम पिक-अप द्वारा अंडे लेना |
| दूसरा चरण | अंडों को परिपक्व कर प्रयोगशाला में बेहतर बद्री सांड के वीर्य से निषेचित करना |
| तीसरा चरण | भ्रूणों को नियंत्रित प्रयोगशाला स्थितियों में विकसित करना |
| चौथा चरण | भ्रूणों को समन्वित प्राप्तकर्ता गायों में प्रत्यारोपित करना |
वीर्य उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड से प्राप्त हुआ। एक और समन्वित संकर प्राप्तकर्ता गाय से भी अगले कुछ दिनों में बद्री बछड़े के जन्म की उम्मीद है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
करनाल स्थित आईसीएआर-एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि ऐसी तकनीकें बेहतरीन मादा जर्मप्लाज्म को पारंपरिक प्रजनन की तुलना में कहीं तेजी से बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह जन्म नस्ल सुधार और जर्मप्लाज्म संरक्षण के व्यवस्थित कार्यक्रमों की नींव रखता है। टीम अधिक दूध देने वाली बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी काम कर रही है और अनुसंधान के कई चरणों में क्लोन किए गए बद्री भ्रूण तैयार कर चुकी है। अगले चरण में ओपीयू-आईवीएफ और क्लोनिंग से बने भ्रूण साहीवाल, संकर तथा बद्री प्राप्तकर्ता गायों में प्रत्यारोपित किए जाएंगे। हिमालयी क्षेत्र की कम संख्या वाली इस नस्ल के लिए यह गुणन की गति बढ़ाने का रास्ता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| उपलब्धि | ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से बद्री बछिया का जन्म |
|---|---|
| पूरा नाम | ओवम पिक-अप और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन |
| जन्म तिथि | 11 सितंबर 2026, एकेडमिक डेयरी फार्म |
| प्राप्तकर्ता गाय | साहीवाल गाय ने बद्री भ्रूण को धारण किया |
| नस्ल | बद्री मवेशी, उत्तराखंड का राज्य पशु |
| संस्थाएं | आईसीएआर-एनडीआरआई, करनाल तथा जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर |
| आर्थिक मदद | उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद, हल्दी |
| कार्यक्रम की शुरुआत | 2023, तत्कालीन कुलपति डॉ. एम. एस. चौहान की पहल पर |
| वीर्य का स्रोत | आनुवंशिक रूप से बेहतर बद्री सांड, उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड के माध्यम से |
| अगला चरण | ओपीयू-आईवीएफ और क्लोनिंग से बने भ्रूणों का साहीवाल, संकर तथा बद्री गायों में प्रत्यारोपण |
परीक्षा की दृष्टि से
ओपीयू-आईवीएफ का पूरा नाम, बछिया की नस्ल बद्री और यह कि बद्री उत्तराखंड का राज्य पशु है, प्राप्तकर्ता साहीवाल गाय, दोनों संस्थाएं (आईसीएआर-एनडीआरआई करनाल और जी. बी. पंत विश्वविद्यालय, पंतनगर), आर्थिक मदद देने वाली संस्था तथा कार्यक्रम के आरंभ का वर्ष 2023 याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
जिस नस्ल में ओपीयू-आईवीएफ से बछिया का जन्म हुआ, वह बद्री नस्ल किस राज्य का राज्य पशु है?
- A.हिमाचल प्रदेश
- B.उत्तराखंड
- C.सिक्किम
- D.अरुणाचल प्रदेश
उत्तर देखें
बद्री मवेशी इस राज्य का महत्वपूर्ण देशी आनुवंशिक संसाधन बताए गए हैं और इन्हें राज्य पशु का दर्जा प्राप्त है, इसलिए इस नस्ल के संरक्षण का वैज्ञानिक और प्रतीकात्मक, दोनों महत्व है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बद्री प्रजनन कार्यक्रम में बद्री भ्रूण किस नस्ल की प्राप्तकर्ता गाय में प्रत्यारोपित किया गया?
- A.गिर
- B.थारपारकर
- C.साहीवाल
- D.लाल सिंधी
उत्तर देखें
कार्यक्रम के तहत आनुवंशिक रूप से मूल्यवान बद्री दाता गायों से अल्ट्रासाउंड-निर्देशित ओवम पिक-अप द्वारा अंडे लिए गए, उन्हें परिपक्व कर प्रयोगशाला में बेहतर बद्री सांड के वीर्य से निषेचित किया गया और भ्रूणों को नियंत्रित परिस्थितियों में विकसित किया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बद्री ओपीयू-आईवीएफ कार्यक्रम किन दो संस्थाओं ने चलाया?
- A.आईसीएआर-एनडीआरआई, करनाल और जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर
- B.आईसीएआर-आईवीआरआई, इज्जतनगर और काशी हिंदू विश्वविद्यालय
- C.एनबीएजीआर, करनाल और कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल
- D.आईसीएआर-सीआईआरसी, मेरठ और दून विश्वविद्यालय, देहरादून
उत्तर देखें
यह कार्यक्रम इन्हीं दोनों के सहयोग से चला, जिसमें हल्दी स्थित उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद ने आर्थिक मदद दी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ओपीयू-आईवीएफ का पूरा नाम क्या है?
ओवम पिक-अप और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन। दाता गाय से अल्ट्रासाउंड-निर्देशित तरीके से अंडे लिए जाते हैं, प्रयोगशाला में निषेचन होता है और भ्रूण प्राप्तकर्ता गाय में प्रत्यारोपित किया जाता है।
बद्री मवेशी किस राज्य के राज्य पशु हैं?
उत्तराखंड के। बद्री मवेशी इस राज्य का महत्वपूर्ण देशी आनुवंशिक संसाधन माने जाते हैं।
यह उपलब्धि किन संस्थाओं ने हासिल की?
करनाल के आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान और पंतनगर के जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने, हल्दी स्थित उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद की मदद से।
स्रोत
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