अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष का संचालन करने वाली स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई किस संस्था के भीतर है?
- A.नीति आयोग
- B.वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद
- C.अनुसंधान राष्ट्रीय शोध संस्थान (एएनआरएफ)
- D.भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर अनुसंधान राष्ट्रीय शोध संस्थान है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करता है। कोष इसी संस्थान के भीतर बनी एक स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई चलाती है, और संस्थान की कार्यकारी परिषद उन चरणों में से एक है जिनसे किसी कोष प्रबंधक का प्रस्ताव सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह तक पहुंचने से पहले गुजरता है। विकल्प A गलत है क्योंकि नीति आयोग नीति पर सलाह देता है और इस तरह के निवेश कोष नहीं चलाता। विकल्प B देश की सबसे बड़ी शोध प्रयोगशाला श्रृंखला का नाम है, जो खुद शोध करती है, उद्यमों तक धैर्यवान पूंजी नहीं पहुंचाती। विकल्प D लघु उद्योग के लिए विकास वित्त संस्थान है, जो देखने में ठीक लगता है पर इस कोष का घर नहीं है। संभावित प्रबंधकों से आवेदन का पहला आह्वान जनवरी 2026 में निकला था।
पूरा लेख पढ़ें: आरडीआई कोष ने चुने पहले 19 द्वितीय स्तरीय कोष प्रबंधक
अभ्यास प्रश्न
अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष के पहले समूह में कितने द्वितीय स्तरीय कोष प्रबंधक घोषित किए गए?
- A.14
- B.19
- C.5
- D.24
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व्याख्या
सही उत्तर 19 है। सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह ने 8 अक्टूबर 2026 की बैठक में इस समूह को मंजूरी दी, और ये उन्नीस दो तरह की संस्थाओं से बने हैं: 14 वैकल्पिक निवेश कोष और 5 केंद्रित शोध संगठन। इसी विभाजन से समझ आता है कि विकल्प A और C ही सबसे बड़े भ्रम हैं, क्योंकि दोनों कुल संख्या के एक-एक हिस्से का नाम हैं और जिसे हिस्से याद रहते हैं पर जोड़ नहीं, वह इन्हीं में से चुन लेता है। विकल्प D घोषित आंकड़ा ही नहीं है। इस पहले समूह के लिए कोष की कुल प्रतिबद्धता एक लाख करोड़ रुपये की योजना में से 7,131 करोड़ रुपये है। ये प्रबंधक यह धन उन पात्र प्रौद्योगिकी उद्यमों तक पहुंचाएंगे जो प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 4 और उससे ऊपर पर काम कर रहे हैं, और इनसे बराबर निजी पूंजी जुटाने की भी अपेक्षा है।
आरडीआई कोष से सहायता पाने के लिए उद्यम की तकनीक किस स्तर पर होनी चाहिए?
- A.प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 1 और उससे ऊपर
- B.प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 4 और उससे ऊपर
- C.प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 7 और उससे ऊपर
- D.केवल व्यावसायिक लॉन्च के बाद
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व्याख्या
सही उत्तर प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 4 और उससे ऊपर है। इसी स्तर या उससे ऊपर काम करने वाले पात्र प्रौद्योगिकी उद्यमों को द्वितीय स्तरीय कोष प्रबंधकों के जरिए पूंजी मिल सकती है, यानी कोष तब आगे आता है जब कोई विचार कागज और शुरुआती परिकल्पना से आगे बढ़कर प्रयोगशाला में परखा जा चुका होता है। विकल्प A में सबसे शुरुआती वैचारिक चरण भी आ जाते, जिनके लिए यह कोष बना ही नहीं है; विकल्प C सहायता को पूरी तैनाती के करीब पहुंची तकनीकों तक सीमित कर देता, जहां व्यावसायिक पूंजी आमतौर पर आसानी से मिल जाती है; और विकल्प D गलत है क्योंकि कोष का पूरा मकसद उत्पाद के बाजार तक पहुंचने से पहले के काम को सहारा देना है। यह व्यवस्था उस वित्तीय कमी को ध्यान में रखकर बनी है जिसने उभरती व सामरिक तकनीकों में निजी निवेश को सीमित रखा, और प्रबंधकों को कोष के योगदान के बराबर निजी पूंजी भी जुटानी होगी।
वीआईजीओआर कार्यक्रम में एआई से खोजी गई चार दवाओं को किन प्रौद्योगिकी तत्परता स्तरों के बीच आगे बढ़ाया जाएगा?
- A.टीआरएल-1 से टीआरएल-3
- B.टीआरएल-4 से टीआरएल-6
- C.टीआरएल-6 से टीआरएल-9
- D.टीआरएल-2 से टीआरएल-8
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व्याख्या
सही उत्तर टीआरएल-4 से टीआरएल-6 है। चारों अणु, तंत्रिका-मांसपेशी विकार तथा कैंसर के लिए पीईपीआर111, एलोपेसिया के लिए पीईपीआरएक्स101, न्यूरोपैथी के लिए पीईपीआर202 और डीएमडी के लिए पीईपीआर112, आज प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर चार पर हैं और इस धन का घोषित उद्देश्य प्रत्येक को स्तर छह तक पहुंचाना है। इस दायरे में उन्नत पूर्व-नैदानिक कार्य, जांचाधीन नई दवा से जुड़े अध्ययन, फॉर्मूलेशन विकास और मनुष्यों पर परीक्षण शुरू करने से पहले की तैयारी आती है। विकल्प A के पहले तीन स्तर वह काम बताते हैं जो इस समझौते से पहले ही पूरा हो चुका है। विकल्प C वहीं से शुरू होता है जहां यह परियोजना समाप्त होती है, इसलिए वह आगे का चरण होगा। विकल्प D की सीमा समझौते से बहुत बड़ी है और वह दवा को बाजार तक पहुंचा देगी। यह चढ़ाई तीन वर्ष में पूरी होगी और सत्यापन में वैश्विक सीआरओ नेटवर्क सहायता करेंगे।
जिस वीआईजीओआर परियोजना के लिए टीडीबी ने 86 करोड़ रुपये दिए हैं, उसकी कुल लागत कितनी है?
- A.108 करोड़ रुपये
- B.145 करोड़ रुपये
- C.172 करोड़ रुपये
- D.250 करोड़ रुपये
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व्याख्या
सही उत्तर 172 करोड़ रुपये है। वीआईजीओआर: एआई से खोजे गए मॉलिक्यूल्स को लैब से क्लिनिक तक नाम की इस परियोजना की पूरी लागत यही आंकी गई है और प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड इसमें से 86 करोड़ रुपये अनुसंधान विकास और नवाचार कोष से दे रहा है, जो ठीक आधा खर्च है। जो अभ्यर्थी केवल बोर्ड का हिस्सा याद रखता है, वह छोटी कुल लागत चुन सकता है, इसीलिए विकल्प A और विकल्प B रखे गए हैं। न 108 करोड़ रुपये और न 145 करोड़ रुपये परियोजना की बताई गई लागत से मेल खाते हैं, और दोनों में से कोई बोर्ड के हिस्से का दोगुना भी नहीं है। विकल्प D का 250 करोड़ रुपये लागत को बढ़ाकर बताता है और इससे बोर्ड का अंश आधे से काफी कम रह जाएगा। हिस्से और कुल लागत का यह संबंध याद रखना उपयोगी है, क्योंकि प्रश्नपत्र में दोनों आंकड़े एक साथ पूछे जाते हैं। सहायता ओसीडी के रूप में मिलेगी और काम तीन वर्ष में होगा।
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने वीआईजीओआर कार्यक्रम के लिए 86 करोड़ रुपये की आरडीआई सहायता किस कंपनी को दी है?
- A.बायोकॉन लिमिटेड, बेंगलुरु
- B.पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु
- C.भारत बायोटेक इंटरनेशनल, हैदराबाद
- D.सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे
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व्याख्या
सही उत्तर पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने कर्नाटक के बेंगलुरु की इसी कंपनी के साथ समझौता किया और वीआईजीओआर कार्यक्रम के लिए अनुसंधान विकास और नवाचार कोष से 86 करोड़ रुपये देने का वचन दिया, जबकि परियोजना की पूरी लागत 172 करोड़ रुपये है। यह राशि वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के रूप में दी जाएगी। विकल्प A में दी गई बायोकॉन लिमिटेड भी बेंगलुरु में ही है, इसलिए केवल शहर देखकर उत्तर तय करना भूल होगी, परंतु समझौते में इस कंपनी का नाम नहीं है। विकल्प C की भारत बायोटेक इंटरनेशनल हैदराबाद की कंपनी है और इस व्यवस्था में उसका कोई भाग नहीं है। विकल्प D की सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे भी इस समझौते से बाहर है। केवल पेप्ट्रिस के पास वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंच बताया गया है जिससे पीईपीआर111, पीईपीआरएक्स101, पीईपीआर202 और पीईपीआर112 खोजे गए, और वही इन्हें टीआरएल-4 से टीआरएल-6 तक ले जाएगी।