जिस वीआईजीओआर परियोजना के लिए टीडीबी ने 86 करोड़ रुपये दिए हैं, उसकी कुल लागत कितनी है?
- A.108 करोड़ रुपये
- B.145 करोड़ रुपये
- C.172 करोड़ रुपये
- D.250 करोड़ रुपये
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 172 करोड़ रुपये है। वीआईजीओआर: एआई से खोजे गए मॉलिक्यूल्स को लैब से क्लिनिक तक नाम की इस परियोजना की पूरी लागत यही आंकी गई है और प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड इसमें से 86 करोड़ रुपये अनुसंधान विकास और नवाचार कोष से दे रहा है, जो ठीक आधा खर्च है। जो अभ्यर्थी केवल बोर्ड का हिस्सा याद रखता है, वह छोटी कुल लागत चुन सकता है, इसीलिए विकल्प A और विकल्प B रखे गए हैं। न 108 करोड़ रुपये और न 145 करोड़ रुपये परियोजना की बताई गई लागत से मेल खाते हैं, और दोनों में से कोई बोर्ड के हिस्से का दोगुना भी नहीं है। विकल्प D का 250 करोड़ रुपये लागत को बढ़ाकर बताता है और इससे बोर्ड का अंश आधे से काफी कम रह जाएगा। हिस्से और कुल लागत का यह संबंध याद रखना उपयोगी है, क्योंकि प्रश्नपत्र में दोनों आंकड़े एक साथ पूछे जाते हैं। सहायता ओसीडी के रूप में मिलेगी और काम तीन वर्ष में होगा।
पूरा लेख पढ़ें: टीडीबी से पेप्ट्रिस को वीआईजीओआर के लिए 86 करोड़ रुपये
अभ्यास प्रश्न
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने वीआईजीओआर कार्यक्रम के लिए 86 करोड़ रुपये की आरडीआई सहायता किस कंपनी को दी है?
- A.बायोकॉन लिमिटेड, बेंगलुरु
- B.पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु
- C.भारत बायोटेक इंटरनेशनल, हैदराबाद
- D.सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने कर्नाटक के बेंगलुरु की इसी कंपनी के साथ समझौता किया और वीआईजीओआर कार्यक्रम के लिए अनुसंधान विकास और नवाचार कोष से 86 करोड़ रुपये देने का वचन दिया, जबकि परियोजना की पूरी लागत 172 करोड़ रुपये है। यह राशि वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के रूप में दी जाएगी। विकल्प A में दी गई बायोकॉन लिमिटेड भी बेंगलुरु में ही है, इसलिए केवल शहर देखकर उत्तर तय करना भूल होगी, परंतु समझौते में इस कंपनी का नाम नहीं है। विकल्प C की भारत बायोटेक इंटरनेशनल हैदराबाद की कंपनी है और इस व्यवस्था में उसका कोई भाग नहीं है। विकल्प D की सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे भी इस समझौते से बाहर है। केवल पेप्ट्रिस के पास वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंच बताया गया है जिससे पीईपीआर111, पीईपीआरएक्स101, पीईपीआर202 और पीईपीआर112 खोजे गए, और वही इन्हें टीआरएल-4 से टीआरएल-6 तक ले जाएगी।
वीआईजीओआर कार्यक्रम में एआई से खोजी गई चार दवाओं को किन प्रौद्योगिकी तत्परता स्तरों के बीच आगे बढ़ाया जाएगा?
- A.टीआरएल-1 से टीआरएल-3
- B.टीआरएल-4 से टीआरएल-6
- C.टीआरएल-6 से टीआरएल-9
- D.टीआरएल-2 से टीआरएल-8
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर टीआरएल-4 से टीआरएल-6 है। चारों अणु, तंत्रिका-मांसपेशी विकार तथा कैंसर के लिए पीईपीआर111, एलोपेसिया के लिए पीईपीआरएक्स101, न्यूरोपैथी के लिए पीईपीआर202 और डीएमडी के लिए पीईपीआर112, आज प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर चार पर हैं और इस धन का घोषित उद्देश्य प्रत्येक को स्तर छह तक पहुंचाना है। इस दायरे में उन्नत पूर्व-नैदानिक कार्य, जांचाधीन नई दवा से जुड़े अध्ययन, फॉर्मूलेशन विकास और मनुष्यों पर परीक्षण शुरू करने से पहले की तैयारी आती है। विकल्प A के पहले तीन स्तर वह काम बताते हैं जो इस समझौते से पहले ही पूरा हो चुका है। विकल्प C वहीं से शुरू होता है जहां यह परियोजना समाप्त होती है, इसलिए वह आगे का चरण होगा। विकल्प D की सीमा समझौते से बहुत बड़ी है और वह दवा को बाजार तक पहुंचा देगी। यह चढ़ाई तीन वर्ष में पूरी होगी और सत्यापन में वैश्विक सीआरओ नेटवर्क सहायता करेंगे।
आईआईटीएम पुणे की एपार्क प्रारंभिक कैरियर शोधकर्ता कार्यशाला 2026 में देश-विदेश के लगभग कितने प्रतिभागी शामिल हुए?
- A.लगभग 60
- B.लगभग 120
- C.लगभग 250
- D.लगभग 500
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर लगभग 120 है। कार्यशाला में भारत और दूसरे देशों के करीब 120 प्रतिभागी शामिल हुए और इसमें जान-बूझकर नए शोधकर्ताओं के साथ वरिष्ठ वैज्ञानिक, विषय विशेषज्ञ, पत्रिकाओं के संपादक तथा अलग-अलग संस्थानों के पेशेवर जोड़े गए। यही मिश्रण आयोजन का असली मकसद था, क्योंकि सत्र इस तरह बनाए गए थे कि नए शोधकर्ता स्थापित वैज्ञानिकों से सीधे सवाल कर सकें और अपने साथियों से अनुदान, गतिशीलता, आंकड़ों तथा कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच और वैज्ञानिक नेतृत्व के रास्तों पर अनुभव साझा कर सकें। विकल्प A यानी लगभग 60 वास्तविक उपस्थिति से कम है। विकल्प C और D यानी लगभग 250 और लगभग 500 इस एक दिवसीय और एक ही सभागार में हुई केंद्रित कार्यशाला के आकार से बहुत बड़े हैं। इसलिए केवल 120 का आंकड़ा सही बैठता है।
ईएसटीआईसी 2026 की परिकल्पना क्या है?
- A.क्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पावरिंग टेक्नोलॉजीज
- B.साइंस फॉर सोसाइटी, टेक्नोलॉजी फॉर ऑल
- C.इनोवेट इन इंडिया, इनोवेट फॉर द वर्ल्ड
- D.यंग माइंड्स, ग्रीन टेक्नोलॉजीज, स्ट्रॉन्ग नेशन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 'क्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पावरिंग टेक्नोलॉजीज' है। यही वाक्य उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन के 2026 संस्करण की घोषित परिकल्पना है। इस सम्मेलन को भारत का प्रमुख विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंच बताया गया है, जो मंत्रालयों, नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ वैज्ञानिकों, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और डीप-टेक स्टार्टअप को एक साथ लाता है, और यह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ा है। विकल्प B, C और D सुनने में भरोसेमंद नारे लगते हैं, पर इनमें से कोई भी इस सम्मेलन की परिकल्पना नहीं है। परीक्षार्थियों को शब्दावली ठीक से याद रखनी चाहिए, क्योंकि बड़े राष्ट्रीय आयोजनों की थीम या परिकल्पना पर प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं और भ्रमित करने वाले विकल्प दूसरी सरकारी मुहिमों के नारों से गढ़े जाते हैं।
11 अक्टूबर 2026 को हुई ईएसटीआईसी की पूर्वपीठिका में मुख्य संबोधन किसने दिया?
- A.डॉ. सूर्यचंद्र ए. राव
- B.डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार
- C.डॉ. मारिया मोलिना
- D.डॉ. सुवर्णा फडणवीस
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार हैं, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव हैं। उन्होंने दिन का मुख्य संबोधन दिया, सम्मेलन की परिकल्पना और रणनीतिक उद्देश्य रखे तथा कहा कि भारत के भविष्य के विकास और मजबूत शोध तंत्र के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति का मेल जरूरी है। विकल्प A यानी डॉ. सूर्यचंद्र ए. राव आईआईटीएम के निदेशक हैं और उन्होंने स्वागत भाषण दिया, मुख्य संबोधन नहीं। विकल्प C यानी मैरीलैंड विश्वविद्यालय की डॉ. मारिया मोलिना ने पृथ्वी विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग पर मुख्य व्याख्यान दिया, जो अलग सत्र था। विकल्प D यानी डॉ. सुवर्णा फडणवीस आईआईटीएम के सीसीसीआर की परियोजना निदेशक हैं और उन्होंने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस तरह केवल पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव ही इस विवरण पर खरे उतरते हैं।