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GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

बद्री प्रजनन कार्यक्रम में बद्री भ्रूण किस नस्ल की प्राप्तकर्ता गाय में प्रत्यारोपित किया गया?

  1. A.गिर
  2. B.थारपारकर
  3. C.साहीवाल
  4. D.लाल सिंधी

सही उत्तर

C. साहीवाल

व्याख्या

सही उत्तर साहीवाल है। कार्यक्रम के तहत आनुवंशिक रूप से मूल्यवान बद्री दाता गायों से अल्ट्रासाउंड-निर्देशित ओवम पिक-अप द्वारा अंडे लिए गए, उन्हें परिपक्व कर प्रयोगशाला में बेहतर बद्री सांड के वीर्य से निषेचित किया गया और भ्रूणों को नियंत्रित परिस्थितियों में विकसित किया गया। ऐसा ही एक बद्री भ्रूण एक समन्वित साहीवाल प्राप्तकर्ता गाय में रखा गया, जिसने बाद में स्वस्थ बद्री बछिया को जन्म दिया। प्राप्तकर्ता गाय केवल गर्भ धारण करती है, इसलिए बछिया की आनुवंशिकी बद्री दाता और बद्री सांड की ही रहती है, जन्म देने वाली गाय की नहीं। विकल्प A, B और D भारत की अन्य प्रसिद्ध देशी गाय नस्लें हैं और सिद्धांत रूप में इनमें से कोई भी प्राप्तकर्ता बन सकती थी, इसीलिए ये अच्छे भ्रामक विकल्प हैं। एक और संकर गाय से भी जल्द बद्री बछड़े के जन्म की उम्मीद जताई गई थी।

पूरा लेख पढ़ें: उत्तराखंड में ओपीयू-आईवीएफ से पहली बद्री बछिया का जन्म

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Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

जिस नस्ल में ओपीयू-आईवीएफ से बछिया का जन्म हुआ, वह बद्री नस्ल किस राज्य का राज्य पशु है?

  1. A.हिमाचल प्रदेश
  2. B.उत्तराखंड
  3. C.सिक्किम
  4. D.अरुणाचल प्रदेश
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. उत्तराखंड

व्याख्या

सही उत्तर उत्तराखंड है। बद्री मवेशी इस राज्य का महत्वपूर्ण देशी आनुवंशिक संसाधन बताए गए हैं और इन्हें राज्य पशु का दर्जा प्राप्त है, इसलिए इस नस्ल के संरक्षण का वैज्ञानिक और प्रतीकात्मक, दोनों महत्व है। यह काम करनाल के आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान और पंतनगर के जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने मिलकर किया, और पंतनगर स्वयं उत्तराखंड में है। आर्थिक मदद हल्दी स्थित उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद से मिली। विकल्प A, C और D अन्य हिमालयी राज्य हैं, जिनके अपने राज्य पशु हैं, और इन्हें इसलिए रखा गया है कि अभ्यर्थी को केवल इतना याद रह जाए कि नस्ल पहाड़ की है। बद्री नाम को उत्तराखंड से जोड़कर और यह याद रखकर कि वीर्य उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड से आया, उत्तर पक्का हो जाता है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

बद्री ओपीयू-आईवीएफ कार्यक्रम किन दो संस्थाओं ने चलाया?

  1. A.आईसीएआर-एनडीआरआई, करनाल और जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर
  2. B.आईसीएआर-आईवीआरआई, इज्जतनगर और काशी हिंदू विश्वविद्यालय
  3. C.एनबीएजीआर, करनाल और कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल
  4. D.आईसीएआर-सीआईआरसी, मेरठ और दून विश्वविद्यालय, देहरादून
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. आईसीएआर-एनडीआरआई, करनाल और जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर

व्याख्या

सही उत्तर आईसीएआर-एनडीआरआई, करनाल और जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर है। यह कार्यक्रम इन्हीं दोनों के सहयोग से चला, जिसमें हल्दी स्थित उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद ने आर्थिक मदद दी। इसकी शुरुआत 2023 में विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. एम. एस. चौहान की पहल पर हुई और अगले तीन वर्षों में दोनों टीमों ने इस नस्ल के लिए ओवम पिक-अप, भ्रूण उत्पादन और भ्रूण प्रत्यारोपण की प्रक्रियाएं स्थापित कीं। आईसीएआर-एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि ऐसी उन्नत प्रजनन तकनीकें बेहतरीन मादा जर्मप्लाज्म को तेजी से बढ़ा सकती हैं और व्यवस्थित नस्ल सुधार कार्यक्रमों में मदद करती हैं। बाकी विकल्पों में क्षेत्र की ऐसी वास्तविक संस्थाएं और विश्वविद्यालय मिलाए गए हैं जो इस काम में साझेदार नहीं थे।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

आईएनडी-सीईपीआई मिशन के तहत सामने आई भारत की पहली एमआरएनए कोविड-19 वैक्सीन कौन सी है?

  1. A.जीईएमसीओवीएसी-19
  2. B.भारतवैक-19
  3. C.नैनोकोव-21
  4. D.सारबेवैक्स-19
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. जीईएमसीओवीएसी-19

व्याख्या

सही उत्तर है जीईएमसीओवीएसी-19। भारत केंद्रित सीईपीआई मिशन, आईएनडी-सीईपीआई, को बीआरआईसी-टीएचएसटीआई और बीआईआरएसी लागू करते हैं और यह वैक्सीन इसके महत्वपूर्ण नतीजों में शामिल है। इसे आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली थी। इस मिशन के अन्य परिणामों में एक इनएक्टिवेटेड चिकनगुनिया वैक्सीन कैंडिडेट शामिल है, जिसके फेज II और फेज III परीक्षण चल रहे हैं, तथा मंकीपॉक्स और पैन-सारबेकोवायरस के लिए मल्टीवैलेंट सेल्फ-असेम्बल्ड नैनोकेज तकनीक पर आधारित कैंडिडेट, जो उन्नत प्री-क्लिनिकल चरण में हैं। साझेदारी ने साझा ढांचा भी बनाया, क्योंकि बीआरआईसी-टीएचएसटीआई बायोएसे लैबोरेटरी सीईपीआई की 17 केंद्रीकृत नेटवर्क प्रयोगशालाओं में से एक है और इसने आठ वैक्सीन कैंडिडेट को सहयोग दिया है और वैक्सीन विकास के लिए एक लाख से अधिक नमूनों की जांच की है। विकल्प B, C और D गढ़े हुए नाम हैं और विज्ञप्ति में इनका कोई उल्लेख नहीं है। परीक्षा में वैक्सीन का नाम, उसका प्लेटफॉर्म और उसे तैयार करने वाला मिशन, तीनों साथ याद रखने चाहिए।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

विज्ञप्ति के अनुसार 2025 में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का आकार कितना था?

  1. A.165.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर
  2. B.185.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर
  3. C.195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर
  4. D.215.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर

व्याख्या

सही उत्तर है 195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर। भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2025 में इस आकार तक पहुंची और इसमें अठारह प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई। देश का बायोटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम बढ़कर 11 हजार 855 स्टार्टअप तक पहुंचा, जिनमें से 1 हजार 780 अकेले उसी वर्ष जुड़े, और बायोफार्मा क्षेत्र की हिस्सेदारी जैव-अर्थव्यवस्था में लगभग तीस प्रतिशत है। मंत्री ने इन्हीं आंकड़ों के आधार पर कहा कि भारत की क्षमताओं को अब केवल वैक्सीन निर्माण के नजरिए से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि देश उन्नत वैक्सीन तकनीक और जटिल जैविक उत्पादों की ओर बढ़ चुका है। विकल्प A, B और D में दिए आंकड़े विज्ञप्ति में नहीं हैं। परीक्षा में ऐसा आंकड़ा उसके वर्ष और वृद्धि दर के साथ पूछा जाता है, इसलिए तीनों बातें साथ याद रखें।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

सीईपीआई (CEPI) का पूरा नाम क्या है?

  1. A.काउंसिल फॉर एपिडेमिक प्रिवेंशन इन इंडिया
  2. B.कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन
  3. C.सेंटर फॉर इमर्जिंग पैथोजन इन्वेस्टिगेशन
  4. D.कमीशन फॉर एपिडेमिक पॉलिसी एंड इम्युनाइजेशन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन

व्याख्या

सही उत्तर है कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन। इसके बोर्ड और इन्वेस्टर्स काउंसिल की बैठक नई दिल्ली में हुई तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग और सीईपीआई ने मिलकर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में उच्च स्तरीय रिसेप्शन आयोजित किया। इस बैठक के साथ संगठन की गवर्नेंस एक दशक बाद भारत लौटी। भारत इस गठबंधन का संस्थापक सदस्य और लंबे समय से रणनीतिक भागीदार रहा है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा बीआईआरएसी सीईपीआई के साथ एक त्रिपक्षीय रणनीति पर काम करते हैं, जो पहली बार अक्तूबर 2019 में लागू हुई और सितंबर 2025 में पांच और वर्षों के लिए बढ़ाई गई। विकल्प A, C और D गढ़े हुए नाम हैं और विज्ञप्ति में कहीं नहीं आते। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं के संक्षिप्त नाम अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए हर अक्षर का सही शब्द याद रखें।