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सेना ने 'भारत राइस' शुरू किया, FCI से समझौता

भारतीय सेना ने 12 अक्टूबर 2026 को जवानों के लिए 'भारत राइस' शुरू किया और अभियान के समय भंडारण सुविधाओं के उपयोग के लिए FCI से पांच वर्ष का समझौता किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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सेना ने 'भारत राइस' शुरू किया, FCI से समझौता

चर्चा में क्यों

12 अक्टूबर 2026 को भारतीय सेना ने नई दिल्ली में जवानों के लिए 'भारत राइस' शुरू किया और भारतीय खाद्य निगम के साथ समझौता किया, जिससे अभियानगत परिस्थितियों में उसके गोदामों, श्रमशक्ति और सामग्री प्रबंधन संसाधनों का उपयोग हो सकेगा।

भारतीय सेना ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सशस्त्र बलों के लिए भारत राइस की शुरुआत की। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी उपस्थित रहे। इसी कार्यक्रम में सेना और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिससे अभियानगत आवश्यकता के समय सेना FCI के भंडारण और सामग्री प्रबंधन तंत्र का उपयोग कर सकेगी।

जवानों के लिए क्या बदलेगा

अब तक सेना के डिपो नजदीकी FCI केंद्रों से चावल उठाते थे। नई व्यवस्था में बेहतर गुणवत्ता का चावल सीधे सेना आपूर्ति डिपो तक पहुंचेगा, जिनमें लद्दाख और पूर्वोत्तर के दूरदराज के डिपो भी शामिल हैं। चावल रक्षा मानकों के अनुसार मिल किया जाएगा, गुणवत्ता जांच से गुजरेगा और उसमें बाहरी तत्व या मिलावट नहीं होगी; टूटे, खराब तथा रंग बदले दाने बहुत कम रहेंगे। 10 किलो और 30 किलो के बैग में पैकिंग से अग्रिम चौकियों पर ढुलाई आसान होगी। यह पहल आपूर्ति एवं परिवहन महानिदेशालय के नेतृत्व में सैनिकों के लगातार मिले सुझावों पर आधारित है और वित्त वर्ष 2026-27 में आपूर्ति नेफेड के माध्यम से होगी। इसके पीछे सेना, FCI, नेफेड और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के बीच करीब 18 महीने का समन्वय है।

FCI के साथ समझौता

समझौता सेना को चिह्नित FCI गोदामों, श्रमिकों और सामग्री प्रबंधन उपकरणों के उपयोग का औपचारिक ढांचा देता है। समन्वय फॉर्मेशन स्तर पर सेना की आपूर्ति एवं परिवहन इकाइयों तथा FCI के क्षेत्रीय और मंडल कार्यालयों के बीच होगा और इसे अभियानगत लॉजिस्टिक्स योजनाओं में शामिल किया जाएगा। समझौता पांच वर्ष तक प्रभावी रहेगा और आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकेगा। इससे अतिरिक्त भंडारण, तेज गतिशीलता तथा राशन, भंडार और उपकरणों को अभियान क्षेत्रों के निकट रखना संभव होगा।

लॉजिस्टिक्स पर जोर क्यों

राजनाथ सिंह ने कहा कि लॉजिस्टिक्स स्वयं युद्धक क्षमता है और आपूर्ति शृंखला, भंडारण क्षमता, परिवहन तंत्र तथा समय पर पूर्ति हथियारों और प्लेटफॉर्म जितनी ही अहम है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के विश्लेषण का हवाला दिया, जिससे पता चला कि भविष्य के संघर्षों में चेतावनी का समय बहुत कम हो सकता है और लंबे समय तक आपूर्ति तंत्र की परीक्षा होगी। उन्होंने इसे दोहरे उपयोग वाला कदम बताया और एक्सप्रेसवे पर उतरते लड़ाकू विमानों तथा सीमा सड़क संगठन की सड़कों के नागरिक उपयोग का उदाहरण दिया। प्रल्हाद जोशी ने कहा कि देश के रक्षकों को बेहतर चावल देना उनके विभाग के लिए गर्व की बात है। थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ और खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा भी मौजूद रहे। सेना ने अग्निवीरों के लिए अतिरिक्त राशन और तीनों सेनाओं में राशन पैमानों में समानता जैसे कदम भी उठाए हैं, तथा जैविक राशन शुरू करने का प्रस्ताव है।

महत्वपूर्ण तथ्य

पहलभारत राइस, सशस्त्र बलों के लिए
शुरुआत12 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली
उपस्थित मंत्रीराजनाथ सिंह और प्रल्हाद जोशी
समझौता किसके साथभारतीय खाद्य निगम (FCI)
समझौते की अवधिपांच वर्ष, आपसी सहमति से बढ़ाई जा सकती है
नेतृत्वआपूर्ति एवं परिवहन महानिदेशालय
आपूर्ति एजेंसीनेफेड, वित्त वर्ष 2026-27 में
पैकिंग10 किलो और 30 किलो के बैग
सबक किस अभियान सेऑपरेशन सिंदूर
थल सेनाध्यक्षजनरल धीरज सेठ

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें: पहल का नाम (भारत राइस), समझौते का साझेदार (FCI) और उसकी पांच वर्ष की अवधि, आपूर्ति एजेंसी (नेफेड) तथा वर्ष (वित्त वर्ष 2026-27), नेतृत्व करने वाली संस्था (आपूर्ति एवं परिवहन महानिदेशालय), बैग के आकार (10 किलो और 30 किलो) और वह अभियान जिसके सबक ने समझौते को आकार दिया (ऑपरेशन सिंदूर)।

अभ्यास प्रश्न

Q1.रक्षाआसान

अभियानगत परिस्थितियों में भंडारण और सामग्री प्रबंधन संसाधनों के उपयोग के लिए भारतीय सेना ने किस संस्था से समझौता किया?

  1. A.नेफेड
  2. B.भारतीय खाद्य निगम
  3. C.सीमा सड़क संगठन
  4. D.केंद्रीय भंडारण निगम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारतीय खाद्य निगम

व्याख्या

सही उत्तर भारतीय खाद्य निगम है। भारत राइस की शुरुआत के साथ हुए इस समझौते से सेना को चिह्नित FCI गोदामों, श्रमिकों और सामग्री प्रबंधन उपकरणों के उपयोग का औपचारिक ढांचा मिलता है। यह समझौता पांच वर्ष तक प्रभावी रहेगा और आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकेगा। विकल्प A यानी नेफेड का उल्लेख है, लेकिन उसकी भूमिका वित्त वर्ष 2026-27 में चावल की आपूर्ति करना है, गोदाम देना नहीं। विकल्प C यानी सीमा सड़क संगठन का जिक्र केवल दोहरे उपयोग के उदाहरण के रूप में हुआ, क्योंकि उसकी बनाई सड़कों और पुलों का उपयोग स्थानीय लोग भी करते हैं। विकल्प D यानी केंद्रीय भंडारण निगम इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं है। रक्षा मंत्री ने FCI समझौते को अभियानगत तैयारी के लिए शक्ति बढ़ाने वाला कदम बताया।

Q2.रक्षामध्यम

वित्त वर्ष 2026-27 में सशस्त्र बलों को 'भारत राइस' की आपूर्ति कौन करेगा?

  1. A.भारतीय खाद्य निगम
  2. B.नेफेड
  3. C.सेना क्रय संगठन
  4. D.राज्य नागरिक आपूर्ति निगम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नेफेड

व्याख्या

सही उत्तर नेफेड यानी भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड है। रक्षा मानकों के अनुसार मिल किए जाने और गुणवत्ता जांच से गुजरने के बाद वित्त वर्ष 2026-27 में चावल की आपूर्ति नेफेड के माध्यम से होगी। विकल्प A यानी भारतीय खाद्य निगम इसी घोषणा के दूसरे हिस्से, अर्थात भंडारण और सामग्री प्रबंधन से जुड़े लॉजिस्टिक्स समझौते का साझेदार है, इसलिए उसकी भूमिका अलग है। विकल्प C यानी सेना क्रय संगठन का इस व्यवस्था में नाम नहीं है। विकल्प D यानी राज्य नागरिक आपूर्ति निगम भी इसमें शामिल नहीं हैं; बदलाव यही है कि चावल सीधे सेना आपूर्ति डिपो तक जाएगा, नजदीकी केंद्रों से उठाया नहीं जाएगा। इस पहल का नेतृत्व आपूर्ति एवं परिवहन महानिदेशालय कर रहा है और यह सैनिकों से लगातार मिले सुझावों पर आधारित है। इसके पीछे सेना, FCI, नेफेड तथा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के बीच लगभग 18 महीने का समन्वय रहा है।

Q3.रक्षामध्यम

अग्रिम चौकियों पर ढुलाई आसान बनाने के लिए 'भारत राइस' की खरीद किन आकार के बैग में होगी?

  1. A.5 किलो और 25 किलो
  2. B.10 किलो और 30 किलो
  3. C.20 किलो और 50 किलो
  4. D.15 किलो और 40 किलो
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 10 किलो और 30 किलो

व्याख्या

सही उत्तर 10 किलो और 30 किलो है। इन दो आकारों में खरीद का उद्देश्य अनाज को उठाने, लादने और ले जाने में आसानी देना है, जो लद्दाख तथा पूर्वोत्तर जैसे दुर्गम इलाकों में राशन पहुंचाते समय सबसे अधिक मायने रखता है। बाकी तीनों विकल्पों में दिए गए वजन अनाज की पैकिंग के लिए संभव लग सकते हैं, पर इस पहल का हिस्सा नहीं हैं। इसके पीछे व्यावसायिक नहीं, अभियानगत कारण है। रक्षा मंत्री ने कहा कि सुविधाजनक पैकिंग छोटा कदम लग सकता है, लेकिन अग्रिम चौकियों तक राशन पहुंचाने वाले जवानों को इससे वास्तविक राहत मिलती है। पैकिंग के साथ ही चावल रक्षा मानकों के अनुसार मिल किया जाएगा और उसमें बाहरी तत्व या मिलावट नहीं रहेगी, तथा टूटे व खराब दाने न्यूनतम रहेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'भारत राइस' क्या है?

सशस्त्र बलों के लिए बेहतर गुणवत्ता का चावल, जो रक्षा मानकों के अनुसार मिल किया जाएगा और सीधे सेना आपूर्ति डिपो तक पहुंचेगा, जिनमें लद्दाख और पूर्वोत्तर के डिपो भी हैं। इसकी शुरुआत 12 अक्टूबर 2026 को हुई।

सेना ने समझौता किस संस्था के साथ किया?

भारतीय खाद्य निगम के साथ। यह समझौता अभियानगत परिस्थितियों में चिह्नित FCI गोदामों, श्रमिकों और सामग्री प्रबंधन उपकरणों के उपयोग की अनुमति देता है और पांच वर्ष तक प्रभावी रहेगा।

आपूर्ति कौन करेगा और पैकिंग कैसी होगी?

नेफेड वित्त वर्ष 2026-27 में आपूर्ति करेगा और पैकिंग 10 किलो तथा 30 किलो के बैग में होगी, जिससे अग्रिम चौकियों पर ढुलाई आसान हो।

FCI समझौते को किस अभियान के सबक ने आकार दिया?

ऑपरेशन सिंदूर के, जिसके विश्लेषण से पता चला कि चेतावनी का समय बहुत कम हो सकता है और लंबे समय तक चलने वाली परिस्थितियों के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था जरूरी है।

स्रोत

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