आरडीआई कोष ने चुने पहले 19 द्वितीय स्तरीय कोष प्रबंधक
अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष ने 7,131 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता के साथ 19 द्वितीय स्तरीय कोष प्रबंधकों का अपना पहला समूह घोषित कर दिया है।

चर्चा में क्यों
12 अक्टूबर 2026 को अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष ने 19 द्वितीय स्तरीय कोष प्रबंधकों का पहला समूह घोषित किया, जिसके लिए 7,131 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह ने 8 अक्टूबर 2026 को मंजूर की थी।
अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष (आरडीआईएफ) ने 12 अक्टूबर 2026 को 19 द्वितीय स्तरीय कोष प्रबंधकों का पहला समूह घोषित किया, जो एक लाख करोड़ रुपये के इस कोष के क्रियान्वयन का पहला बड़ा कदम है। सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएस) ने 8 अक्टूबर 2026 की बैठक में 14 वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) और 5 केंद्रित शोध संगठनों (एफआरओ) को मंजूरी दी, जिनके लिए कुल 7,131 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता तय हुई। इसी बैठक में कोष के दायरे में पांच और तकनीकों को शामिल करने की मंजूरी भी दी गई।
कोष का उद्देश्य
एक लाख करोड़ रुपये की आरडीआई योजना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2025 में शुरू की थी। इसका घोषित मकसद है कि भारत तकनीक का उपभोक्ता बने रहने की जगह वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी तकनीक और उत्पाद बनाने वाला देश बने, और आगे चलकर तकनीक देने वाला अग्रणी देश कहलाए। इसके लिए कोष ऐसे शोध को दीर्घकालिक और धैर्यवान पूंजी देता है जिसमें जोखिम ऊंचा है पर असर भी बड़ा हो सकता है, और इस तरह वह वित्त की उस कमी को भरता है जिसने उभरती तथा सामरिक तकनीकों में निजी निवेश को लंबे समय तक रोका।
संचालन कौन करता है
कोष का संचालन अनुसंधान राष्ट्रीय शोध संस्थान (एएनआरएफ) के भीतर बनी एक स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई करती है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन है। संभावित कोष प्रबंधकों से आवेदन का पहला आह्वान जनवरी 2026 में निकला था। आवेदनों की कई चरणों में जांच हुई, जिसमें वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन और विशेषज्ञ सलाहकार समिति के साथ आमने-सामने बातचीत शामिल थी। इसके बाद प्रस्ताव एएनआरएफ की कार्यकारी परिषद और फिर सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह के पास मंजूरी के लिए गए।
पैसा कैसे पहुंचेगा
मंजूर हुए 19 संस्थान आरडीआईएफ की पूंजी पात्र प्रौद्योगिकी उद्यमों तक पहुंचाएंगे, जो प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर (टीआरएल) 4 और उससे ऊपर पर काम कर रहे हैं, यानी उस चरण पर जहां तकनीक प्रयोगशाला में परखी जा चुकी है और आगे बढ़ने के लिए धन चाहिए। इन प्रबंधकों से अपेक्षा है कि वे आरडीआईएफ के योगदान के बराबर निजी पूंजी भी जुटाएं, जिससे शोध तक पहुंचने वाली राशि दोगुनी हो जाएगी।
महत्व क्यों
सरकार इस कदम को तकनीकी संप्रभुता बढ़ाने, आयातित तकनीक पर निर्भरता घटाने और नवाचार से चलने वाली अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में देखती है, जो आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत 2047 की सोच के अनुरूप है। कोष अपने तरीके को 'साइंस 4 टेक्नोलॉजी' कहता है, यानी निजी क्षेत्र की अगुवाई वाले विकास कार्य के लिए विज्ञान का उपयोग। आगे कोष प्रबंधकों के और समूह आमंत्रित तथा जोड़े जाएंगे, जिससे कोष की पहुंच बढ़ेगी।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कोष | अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष (आरडीआईएफ) |
|---|---|
| कोष का आकार | एक लाख करोड़ रुपये |
| योजना की शुरुआत | प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा, नवंबर 2025 |
| पहला समूह | 19 द्वितीय स्तरीय कोष प्रबंधक |
| विभाजन | 14 वैकल्पिक निवेश कोष और 5 केंद्रित शोध संगठन |
| प्रतिबद्धता | 7,131 करोड़ रुपये |
| मंजूरी | सचिवों का अधिकार प्राप्त समूह, 8 अक्टूबर 2026 की बैठक |
| संचालन | एएनआरएफ के भीतर स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन |
| पहला आह्वान | जनवरी 2026 |
| लाभार्थी | प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 4 और उससे ऊपर के पात्र प्रौद्योगिकी उद्यम |
| निजी पूंजी | प्रबंधकों को आरडीआईएफ के योगदान के बराबर पूंजी जुटानी होगी |
| लक्ष्य | आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047; तरीका 'साइंस 4 टेक्नोलॉजी' |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: कोष का आकार (एक लाख करोड़ रुपये), शुरुआत (नवंबर 2025, प्रधानमंत्री द्वारा), पहला समूह (19 प्रबंधक: 14 एआईएफ और 5 एफआरओ), प्रतिबद्धता (7,131 करोड़ रुपये), मंजूरी देने वाली संस्था (सचिवों का अधिकार प्राप्त समूह, 8 अक्टूबर 2026), संचालक (एएनआरएफ की स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई), पहला आह्वान (जनवरी 2026), पात्रता (टीआरएल 4 और ऊपर) और लक्ष्य (विकसित भारत 2047)।
अभ्यास प्रश्न
अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष के पहले समूह में कितने द्वितीय स्तरीय कोष प्रबंधक घोषित किए गए?
- A.14
- B.19
- C.5
- D.24
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 19 है। सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह ने 8 अक्टूबर 2026 की बैठक में इस समूह को मंजूरी दी, और ये उन्नीस दो तरह की संस्थाओं से बने हैं: 14 वैकल्पिक निवेश कोष और 5 केंद्रित शोध संगठन। इसी विभाजन से समझ आता है कि विकल्प A और C ही सबसे बड़े भ्रम हैं, क्योंकि दोनों कुल संख्या के एक-एक हिस्से का नाम हैं और जिसे हिस्से याद रहते हैं पर जोड़ नहीं, वह इन्हीं में से चुन लेता है। विकल्प D घोषित आंकड़ा ही नहीं है। इस पहले समूह के लिए कोष की कुल प्रतिबद्धता एक लाख करोड़ रुपये की योजना में से 7,131 करोड़ रुपये है। ये प्रबंधक यह धन उन पात्र प्रौद्योगिकी उद्यमों तक पहुंचाएंगे जो प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 4 और उससे ऊपर पर काम कर रहे हैं, और इनसे बराबर निजी पूंजी जुटाने की भी अपेक्षा है।
अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष का संचालन करने वाली स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई किस संस्था के भीतर है?
- A.नीति आयोग
- B.वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद
- C.अनुसंधान राष्ट्रीय शोध संस्थान (एएनआरएफ)
- D.भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर अनुसंधान राष्ट्रीय शोध संस्थान है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करता है। कोष इसी संस्थान के भीतर बनी एक स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई चलाती है, और संस्थान की कार्यकारी परिषद उन चरणों में से एक है जिनसे किसी कोष प्रबंधक का प्रस्ताव सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह तक पहुंचने से पहले गुजरता है। विकल्प A गलत है क्योंकि नीति आयोग नीति पर सलाह देता है और इस तरह के निवेश कोष नहीं चलाता। विकल्प B देश की सबसे बड़ी शोध प्रयोगशाला श्रृंखला का नाम है, जो खुद शोध करती है, उद्यमों तक धैर्यवान पूंजी नहीं पहुंचाती। विकल्प D लघु उद्योग के लिए विकास वित्त संस्थान है, जो देखने में ठीक लगता है पर इस कोष का घर नहीं है। संभावित प्रबंधकों से आवेदन का पहला आह्वान जनवरी 2026 में निकला था।
आरडीआई कोष से सहायता पाने के लिए उद्यम की तकनीक किस स्तर पर होनी चाहिए?
- A.प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 1 और उससे ऊपर
- B.प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 4 और उससे ऊपर
- C.प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 7 और उससे ऊपर
- D.केवल व्यावसायिक लॉन्च के बाद
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 4 और उससे ऊपर है। इसी स्तर या उससे ऊपर काम करने वाले पात्र प्रौद्योगिकी उद्यमों को द्वितीय स्तरीय कोष प्रबंधकों के जरिए पूंजी मिल सकती है, यानी कोष तब आगे आता है जब कोई विचार कागज और शुरुआती परिकल्पना से आगे बढ़कर प्रयोगशाला में परखा जा चुका होता है। विकल्प A में सबसे शुरुआती वैचारिक चरण भी आ जाते, जिनके लिए यह कोष बना ही नहीं है; विकल्प C सहायता को पूरी तैनाती के करीब पहुंची तकनीकों तक सीमित कर देता, जहां व्यावसायिक पूंजी आमतौर पर आसानी से मिल जाती है; और विकल्प D गलत है क्योंकि कोष का पूरा मकसद उत्पाद के बाजार तक पहुंचने से पहले के काम को सहारा देना है। यह व्यवस्था उस वित्तीय कमी को ध्यान में रखकर बनी है जिसने उभरती व सामरिक तकनीकों में निजी निवेश को सीमित रखा, और प्रबंधकों को कोष के योगदान के बराबर निजी पूंजी भी जुटानी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरडीआई कोष के पहले समूह में कितने द्वितीय स्तरीय कोष प्रबंधक मंजूर हुए?
उन्नीस: 14 वैकल्पिक निवेश कोष और 5 केंद्रित शोध संगठन, जिन्हें सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह ने 8 अक्टूबर 2026 की बैठक में मंजूरी दी।
आरडीआई कोष का आकार कितना है और यह कब शुरू हुआ?
एक लाख करोड़ रुपये। यह योजना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2025 में शुरू की थी, और प्रबंधकों के पहले समूह के लिए प्रतिबद्धता 7,131 करोड़ रुपये है।
अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष का संचालन कौन करता है?
अनुसंधान राष्ट्रीय शोध संस्थान के भीतर बनी एक स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करती है।
कोष से कौन से उद्यमों को धन मिल सकता है?
वे पात्र प्रौद्योगिकी उद्यम जो प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 4 और उससे ऊपर पर शोध, विकास तथा नवाचार कर रहे हैं। कोष प्रबंधकों से बराबर निजी पूंजी जुटाने की अपेक्षा है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2322295 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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