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इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद बनेगी, छमाही समीक्षा जारी

इस्पात मंत्रालय अपने सचिव की अध्यक्षता में इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद बनाएगा और उसकी समीक्षा में कच्चे इस्पात का उत्पादन 2.9 प्रतिशत बढ़ा है।

लेखक प्रकाशित · 3 मिनट
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इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद बनेगी, छमाही समीक्षा जारी — GK24 title card

चर्चा में क्यों

6 अक्तूबर 2026 को इस्पात मंत्रालय ने सचिव की अध्यक्षता वाली इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद की घोषणा की और छमाही समीक्षा जारी की, जिसमें कच्चे इस्पात का उत्पादन 2.9 प्रतिशत तथा खपत 7.5 प्रतिशत बढ़ी है।

इस्पात मंत्रालय ने 6 अक्तूबर 2026 को इस्पात क्षेत्र की समीक्षा जारी की, जो वित्त वर्ष की पहली छमाही को समेटती है और संयुक्त संयंत्र समिति (जेपीसी) के सितंबर 2026 के अनंतिम आंकड़ों पर आधारित है। उत्पादन तथा व्यापार के आंकड़ों के साथ इसमें उद्योग के लिए एक नई सुरक्षा व्यवस्था की घोषणा भी की गई है।

सुरक्षा परिषद और निदेशालय

मंत्रालय ने शीर्ष संस्था के रूप में इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद (एसआईएससी) बनाने का निर्णय लिया है, जिसकी अध्यक्षता इस्पात मंत्रालय के सचिव करेंगे। इसका काम सुरक्षा मानकों को कड़ा करना, दुर्घटनाओं की रोकथाम और इस्पात निर्माण में सुरक्षा संस्कृति विकसित करना होगा। परिषद के अधीन तकनीकी कार्य इस्पात उद्योग सुरक्षा निदेशालय (एसआईएसडी) करेगा, जो सुरक्षा ऑडिट, गंभीर घटनाओं की जांच तथा भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल मानक जारी करने का दायित्व संभालेगा। इसका दायरा लोहा-इस्पात उत्पादकों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की खदानों तक रहेगा। इसी क्रम में सेल ने अपने राउरकेला इस्पात संयंत्र के हॉट स्ट्रिप मिल-2 में कृत्रिम बुद्धि आधारित निगरानी प्रणाली शुरू की है, जिसमें 10 आईपी कैमरे और कंप्यूटर विजन हेलमेट न पहनने वाले कर्मियों को पहचानकर स्वत: चेतावनी देते हैं।

क्षेत्र का प्रदर्शन

अप्रैल से सितंबर 2026 की अवधि में कच्चे इस्पात का उत्पादन 2025 की इसी अवधि से 2.9 प्रतिशत अधिक रहा, हॉट मेटल 2.5 प्रतिशत और तैयार इस्पात 3.7 प्रतिशत अधिक रहा। मांग उत्पादन से तेज बढ़ी, क्योंकि छमाही में तैयार इस्पात की खपत 7.5 प्रतिशत बढ़ गई। तैयार इस्पात का आयात और निर्यात दोनों बढ़े, फिर भी मात्रा के आधार पर भारत अप्रैल से सितंबर 2026 तक तैयार इस्पात का शुद्ध आयातक बना रहा। 10 मिलीमीटर टीएमटी सरिया से लेकर गैल्वनाइज्ड प्लेन शीट तक सभी उत्पाद महीने और वर्ष, दोनों आधार पर महंगे हुए। मंत्रालय ये भाव कोलकाता, दिल्ली, मुंबई तथा चेन्नई के औसत के रूप में देता है, जिनमें जीएसटी शामिल है। कच्चे माल में एनएमडीसी के लौह अयस्क के बारीक कण 4,500 रुपये प्रति टन पर स्थिर रहे और मॉयल का मैंगनीज अयस्क लंप 17,603 रुपये प्रति टन रहा।

सबसे बड़े उत्पादकसेल, आरआईएनएल, एनएसएल, टीएसएल समूह, एएम/एनएस, जेएसएल (जेएसपीएल) और जेएसडब्ल्यू समूह
आंकड़ों का स्रोतसितंबर 2026 के अनंतिम जेपीसी आंकड़े
व्यापार स्थितिमात्रा के आधार पर तैयार इस्पात का शुद्ध आयातक

एनएमडीसी और सेल की परियोजनाएं

एनएमडीसी ने छत्तीसगढ़ के नगरनार में 2 एमटीपीए क्षमता का पेलेट संयंत्र शुरू किया है, जिससे 5,427 करोड़ रुपये की एकीकृत परियोजना पूरी हो गई। इस परियोजना में बचेली का लौह अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र तथा 15 एमटीपीए क्षमता की 135 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन भी शामिल है। पेलेट संयंत्र स्ट्रेट ग्रेट इंड्यूरेशन तकनीक पर चलता है, जिससे बैलाडीला अयस्क के बारीक कणों और स्लाइम से मूल्यवर्धन होगा तथा सड़क से अयस्क की ढुलाई घटेगी। कंपनी ने सितंबर 2026 में 4.04 मिलियन टन लौह अयस्क निकाला, जो एक वर्ष पहले से 8 प्रतिशत अधिक है, और छमाही का उत्पादन 27.3 मिलियन टन रहा, जिसमें लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि है। सेल तथा भारत कोकिंग कोल लिमिटेड ने पश्चिम बंगाल के दो कोयला ब्लॉक मिलकर विकसित करने और चलाने का समझौता किया है, जिनमें सेल का इंडिकट्टा रामनगोर ब्लॉक और बीसीसीएल का ईस्ट ऑफ दामागोड़िया (कल्याणेश्वरी) ब्लॉक शामिल हैं।

हरित इस्पात

मंत्रालय की हरित इस्पात पहल के तहत सितंबर 2026 तक जारी सूचियों में 101 अलग-अलग उत्पादकों को हरित इस्पात प्रमाणपत्र मिल चुके हैं। इसमें टीएमटी सरिया, कॉइल, प्लेट, वायर रॉड तथा पाइप शामिल हैं और अधिकतर प्रमाणित उत्पादों को पांच सितारा रेटिंग मिली है। जादवपुर विश्वविद्यालय, सेल, डीवीसी तथा एचयूआरएल के साथ मिलकर 8.18 करोड़ रुपये की लागत से हरित हाइड्रोजन शोध का उत्कृष्टता केंद्र बना रहा है, जो राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा मंजूर चार केंद्रों में से एक है।

महत्वपूर्ण तथ्य

जारी करने वालाइस्पात मंत्रालय, सितंबर 2026 के अनंतिम जेपीसी आंकड़ों पर
नई संस्थाइस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद (एसआईएससी), उद्योग की शीर्ष संस्था
अध्यक्षइस्पात मंत्रालय के सचिव
सहयोगी इकाईइस्पात उद्योग सुरक्षा निदेशालय (एसआईएसडी), ऑडिट तथा मानकों के लिए
कच्चा इस्पात वृद्धिअप्रैल से सितंबर 2026 में 2.9 प्रतिशत अधिक
तैयार इस्पात की खपतछमाही में 7.5 प्रतिशत अधिक
व्यापार स्थितिअप्रैल से सितंबर 2026 में मात्रा के आधार पर शुद्ध आयातक
एनएमडीसी पेलेट संयंत्रछत्तीसगढ़ के नगरनार में 2 एमटीपीए, लागत 5,427 करोड़ रुपये
एनएमडीसी अयस्क उत्पादनसितंबर 2026 में 4.04 मिलियन टन, छमाही में 27.3 मिलियन टन
हरित इस्पात प्रमाणपत्रसितंबर 2026 तक 101 उत्पादकों को जारी

परीक्षा की दृष्टि से

इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद और उसके अध्यक्ष, सहयोगी इस्पात उद्योग सुरक्षा निदेशालय, कच्चे इस्पात (2.9 प्रतिशत) तथा खपत (7.5 प्रतिशत) की वृद्धि दर, तैयार इस्पात में भारत की शुद्ध आयातक स्थिति, नगरनार का एनएमडीसी पेलेट संयंत्र (2 एमटीपीए, 5,427 करोड़ रुपये) और हरित इस्पात प्रमाणपत्र वाले 101 उत्पादक याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.अर्थव्यवस्थाआसान

इस्पात मंत्रालय द्वारा घोषित इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कौन करेगा?

  1. A.केंद्रीय इस्पात मंत्री
  2. B.सेल के अध्यक्ष
  3. C.इस्पात मंत्रालय के सचिव
  4. D.एनएमडीसी के अध्यक्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. इस्पात मंत्रालय के सचिव

व्याख्या

सही उत्तर इस्पात मंत्रालय के सचिव है। इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद को पूरे इस्पात उद्योग की शीर्ष संस्था के रूप में बनाया जा रहा है, जिसका दायित्व सुरक्षा मानकों को मजबूत करना, दुर्घटनाओं की रोकथाम करना तथा सुरक्षा संस्कृति विकसित करना है, और इसकी अध्यक्षता मंत्रालय के सचिव करेंगे। तकनीकी कार्य के लिए अलग इस्पात उद्योग सुरक्षा निदेशालय बनेगा, जो सुरक्षा ऑडिट करेगा, गंभीर घटनाओं की जांच करेगा और भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल मानक जारी करेगा। इसका दायरा लोहा-इस्पात उत्पादकों तथा केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की खदानों तक रहेगा। विकल्प A मंत्रालय के राजनीतिक प्रमुख का नाम है, जिन्हें यह दायित्व नहीं दिया गया। विकल्प B एक ही उत्पादक कंपनी का प्रमुख है, जो पूरे उद्योग की निगरानी करने वाली संस्था का अध्यक्ष नहीं हो सकता। विकल्प D उस खनन कंपनी से जुड़ा है जिसने नगरनार पेलेट संयंत्र शुरू किया, जो इसी समीक्षा की अलग खबर है।

Q2.अर्थव्यवस्थामध्यम

एनएमडीसी ने नगरनार में 2 एमटीपीए का पेलेट संयंत्र शुरू किया है। नगरनार किस राज्य में है?

  1. A.ओडिशा
  2. B.झारखंड
  3. C.छत्तीसगढ़
  4. D.पश्चिम बंगाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. छत्तीसगढ़

व्याख्या

सही उत्तर छत्तीसगढ़ है। 2 एमटीपीए क्षमता का पेलेट संयंत्र छत्तीसगढ़ के नगरनार में शुरू किया गया है और इसके साथ एनएमडीसी की 5,427 करोड़ रुपये की एकीकृत परियोजना पूरी हो गई है। इसी परियोजना में बचेली का लौह अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र तथा 15 एमटीपीए क्षमता की 135 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन शामिल है, जबकि पेलेट संयंत्र स्ट्रेट ग्रेट इंड्यूरेशन तकनीक पर आधारित है। इसका उद्देश्य बैलाडीला के लौह अयस्क के बारीक कणों और स्लाइम से मूल्यवर्धन करना तथा सड़क मार्ग से अयस्क की ढुलाई कम करना है। विकल्प A और B खनिज तथा इस्पात क्षमता से संपन्न दो अन्य राज्य हैं, पर यह संयंत्र वहां नहीं है। विकल्प D पश्चिम बंगाल है, जहां सेल और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड ने दो कोयला ब्लॉक मिलकर विकसित करने पर सहमति दी है, इसलिए वह इसी समीक्षा की अलग खबर है।

Q3.अर्थव्यवस्थामध्यम

सितंबर 2026 तक जारी सूचियों में कितने इस्पात उत्पादकों को हरित इस्पात प्रमाणपत्र दिए गए हैं?

  1. A.51
  2. B.101
  3. C.151
  4. D.201
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 101

व्याख्या

सही उत्तर 101 है। इस्पात मंत्रालय की हरित इस्पात पहल के अंतर्गत सितंबर 2026 तक जारी सूचियों में 101 अलग-अलग उत्पादकों को हरित इस्पात प्रमाणपत्र दिए गए हैं। इस प्रमाणन के दायरे में टीएमटी सरिया, हॉट रोल्ड तथा कोल्ड रोल्ड कॉइल, प्लेट, वायर रॉड, पाइप और अन्य इस्पात उत्पाद आते हैं, तथा प्रमाणित उत्पादों में अधिकतर को पांच सितारा रेटिंग मिली है। मंत्रालय इसे कम उत्सर्जन वाली इस्पात निर्माण पद्धतियों के बढ़ते उपयोग का संकेत मानता है। बाकी तीनों विकल्प मिलते-जुलते अंक हैं, जिन्हें यह परखने के लिए रखा जाता है कि सही संख्या याद है या नहीं। परीक्षार्थी इसे इसी समीक्षा की दूसरी हरित खबर से जोड़ें, जिसमें जादवपुर विश्वविद्यालय सेल, डीवीसी तथा एचयूआरएल के साथ 8.18 करोड़ रुपये की लागत से हरित हाइड्रोजन शोध का उत्कृष्टता केंद्र बना रहा है।

Q4.अर्थव्यवस्थामध्यम

सेल ने पश्चिम बंगाल में दो कोयला ब्लॉक मिलकर विकसित करने का समझौता किस कंपनी के साथ किया है?

  1. A.कोल इंडिया लिमिटेड
  2. B.भारत कोकिंग कोल लिमिटेड
  3. C.एनएमडीसी लिमिटेड
  4. D.दामोदर घाटी निगम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भारत कोकिंग कोल लिमिटेड

व्याख्या

सही उत्तर भारत कोकिंग कोल लिमिटेड है। यह समझौता पश्चिम बंगाल के दो ब्लॉक को मिलकर विकसित करने और चलाने के लिए हुआ है, जिनमें सेल का इंडिकट्टा रामनगोर कोयला ब्लॉक और बीसीसीएल का ईस्ट ऑफ दामागोड़िया यानी कल्याणेश्वरी ब्लॉक शामिल है। दोनों कंपनियां केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम हैं और यह साझेदारी उनके बीच सहयोग बढ़ाने तथा कोकिंग कोल के घरेलू स्रोत विकसित करने के लिए है, क्योंकि भारतीय इस्पात संयंत्र यह कोयला बड़ी मात्रा में आयात करते हैं। विकल्प A मूल कोयला कंपनी का नाम है, पर समझौते में वह पक्ष नहीं है। विकल्प C वही लौह अयस्क कंपनी है जिसने नगरनार में पेलेट संयंत्र शुरू किया, इसलिए वह पड़ोसी खबर से लिया गया भ्रमक विकल्प है। विकल्प D दामोदर घाटी निगम इसी समीक्षा में आता है, पर जादवपुर विश्वविद्यालय, सेल तथा एचयूआरएल के साथ हरित हाइड्रोजन उत्कृष्टता केंद्र में, इस कोयला समझौते में नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद क्या है?

यह एक शीर्ष संस्था है, जिसे इस्पात मंत्रालय बनाने जा रहा है। इसका काम उद्योग में सुरक्षा मानक मजबूत करना, दुर्घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षा संस्कृति विकसित करना है। इसकी अध्यक्षता इस्पात मंत्रालय के सचिव करेंगे।

इस परिषद की सहायता कौन इकाई करेगी?

इस्पात उद्योग सुरक्षा निदेशालय। यह सुरक्षा ऑडिट करेगा, गंभीर घटनाओं की जांच करेगा तथा लोहा-इस्पात उत्पादकों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की खदानों के लिए भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल मानक जारी करेगा।

एनएमडीसी का नया पेलेट संयंत्र कहां शुरू हुआ है?

छत्तीसगढ़ के नगरनार में, जिसकी क्षमता 2 एमटीपीए है। इससे 5,427 करोड़ रुपये की एकीकृत परियोजना पूरी हुई, जिसमें बचेली का प्रसंस्करण संयंत्र और 135 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन भी शामिल है।

हरित इस्पात प्रमाणपत्र कितने उत्पादकों को मिले हैं?

सितंबर 2026 तक जारी सूचियों में 101 अलग-अलग इस्पात उत्पादकों को, जो मंत्रालय की हरित इस्पात पहल के अंतर्गत दिए गए हैं। अधिकतर प्रमाणित उत्पादों को पांच सितारा रेटिंग मिली है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS