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टीडीबी से पेप्ट्रिस को वीआईजीओआर के लिए 86 करोड़ रुपये

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने बेंगलुरु की पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज को वीआईजीओआर परियोजना के लिए आरडीआई कोष से 86 करोड़ रुपये की सहायता देने पर सहमति दी है।

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टीडीबी से पेप्ट्रिस को वीआईजीओआर के लिए 86 करोड़ रुपये

चर्चा में क्यों

12 अक्टूबर 2026 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने बेंगलुरु की पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ वीआईजीओआर कार्यक्रम के लिए 86 करोड़ रुपये की आरडीआई सहायता का समझौता किया, जिसके तहत एआई से खोजी गई चार दवाओं को टीआरएल-4 से टीआरएल-6 तक ले जाया जाएगा।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित कंपनी पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है। बोर्ड इस कंपनी के दवा विकास कार्य में 86 करोड़ रुपये लगाएगा और यह राशि अनुसंधान विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष से दी जाएगी। इसकी जानकारी 12 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक की गई।

परियोजना क्या है

परियोजना को वीआईजीओआर: एआई से खोजे गए मॉलिक्यूल्स को लैब से क्लिनिक तक नाम दिया गया है। इसकी कुल लागत 172 करोड़ रुपये आंकी गई है, अर्थात बोर्ड आधा खर्च उठा रहा है। यह सहायता सीधा अनुदान नहीं है। यह कंपनी तक वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण (ओसीडी) के रूप में पहुंचेगी, जिसे देने वाला चाहे तो बाद में हिस्सेदारी में बदल सकता है। इस धन से चार प्रायोगिक दवाओं को प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (टीआरएल)-4 से टीआरएल-6 तक पहुंचाया जाएगा। इस चढ़ाई में पूर्व-नैदानिक अध्ययन, प्रयोगशाला में सत्यापन और मनुष्यों पर परीक्षण से पहले की तैयारी शामिल है, जिसमें जांचाधीन नई दवा से जुड़े अध्ययन भी आते हैं। इस काम के लिए तीन वर्ष रखे गए हैं और इसी अवधि में फॉर्मूलेशन विकास तथा परीक्षण की तैयारी भी होगी।

चारों प्रायोगिक दवाएं

चारों अणु कंपनी के अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंच से चुने गए हैं, न कि यौगिकों की लंबी छंटाई से। चारों आज टीआरएल-4 पर खड़े हैं।

दवारोग क्षेत्र
पीईपीआर111तंत्रिका-मांसपेशी विकार और कैंसर
पीईपीआरएक्स101बालों का झड़ना (एलोपेसिया)
पीईपीआर202न्यूरोपैथी
पीईपीआर112डीएमडी

यह खाई क्यों भरनी थी

सॉफ्टवेयर किसी आशाजनक अणु को जल्दी सामने ला सकता है, रोग के तंत्र का संकेत दे सकता है और उपचार की तलाश छोटी कर सकता है। जो वह नहीं कर सकता, वह है अणु को सुरक्षित सिद्ध करना। इसके लिए प्रयोगशाला के परीक्षण, पशुओं पर अध्ययन और नियमों के दायरे में होने वाला नैदानिक परीक्षण चाहिए और इसी खर्च पर भारत की अनेक खोजें रुक जाती हैं। टीडीबी के अनुसार उसका उद्देश्य कंप्यूटर के परिणाम और परीक्षण योग्य दवा के बीच की इसी दूरी को पाटना है। सत्यापन के एक हिस्से में वैश्विक अनुबंध अनुसंधान संगठन के नेटवर्क का उपयोग होगा।

बोर्ड का कहना

टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता नई दवाओं को पहचानने और आगे बढ़ाने का तरीका बदल सकती है, परंतु किसी आशा भरे परिणाम को प्रमाणित दवा में बदलने के लिए लगातार निवेश, कड़ी वैज्ञानिक जांच और एक व्यवस्थित राह चाहिए। उन्होंने आरडीआई कोष को ऐसे प्रौद्योगिकी-प्रधान कार्यक्रमों का सहारा बताया और इसे जैव प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर टिकी स्वास्थ्य सेवा में भारत की क्षमता से जोड़ा।

महत्वपूर्ण तथ्य

समझौता करने वाली संस्थाप्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
कंपनीपेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु, कर्नाटक
सहायताअनुसंधान विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष से 86 करोड़ रुपये
कुल परियोजना लागत172 करोड़ रुपये
सहायता का माध्यमवैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण (ओसीडी)
कार्यक्रमवीआईजीओआर: एआई से खोजे गए मॉलिक्यूल्स को लैब से क्लिनिक तक
तत्परता स्तरटीआरएल-4 से टीआरएल-6
शामिल दवाएंपीईपीआर111, पीईपीआरएक्स101, पीईपीआर202 और पीईपीआर112
अवधितीन वर्ष, जिसमें आईएनडी-सक्षम अध्ययन और परीक्षण की तैयारी शामिल
टीडीबी के सचिवराजेश कुमार पाठक
घोषणा की तिथि12 अक्टूबर 2026

परीक्षा की दृष्टि से

सहायता देने वाली संस्था (टीडीबी, डीएसटी के अधीन), कंपनी और उसका शहर (पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज, बेंगलुरु, कर्नाटक), राशि (86 करोड़ रुपये) और कुल लागत (172 करोड़ रुपये), कोष (आरडीआई), माध्यम (ओसीडी), कार्यक्रम का नाम (वीआईजीओआर), टीआरएल-4 से टीआरएल-6 की छलांग, चारों अणु और उनके रोग क्षेत्र, तीन वर्ष की अवधि तथा सचिव राजेश कुमार पाठक का नाम याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने वीआईजीओआर कार्यक्रम के लिए 86 करोड़ रुपये की आरडीआई सहायता किस कंपनी को दी है?

  1. A.बायोकॉन लिमिटेड, बेंगलुरु
  2. B.पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु
  3. C.भारत बायोटेक इंटरनेशनल, हैदराबाद
  4. D.सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु

व्याख्या

सही उत्तर पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने कर्नाटक के बेंगलुरु की इसी कंपनी के साथ समझौता किया और वीआईजीओआर कार्यक्रम के लिए अनुसंधान विकास और नवाचार कोष से 86 करोड़ रुपये देने का वचन दिया, जबकि परियोजना की पूरी लागत 172 करोड़ रुपये है। यह राशि वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के रूप में दी जाएगी। विकल्प A में दी गई बायोकॉन लिमिटेड भी बेंगलुरु में ही है, इसलिए केवल शहर देखकर उत्तर तय करना भूल होगी, परंतु समझौते में इस कंपनी का नाम नहीं है। विकल्प C की भारत बायोटेक इंटरनेशनल हैदराबाद की कंपनी है और इस व्यवस्था में उसका कोई भाग नहीं है। विकल्प D की सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे भी इस समझौते से बाहर है। केवल पेप्ट्रिस के पास वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंच बताया गया है जिससे पीईपीआर111, पीईपीआरएक्स101, पीईपीआर202 और पीईपीआर112 खोजे गए, और वही इन्हें टीआरएल-4 से टीआरएल-6 तक ले जाएगी।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

जिस वीआईजीओआर परियोजना के लिए टीडीबी ने 86 करोड़ रुपये दिए हैं, उसकी कुल लागत कितनी है?

  1. A.108 करोड़ रुपये
  2. B.145 करोड़ रुपये
  3. C.172 करोड़ रुपये
  4. D.250 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 172 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 172 करोड़ रुपये है। वीआईजीओआर: एआई से खोजे गए मॉलिक्यूल्स को लैब से क्लिनिक तक नाम की इस परियोजना की पूरी लागत यही आंकी गई है और प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड इसमें से 86 करोड़ रुपये अनुसंधान विकास और नवाचार कोष से दे रहा है, जो ठीक आधा खर्च है। जो अभ्यर्थी केवल बोर्ड का हिस्सा याद रखता है, वह छोटी कुल लागत चुन सकता है, इसीलिए विकल्प A और विकल्प B रखे गए हैं। न 108 करोड़ रुपये और न 145 करोड़ रुपये परियोजना की बताई गई लागत से मेल खाते हैं, और दोनों में से कोई बोर्ड के हिस्से का दोगुना भी नहीं है। विकल्प D का 250 करोड़ रुपये लागत को बढ़ाकर बताता है और इससे बोर्ड का अंश आधे से काफी कम रह जाएगा। हिस्से और कुल लागत का यह संबंध याद रखना उपयोगी है, क्योंकि प्रश्नपत्र में दोनों आंकड़े एक साथ पूछे जाते हैं। सहायता ओसीडी के रूप में मिलेगी और काम तीन वर्ष में होगा।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

वीआईजीओआर कार्यक्रम में एआई से खोजी गई चार दवाओं को किन प्रौद्योगिकी तत्परता स्तरों के बीच आगे बढ़ाया जाएगा?

  1. A.टीआरएल-1 से टीआरएल-3
  2. B.टीआरएल-4 से टीआरएल-6
  3. C.टीआरएल-6 से टीआरएल-9
  4. D.टीआरएल-2 से टीआरएल-8
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. टीआरएल-4 से टीआरएल-6

व्याख्या

सही उत्तर टीआरएल-4 से टीआरएल-6 है। चारों अणु, तंत्रिका-मांसपेशी विकार तथा कैंसर के लिए पीईपीआर111, एलोपेसिया के लिए पीईपीआरएक्स101, न्यूरोपैथी के लिए पीईपीआर202 और डीएमडी के लिए पीईपीआर112, आज प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर चार पर हैं और इस धन का घोषित उद्देश्य प्रत्येक को स्तर छह तक पहुंचाना है। इस दायरे में उन्नत पूर्व-नैदानिक कार्य, जांचाधीन नई दवा से जुड़े अध्ययन, फॉर्मूलेशन विकास और मनुष्यों पर परीक्षण शुरू करने से पहले की तैयारी आती है। विकल्प A के पहले तीन स्तर वह काम बताते हैं जो इस समझौते से पहले ही पूरा हो चुका है। विकल्प C वहीं से शुरू होता है जहां यह परियोजना समाप्त होती है, इसलिए वह आगे का चरण होगा। विकल्प D की सीमा समझौते से बहुत बड़ी है और वह दवा को बाजार तक पहुंचा देगी। यह चढ़ाई तीन वर्ष में पूरी होगी और सत्यापन में वैश्विक सीआरओ नेटवर्क सहायता करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीडीबी ने वीआईजीओआर कार्यक्रम को कितनी सहायता दी है?

अनुसंधान विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष से 86 करोड़ रुपये, जबकि परियोजना की कुल लागत 172 करोड़ रुपये है। यह राशि बेंगलुरु की पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज को वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के रूप में मिलेगी।

वीआईजीओआर कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है?

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से खोजी गई चार प्रायोगिक दवाओं को तीन वर्ष में टीआरएल-4 से टीआरएल-6 तक पहुंचाना, जिसमें पूर्व-नैदानिक विकास, सत्यापन और नैदानिक परीक्षण की तैयारी शामिल है।

परियोजना में कौन-कौन से चार अणु शामिल हैं?

तंत्रिका-मांसपेशी विकार और कैंसर के लिए पीईपीआर111, एलोपेसिया के लिए पीईपीआरएक्स101, न्यूरोपैथी के लिए पीईपीआर202 और डीएमडी के लिए पीईपीआर112। चारों अभी टीआरएल-4 पर हैं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS